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जानकर हैरान रह जाओगे, ज़ीरो ही नहीं, गणित का ये कमाल भी हिंदुस्तानी है

सीरीज़. इन्हें आप टीवी या स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर देखते हैं. सीरीज़ मतलब एक से अधिक एपिसोड और दूसरा एपिसोड वहीं से कंटीन्यू,जहां से पहला ख़त्म हुआ. लेकिन सीरीज़ शब्द एक्सक्ल्यूज़िवली एंटरटेनमेंट या छोटे पर्दे के साथ जुड़ा हो,ऐसा नहीं है.

इन-फ़ैक्ट, ’सीरीज़शब्द सबसे ज़्यादा आप गणित में सुनेंगे. आपने कोई कंपटिटिव इग्ज़ैम दिया हो तोसीरीज़वाले सवाल भी हल किए होंगे. जैसे,1,2,3,4के बाद अगला नंबर कौन सा आएगा. हम जानते हैं कि 5 आएगा. क्योंकि अगला नम्बर पिछले नंबर से एक अधिक है. ऐसे ही अगर पूछें कि 1,2,4,8के बाद अगला नंबर कौन सा आएगा. आप फट से कहेंगे 16. क्योंकि यहां अगला नंबर पिछले नंबर से जस्ट दुगना है. साफ़ है जैसे टीवी में आने वाली सीरीज़ में एक से ज़्यादा एपिसोड होते हैं वैसे ही अर्थमेटिकल सीरीज़ में भी एक से ज़्यादा नंबर्स होते हैं. और हर नंबर पिछले नंबर से किसी न किसी पैटर्न के चलते जुड़ा रहता है. अभी दिए गए उदाहरणों से भी ये क्लियर हो ही गया होगा. जैसे पहली सीरीज़ में बिना पूरी सीरीज़ को लिखे आप बता सकते हैं कि दसवां नंबर दस और सौवां नंबर सौ होगा. ऐसे ही सीरीज़ के दूसरे उदाहरण में आप बिना पूरी सीरीज़ को लिखे आप बता सकते हैं कि दसवां नम्बरटू टू दी पावर टेनऔर सौवां  नंबरटू टू दी पावर हंड्रेडहोगा. सिंपल. ये है पैटर्न.

अच्छा अब हम आपको एक सीरीज़ देते हैं,और आप गेस कीजिए कि इस सीरीज़ का अगला नंबर क्या होगा

तो सीरीज़ है 1,1,2,3,5,8,13


आज 23 नवंबर है. और आज की तारीख़ का संबंध है एक अर्थमेटिकल सीरीज़ से. शायद दुनिया की सबसे फ़ेमस सीरीज़ से. नाम फिबोनाची सीरीज़. जिनको फ़ाइनेंस वग़ैरह का तनिक भी ज्ञान न होगा,वो भी जानते होंगे कि भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी हैं. जिन्हें फ़िज़िक्स का तनिक भी ज्ञान न होगा वो भीE=MC^2 को कोट करते रहते होंगे. ऐसा ही कुछ फिबोनाची सीरीज़ के बारे में भी सत्य है. मतलब गणित से दूर दूर भागने वाले भी इस सीरीज़ के बारे में जानते हैं. 

#क्या है फिबोनाची सीरीज़? – 

1 से शुरू होकर आगे बढ़ते जाइए. कुछ इस तरह कि हर अगला नंबर पहले वाले दो नंबर्स का जोड़ हो. ऐसे में अनन्त दूरी तक जाने वाली इस श्रृंखला या श्रेणी को फिबोनाची श्रृंखला कहेंगे. फ़ॉर्मूला क्या है, कहां से आया आगे बताएंगे. फिलहाल के लिए उदाहरण के तौर पर इस सीरीज़ के कुछ शुरुआती नंबर्स देखिए- 

1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, 144, 233, 377…..

पैटर्न समझ लीजिए. 377 के बाद क्या आएगा अब आप ये भी बता देंगें. 

# आज क्यों बात कर रहे हैं फिबोनाची सीरीज़ के बारे में?-

अच्छा हमने आपको शुरू में बताया था कि अनंत तरह की सीरीज़ हो सकती हैं. और हम जान बूझ करअनंतशब्द का उपयोग कर रहे रहे हैं, ‘ढेर सारीशब्द का नहीं. क्योंकि आप कोई पैटर्न सेट करके ख़ुद अपनी एक यूनीक सीरीज़ बना सकते हैं और उस सीरीज़ को अपना नाम दे सकते हैं. और यक़ीन मानिए एक सीरीज़ प्रति मिनट की रफ़्तार से भी ऐसी यूनीक सीरिजेज़ बनाएंगे तो भी पूरे जीवनकाल में नई-नई सीरीज़ बनाते रह सकते हैं. जब इतनी सीरीज़ संभव है,तो फिर ऐसा क्या ख़ास है,फिबोनाची सीरीज़ के बारे में कि इस सीरीज़ का एक स्पेशल नाम तक है?नाम छोड़िए,इसे एक विशेष दिन डेडिकेटेड है. 23 नवंबर का दिन. लेकिन 23 नवंबर ही क्यों?वो इसलिए क्योंकि अमेरिका में 23 नवंबर को 23/11 नहीं 11/23 लिखते हैं. मतलब महीना पहले और दिन बाद में. जैसे जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ था तो उस दिन को 09/11 लिखते हैं. और हम सब जानते हैं वो हमला 09 नवंबर को नहीं,11 सितंबर को हुआ था. तो 23 नवंबर को अमेरिका और उसे फ़ॉलो करने वाली कंट्री लिखती हैं- 11/23. अब अगर आप देखें तो ये नंबर्स,फिबोनाची सीरीज़ के पहले चार नंबर्स हैं. 1,1, 2 और 3. 

9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर पर हमला (फोटो सोर्स - आज तक)
9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर पर हमला (फोटो सोर्स – आज तक)

कई दशकों तक पॉप क्लचर में अमेरिका का बहुत इंपेक्ट रहा है. अब भी है. इसलिए डॉलर से लेकर हॉलीवुड तक अमेरिका का जो भी है वो वैश्विक है. और यही है 23/11 आई मीन 11/23 के मामले में. और इसलिए ही 11/23 को वर्ल्ड फिबोनाची डे के रूप में मनाया जाता है. 

#क्यों फ़ेमस है फिबोनाची सीरीज़?

फूल जैसे गुलाब, गुड़हल, सूरजमुखी, इमारतें जैसे – ताजमहल,गीज़ा के पिरामिड यहां तक कि हमारी आकाशगंगा भी फिबोनाची सीरीज़ से जुडी हुई है. कैसे? समझने के लिए थोड़ी गणित लगानी पड़ेगी.

फिबोनाची सीरीज़ के शुरुआती नंबर हैं-1, 1, 2, 3, 5, 8.इन्हीं से समझ आ जाएगा. नाइंटीज़ की फिल्मों में वो वाला सीन याद होगा, जिसमें हिरोइन गुलाब की पंखुड़ियों को एक-एक करके तोड़ती है और अपने प्रेम के भविष्य का निर्धारण करती है. आप गुलाब, सूरजमुखी या दूसरे किसी फूल की पंखुड़ियां गिनिएगा. ये प्रायः फिबोनाची सीरीज़ के नंबर्स में होती हैं. माने 3,5,8 या उससे ज्यादा भी हों तो भी फिबोनाची सीरीज़ को ही फॉलो करती हैं.

किसी आर्किटेक्ट से घर का डिजाईन बनवाएं तो वो भी ज्यादातर फिबोनाची सीरीज को ही फॉलो करते हैं. एक आयताकार प्लॉट के क्षेत्रफल को आर्किटेक्ट कुछ ऐसे हिस्सों में बांटता है जो फिबोनाची सीरीज़ को पुष्ट करते से लगते हैं. वाशरूम, किचन, बेडरूम, कॉमन हॉल और आँगन. इनका क्षेत्रफल अगर1,2,3,5,8के अनुपात में हो तो हो गई फिबोनाची सीरीज.

नक्शा बनाने वाला अगर घर के हिस्सों के क्षेत्रफल को इस अनुसार बांटे तो ये फिबोनाची सीरीज़ जैसा होगा (फोटो सोर्स - towarddatascience.com)
नक्शा बनाने वाला अगर घर के हिस्सों के क्षेत्रफल को इस अनुसार बांटे तो ये फिबोनाची सीरीज़ जैसा होगा (फोटो सोर्स – towarddatascience.com)

#गोल्डेन रेश्यो और गोल्डन स्पाइरल

अब गीज़ा के पिरामिड, ताजमहल, और हमारी आकाशगंगा मिल्की वे का फिबोनाची सीरीज से क्या संबंध है, इसके लिए गोल्डन रेश्यो को समझना पड़ेगा. गोल्डन रेश्यो या डिवाइन प्रोपोर्शन या गोल्डन सेक्शन. नाम कई हैं लेकिन चीज़ एक ही है. दरअसल ये एक अनुपात है. जिसे ग्रीक अल्फाबेट के 21वें लेटर फ़ाई(Phi) से दर्शाते हैं. मान लीजिए आपके पास दो छड़ियाँ हैं- बड़ी वाली छड़ी की लम्बाई A है और छोटी वाली की B. अब अगर इनको एक साथ जोड़ दें तो कुल लम्बाई हुई A+B. अब अगर टोटल लम्बाई (A+B) और बड़ी छड़ी यानी A का अनुपात, बड़ी छड़ी(A) और छोटी छडी(B) के अनुपात के बराबर है और ये अनुपात 1.618.. है तो इसे गोल्डन रेश्यो कहा जाएगा. और इसका फिबोनाची सीरीज़ से लेना-देना ये है कि सीरीज के नंबर जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, हर बड़े नंबर का उसके पहले वाले नंबर से रेश्यो 1.618 के बहुत करीब आता जाता है. गोल्डन स्पाइरल यानी वो चक्कर जैसा आपने ब्लैक होल की तस्वीर में देखा होगा, इसे भी गोल्डन रेश्यो से रिलेटेड कहा जाता है. कहा जाता है कि इमारतें, प्राकृतिक वस्तु जैसे कोई पेड़, शरीर के अंग जैसे कान, उंगलियां या पूरा मानव शरीर या तो आकार में गोल्डन स्पाइरल को प्रूव करते हैं या अनुपात में गोल्डेन रेश्यो को. वही रेश्यो, जो फिबोनाची सीरीज़ के नंबर्स के बीच है.

लेकिन हम इन्हें थोड़ा मिथ और थोड़ा सच ही मानते हैं. कैसे? हमने उदाहरण के तौर पर गीज़ा का पिरामिड लिया और गुणा-भाग किया. पिरामिड का बेस756फ़ीट है और ऊंचाई481फीट. अनुपात लें तो क़रीब1.5717आता है जो है तो फाई की वैल्यू यानी गोल्डन रेश्यो के आस पास ही. लेकिन सटीक नहीं कह सकते.  

गीज़ा पिरामिड , ताजमहल और हमारी आकाशगंगा मिल्की वे (फोटो सोर्स- आज तक)
गीज़ा पिरामिड , ताजमहल और हमारी आकाशगंगा मिल्की वे (फोटो सोर्स- आज तक)

प्रकृति से वास्ता, डिविनिटी, ईश्वर से लिंक कुछ हो या न हो. थोड़ा हो बहुत हो. इस बारे में हम कुछ भी पुष्ट तौर पर नहीं कहेंगे. लेकिन जहां तक बात फिबोनाची सीरीज़ की है तो इसको कथित तौर पर बनाने वाले फिबोनाची महोदय के बारे में जानना ज़रूरी है.

#फिबोनाची कौन थे- 

फिबोनाची (Fibonacci) भाईसाब को कई और नामों से भी जानते हैं. जैसे लियोनार्डो बोनाची, लियोनार्डो ऑफ़ पीसा और लियोनार्डो बिगोलो पिसानो. फिबोनाची साल1170के आस-पास अल्जीरिया के बुगिया (Bugi) में पैदा हुए. पिता तब के हम्मादीद साम्राज्य की राजधानी बुगिया में कस्टम्स डिपार्टमेंट में काम करते थे और व्यापारी थे.फिबोनाची की पढ़ाई-लिखाई इसी बुगिया नाम की जगह पर हुई. अपने पिता के साथ ट्रैवेल करने के दौरान इनकी मुलाकात बाहरी व्यापारियों से हुई. इन्हीं व्यापारियों के जरिए फिबोनाची को हिन्दू-अरैबिक संख्या पद्धति के बारे में पता चला. फिबोनाची यूं तो महान इटालियन मैथमेटीशियन कहे जाते हैं, लेकिन पश्चिमी देशों के लिए इनका सबसे बड़ा योगदान था – कैलकुलेशन आसान करना. जिसमें इन्होंने हमारे देश से मदद ली. खुद कहा भी कि हमने ये संख्या पद्धति भारत से ली. शून्य की खोज के लिए जैसे आर्यभट्ट को क्रेडिट नहीं दिया गया, वैसा काम इन्होंने नहीं किया. बाकायदा अपनी एक किताब में इन्होंने पूरा ज़िक्र किया. आदमी बढ़िया थे, एक जगह ये भी कहा –

‘अगर संयोग से मैंने कुछ भी कम या अधिक उचित या आवश्यक छोड़ दिया है, तो मैं माफी मांगता हूं,क्योंकि कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो सभी मामलों में दोषमुक्त हो.‘ 

लियोनार्डो फिबोनाची (फोटो सोर्स- Getty Images)
लियोनार्डो फिबोनाची (फोटो सोर्स- Getty Images)

#फिबोनाची की किताब लिबर अबाची (Liber Abbaci)

फिबोनाची भूमध्य सागर के तटों पर टहलने-घूमने के दौरान व्यापारियों के संपर्क में आए. व्यापारियों से ही इन्हें हिन्दू-अरैबिक न्यूमरल सिस्टम का पता चला. समझ में आ गया कि इस सिस्टम के कितने फायदे हैं. ये सिस्टम रोमन न्युमरल सिस्टम से कहीं बेहतर था. कैलकुलेशन प्लेस वैल्यू सिस्टम से होती थी, जीरो भी शामिल था. अब बस इसे बेहतर तरह से समझ कर यूरोपियंस को देना भर बाकी था. और ये काम किया फिबोनाची ने. फिबोनाची ने इसके लिए साल1202में एक किताब लिखी, नाम – लिबर अबाची ( Liber Abaci). इस किताब में फिबोनाची ने मोडस इंडोरम यानी भारतीयों के मेथड को शामिल किया. इसी मेथड को आजहिन्दू-अरैबिक न्यूमरल सिस्टम कहते हैं. लिबर अबाची में फिबोनाची ने टेन डिजिट और शून्य के इस्तेमाल की वकालत की है.लिबर अबाची ने यूरोप को करेंसी एक्सचेंज, ब्याज की गणना, वज़न और लम्बाई वगैरह मापने के लिएहिन्दू-अरैबिक न्यूमरल सिस्टम के प्रैक्टिकल फायदे गिनाए. किताब हाथों-हाथ ली गई. रोमन न्यूमरल सिस्टम को भारतीय संख्या पद्धति ने रिप्लेस कर दिया. और यूरोप के लोगों ने कैलकुलेशन के लिए अबेकस का इस्तेमाल भी बंद कर दिया. शायद इसलिए ही किताब का नामलिबर अबाची यानी अबेकस से लिबरेशन या मुक्ति था. तोव्यापार के लिए ज़रूरी जोड़-घटाना-गुणा-भाग अब भारतीय पद्धति से होने लगा. और इस तरह व्यापार अब पहले से तेज़ और बेहतर हो गया. किताब में रैशनल नंबर्स वगैरह के बारे में भी बहुत ज्ञान है. वो छोड़ते हैं. और आगे बढ़ते हैं. फिबोनाची सीरीज़ के इंडिया कनेक्शन पर.

लिबर अबाची (फोटो सोर्स- twistedlifestyle.com)
लिबर अबाची (फोटो सोर्स- twistedlifestyle.com)

#फिबोनाची सीरीज़ का इंडिया कनेक्शन-

लियोनार्डो बोनाची यानी फिबोनाची पहले गणितज्ञ नहीं थे, जिन्होंने फिबोनाची सीरीज़ की खोज की. हालांकि ये निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि उन्होंने इसे पूरी दुनिया में फेमस कर दिया. जैसे आर्यभट्ट के शून्य को किया गया था. वहां क्रेडिट नहीं दिया गया लेकिन फिबोनाची सीरीज़ के बारे में खुद फिबोनाची ने अपनी किताब लिबर अबाची में कहा कि इस सीरीज़ की खोज भारतीय गणितज्ञों ने की है.  इतना ही नहीं फिबोनाची,लिबर अबाची में कहते हैं कि उन्होंने सिर्फ उन कॉन्सेप्ट्स को दोबारा से लिख दिया है जो उन्होंने भारतीय गणितज्ञों की किताबों में पढ़े हैं.किताब में जो कुछ भी लिखा गया है उस पर फिबोनाची अपना कोई क्लेम नहीं करते हैं. फिबोनाची लिबर अबाची में एक जगह लिखते हैं,

मैंने गणित के सिद्धांतों को पूरी तरह भारतीय मेथड्स के अकॉर्डिंग लिखा है. मैंने भारतीयों की गणितीय पद्धति को पूरी तरह अडॉप्ट कर लिया, क्योंकि यह सबसे ज्यादा इफेक्टिव है.’

स्पष्ट है कि आज 23 नवंबर को जब पूरी पश्चिमी दुनिया फिबोनाची डे सेलिब्रेट कर रही है, तो असल में वो भारतीय गणितज्ञों के सामर्थ्य की महानता का ही उत्सव है.

#किस भारतीय गणितज्ञ ने खोजी फिबोनाची सीरीज़?

फिबोनाची खुद कहते हैं कि उन्होंने फिबोनाची सीरीज़ कई भारतीय गणितज्ञों की किताबों से ली है. कई माने अगर एक लाइन में कहें तो फिबोनाची ने12वीं सदी में इस सीरीज़ को यूरोप में फेमस किया, लेकिन उसके पहले आचार्य पिंगल ने 200 BC में, आचार्य विरहांक ने छठी सदी में, आचार्य गोपालने सन्1135में और हेमचंद्र ने सन्1150में अपनी किताबों में फिबोनाची सीरीज़ से जुड़े नियम और सिद्धांत बता दिए थे. हेमचन्द्र के नाम पर इस फिबोनाची सीरीज़ को ‘हेमचन्द्र श्रेणी’ भी कहते हैं.

#सबसे पहले किसने खोज की?

साफ़ है कि आचार्य पिंगल नेही फिबोनाची सीरीज़ की खोज की.जनश्रुतियों के मुताबिक़ पिंगल, आचार्य पाणिनि के छोटे भाई थे.पिंगल ने अपनी पुस्तक छंद-सूत्रम् में इस सीरीज़ का उल्लेख किया है. इसे मुख्यतः हिन्दी छंदों का मूलतम ग्रन्थ माना जाता है. छंद-सूत्रम् में कुल आठ अध्याय हैं. जिनमें छंद और मात्राओं के ज्ञान के अलावामेरु प्रस्तार यानी पास्कल त्रिभुज,द्विपद प्रमेय (binomial theorem)और द्विआधारी संख्या (binary numbers)का डिटेल भी दिया गया है. आज शायर और कवि अपनी रचनाओं में जिन मात्राओं और मीटर की बात करते हैं, वो इसी ‘छंद-सूत्रम्’ की देन हैं.

फिबोनाची सीरीज़ बनाने का फार्मूला है F(n) = F(n-1)+ F(n-2), यानी तीसरी संख्या पहली दो संख्याओं का योग है.इस फ़ॉर्मूले को सबसे पहले पिंगल ने ही छंद-सूत्रम् में बताया है.

आचार्य आर्यभट्ट की मूर्ति बाएं, आचार्य पिंगल की मूर्ति मध्य में एवं आचार्य हेमचन्द्र का चित्र दाएं (फोटो सोर्स -wikimedia
आचार्य आर्यभट्ट की मूर्ति बाएं, आचार्य पिंगल की मूर्ति मध्य में एवं आचार्य हेमचन्द्र का चित्र दाएं (फोटो सोर्स -wikimedia)

हम कह सकते हैं कि फिबोनाची डे के उत्सव पर पहला अधिकार भारतीय गणितज्ञों का है. हालांकि कोईआविष्कारक या खोजकर्ता श्रेय मिलने से कहीं ज्यादा आविष्कार की आवश्यकता के कारण महान प्रयास करता है. लेकिन ये भी ज़रूरी है कि किसी नए इन्वेंशन और डिस्कवरी के साथ नाम सही लिया जाए. क्योंकि क्रेडिट न मिलना कई बार नए प्रयासों की दर कम कर देता है. इबारतें लिखी जाएं इसके लिए सही रिकग्निशन भी ज़रूरी है. और इसीलिए आज तारीख में हमने आपको ऐसे विदेशी किस्से से रूबरू कराया जिसके तार हमारे देश की मिट्टी के अन्दर गहरे जुड़े हैं. 


तारीख़ का ये एपिसोड शिवेंद्र के साथ मिलकर लिखा गया है.


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