Submit your post

Follow Us

थिएटर से करियर शुरू करने वाली सुरेखा सीकरी ने मुंबई में आज तक एक भी नाटक क्यों नहीं किया?

16 जुलाई की सुबह मशहूर एक्टर और थिएटर पर्सनैलिटी सुरेखा सीकरी का निधन हो गया. वो 76 साल की थीं. अपने बेटे के साथ बंबई में रहती थीं. याद करने वाले उन्हें तीन नेशनल अवॉर्ड, ‘बालिका वधू’ और ‘बधाई हो’ जैसे चर्चित कामों तक महदूद करके रख देते हैं. मगर सुरेखा सीकरी इससे कहीं ज़्यादा चीज़ों के बारे में थी. बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि हमें उन्हें और उनके काम को जानने-समझने के लिए उनके गुज़रने का इंतज़ार करना पड़ा. आज हम समय में पीछे जाकर सुरेखा सीकरी की वो कहानी जानेंगे, जो कई लोगों के लिए इंस्पिरेशन है.

सुरेखा सीकरी. आखिरी याद.
सुरेखा सीकरी. आखिरी याद.

# वो लड़की, जो गलती से नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में एडमिशन पा गई

सुरेखा का जन्म 19 अप्रैल, 1945 को दिल्ली में हुआ था. पापा एयर फोर्स में ऑफिसर थे और मां टीचर थीं. शुरुआती पढ़ाई-लिखाई तब उत्तर प्रदेश का हिस्सा रहे अल्मोड़ा शहर में हुई. कॉलेज की पढ़ाई के लिए वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी चली गईं. वहां उनकी बहन भी पढ़ा करती थीं. एक बार नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के तत्कालीन डायरेक्टर इब्राहिम अल काज़ी अपनी रिपर्टरी के साथ AMU पहुंचे. उन्होंने यहां किंग लीयर नाम के नाटक का मंचन किया. ताकि और लोगों को थिएटर जॉइन करने के लिए प्रेरित किया जाए. इस नाटक को देखने के बाद सुरेखा की बहन थिएटर के प्रति सम्मोहित हो गईं. अब वो NSD जाना चाहती थीं. उनके लिए ड्रामा स्कूल का फॉर्म वगैरह मंगाया गया. मगर इसी बीच उनका मन बदल गया.

NSD का फॉर्म घर पर पड़ा धूल फांक रहा था. ऐसे में सुरेखा की मां ने उनसे कहा कि तुम ये फॉर्म भर दो. मगर सुरेखा की दिलचस्पी पढ़ने में थी. वो किताबी कीड़ा थीं. आगे चलकर लिखने के क्षेत्र में जाना चाहती थीं. मगर मां की सलाह पर उन्होंने वो फॉर्म भर दिया. उन्हें लगा कि फॉर्म भरने से किसी का एडमिशन थोड़ी हो जाता है. मगर उम्मीद से उलट उन्हें NSD से इंटरव्यू और ऑडिशन के लिए बुलावा आ गया. सुरेखा ने कभी ऐसे नाटक वगैरह किया नहीं था. इक्का-दुक्का मौकों पर कॉलेज में हो रहे प्ले में छोटे-मोटे किरदार निभा रखे थे. ऑडिशन के लिए दिल्ली आईं सुरेखा को लेडी मैकबेथ की चार लाइनें ट्रांसलेट करके दी गईं. जो उन्हें टीचर्स के सामने बोलनी थीं. मगर शाय होने की वजह से उन्होंने किसी तरह फुसफुसाकर वो लाइनें बोल दीं. कमाल की बात ये कि इसी ऑडिशन की बिना पर 1965 में इंडिया के सबसे बड़े एक्टिंग इंस्टिट्यूट नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में उनका चयन हो गया.

अपने करियर के शुरुआती दिनों में सुरेखा सीकरी.
अपने करियर के शुरुआती दिनों में सुरेखा सीकरी.

# दिल्ली में 15 साल तक नाटक करती रहीं, मुंबई में एक भी नाटक नहीं किया

राज्यसभा टीवी के चर्चित टॉक शो गूफ्तगू में एंकर इरफान से बात करते हुए सुरेखा NSD में अपने पहले नाटक की कहानी बताती हैं. वो कहती हैं कि ड्रामा स्कूल में ग्रीक ट्रैजेडी प्ले दी ट्रोजन वुमन का मंचन होने जा रहा था. इसे मंचन के लिए उर्दू में ट्रांसलेट किया गया था. इस प्ले में ओम शिवपुरी समेत कई बड़े और अनुभवी एक्टर्स के साथ सुरेखा को भी कास्ट किया गया था. वो इसमे हेलन ऑफ ट्रॉय का छोटा सा किरदार निभा रही थीं. नाटक शुरू हुआ. सब कुछ स्मूद चल रहा था. मगर जैसे ही सुरेखा को अपना रोल प्ले करने के लिए स्टेज पर आने की बारी आई, वो भयानक नर्वस हो गईं. वो चलकर स्टेज पर नहीं जा पा रही थीं, गोया उनके घुटने जाम हो गए थे. जैसे-तैसे स्टेज पर पहुंची, तो मुंह से डायलॉग न निकले. डर के मारे गला रुंध गया था. किसी तरह वो अपना डायलॉग बोलकर बैकस्टेज चली गईं.

सुरेखा सीकरी बताती हैं कि उन्हें नाटकों का कोई अनुभव नहीं था. ऐसे में उन्हें सीधे देश के सबसे बड़ा ड्रामा इंस्टिट्यूट के स्टेज पर चढ़ा दिया गया. नर्वस होना लाज़मी थी. इस घटना के बाद भी सुरेखा को एक्टिंग और ड्रामा जैसी चीज़ें समझ नहीं आ रही थीं. समय बीतता जा रहा था. एक दिन सुरेखा ऑडिटोरियम में बैठकर स्टेज पर लाइटिंग का काम होता देख रही थीं. अचानक उन्हें ऐसा आभास हुआ कि उन्हें सबकुछ समझ आने लगा. इसके बाद वो थिएटर और एक्टिंग को फुल ऑन एंजॉय करने लगीं. अपना तीन साल का कोर्स पूरा करने के बाद सुरेखा NSD की रेपर्टरी के साथ काम करने लगीं. वो 15 साल तक दिल्ली में नाटक करती रहीं. इस दौरान उन्होंने यूरिडिस, दी चेरी ऑर्चड और लुक बैक इन एंगर जैसे विश्व प्रसिद्ध नाटकों में हिस्सा लिया. दिल्ली के पुराना किला में हुए ऐतिहासिक प्ले ‘तुग़लक’ की कास्ट का भी वो हिस्सा रही थीं. इसमें उन्होंने सौतेली मां वाला किरदार निभाया था.

इब्राहिम अल्काज़ी के नेतृत्व में दिल्ली के पुराना किला में गिरिश कर्नाड के लिखे नाटक 'तुग़लक' का मंचन होता हुआ.
इब्राहिम अल्काज़ी के नेतृत्व में 1972 में दिल्ली के पुराना किला में गिरिश कर्नाड के लिखे नाटक ‘तुग़लक’ का मंचन होता हुआ. इसमें सुरेखा ने सौतेली मां का किरदार निभाया था. मगर वो इस तस्वीर में नज़र नहीं आ रहीं. 

दिल्ली के ड्रामा सर्किट में 15 सालों तक काम करने के बाद सुरेखा मुंबई गईं. मुंबई आने के पीछे उनकी वजहें थीं. पहला वो दिल्ली छोड़कर किसी भी दूसरे शहर जाना चाहती थीं. क्योंकि दिल्ली में उनके साथ एक निजी हादसा हुआ था. साथ ही रेपर्टरी में एक्टर्स अब उस डेडिकेशन के साथ काम नहीं करते थे. वो बहाने बनाकर रिहर्सल वगैरह से गायब हो जाते थे. उनके मुंबई शिफ्ट होने की दूसरी वजह ये थी कि इस शहर में उनकी बहन का फ्लैट था. मुंबई आने के बाद सुरेखा थिएटर करने की कोशिश कर रही थीं. मगर यहां बड़े क्लोज़ थिएटर ग्रुप्स होते थे. उसमें बाहरी लोगों को जगह नहीं मिल पाती थी. तिस पर सुरेखा की नेटवर्किंग भी अच्छी नहीं थी. वो बहुत व्यवहारकुशल नहीं थीं. यही वजह रही कि 80 के दशक में मुंबई आने और वहां 40 साल गुज़ारने के बावजूद उन्होंने एक भी नाटक में हिस्सा नहीं लिया. थिएटर के क्षेत्र में योगदान के लिए सुरेका को 1989 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड से नवाज़ा गया.

# फिल्मों में आला काम, टीवी में बड़ा नाम

मुंबई में सुरेखा सीकरी को कुछ लोग जानते थे. दिल्ली के भी कई एक्टर्स बंबई आकर या तो फिल्मों में काम कर रहे थे या काम पाने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे. कुछ लोगों के सुझाव के बाद सुरेखा को 1978 में आई फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ में काम करने को मौका मिला. ये पॉलिटिकल सटायर फिल्म थी, जिसमें शबाना आज़मी लीड रोल कर रही थीं. उन्हीं दिनों पैरलल सिनेमा के जाने-माने नाम गोविंद निहलानी ‘तमस’ नाम की एक टेली-फिल्म बनाने जा रहे थे. सुरेखा के काम से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी फिल्म में उन्हें काम ऑफर किया. इस टेली-फिल्म में उनका रोल राजो नाम की एक मुस्लिम महिला का था, जिसका बेटा और पति दंगाइयों की भीड़ का हिस्सा हैं. ऐसे में राजो एक बुजुर्ग सिख जोड़े को अपने घर में पनाह देती है. मगर उन्हें साफ चेता देती है कि उनका बेटा या पति उनके साथ कैसे बर्ताव करेंगे, उसे नहीं पता. राजो का किरदार निभाने के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला. अपने करियर में एक बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होना हर आर्टिस्ट का सपना होता है. सुरेखा ने ये उपलब्धि अपने करियर में तीन बार हासिल की. श्याम बेनेगल डायरेक्टेड फिल्म ‘मम्मो’ में उन्होंने नायिका की विधवा बहन फैय्याज़ी का किरदार निभाया था. इसके लिए उन्हें करियर का दूसरा बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला. फिल्म ‘मम्मो’ में जगजीत सिंह के गाए गाने ‘ये फासले तेरी गलियों के’ में सुरेखा सीकरी की परफॉरमेंस देखिए-

इसके अलावा सुरेखा ने अपने करियर में अजीज मिर्ज़ा की ‘सलीम लंगड़े पे मत रो’, प्रकाश झा की ‘परिणती’, श्याम बेनेगल की ‘सरदारी बेगम’ और गोविंद निहलानी की ‘दहम’ समेत कई क्रिटिकली अक्लेम्ड फिल्मों में काम किया. फिल्मों में क्वॉलिटी काम की कमी सुरेखा को टीवी की ओर ले आई. उन दिनों ज़ी, स्टार प्लस और सोनी जैसे कई नए टीवी चैनल शुरू हो गए थे, जहां बढ़िया काम हो रहा था. अपने करियर के इस फेज़ में सुरेखा जी ‘कभी कभी’, ‘जस्ट मोहब्बत’ और ‘बनेगी अपनी बात’ जैसे पॉपुलर शोज़ में नज़र आईं. साथ-साथ में बेनेगल और निहलानी की फिल्मों में भी काम करती रहीं. मगर उन्हें सफलता मिली कलर्स चैनल के शो ‘बालिका वधू’ से. इस सीरियल में उनका निभाया कल्याणी देवी उर्फ दादी सा का किरदार भयानक तरीके से पसंद किया गया. तब तक सुरेखा फिल्मों से बिलकुल दूर हो चुकी थीं. उन्होंने ‘एक था राजा, एक थी रानी’ और ‘परदेस में है मेरा दिल’ जैसे शोज़ में भी काम किया.

टीवी शो 'बालिका वधू' के एक सीन में अपनी को-स्टार स्मिता बंसल के साथ सुरेखा सीकरी.
टीवी शो ‘बालिका वधू’ के एक सीन में अपनी को-स्टार स्मिता बंसल के साथ सुरेखा सीकरी.

# थर्ड एंड फाइनल एक्ट

2017 में अमित रविंद्रनाथ शर्मा नाम के एक फिल्मकार सुरेखा सीकरी को अपनी फिल्म में कास्ट करना चाहते थे. मगर उन्होंने सुरेखा का बहुत काम नहीं देखा था. वो सुरेखा को टीवी एक्टर के तौर पर जानते थे. और टीवी एक्टर्स को लाउड एक्टर मान लिया जाता है. इसलिए वो सुरेखा को अपनी फिल्म में लेने के बारे में श्योर नहीं थे. सुरेखा को स्क्रिप्ट सुनाई गई. उन्हें फिल्म की कहानी के साथ वो किरदार भी बहुत पसंद आया, जिसके लिए उनके कंसिडर किया जा रहा था. मगर नैरेशन के दो-तीन दिन बाद तक अमित की टीम की ओर से उन्हें कुछ खबर नहीं मिली. उन्हें लगा कि उस फिल्म में किसी और एक्टर को कास्ट कर लिया गया. फाइनली सुरेखा को बताया गया कि ‘बधाई हो’ नाम से बन रही इस फिल्म में उन्हें दादी के रोल में कास्ट कर लिया गया.

‘बधाई हो’ में सुरेखा का किरदार एक ऐसी सास का था, जो अपनी बहू से खार खाए रहती है. मिड-एज प्रेग्नेंसी के बाद समाज में उसकी बहू का मज़ाक बनाया जाने लगता है. तब वो उसके समर्थन में खड़ी होकर कहती है- ‘उसकी मर्ज़ी वो सेक्सी करें’. यहां उन्होंने सेक्स को सेक्सी कहा था. इस डायलॉग ने उन्हें हिंदी सिनेमा का वो मील पत्थर बना दिया, जिससे गुज़रे बिना आप प्रोग्रेसिव सिनेमा की बात नहीं कर सकते. इस फिल्म ने उन्हें वापस डिमांड में ला दिया. हर फिल्ममेकर उनके साथ काम करना चाहता था. मगर सुरेखा का सपना था कि वो अपने करियर में कम-अज़-कम एक बार अमिताभ बच्चन के साथ काम करें. काम करना तो संभव नहीं हो पाया. मगर ‘बधाई हो’ देखने के बाद अमिताभ ने सुरेखा की तारीफ करते हुए एक एप्रीसिएशन लेटर लिखा था. जिसे सुरेखा अपना सबसे प्राइज़्ड पजेशन मानती थीं.

फिल्म 'बधाई हो' के एक सीन में सुरेखा सीकरी.
फिल्म ‘बधाई हो’ के एक सीन में सुरेखा सीकरी.

वो ‘बधाई हो’ के बाद करियर के उस मुकाम पर पहुंच गई थीं, जब उनके पास फिल्मों का ढेर लगा हुआ था. फिर एक हादसा हुआ. 2018 में वो एक टीवी शो की शूटिंग के लिए महाबलेश्वर गई हुई थीं. वहां उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हो गया. उनका पांव साबून पर पड़ा और फिसलकर गिर गईं. उनका सिर पास में रखे फर्निचर से टकरा गया. अस्पताल में भर्ती करवाया गया. इलाज तो हुआ मगर उन्हें चलने-फिरने में तकलीफ हो रही थी. व्हील चेयर के बिना कहीं आना जाना बंद हो गया. वो इसी हिचकिचाहट के मारे बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड लेने भी नहीं गईं. हालांकि उन्होंने व्हील चेयर पर बैठे-बैठे ही फिल्म ‘बधाई हो’ के लिए अपने करियर का तीसरा बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड स्वीकार किया.

फिल्म 'बधाई हो' के लिए उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडु के हाथों बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड रिसीव करती सुरेखा सीकरी.
फिल्म ‘बधाई हो’ के लिए उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडु के हाथों व्हील चेयर पर बैठ बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड रिसीव करती सुरेखा सीकरी.

2020 में उन्हें एक बार फिर ब्रेन स्ट्रोक हुआ. ट्रीटमेंट हुआ. मगर वो फिर पहले जैसी एक्टिव नहीं हो पाईं. इस दौरान उन्हें फराज़ अंसारी की ‘शीर कोरमा’ और एक अनाम फिल्म में गुज़रे ज़माने की एक्ट्रेस का रोल नहीं कर पाने का मलाल होता रहा. 16 जुलाई, 2021 की तड़के सुबह उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और वो इस दुनिया से चली गईं. सुरेखा मुंबई में अपने बेटे राहुल के साथ रहती थीं. जाते-जाते हम आपको फैज़ अहमद फैज़ की नज़्म गुनगुनाती सुरेखा सीकरी की आवाज़ के साथ छोड़े जाते हैं-


वीडियो देखें: ‘बालिका वधू’ वाली सुरेखा सीकरी का कार्डियक अरेस्ट से निधन

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

जब ट्रेलर आया था, तबसे लगातार विरोध जारी है.