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जब तालिबान को जन्म देने वाले मुजाहिदीन को अमेरिका ने 'फ्रीडम फाइटर्स' कहा!

“हम खुदा में उनके गहरे विश्वास के बारे में जानते हैं. हमें विश्वास है कि उनके संघर्ष को सफलता मिलेगी. उस तरफ, वो जमीन, तुम्हारी है. एक दिन वो तुम्हें वापस मिलेगी. तुम्हारी जीत होगी. तुम्हारे घर, तुम्हारी मस्जिदें तुम्हें फिर से वापस मिलेंगी. क्योंकि तुम्हारी लड़ाई सच्ची है और खुदा तुम्हारी तरफ है.”

ये बात 1979 में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जिबिग्नीव ब्रेजेजिंस्की ने अफगानिस्तान के मुजाहिदीन से कही थी. उन मुजाहिदीन से, जो सोवियत संघ की देखरेख में अफगानिस्तान में चल रही वामपंथी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे. ब्रेजेजिंस्की ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर के पास स्थित खैबर पख्तूनख्वा इलाके का दौरा किया था और वहीं पर अफगानिस्तान से भाग आए मुजाहिदीन को संबोधित किया. बाद में अमेरिका ने पाकिस्तान और सऊदी अरब की मदद से इन मुजाहिदीन को हथियार और फंड दिए और सोवियत संघ के खिलाफ ‘जिहाद’ छेड़ने के लिए कहा.

अमेरिका ने खड़ा किया तालिबान!

इन मुजाहिदीन ने सोवियत संघ को हरा दिया. आगे चलकर इनके ही बीच अफगानिस्तान की सत्ता के लिए गृहयुद्ध हुआ. इन्हीं मुजाहिदीन के बीच से निकला तालिबान (Taliban). उसने साल 1996 में अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर लिया. लेकिन 9/11 के हमले के बाद अमेरिका ने तालिबान को खदेड़ दिया. हालांकि, तालिबान ने किसी तरह अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी बनाए रखी. लंबे वक्त तक अफगानिस्तान में रहने के बाद जब अमेरिकी सैनिक लौट गए तो तालिबान ने वहां कब्जे की लड़ाई फिर शुरू कर दी. अब उसने एक बार फिर वहां कब्जा कर लिया है. उसके आतंक के चलते लाखों लोग अफगानिस्तान छोड़कर जाने के लिए मजबूर हो चुके हैं.

जिबिग्नीव ब्रेजेजिंस्की कार्टर प्रशासन में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे. (फोटो: एपी)
जिबिग्नीव ब्रेजेजिंस्की कार्टर प्रशासन में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे. (फोटो: एपी)

तालिबान (Taliban) के आतंक की निंदा दुनिया का हर तार्किक व्यक्ति कर रहा है. अमेरिका में विपक्षी सांसद राष्ट्रपति जो बाइडेन के सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं. इन सांसदों की चिंता है कि तालिबान फिर से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देगा. इस बीच तालिबान को पालने-पोसने में अमेरिका की भूमिकी की भी चर्चा हो रही है. मसलन, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की मुजाहिदीन के साथ एक फोटो फिर से सोशल मीडिया पर तैरने लगी है. कहा जा रहा है कि अमेरिका ने अपने फायदे के लिए जिन लोगों को बंदूक और कट्टर इस्लामिक विचारधारा की खुराक दी, वो अब ना केवल अफगानिस्तान के लोगों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा बन गए हैं.

रीगन ने मुजाहिदीन को स्वतंत्रता सेनानी बताया

1919 में अंग्रेजों को हराने के बाद अफगानिस्तान पूरी तरह से आजाद हो गया था. हालांकि, वहां बादशाहत कायम रही. ये बादशाहत 1973 तक चली. 1973 में तख्तापलट हुआ और दाऊद खान अफगानिस्तान के पहले राष्ट्रपति बने. पांच साल बाद यानी 1978 में एक और तख्तापलट हुआ, जिसमें सोवियत संघ का हाथ था. इस तख्तापलट को अफगानिस्तान में कम्युनिस्ट क्रांति की संज्ञा दी गई. अफगानिस्तान की पीपल्स डेमोक्रेटिक पॉर्टी ऑफ अफगानिस्तान के नेतृत्व में एक नई सरकार का गठन हुआ. उधर, कम्युनिस्टों के घोर विरोधी अमेरिका को ये तख्तापलट रास नहीं आया और उसने उसी पल से इस वामपंथी कलेवर वाली सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए योजना बनानी शुरू कर दी.

उस समय जिमी कार्टर अमेरिका के राष्ट्रपति थे. उन्होंने ही अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को मुजाहिदीन के पास भेजा. बाद में कार्टर ने इन लड़ाकों को हथियार और पैसे दिए. कार्टर के जाने के बाद अमेरिका के अगले राष्ट्रपति बने रोनाल्ड रीगन. उन्होंने मुजाहिदीन को दिए जाने वाले फंड और हथियार, दोनों में बढ़ोतरी कर दी. न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर रहे इकबाल हसन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रीगन ने साल 1983 में इन मुजाहिदीन को वाइट हाउस बुलाया और उन्हें ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ की संज्ञा दी.

रीगन यहीं नहीं रुके. उन्होंने इन कट्टर इस्लामिक विचारधारा वाले लड़ाकों को नैतिक तौर पर अमेरिका के संस्थापक और महान नेताओं जॉर्ज वाशिंगटन और थॉमस जैफरसन जैसा बता दिया. अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1982 में रीगन ने अमेरिकी स्पेस शटल ‘कोलंबिया’ को अफगानिस्तान के सोवियत विरोधी ‘विद्रोहियों’ को समर्पित किया था.

Kabul
काबुल हवाई अड्डे पर भारी भीड़ जमा है. गोलीबारी और भगदड़ की वजह से अब तक कम से कम पांच लोगों के मारे जाने की खबर है. (फोटो: एपी)

बाद में इन मुजाहिदीन और अमेरिका के बीच अंतर्विरोध बढ़ते गए. इसके परिणाम में अमेरिका के पर 9/11 आतंकी हमला हुआ. फिलहाल, तालिबान अफगानिस्तान में वापस आ गया है. ताजा अपडेट ये है कि उसकी वापसी के डर से काबुल एयरपोर्ट पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई. लोग बस किसी तरह अफगानिस्तान से भाग जाना चाहते हैं. इस बीच एयरपोर्ट पर गोलीबारी और भगदड़ में कम से कम पांच लोगों की जान भी जा चुकी है.

वीडियो- काबुल पर कब्जे के बाद तालीबान ने भारत, पाकिस्तान समेत अन्य देशों के लिए क्या कहा?

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