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बेटी भूख से मरी तो मां ने सरकार को कोर्ट में घसीट लिया

कोइली देवी झारखंड की रहने वाली हैं. इनकी 11 साल की बिटिया थी. 2017 में उसकी मौत हो गई. भूख से. कोइली देवी के घर में कई दिन से फाका पड़ा था. बेहद ग़रीबी में राशन कार्ड की बदौलत घर में आटा-दाल आ जाता था. लेकिन परिवार का राशन कार्ड रद्द हो गया था. कोइली देवी का कहना है कि इसकी वजह थी राशन कार्ड का आधार कार्ड से लिंक न होना. बिटिया के जाने के बाद कोइली देवी अदालत पहुंचीं. उनकी मांग है कि भूख से मौत की जांच हो, रद्द राशन कार्ड को दोबारा चालू किया जाए और बेटी की मौत का मुआवजा मिले.

17 मार्च 2021 को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे की बेंच ने केंद्र से इस पर जवाब मांगा है. कोलिन गोंसाल्विस इस मामले में कोइली देवी की तरफ से वकील हैं. उन्होंने अदालत में कहा कि इस तरह से आधार कार्ड को कैंसल कर देना, देश में बड़े स्तर पर भूख से होने वाली मौतों के लिए ज़िम्मेदार होगा. सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि अगर केंद्र सरकार ने सिर्फ इस बात पर तीन करोड़ राशन कार्ड कैंसल कर दिए क्योंकि वो आधार से लिंक नहीं थे, तो ये काफी गंभीर बात है. ख़ासकर तब, जब इनमें से तमाम राशन कार्ड ग़रीब, पिछड़े, आदिवासी लोगों के हैं.

राइट टू फूड

याचिकाकर्ता का कहना है कि राशन कार्ड एक तरह से भोजन के अधिकार का प्रतीक है. सरकार सिर्फ इस बिनाह पर राशन कार्ड कैंसल नहीं कर सकती, क्योंकि वे आधार से लिंक नहीं हैं.

कोर्ट में गोंसाल्विस ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा –

“आधार और बायोमेट्रिक आईडी पर जोर दिए जाने का ही नतीजा है कि देश में 2 से 4 करोड़ राशन कार्ड रद्द कर दिए गए. भारत सरकार ने बड़ी आसानी से ये कह दिया कि ये कार्ड बेकार हो चुके थे. जबकि सच्चाई ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आइरिस की पहचान करना, थंब प्रिंट लेने जैसी सुविधाएं इतनी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं. इंटरनेट और आधार कार्ड बनवाने की भी सुविधा आसान नहीं है.”

“राज्य कह रहे- डेंगू, मलेरिया से मौत”

याचिकाकर्ता की तरफ से ये भी कहा गया कि एक तरफ केंद्र लगातार आधार कार्ड पर जोर दे रहा है, जिसकी वजह से लोगों के राशन कार्ड रद्द हुए जा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ, राज्य लगातार भूख से होने वाली मौत की बात को नकार रहे हैं. वे इसे डेंगू, मलेरिया से मौत बताने में जुटे हैं. याचिका में कहा गया है कि यूपी, एमपी, झारखंड, महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक जैसे राज्यों में भूख से मौतें हुई हैं.

Ration Card
सुप्रीम कोर्ट के सामने केंद्र सरकार ने कह दिया है कि राशन कार्ड बनवाना राज्यों की ज़िम्मेदारी है. (सांकेतिक फोटो- PTI)

सरकार का क्या कहना है?

एडिशिनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने सरकार की तरफ से कहा कि राशन कार्ड का जारी होना आधार कार्ड पर निर्भर नहीं है और सरकार ने इसके लिए अलग मैकेनिज़्म बना रखा है. उन्होंने केंद्र का पल्ला झाड़ते हुए कहा कि राशन कार्ड इश्यू कराने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है.

अमन लेखी ने ये भी कहा कि याचिकाकर्ता को पहले हाईकोर्ट में जाना चाहिए था, फिर सुप्रीम कोर्ट आना चाहिए था. इस पर सीजेआई ने कहा कि अगर राशन कार्ड कैंसल हुए हैं तो ये बहुत गंभीर बात है और इसीलिए हम इस केस को ले रहे हैं.

कैसे बनता है राशन कार्ड?

देश में तीन तरह के राशन कार्ड बनाए जाते हैं.

APL कार्ड (अबव पोवर्टी लाइन) – ये उनके लिए होता है, जो गरीबी रेखा से ऊपर हैं.

BPL – (बिलो पोवर्टी लाइन) – ये गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए होता है.

अन्‍त्योदय – ये कार्ड सबसे गरीब परिवारों के लिए होता है.

राज्य सरकारें ही अपने नागरिकों के लिए राशन कार्ड जारी करती हैं. इनके जरिए राशन की दुकान से तयशुदा रेट पर सब्सिडी सामान मिलता है. हर स्टेट गवर्नमेंट के खाद्यान्न विभाग की जिम्मेदारी होती है कि नागरिकों के राशन कार्ड बनवाएं. ज़्यादातर स्टेट्स में इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से अप्लाई करने की सुविधा है. अगर आपकी उम्र 18 से अधिक है तो आप राशन कार्ड बनवा सकते हैं. अगर आपकी उम्र इससे कम है, तो आपका नाम आपके माता या पिता के राशन कार्ड में ही जोड़ा जाएगा. एक से ज्यादा राशन कार्ड बनवाना ग़ैर-कानूनी है.

वन नेशन, वन राशन कार्ड

इसके अलावा ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना भी लागू हो चुकी है. इसके तहत कोई भी कार्डधारक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत किसी भी राज्य की राशन की दुकान से अपने हिस्से का राशन ले सकेगा. मान लीजिए कि कोई यूपी का है. उसका राशन कार्ड यूपी में बना है, लेकिन वह बिहार में काम करता है. ऐसे में वह यूपी के राशन कार्ड से बिहार में राशन ले सकेगा.

इस योजना के तहत पीडीएस के लाभार्थियों की पहचान उनके आधार कार्ड पर ‘इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल डिवाइस’ से की जाती है, जिसमें लाभार्थियों से संबंधित विवरण फीड किए गए हैं.

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा. फर्जी राशन कार्ड नहीं बन पाएंगे. पिछले साल सरकार ने कहा था कि मार्च 2021 तक सभी राशन कार्ड धारकों को इस योजना से जोड़ लिया जाएगा. ये लक्ष्य कहां तक पहुंचा, इसकी पड़ताल अभी बाकी है.


जानिए क्या है ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना?

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