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किडनैपिंग और मर्डर का 29 साल पुराना केस, जिसमें पूर्व डीजीपी पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी है

सुमेध सिंह सैनी. पंजाब के पूर्व डीजीपी यानी पुलिस महानिदेशक. वो आईपीएस अधिकारी, जिसका पंजाब में रौला हुआ करता था. जिसने सबसे कम उम्र में डीजीपी बनकर इतिहास रच दिया था. जिसको जेड प्लस सिक्योरिटी मिली हुई है. वही सिक्योरिटी, जो गांधी परिवार को मिली है. सैनी पिछले कुछ दिनों से खबरों में हैं. भागे-भागे फिर रहे हैं. उसी पुलिस से बचने के लिए, जिसके वो कभी मुखिया रहे.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें थोड़ी राहत जरूर दी है. अगले आदेश तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. सुमेध सिंह 1991 के बलवंत सिंह मुल्तानी अपहरण और हत्याकांड के आरोपी हैं. इसी मामले में उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.

क्या है मामला

मामले को समझने के लिए फ्लैशबैक में जाना होगा. 29 साल पहले. 1991. सुमेध सिंह सैनी उस समय चंडीगढ़ के एसएसपी हुआ करते थे. उन पर आतंकी हमला हुआ. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुमेध सिंह सैनी की हत्या की साजिश रची गई थी. 29 अगस्त 1991 को 20 किलो आरडीएक्स से भरी कार को सेक्टर 17 में उड़ा दिया गया था. इस हमले में सुमेध सिंह घायल हो गए. वहीं तीन पुलिसवाले शहीद हो गए.

इस केस के संबंध में पुलिस ने सैनी के ऑर्डर पर तत्कालीन आईएएस अधिकारी दर्शन सिंह मुल्तानी के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी को 13 दिसंबर की रात कथित तौर पर उठा लिया. 25 साल के बलवंत सिंह मुल्तानी चंडीगढ़ औद्योगिक और पर्यटन निगम में जूनियर इंजीनियर थे. आरोप है कि मुल्तानी को यातना दी गई. कथित तौर पर दिखाया गया कि वह पुलिस कस्टडी से फरार हो गए.

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सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ इस तरह के पोस्टर जारी किए गए हैं.

सीबीआई को भी सौंपी गई जांच

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक, मुल्तानी के परिवार के आरोपों पर 5 अक्टूबर, 2007 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. 2 जुलाई 2008 को सीबीआई ने सैनी, तत्कालीन चंडीगढ़ डीएसपी बलदेव सिंह सैनी और सेक्टर-17 पुलिस स्टेशन में पोस्टेड एसआई हरसहाय शर्मा, जगीर सिंह और अन्य अज्ञात पुलिसवालों के खिलाफ हत्या के इरादे से अपहरण सहित कई मामलों में केस दर्ज किया.

क्या था सीबीआई की एफआईआर में

एफआईआर में सीबीआई ने उल्लेख किया कि मुल्तानी को दविंदर पाल सिंह भुल्लर के ठिकाने का पता लगाने के लिए उठाया गया था. सैनी ने उसे बम हमले का जिम्मेदार माना था. एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया कि भुल्लर के पिता बलवंत सिंह भुल्लर को भी उस मामले में उठाया गया था. बलवंत के भाई पलविंदर ने पंजाब पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि कुलतार सिंह, भुल्लर के ससुर और उनके दो रिश्तेदारों- मंजीत सिंह और जसप्रीत इंद्रजीत सिंह को भी उठाया और टॉर्चर किया गया.

दविंदर पाल सिंह भुल्लर 1993 के दिल्ली बम विस्फोट मामले में वर्तमान में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. टाडा कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास में बदल दिया था.

सीबीआई की 2008 की एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में रद्द कर दिया था. इस मामले में तत्कालीन अकाली दल की सरकार ने सैनी का जोरदार तरीके से बचाव किया था.

2020 में क्या हुआ

ये 2011 की बात थी. लेकिन 6 मई, 2020 को मोहाली के मटौर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई. इसमें सैनी के अलावा छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक, मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह मुल्तानी का कहना है कि सीबीआई की एफआईआर “तकनीकी आधार” पर खारिज की गई थी. पलविंदर सिंह मुल्तानी की शिकायत पर सैनी और छह अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया.

ऐसे बढ़ी मुश्किल

दो पुलिसवालों से सरकारी गवाह बनने के बाद अगस्त में इस मामले में हत्या का केस दर्ज किया गया. सरकारी गवाहों का आरोप है कि पुलिस रिमांड में टॉर्चर से बलवंत मुलतानी की मौत हो गई थी. परिवार ने भी यही आरोप लगाए थे. हत्या के मामले में पहले मोहाली कोर्ट और फिर हाईकोर्ट से सैनी की अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज कर दी. मोहाली कोर्ट ने सैनी के खिलाफ नया गैर जमानती वॉरंट वॉरंट जारी कर दिया. 25 सितंबर तक सैनी को गिरफ्तार करके अदालत में पेश करने का आदेश दिया. हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. फिलहाल सैनी को चार हफ्ते के लिए राहत मिल गई है.

कौन हैं सुमेध सिंह सैनी

1982 बैच के आईपीएस ऑफिसर. बटाला, बठिंडा, लुधियाना, फिरोजपुर, रूपनगर और चंडीगढ़ के एसएसपी रहे. प्रकाश सिंह बादल के सत्ता में आने के बाद मार्च 2012 में उन्हें डीजीपी बनाया गया. अनिल कौशिक की जगह. 54 साल की उम्र में उन्हें ये जिम्मेदारी मिली. वो पंजाब के सबसे कम उम्र के डीजीपी बने. अपने से सीनियर चार आईपीएस को सुपरसीड करके उन्हें ये जिम्मेदारी दी गई थी. अक्टूबर, 2015 में उन्हें डीजीपी के पद से हटा दिया गया. 36 साल की सर्विस के बाद जून, 2018 में सुमेध सिंह सैनी रिटायर हो गए. रिटायर होने के समय वह पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रमुख रहे.

Sumedh Singh
29 साल पुराने मामले में गिरफ्तार की तलवार लटक रही है. (फाइल फोटो)

पंजाब में आतंकवाद जब अपने चरम पर था, केपीएस गिल पंजाब पुलिस का नेतृत्व कर रहे थे. उस समय सैनी को फ्री हैंड दिया गया था. हालांकि उनकी कार्यशैली हमेशा विवादों में रही. आतंक के खिलाफ उनकी लड़ाई का अधिकारियों का एक वर्ग अभी भी प्रशंसक है, जबकि अन्य लोग मानवाधिकारों को लेकर उनकी आलोचना करते हैं.

1992 में सैनी पर चंडीगढ़ में लेफ्टिनेंट कर्नल पर हमले में शामिल होने का आरोप लगा था. इस मामले में सेना ने काफी तीखी प्रतिक्रिया दी थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और तत्कालीन डीजीपी केपीएस गिल के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ था.

बाद में जब दीनानगर पुलिस स्टेशन पर आतंकी हमला हुआ, तो पुलिस प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सैनी ने सेना की मदद लेने से इनकार कर दिया था. उन्होंने खुद फोर्स को लीड किया.

अमरिंदर सिंह के खिलाफ दर्ज किया था केस

2007 में जब सैनी सतर्कता ब्यूरो (Vigilance Bureau chief) के प्रमुख थे, उन्होंने पूर्व डीजीपी एसएस विर्क को एक बेनामी संपत्ति मामले में बुक किया था. हालांकि विर्क ने मामले को अवैध करार दिया था. 2017 में मोहाली की एक विशेष अदालत ने एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया था, क्योंकि पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने कोर्ट को बताया था कि विर्क के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं.

कैप्टन अमरिंदर (फाइल फोटो)
कैप्टन अमरिंदर (फाइल फोटो)

सुमेध सिंह सैनी ने 2007 में वर्तमान सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, उनके बेटे रनिंदर सिंह और क़रीबियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के केस दर्ज किए थे. 2007 में अमरिंदर सिंह की सत्ता जाने के बाद प्रकाश सिंह बादल ने सीएम बनते ही सुमेध सिंह सैनी को विजिलेंस महकमे का चीफ़ डायरेक्टर बना दिया था. 2017 में अमरिंदर सिंह दोबारा पंजाब के मुख्यमंत्री बने, तो विजिलेंस विभाग ने उनके ख़िलाफ़ लुधियाना कोर्ट में चल रहे सिटी सेंटर स्कैम का केस बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की, तो सैनी ने उसका भी विरोध किया. सैनी के वकील ने अदालत में कहा था कि सीएम के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का केस बंद करने से पहले एक बार सैनी को भी सुना जाए.


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