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यूपी: धर्मांतरण के फायदे गिनाते दिख रहे सीनियर IAS इफ्तिखारुद्दीन की असली कहानी ये है

सोशल मीडिया पर सोमवार 27 सितंबर को एक वीडियो वायरल (Viral Video) हुआ. इसमें सफेद कपड़े पहने कुछ लोग तकरीर करते नजर आ रहे हैं. इसमें एक शख्स धर्मांतरण के फायदे गिना रहा है. बाद में पता चला कि वीडियो में धर्मांतरण के फायदे गिनाने वाला शख्स एक सीनियर IAS अधिकारी है. इनका नाम है इफ्तिखारुद्दीन (Iftikharuddin). आइए जानते हैं कौन हैं सीनियर IAS इफ्तिखारुद्दीन और क्या है पूरा मामला.

तीन वीडियो वायरल, क्या है इनमें?

इस घटना के तीन वीडियो वायरल हो रहे हैं. वीडियो में कुछ ऐसी बातें भी कही जा रही हैं जो समुदाय विशेष की भावनाएं आहत कर सकती हैं इसलिए हम स्टोरी में वीडियो नहीं लगा रहे हैं. पहले वीडियो में एक घर का सुसज्जित कमरा नजर आ रहा है. एक सफेद कुर्ता-पजामा पहने शख्स बैठा है. वह जमीन पर बैठे कुछ लोगों को संबोधित कर रहा है. वह कहता है कि अल्लाह ने हमें उत्तर प्रदेश के तौर पर ऐसा सेंटर दिया है, जहां से पूरे देश-दुनिया में काम कर सकते हैं. ये वक्ता कोई और नहीं, सीनियर IAS अधिकारी इफ्तिखारुद्दीन हैं. उसके बाद इफ्तिखारुद्दीन इस्लाम में होने के फायदे गिनाते हैं. वह कहते हैं-

“ऐलान करो दुनिया के इंसानों से कि अल्लाह की बादशाहत और निजामियत पूरी दुनिया में कायम करनी है.”

इसके बाद दूसरे वीडियो में सीनियर IAS इफ्तिखारुद्दीन जमीन पर बैठे दिखते हैं. एक वक्ता अपनी बातें कह रहा है. वह सामने बैठे लोगों को बताता है कि,

“पंजाब में एक व्यक्ति ने इस्लाम कबूल कर लिया. मैंने उनको इस्लाम कबूल करने के लिए दावत नहीं दी थी. मैंने उनसे इस्लाम कबूल करने की वजह पूछी…”

इसके आगे आपत्तिजनक बातें हैं. ये वक्ता कई मनगढ़ंत कहानियां भी सुनाता है. वह कह रहा है कि इस्लाम में बहन-बेटियों को जलाया नहीं जाता. उसने भी कहा कि अल्लाह ने हमें उत्तर प्रदेश के तौर पर ऐसा सेंटर दिया है, जहां से पूरे देश और दुनिया में काम कर सकते हैं.

तीसरे वीडियो में IAS इफ्तिखारुद्दीन पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की किताब का जिक्र करते दिखते हैं. वह कहते हैं कि

“ऐलान करो बताओ पूरी दुनिया के इंसानों को कि अल्लाह और रसूल के मिशन को आगे बढ़ाएं. अल्लाह के नूर का ईद नाम होना है. पूरे ज़मीं पर अल्लाह का निज़ाम दाखिल होना है. कैसे होगा यहां पर जो इंसान बैठे हैं, इनको यह काम करना चाहिए. जरूर करना चाहिए नहीं तो अल्लाह इनको पकड़ेगा.”

कब का और कहां के हैं ये वीडियो?

अभी आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि ये वीडियो किस जगह रेकॉर्ड किए गए हैं. लेकिन एक सीनियर पत्रकार नाम न बताने की शर्त पर दावा करते हैं कि ये वीडियो 2015 के आसपास का है और इफ्तिखारुद्दीन के कानपुर स्थित सरकारी आवास पर रेकॉर्ड किया गया था. उस वक्त इफ्तिखारुद्दीन कानपुर के मंडलायुक्त थे.

वीडियो वायरल होने के बाद तीखे रिएक्शन आए. मठ एवं मंदिर समन्वय समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और यूपी के स्टेट एंप्लाई जॉइंट काउंसिल के अध्यक्ष भूपेश अवस्थी ने 27 सितंबर को ट्वीट करके सीएम को अपनी शिकायत भेजी.

वायरल वीडियो की जानकारी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य तक पहुंची. उन्होंने कहा कि उन्हें इस वीडियो के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. अगर ऐसा है तो जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी. मंगलवार 28 सितंबर को शासन ने मामले की एसआईटी से जांच कराने के आदेश दे दिए. एसआईटी का अध्यक्ष डीजी CBCID जीएल मीणा को बनाया गया है. एसआईटी 7 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी.

IAS इफ्तिखारुद्दीन के बारे में भी जान लीजिए

साल 2015. रमजान का वक्त. कानपुर के मंडलायुक्त इफ्तिखारुद्दीन भी रोज़ा रखे हुए थे. लेकिन उनके ऑफिस और घर पर जो गैर मुस्लिम थे, उन्हें भी कुछ खाने-पीने की इज़ाजत नहीं थी. सरकारी आवास पर जो कर्मचारी तैनात थे, उन्हें आवास के अंदर एक सीमा से आगे जाने की मनाही थी. जिसे भी कुछ खाना होता, आवास प्रांगढ़ के बाहर जाकर ही खाता था. ये दावा है उस दौरान जिला प्रशासन कवर करने वाले एक सीनियर पत्रकार का.

उन्होंने बताया कि इफ्तिखारुद्दीन बहुत नर्म मिज़ाज और सरल दिखने वाले शख्स हैं. लेकिन अपने धर्म को लेकर उनकी आस्था काफी पक्की है. ये उनके पहनावे और रहन-सहन से भी नज़र आता है. उनका कपड़े पहनने से लेकर दाढ़ी रखने का तरीका बाकी सोफेस्टिकेटेड IAS अधिकारियों से बिल्कुल अलहदा है. चेहरे पर लंबी दाढ़ी और टखने से थोड़ी ऊपर उठी पैंट, उन्हें बाकी नौकरशाहों से अलग दिखाती है. पत्रकार के मुताबिक, जब भी इफ्तिखारुद्दीन से कोई सवाल-जवाब किया जाता तो वह जवाब बहुत नरमी से और नपे-तुले लहज़े में ही देते. वो लोगों से ज्यादा घुलते-मिलते नहीं थे. जब वो कानपुर में पोस्टेड थे तो उनके सरकारी आवास पर बहुत ही कम लोगों की एंट्री थी.

कानपुर के राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि IAS इफ्तिखारुद्दीन को किस सरकार में बड़े पद मिले. यूपी की राजनीति पर नजर रखने वाले एक पत्रकार दावा करते हैं कि इफ्तिखारुद्दीन समाजवादी पार्टी की सरकार के वक्त काफी ताकतवर रहे. उस सरकार के रहते उन्हें हमेशा बड़ी पोस्टिंग मिली. कानपुर में ही इफ्तिखारुद्दीन तकरीबन 8 साल तक अलग-अलग पदों पर रहे.

 

साल 2014 से लेकर 2016 के आखिर तक इफ्तिखारुद्दीन कानपुर में मंडलायुक्त बनकर रहे. 2017 में जब योगी सरकार यूपी में आई तो उनका ट्रांस्फर किया गया. फिलहाल वो UPSRTC में चेयरमैन के पद पर हैं. वैसे इफ्तिखारुद्दीन मूल रूप से बिहार के सीवान के रहने वाले हैं. बीए ऑनर्स की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने IAS का एग्जाम दिया. साल 1985 में उनका सेलेक्शन IAS में हुआ. उन्हें यूपी काडर मिला. तब से वो लगातार यूपी में बड़े और महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे हैं.

 

‘सरकारी आवास पर होती थीं तकरीरें’

इफ्तिखारुद्दीन जब कानपुर के मंडलायुक्त थे, तब एक बार कुछ लोग उन्हें संगीत के एक कार्यक्रम में चीफ गेस्ट बनाने का न्यौता देने गए थे. इस पर उनका कहना था कि संगीत वगैरा तो गैर-इस्लामिक है. ऐसे कार्यक्रम कराने ही नहीं चाहिए. ये किस्सा हमें बताया कानपुर के एक सीनियर पत्रकार ने. उन्होंने ये दावा भी किया कि इफ्तिखारुद्दीन के सरकारी आवास पर धार्मिक तकरीरें होती थीं. बाहर से मौलवी भी आते थे जो आवास पर ही रुकते थे. ये बात जिला प्रशासन के अधिकारी और पत्रकार भी जानते थे. धर्म परिवर्तन की गतिविधियों में उनके रोल को लेकर भी चर्चाएं होती थीं. हालांकि किसी के पास ऐसा कोई पक्का सबूत नहीं रहा कि इसकी पुष्टि की जा सके.

Ias Iftikharuddin Up Kanpur Religious Conversion Viral Video
कानपुर के पत्रकारों का दावा है कि वायरल वीडियो 2015 में रमज़ान के दौरान रिकॉर्ड किया गया था.

IAS इफ्तिखारुद्दीन का क्या कहना है?

तकरीर के वीडियो सामने आने के बाद लोग भले ही इफ्तिखारुद्दीन को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन वह इसे बुरा नहीं मानते. कानपुर के एक टीवी पत्रकार ने जब इफ्तिखारुद्दीन से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी तो पहले तो वो ना-नुकुर करते रहे. हालांकि जब उन्हें वीडियो दिखाया गया तो उन्होंने माना कि ये वीडियो उनका ही है. लेकिन उनका ये भी सवाल था कि क्या ऐसा करके उन्होंने कोई अपराध किया है? इफ्तिखारुद्दीन के मुताबिक, ऐसा करना कानूनी रूप से गलत नहीं है और न ही सेवा शर्तों के खिलाफ है.

फिलहाल इफ्तिखारुद्दीन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आया. इस मामले से बीजेपी और सपा के बीज राजनीतिक उठापटक तेज होने का अंदेशा है. बीजेपी ने शुरुआत कर दी है. कानपुर से बीजेपी विधायक सुरेंद्र मैथानी ने इफ्तिखारुद्दीन को लेकर आरोप लगाए हैं. मैथानी ने दावा किया कि जब इफ्तिखारुद्दीन कानपुर के मंडलायुक्त थे, तब मैं बीजेपी का जिला अध्यक्ष था. वो हमें बहुत प्रताड़ित किया करते थे. वो तब इस बात का दावा करते थे कि मैं यूपी के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव का बहुत नजदीकी हूं और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. हम लगातार संघर्ष करते रहते थे लेकिन वो हमारी बिल्कुल नहीं सुनते थे.

अब देखना ये है कि IAS अधिकारी की तकरीर का ये केस किस करवट बैठता है. हालांकि यूपी में विधानसभा इलेक्शन से पहले इस वीडियो के खुलासे ने सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.


वीडियो – मौलाना कलीम सिद्दीकी की गिरफ्तारी पर यूपी में क्यों मचा सियासी बवाल?

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