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तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद की ऑडियो क्लिप पर फिर से क्यों मचा है बवाल?

मौलाना साद. फिलहाल इनका परिचय भारत में ज़्यादातर लोगों के लिए इस तरह है- वो तबलीगी जमात के मुखिया हैं. वही तबलीगी जमात, जिसका कार्यक्रम दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज में मार्च के महीने में हुआ. देश-दुनिया से लोग जुटे. दिल्ली सरकार ने कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए लोगों के जुटने पर पाबंदी लगाई, तब भी कार्यक्रम चलता रहा. फिर देश के अलग अलग हिस्सों से करोना संक्रमण के सैंकड़ों मामले सामने आए जिनका संबंध तबलीगी जमात से था.

जमात के मुखिया से प्रशासन खास तौर पर नाराज़ था. क्योंकि सोशल मीडिया पर उनकी एक ऑडियो क्लिप वायरल हो गई थी जिसमें वो कथित तौर पर तबलीगी के सदस्यों से सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन का पालन न करने की हिदायत दे रहे थे.

अब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिस ऑडियो क्लिप ने मौलाना साद को पूरे देश में एक विवादित नाम बनाया, वो डॉक्टर्ड हो सकती है. सादी भाषा में – कई छोटी छोटी ऑडियो क्लिप्स को जोड़कर बनाई गई एक क्लिप. और सादी भाषा में – फर्ज़ी.

ऑडियो क्लिप की बात आई कहां से?

मौलाना साद की ऑडियो क्लिप देश भर के समाचार चैनलों पर चली. लेकिन इसकी चर्चा सिर्फ प्रेस में ही नहीं थी. तबलीगी जमात मामले में 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी – मौलाना साद और निज़ामुद्दीन स्थित आलमी मरकज बंगलेवाली मस्जिद की प्रबंधन कमेटी के छह सदस्य. बंगलेवाली मस्जिद में तबलीगी जमात का मुख्यालय है. एफआईआर में शिकायतकर्ता खुद निज़ामुद्दीन पुलिस थाने के एसएचओ मुकेश वालिया हैं. मुकेश वालिया ने अपनी शिकायत में लिखा,

21 मार्च को वॉट्सएप पर शेयर हो रही एक ऑडियो क्लिप मिली, जिसमें वक्ता अपने अनुयायियों से लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी करते हुए मरकज के धार्मिक आयोजन में जुटने की अपील कर रहा था. ये वक्ता कथित रूप से मौलाना साद थे.

9 मई, 2020 को इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने अपनी वेबसाइट पर ‘Tablighi FIR: Police probe indicates Saad audio clip was doctored‘ शीर्षक से एक खबर छापी. इसमें सूत्रों के हवाले से तबलीगी जमात मामले की आरंभिक जांच के बारे में कई दावे किए गए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने मरकज के उस सदस्य के लैपटॉप की जांच की जो जमात की ऑडियो क्लिप्स जारी करता था. इसमें तकरीबन 350 ऑडियो क्लिप्स थीं –

# मरकज के कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग

# जमात के अनुयायियों को भेजी गई ऑडियो क्लिप्स

# जमात के यूट्यूब चैनल पर अपलोड की गई ऑडियो क्लिप्स

इंस्पेक्टर सतीश कुमार की अगुआई में एक टीम वायरल हुई उस ऑडियो क्लिप को खोज रही थी जिसका ज़िक्र एफआईआर में है. लेकिन ऐसी कोई क्लिप लैपटॉप में मिली नहीं. रिपोर्ट में आगे लिखा है,

जांचकर्ताओं ने पाया कि मौलाना साद की पुलिस और धर्म को लेकर की गई टिप्पणियों को बगैर उनके असल संदर्भ के पेश किया गया है.

सूत्रों के आधार पर रिपोर्ट में ये दावा भी किया गया है कि वायरल हुई क्लिप में मौलाना साद के तकरीबन 20 बयानों को एडिट करके लगाया गया है. इस्पेक्टर कुमार ने ये जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है, जिसके बाद वायरल ऑडियो और साद के सभी बयानों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है.

अखबार के मुताबिक स्पेशल कमिश्रनर (क्राइम) प्रवीर रंजन ने पूर्व में कहा था कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही क्लिप को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है. और इस बात के सबूत जुटाए जा रहे हैं कि जमात का कार्यक्रम प्रशासन की ओर से मिली तमाम चेतावनियों के बावजूद होता रहा. लेकिन 8 मई को प्रवीर रंजन ने फोन नहीं उठाया, न मैसेज का जवाब दिया.

इस रिपोर्ट पर दिल्ली पुलिस का जवाब ट्विटर के माध्यम से आया. विभाग ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया,

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से गलत है, अनुमानों और कल्पनाओं पर आधारित है.

दिल्ली पुलिस ने एक और ट्वीट करके ये भी कहा कि अखबार के रिपोर्टर ने किसी आधिकारिक सूत्र से बात नहीं की है.

लेकिन दिल्ली पुलिस के ट्वीट से मामला शांत हुआ नहीं है. सोशल मीडिया पर इस रिपोर्ट की चर्चा हो रही है और अखबार की वेबसाइट पर ये खबर अब भी है. इस पूरे प्रकरण ने तबलीगी जमात और उसके खिलाफ हो रही पुलिस कार्रवाई को लेकर कुछ सवाल खड़े कर दिए हैं.

# मौलाना साद कहां हैं? पुलिस ने कई जगह छापे मारे थे. लेकिन अब क्या दिल्ली पुलिस की मंशा उन्हें गिरफ्तार करने या हिरासत में लेकर पूछताछ करने की नहीं है? अगर ऐसा है, तो अब तक ये हुआ क्यों नहीं है? क्या उनका क्वारिंटीन पीरियड अब तक चल रहा है?

# एक एसएचओ खुद की शिकायत में जिस ऑडियो क्लिप का हवाला देता है, उसकी सत्यता को लेकर डेढ़ महीने बाद तक विवाद कैसे है? दिल्ली पुलिस ने एक ट्वीट में रिपोर्ट को गलत कहा है, लेकिन साफ साफ क्यों नहीं बताया कि ऑडियो क्लिप असली है या डॉक्टर्ड (फर्ज़ी)? इस जांच में कितना वक्त लगेगा?

इसके अलावा कुछ और सवाल हैं, जो दबी ज़बान में पूछे जा रहे हैं. जैसे – क्या जमात मामले में हो रही देरी अरविंद केजरीवाल और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच रस्साकशी का नतीजा है?

तबलीगी जमात के जमावड़े को सुपर स्प्रेडिंग ईवेंट की तरह पेश किया गया था. सरकार से जुड़े लोग नियमित रूप से इस बात को रेखांकित करते आए हैं कि तबलीगी जमात के चलते देश में संक्रमण बढ़ा. अगर सरकार अपनी बात पर कायम रहना चाहती है, तो उसे मौलाना साद के ऑडियो को लेकर उठ रहे सवालों पर अपना रुख साफ करना चाहिए. इस मामले में अब सूत्रों के हवाले से दी गई ‘लीड’ और ट्विटर पर होने वाले खंडन से ज़्यादा पारदर्शिता की दरकार है.

भारत में कोरोना वायरस के मामलों का स्टेटस


Video: निज़ामुद्दीन में हुई तबलीगी जमात में शामिल कई लोग निकले कोरोना पॉजिटिव

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