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तारीख: मशहूर सिंगर जॉन लेनन को आज ही के दिन उनके फ़ैन ने गोली क्यों मार दी थी?

सोचो.. न कोई स्वर्ग हो

मुमकिन है, अगर तुम सोचो

न कोई नर्क हो

हो सिर्फ़ खुला आसमान

सोचो.. हम इस पल के लिए जिएं

तुम कहोगे, ये एक दिवास्वप्न है

लेकिन मैं इसमें अकेला नहीं हूं

एक दिन तुम भी मेरे साथ चलोगे

और, ये दुनिया ‘एक’ हो जाएगी.

ये रचनेवाला एक बगावती शख़्स था. गीत लिखता. गाता भी था. वो ख़ूब मशहूर हुआ. ताउम्र अपनी ज़िद पर कायम रहा. सरहदों को मिटाने की बात करता. उसकी पॉपुलैरिटी कुछ ऐसी ही थी. दुनियाभर में उसके चाहनेवाले हुए. सीमाएं कभी उस दीवानगी के आड़े नहीं आ सकीं.

वो एक ऐसी दुनिया में ले चलने के ख़्वाब दिखाता, जहां इंसान, बस इंसान की तरह देखा जाए. जहां मज़हब की बंदिशें न हों. मगर ख़्वाब से बाहर की दुनिया अलग थी. उसी के एक फ़ैन को ये बातें पसंद नहीं आईं. उसने एक रात अपने नायक के शरीर में गोलियां धांस दीं.

नायक चला गया. रह गए उसके अल्फ़ाज़, जो आज भी ज़िंदा हैं. और, जिनकी ज़रूरत समय के साथ बढ़ती जा रही है. ये कहानी जॉन लेनन की है. 

बमबारी के बीच जन्म

साल था 1940 का. दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था. इंग्लैंड के लिवरपूल शहर पर हिटलर की एयरफ़ोर्स दिन-रात बम गिरा रही थी. लोगों का अधिकतर समय शेल्टर में बीतता था. ऐसे ही समय में जॉन का जन्म हुआ था. तारीख़ थी 9 अक्टूबर की. जॉन के मां-बाप बचपन में ही अलग हो चुके थे. उनकी परवरिश एक रिश्तेदार ने की. जहां खूब सारी पाबंदियां थीं. जॉन का बचपन उन्हीं पाबंदियों में घुट-घुटकर बीता. फिर उनको एक दोस्त मिला. म्यूजिक के रूप में. ये रास्ता था. जो उन्हें एक अलग किस्म की दुनिया में ले गया. जिसे बाद में जॉन ने अपना बना लिया.

एक लाइव परफ़ॉर्मेंंस के दौरान बीटल्स.
एक लाइव परफ़ॉर्मेंंस के दौरान बीटल्स.

16 की उम्र में जॉन ने ‘द क्वैरीमैन’ नाम का एक म्यूजिक बैंड शुरू किया. ये बैंड आगे चलकर ‘बीटल्स’ बना. 1960 के दशक में बीटल्स एक क्रांति की तरह आया था. मशहूर इतना कि बीटल्स के एल्बम अपना ही रेकॉर्ड तोड़ा करते थे. टाइम मैगज़ीन की ‘20वीं सदी की 100 सबसे प्रभावशाली शख़्सियतों’ की लिस्ट में बीटल्स का नाम भी है.

मोर पॉपुलर दैन जीसस

फिर एक दिन यही पॉपुलैरिटी बैकफ़ायर कर गई. एक इंटरव्यू में जॉन लेनन ने कह दिया कि बीटल्स जीसस क्राइस्ट से भी ज़्यादा मशहूर हैं. उनका इतना कहना था कि हंगामा खड़ा हो गया. उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था. लेकिन बीटल्स के ख़िलाफ़ माहौल बनने में देर नहीं लगी. रेडियो चैनल्स, कैसेट स्टोर का पता बताते थे. और, लोगों से बीटल्स के कैसेट जलाने के लिए कहते. जॉन लेनन और बीटल्स कट्टरपंथी धड़े के लिए विलेन बन चुके थे.

पॉपुलर दैन जीसस वाला बयान, जिसकी वजह से बीटल्स का बॉयकॉट होने लगा.
पॉपुलर दैन जीसस वाला बयान, जिसकी वजह से बीटल्स का बॉयकॉट होने लगा.

बीटल्स को धमकियां मिलने लगीं. प्रेस कॉन्फ़्रेंस रद्द होने लगे. लोगों को उनके कंसर्ट में घुसने से रोका जाने लगा. जॉन लेनन ने बाद में सफाई भी दी. लेकिन उन्होंने अपने कहे के लिए माफ़ी नहीं मांगी. बीटल्स को नुकसान हो चुका था. 

वादा, जो पूरा नहीं हो सका

कुछ समय बाद बैंड के चारों मेंबर्स के बीच तकरार शुरू हुई. उनके मत अलग होने लगे. साथ में रास्ते भी. सबसे पहले जॉन लेनन ने बैंड छोड़ा. 1970 में बीटल्स के भंग होने का औपचारिक ऐलान हुआ. ये दुनियाभर के संगीतप्रेमियों के लिए सदमे की तरह था.

बीटल्स से अलग होने के बाद जॉन लेनन ने अकेले परफ़ॉर्म किया. अल्बम रेकॉर्ड किए. जो खूब बिके भी. लेनन पीस एक्टिविस्ट भी बन चुके थे. वियतनाम वॉर के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इन रैलियों में वो भोंपू लेकर सबसे आगे चलते. अपनी आवाज़ बुलंद करते. फिर आया 1980 का साल. जॉन लेनन ने अनाउंस किया कि वो अगले साल स्टेज पर वापस लौटेंगे. लाइव परफॉर्म करेंगे. नए साल में लेनन के दीवानों को इस बड़े तोहफे का बेसब्री से इंतज़ार था.

लेकिन जैसा तय था, वैसा हुआ नहीं.

लौटने का इंतज़ार करता फ़ैन

8 दिसंबर की शाम आई. लेनन न्यू यॉर्क के डकोटा अपार्टमेंट्स में अपने घर से बाहर निकले. उन्हें ‘रॉलिंग स्टोन’ मैगज़ीन के फ़ोटोशूट में जाना था. लेकिन उन्हें वहां पहुंचने में देर हुई. घर से निकलते ही फ़ैंस ने ऑटोग्राफ़ के लिए उनको घेर लिया था.

ऑटोग्राफ़ देते जॉन लेनन.
ऑटोग्राफ़ देते जॉन लेनन.

जब जॉन लेनन फ़ोटोशूट खत्म कर वापस लौटे, तब तक रात के 10:30 बज रहे थे. घर के बाहर शांति थी. फ़ैंस वापस लौट चुके थे. एक को छोड़कर. वो शाम से लेनन का वेट कर रहा था. उसे अपना काम निपटाना था. ऑटोग्राफ़ के चक्कर में वो शाम में भूल गया था.

कौन सा काम? जॉन लेनन की हत्या. इस बार उसने कोई ग़लती नहीं की. जब तक लेनन अपने घर के अंदर घुसते, गोलियां उनके शरीर में घुस चुकी थीं. लेनन वहीं पर ढह गए. पुलिस उनको अपनी ही गाड़ी में उठाकर हॉस्पिटल ले गई. आधे घंटे बाद अनाउंस हुआ, जॉन लेनन नहीं रहे.

हत्यारा कौन था और उसका क्या हुआ?

उसका नाम था मार्क डेविड चैपमैन. उम्र 25 साल. एक समय वो बीटल्स का जबरदस्त फ़ैन हुआ करता था. लेकिन जब से उसे लेनन के इंटरव्यू वाली बात पता चली, उसका मन बदल गया. कट्टरता ने उसके भीतर ज़हर भर दिया था. चैपमैन ने महीनों तक प्लानिंग की. फिर एक दिन सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़कर न्यू यॉर्क आया. वहां रेकी की. और, फिर उस रात अपने प्लान पर अमल भी किया.

मार्क डेविड चैपमैन.
मार्क डेविड चैपमैन.

चैपमैन गोली मारने के बाद भागा नहीं. बल्कि वहीं किनारे खड़े होकर एक नॉवेल पढ़ने लगा. नॉवेल का नाम था, ‘द कैचर इन द राय’. ये अमेरिका में सबसे ज़्यादा सेंसर्ड की गई किताबों में से एक है. वजह, सेक्शुअल सीन्स, वल्गर लैंग्वेज, हिंसा. ये वयस्को के लिए लिखी गई थी. लेकिन ये किशोरों के बीच खूब पॉपुलर हुई.

नॉवेल का क्या कनेक्शन था?

नॉवेल पढ़ते चैपमैन को पुलिस ने पकड़ लिया. जनवरी, 1981 में सुनवाई शुरू हुई. छह महीने के बाद उसने अपना अपराध क़बूल कर लिया. उसने कहा, ‘ईश्वर ने मुझे अपना दोष स्वीकार करने के लिए कहा है’. अदालत ने मार्क चैपमैन को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई.  साल 2000 में उसके पैरोल पर पहली बार सुनवाई हुई. अदालत ने उसे समाज के लिए खतरनाक माना. पैरोल की याचिका रद्द कर दी.

चैपमैन ने यहां तक कहा कि अगर लेनन ज़िंदा होते तो उसे माफ़ कर देते. लेकिन लेनन वहां नहीं थे. वजह चैपमैन ख़ुद था. 2020 में चैपमैन के पैरोल को 11वीं बार रद्द कर दिया गया. अब अगली सुनवाई अगस्त, 2022 में होनी है. तब तक चैपमैन 67 साल का हो जाएगा.

अगर जॉन लेनन ज़िंदा होते तो अभी 80 साल के होते. वो होते तो दुनिया और भी सुंदर होती. उनके गीतों की तरह.


वीडियो: तारीख: क्या हुआ जब एक शाम ये मशहूर मिस्ट्री राइटर अचानक गायब हो गई?

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