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वो स्पेशल 4, जो अंतरिक्ष में पहुंचने वाले पहले सिविलियन बने हैं

चांद पर सबसे पहले कदम रखा अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने. तारीख थी 20 जुलाई 1969. उन्होंने चांद पर अपना बांया पैर रखा, और कहा-

“That’s one small step for man, one giant leap for mankind.”

मतलब ये कि- ये एक इंसान के लिए छोटा सा कदम है, लेकिन पूरी मानव जाति के लिए एक बहुत बड़ी छलांग हैं.

एक ऐसी ही छलांग 16 सितंबर 2021 को 4 इंसानों ने लगाई. खास बात ये कि ये चारों सिविलियंस हैं. मतलब प्रोफेशनल एस्ट्रोनॉट नहीं हैं. इन्हें अंतरिक्ष में भेजा है स्पेसएक्स (Spacex) ने. ये इलॉन मस्क की कंपनी है. शायद ही कोई ऐसा साल जाता हो, जब इलॉन मस्क कुछ ऐसा न करते हों जो लोगों को हैरान कर दे. इनकी कंपनी ने  Inspiration 4 मिशन के तहत 4 आम लोगों को अंतरिक्ष में भेजा है. इससे पहले प्रोफेशनल एस्ट्रोनॉट्स ही स्पेस में गए हैं. लेकिन ये पहला मौका है, जब बिना किसी प्रोफेशनल एस्ट्रोनॉट के सिर्फ सिविलियंस अंतरिक्ष में भेजे गए. ये कदम दुनिया के बाकी लोगों के लिए एक नया रास्ता खोलता है. सोचिए ऐसे ही कभी चंद सिविलियन हवाई जहाज पर चढ़े होंगे. और आज हर खासोआम हवाई यात्रा कर सकता है. खैर आइए बताते हैं इन खास सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स के बारे में और उनके सेलेक्शन से लेकर ट्रेनिंग तक के सफर के बारे में.

पहले मिलिए ‘स्पेशल 4’ से

पहली बार अंतरिक्ष में जाने वाले 4 लोगों को ‘स्पेशल 4’ कहना ही सही होगा. ये चारों अंतरिक्ष यात्री कई मामलों में स्पेशल हैं. इनकी कहानी बहुत से लोगों को प्रेरणा दे सकती है. तो आइए मिलते हैं इनसे.

जार्ड आइसकमैन (Jared Isaacman)

जार्ड 38 साल के हैं और उनका रोल मिशन कमांडर का है. ये धन कुबेर हैं. इन्होंने ई-कॉमर्स के बिजनेस में काफी पैसे कमाए हैं. उड़ने के लिए इनकी दीवानगी गज़ब की है. इन्होंने प्राइवेट एयरफोर्स बना रखी है. इसमें फाइटर प्लेन भी हैं. इसका इस्तेमाल मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए किया जाता है. इन्होंने अपने गैराज में एक छोटा सा स्टार्टअप शुरू किया था. नाम था Shift4 Payments. देखते ही देखते ये अमेरिका की पैसे ट्रांसफर करने वाली सबसे बड़ी सर्विस बन गई. फिर क्या था. पैसा बरसा और उड़ान भरने के दीवाने इस शख्स ने स्पेसएक्स के मिशन की चारों सीटें खरीद लीं. कितने में खरीदीं, इसका खुलासा आधिकारिक तौर पर तो नहीं हुआ. लेकिन टाइम मैगज़ीन के मुताबिक जार्ड ने इसके लिए 200 मिलियन डॉलर मतलब तकरीबन 1470 करोड़ रुपए भरे हैं.

शॉन प्रॉक्टर (Sian Proctor)

शॉन की उम्र 51 साल है. वो मिशन की सबसे उम्रदराज़ सदस्य हैं. जियोसाइंस की प्रोफेसर हैं. पीएचडी कर चुकी हैं. उनका और अंतरिक्ष का पुराना रिश्ता है. उनके पिता एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा रहे. इस वजह से वो बचपन से ही अंतरिक्ष को लेकर सपने बुनती रही हैं. शॉन के पिता नासा के अपोलो लूनर मिशन के दौरान ट्रैकिंग स्टेशन में काम करते थे. जिस जगह वो काम करते थे, उसका नाम था गुआम. यहीं पर शॉन का जन्म हुआ.

शॉन के पास पायलट का लाइसेंस है. इसके अलावा वो पहले भी नासा से स्पेस मिशन की ट्रेनिंग लेती रही हैं. उन्होंने नासा से उस 4 महीने के मिशन की ट्रेनिंग भी ली है, जिसमें मंगल पर जाने के लंबे मिशन पर खाने-पीने की रणनीति के बारे में सिखाया जाता है. शॉन नासा के एस्ट्रोनॉट कैंडिडेट प्रोग्राम 2009 की फाइनलिस्ट रही हैं. अब वो अमेरिका की चौथी अफ्रीकन अमेरिकन महिला बन गई हैं जो कभी अंतरिक्ष में गई हो. उनका सेलेक्शन Shift4 Payments द्वारा आयोजित एक प्रतियोगिता के जरिए किया गया था.

हैली आर्सेनॉक्स (Hayley Arceneaux)

मिशन की चीफ मेडिकल ऑफिसर 29 साल की हैली हैं. उनकी कहानी पूरी फिल्मी है. उन्हें बचपन में बोन कैंसर हो गया था. इलाज हुआ तो ठीक हो गईं. उन्होंने उसके बाद पढ़ाई की, डॉक्टर बनीं. उसी हॉस्पिटल में फिजीशियन असिस्टेंट बनीं, जहां बचपन में उनके बोन कैंसर का इलाज हुआ था. इस अस्पताल में कैंसर से पीड़ित बच्चों का इलाज होता है. हैली ने कैंसर के चलते अपनी बायीं जांघ और घुटना 10 साल की उम्र में ही खो दिया था. वो अपने कृत्रिम पैरों को गुमान से दिखाती हैं. और कहती हैं कि वो ऐसी पहली इंसान हैं जो प्रोस्थेटिक बॉडी पार्ट के साथ अंतरिक्ष में गया है.
उनके नाम एक और रेकॉर्ड भी है. वो अंतरिक्ष मे जाने वाली सबसे कम उम्र की अमेरिकन नागरिक भी बन गई हैं. स्पेसएक्स के मुताबिक अब तक सिर्फ 533 लोग ही अंतरिक्ष में पहुंचे हैं.

हैली ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया-

“मैं कैंसर से पीड़ित युवा मरीजों को दिखाना चाहती हूं कि कैंसर के बाद जिंदगी कैसी दिख सकती है.”

क्रिस सेमबोस्की (Chris Sembroski)

42 साल के क्रिस डाटा इंजीनियर हैं और मिशन स्पेशलिस्ट के तौर पर गए हैं. वो मशहूर एरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन में नौकरी करते हैं. क्रिस को पढ़ाई के दिनों से ही रॉकेट और स्पेस साइंस से लगाव था. उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. अमेरिकी सेना में इलेक्ट्रो मैकेनिकल टेक्नीशियन के तौर पर जुड़ गए. उन्हें ईराक में पोस्टिंग मिली. साल 2007 में जब उन्होंने आर्मी छोड़ी, तब वो इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल को मेंटेन करने वाली टीम के मेंबर थे.

कैसे हुआ इनका सेलेक्शन?

इन लोगों का सेलेक्शन काफी रोचक तरीके से हुआ. जैसा कि हम इंट्रोडक्शन के वक्त बता चुके हैं कि मिशन की चारों सीटें धन कुबेर जार्ड ने खरीद ली थीं. एक सीट तो उन्होंने अपने लिए रखी और बाकी तीन की तलाश शुरू कर दी. उन्होंने इन सीटों के नाम चार मानवीय पहलुओं पर रखे. ये हैं – Leadership, Hope, Generosity और Prosperity. मतलब नेतृत्व, आशा, उदारता और समृद्धि. दो सीटें उन्होंने सेंट ज्यूड हॉस्पिटल को दे दीं. ये वही हॉस्पिटल है, जिसमें हैली का बचपन में इलाज हुआ था और वो यहीं डॉक्टर भी हैं. होप नाम की इस सीट पर किसी हेल्थ केयर वर्कर को ही जाना था. हॉस्पिटल ने इसके लिए हैली को चुना.

बची Generosity नाम की दूसरी सीट. इसके लिए लोगों से हॉस्पिटल में भरपूर दान देने के लिए कहा गया. चुनाव बड़े दानकर्ता का होना था. 13 मिलियन डॉलर का चंदा जमा हुआ. मतलब तकरीबन 96 करोड़ रुपए. इसमें क्रिस सेमबोस्की ने 50 डॉलर का चंदा दिया था. आपको लग रहा होगा कि इतना कम दान देकर भी उनका सेलेक्शन कैसे हो गया. असल में बड़ा चंदा उनके एक अनाम दोस्त ने दिया. सीट उनके नाम पर निकली लेकिन सिंब्रोस्की के रॉकेट और स्पेस के प्रति जुनून को देखते हुए उन्होंने अपनी जगह सिंब्रोस्की को भेजने का फैसला लिया. इस पर तो हम यही कहेंगे – भगवान सबको ऐसा दोस्त दे.

इसके बाद बची आखिरी सीट Prosperity. इसके लिए जार्ड की कंपनी Shift4 Payments ने एक ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित की. इसमें कंपनी का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करके एक ई-कॉमर्स पोर्टल बनाना था और उसे ट्वीट करना था. इस प्रतियोगिता में बेहतरीन पोर्टल का इनाम जीता शॉन प्रॉक्टर ने, और स्पेस की उड़ान पकड़ ली. नीचे हम उनका प्रतियोगिता वाला ट्वीट लगा रहे हैं.

कैसे होती है अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग?

अंतरिक्ष की यात्रा शरीर पर काफी तगड़ा असर छोड़ती है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अंतरिक्ष में जरा सा पैनिक पूरे मिशन को धराशायी कर सकता है. ऐसे में शारीरिक और मानसिक तौर पर तगड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. ये ट्रेनिंग कई महीने चलती है. जहां तक बात Inspiration 4 पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों की है तो उन्हें भी कमोबेश रेग्युलर अंतरिक्ष यात्रियों वाली ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा है. इसमें शामिल है-

माइक्रोग्रेविटी ट्रेनिंग

अंतरिक्ष में गुरुत्‍वाकर्षण नहीं होता है. इस वजह से अंतरिक्ष यात्री को भार महसूस नहीं होता. लिहाजा सारी चीजें हवा में तैरती रहती हैं. अंतरिक्ष में जाने से पहले अंतरिक्ष यात्रियों को इसकी ट्रेनिंग दी जाती है. स्‍पेस शटल को स्‍पेस में मूव करना बेहद आसान लग सकता है, क्‍योंकि वहां किसी भी तरह के टकराव की स्थिति नहीं बनती है. लेकिन गुरुत्वाकर्षण न होने की वजह से अगर टकराव मुश्किल है तो किसी चीज को रोकना भी उतना ही मुश्किल होता है. अंतरिक्ष यात्रियों को धरती के वायुमंडल से बाहर निकलते वक्त और एंट्री लेते वक्त लगने वाले गुरुत्वाकर्षण के झटके से उबरने की ट्रेनिंग दी जाती है.

स्पेसक्राफ्ट ट्रेनिंग

Inspiration 4 पूरी तरह से ऑटो पायलट मोड में चलता है. मतलब अंतरिक्ष यान में मौजूद किसी अंतरिक्ष यात्री को कुछ करना नहीं है. सब कुछ धरती के मिशन कंट्रोल ऑफिस से कंट्रोल होता रहता है. लेकिन एहतियात के तौर पर चारों अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेसशिप चलाने की मैन्युअल ट्रेनिंग भी दी गई. इसके लिए पूरे क्रू ने 30 घंटे तक लगातार ड्रैगन सिम्युलेटर पर ट्रेनिंग ली. ड्रैगन सिम्युलेटर स्पेसक्राफ्ट के कॉकपिट जैसा बनाया जाता है. इसमें अलग-अलग परिस्थितियां पैदा करके अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग दी जाती है. अमूमन हर एस्‍ट्रोनॉट्स को Space Vehicle Mockup Facility में ट्रेनिंग दी जाती है. इसके जरिए वो सीखते हैं कि उन्हें स्‍पेस शटल का कैसे इस्‍तेमाल कैसे करना है और कैसे ऑर्बिट मेंटेनेस करनी है.

अंडर वॉटर ट्रेनिंग

ये अंतरिक्ष यात्रियों की पूरी ट्रेनिंग का सबसे अहम हिस्‍सा होता है. इसके लिए अंतरिक्ष यात्री पानी के भीतर ट्रेनिंग लेते हैं. इसके लिए Neutral Buoyancy Laboratory (NBL) का प्रयोग करते हैं, जिसे आप एक बड़ा स्विमिंग पूल कह सकते हैं. NBL की लंबाई 202 फीट, चौड़ाई 102 फीट और 40 फीट गहराई तक होती है. इसके अंदर 22.7 मिलियन लीटर पानी भर सकते हैं. एस्‍ट्रोनॉट इसमें तैरते हुए अपनी प्रैक्टिस करते हैं. वे एक समय में कम से कम 7 घंटे तक लगातार अंडरवॉटर प्रैक्टिस करते हैं. चूंकि Inspiration 4 अपेक्षाकृत छोटी फ्लाइट है, ऐसे में इन चार एस्ट्रोनॉट्स को इस ट्रेनिंग से नहीं गुजरना पड़ा. लेकिन बाकी प्रोफेशनल एस्ट्रोनॉट के लिए ये ट्रेनिंग सबसे जरूरी होती है. इसके अलावा एस्‍ट्रोनॉट्स को खासतौर पर मेडिकल ट्रेनिंग दी जाती है. उन्‍हें यह भी सिखाया जाता है कि कैसे किसी इमरजेंसी में खुद पर बैलेंस बनाए रखना है.

अपने मिशन पर जाने से पहले जब धनकुबेर आइसकमैन से पूछा गया कि उनके लिए ट्रेनिंग का सबसे कठिन हिस्सा कौन सा रहा. उन्होंने जवाब दिया-

“ट्रेनिंग की शुरुआत ढेरों पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन से हुई. ये अनुभव एक छोटी मौत की तरह था. शुक्र है, इसके बाद जल्दी ही ट्रेनिंग का वो फेज़ आ गया जिसमें इन प्रेजेंटेशन में मिली सारी जानकारी को प्रैक्टिकल तौर पर इस्तेमाल करना था.”


वीडियो – साइंसकारी: स्पेस कहां से शुरू होता है, जानकर चकरा जाएंगे!

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