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मुगलों की नाक के नीचे कैसे पड़ी थी गुलाबी शहर की नींव?

आज 18 नवंबर है. और आज की तारीख का संबंध है जयपुर से.

शिप ऑफ थीसिस, एक नाव जिसके पुर्जे-पुर्जे रिप्लेस कर दिए जाएं. और पुराने पुर्जों से भी एक नाव बना दी जाए, तो बुद्धिजीवी लड़ मरें कि इनमें से असली कौन सी? बहरहाल, हमको तो चलना है एक शहर तक. क्योंकि एक शहर के लिए भी ये सवाल पूछा जा सकता है. शहर के लोग और इमारते हूबहू उठाकर नई जगह ले जाएं. तो क्या वो फिर भी वही शहर रहेगा? जवाब देने के लिए किसी हाइपोथेटिकल शहर पर मत जाइए. अपने शहर को याद कीजिए और नॉस्टैल्जिया का लुत्फ उठाइए.

हम चूंकि नाव से शुरुआत किए हैं, तो शहर तक कोई न कोई रिलेशन तो बैठाना पड़ेगा. क्यों? क्यूंकि शहर से रिलेशन बनाना पड़ता है. ‘पुराना नाता रहा है’ लाइन की कॉपीराइट स्ट्राइक से बचते हुए हम पानी पर चलेंगे. क्योंकि नाव चलती है पानी पर. और पानी की किल्लत के चलते बना एक शहर. नीला नहीं गुलाबी. जिसकी, शाम भी गुलाबी और सहर भी गुलाबी है.

सवाई जय सिंह

जंबू द्वीपे भरतखंडे यानी भारत के अधिकतर शहर-गांव ऑर्गेनिक रूप से बसे हैं. यानी लोग जुड़ते गए और शहर बसते चले गए. लोग कहते हैं कि इंसान ने सब आर्टिफ़िशियल कर दिया. लेकिन भाई जब चिड़िया का बनाया घोंसला प्राकृतिक, तो इंसान का बनाया घोंसला कैसे आर्टिफ़िशियल हो गया. इसी तर्ज पर 1727 में भारत में शहर बसाया गया.

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जय सिंह द्वितीय का जन्म 3 नवंबर 1688 को हुआ था (तस्वीर: wikimedia commons)

खास बात ये थी कि शहर पहले पूरी प्लानिंग से बना और फिर लोग बसे. हम पिंक सिटी यानी जयपुर की बात कर रहें हैं. जिसे बनाने और बसाने का श्रेय जाता है, सवाई जय सिंह को. कौन थे ये?

महाराजा थे. सवाई का मतलब यहां सवा से है. यानी एक और ¼. राजा जय सिंह को सवाई की उपाधि औरंगज़ेब से मिली थी. इसके पीछे कुछ लोक कथाएं हैं. कहते हैं कि जब जय सिंह छोटे थे, तब उनके पिता राजा बिशन सिंह उन्हे औरंगजेब के दरबार में ले गए. औरंगजेब ने हाथ पकड़ लिया और पूछा,

‘अब तुम क्या कर सकते हो?’

हाजिर जवाब जय सिंह ने कहा,

‘जब आप जैसे बड़े बादशाह ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए हैं, तब तो मैं सब से बड़ा बन गया हूं.’

औरंगजेब खुश हुआ और उन्हें सवाई की उपाधि दे दी. 1688 में जय सिंह की पैदाइश हुई थी. पिता की मौत के बाद उन्हें सिर्फ 11 साल की उम्र में आमेर की गद्दी संभालनी पड़ी. औरंगजेब के वसाल बने और आमेर का राजकाज संभालने लगे.

औरंगजेब के बाद

1707 में औरंगजेब की मृत्यु हुई और मुगलों में गद्दी के लिए खींचतान शुरू हो गई. हुआ यूं कि औरंगजेब के दो बेटों, आजम और मुअज्जम में गद्दी को लेकर ठन गई. इनका एक और भाई था कामबक्श. कामबख्श और आज़म शाह, डेक्कन और गुजरात के गवर्नर थे. आमेर के राजा जय सिंह आजम का समर्थन कर रहे थे. लेकिन उसकी हार हुई और वो मारा गया.

इस लड़ाई को जजाऊ की लड़ाई के नाम से जाना जाता है. जंग जीतकर मुअज्जम, बहादुर शाह प्रथम के नाम से सम्राट बना. राजा जय सिंह के भाई विजय सिंह ने बहादुर शाह का साथ दिया था. इसलिए उसने विजय सिंह को मिर्जा की उपाधि देकर आमेर की गद्दी पर बिठा दिया. और जय सिंह को एक मामूली जागीरदार बनकर रह गए. लेकिन किस्मत के पासे जल्द ही पलटने वाले थे.

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औरंगज़ेब और मुअज्जम (तस्वीर :wikimedia commons)

बहादुर शाह गद्दी पर सवार हुआ और दक्खिन में कामबक्श ने विद्रोह कर दिया. मजबूरन बहादुर शाह को दक्खिन की ओर रवाना होना पड़ा. इस दौरान जय सिंह भी बहादुर शाह के साथ थे. मौका देखकर 1708 में जय सिंह मुगल कैंप से भाग निकले. उन्होंने मेवाड़ और मारवाड़ के राजपूत राजाओं के साथ मिलकर बहादुर शाह के खिलाफ बगावत शुरू कर दी.

आमेर का राज्य मजबूत हुआ

1710 में बहादुर शाह दक्खिन के कैम्पेन से लौटा. तब तक राजपूताना उसके हाथ से निकाल चुका था. मजबूरत बहादुर शाह को राजपूतों के साथ संधि करनी पड़ी. जय सिंह को दुबारा मालवा का सूबेदार नियुक्त कर दिया गया. 1712 में बहादुर शाह प्रथम की मृत्यु के बाद जहांदार शाह गद्दी पर बैठा.

ये साहब लालकुंवर नाम की एक तवायफ़ के इश्क में ऐसे गिरफ्तार हुए कि राज काज का कुछ होश न रहा. मुगलों का सूरज मद्धम हुआ तो भारत के अलग-अलग रियासतों के जुगनू टिमटिमाने लगे. दक्षिण में मराठा मजबूत हो रहे थे. सवाई जय सिंह ने ऐसे में अपना राज-काज मजबूत करने की सोची. उन्होंने आसपास के मुगल सरदारों की जमीन पर कब्जा जमाया और अपने राज्य का विस्तार किया.

इतिहासकार जदुनाथ सरकार के अनुसार जय सिंह की सेना में सिर्फ 40 हजार सैनिक थे, लेकिन उनकी आर्टिलरी बहुत मजबूत हुआ करती थी. पारंपरिक तलवार और ढाल के बदले उन्होंने अपनी सेना को बंदूक से लैस किया. जयबाण नाम की उनकी तोप तब दुनिया की सबसे बड़ी तोप हुआ करती थी. साल 1716 में उन्होंने पहली बार अश्वमेध यज्ञ किया. बाकायदा घोड़ा घुमाया गया और आसपास के राजे-रजवाड़ों ने उनका आधिपत्य स्वीकार किया.

ज्योतिष और जीजमुहम्मदशाही

अश्वमेध यज्ञ करने वाले वो आधुनिक भारत के पहले राजा थे. संस्कृत और गणित से भी बहुत लगाव था. खास तौर पर ज्योतिष और खगोल शास्त्र से. एक बार जब वो मुगल दरबार में थे, तो वहां उन्होंने ज्योतिष पर बहस सुनी. बादशाह को सफर पर निकलना था, इसलिए शुभ घड़ी की गणना होनी थी.

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राजा जय सिंह द्वितीय द्वारा दिल्ली में बनाई गई वेधशाला (तस्वीर: Getty)

इसके बाद सवाई जय सिंह ने तय किया कि अपने राज्य में खगोल विज्ञान को बढ़ावा देंगे. उन्होंने 1725 ई. में नक्षत्रों की शुद्ध सारणी बनाई और उसका नाम तत्कालीन मुग़ल सम्राट के नाम पर जीजमुहम्मदशाही रखा. उन्होंने ‘जयसिंह कारिका’ नामक ज्योतिष ग्रंथ की भी रचना की. जनता जजिया से त्रस्त थी. तब जय सिंह ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर मुगल दरबार में जजिया के खिलाफ आवाज उठाई. बादशाह मुहम्मद शाह को तब जजिया टैक्स को समाप्त करना पड़ा.

1725 तक सवाई जय सिंह उत्तर पश्चिम भारत के सबसे ताकतवर राजा बन चुके थे. तक आमेर जय सिंह की राजधानी हुआ करती थी. अधिकतर राजाओं के किले पहाड़ी पर बसे होते थे. ताकि जंग की हालत में आसानी से आक्रमण न हो पाए. 1725 में सवाई जय सिंह ने एक नए शहर का ख्वाब देखा. जो लड़ाई के लिए नहीं व्यापार का केंद्र बनेगा. इसके अलावा आमेर में पानी की कमी और जनसंख्या दबाव के चलते भी नई राजधानी का चुनाव जरूरी हो गया था.

जयपुर की नींव पड़ी

आज ही के दिन यानी 18 नवंबर 1727 के दिन जयपुर शहर की फाउंडेशन रखी गई. इसके लिए बंगाल से एक विशेष शिल्पकार विद्याधर भट्टाचार्य को बुलाया गया. जो वास्तु शास्त्र के विद्वान हुआ करते थे. ग्रिड प्रणाली के आधार पर शहर की नींव रखी गई. कुछ भी टैन्जन्ट नहीं था. रास्तों को पैरलल और पर्पन्डिक्युलर बनाया गया था.

9 आयताकार हिस्सों में शहर को बांटा गया. जिसके केंद्र में राजमहल और अलग-अलग हिस्सों में जनता को बसाया गया. शहर के मुख्य रास्तों की चौड़ाई 119 फ़ीट रखी गई और बीच के निकलने वाले छोटे रास्तों को 60 फ़ीट बनाया गया. शहर को सुरक्षित करने के लिए चारों तरफ से विशाल ब दीवार बनाई गई. और प्रवेश के लिए 7 दरवाजे बनाए गए. राजधानी बनकर पूरा होने में 4 साल लगे. जब बनकर पूरी हुई तो पूरी दुनिया में व्यापार का केंद्र बन गई.

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1875 जयपुर (तस्वीर: Wikimedia Commons)

जयपुर में सवाई जयसिंह ने सुदर्शनगढ़ (नाहरगढ़) क़िले का निर्माण करवाया. जंतर-मंतर का निर्माण कराया. सम्राट यंत्र नाम की एक सूर्य घड़ी भी बनाई, जो दुनिया की सबसे बड़ी सूर्य घड़ियों में से एक है. इसके अलावा उन्होंने दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, मथुरा और बनारस में पांच वेधशालाओं (ऑबजर्वेटरी) का निर्माण करवाया. जिनसे ग्रह-नक्षत्रों की गति का पता लगाया जा सकता था.

1876 में वेल्स के शहजादे अल्बर्ट एडवर्ड ने जयपुर को देखने की ख्वाहिश जताई. तब राजा सवाई राम सिंह ने उनकी आवभगत में शहर को गुलाबी रंग से रंगवाया. और तब से लेकर आज तक इसे गुलाबी शहर के नाम से जाना जाता है. यही अल्बर्ट एडवर्ड आगे जाकर ब्रिटेन के राजा बने और किंग एडवर्ड 7th के नाम से जाने गए.


वीडियो देखें- लाला लाजपत राय की मृत्यु ने कैसे आज़ादी की लड़ाई की दिशा बदल दी थी?

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