Submit your post

Follow Us

राम जन्भूमि से लेकर महंगी बाइक चलाने तक, पूर्व CJI बोबडे के फैसले और विवाद

18 नवंबर 2019 से भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका निभा रहे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शरद अरविंद बोबडे (Justice S A Bobde) का कार्यकाल 23 अप्रैल 2021 को खत्म हुआ. वे रिटायर हो चुके हैं और अब उनकी जगह ले रहे हैं जस्टिस एन वी रमणा. आज हम बात कर रहे हैं जस्टिस अरविंद बोबडे के कुछ बेहद जरूरी फैसलों की और साथ ही उनके कार्यकाल के दौरान हुए कुछ विवादों की भी.

पहले जल्दी से यह बता देते हैं कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का कार्यभार संभालने से पहले उनका करियर क्या रहा है. जस्टिस बोबडे सबसे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में सीनियर एडवोकेट और एडिशनल जज थे. जिसके बाद 2012 में वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए. एक साल बाद यानी 2013 में उन्हें एलिवेट कर सुप्रीम कोर्ट में जज की उपाधि मिल गई. फिर शुरू हुआ सिलसिला कुछ बेहद जरूरी फैसले देने से लेकर भारत के चीफ जस्टिस बनने तक का. इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसे फैसले दिए, जो हिंदुस्तान की अवाम के लिए या तो ताकत बने या फिर अलग-अलग ग्रुप से आ रहे लोगों के लिए सवाल और आलोचना का मुद्दा.

लैंडमार्क फैसले

-2015 के मार्च में एक 3-मेंबर बेंच का फैसला आया, जिसमें जस्टिस एसए बोबडे भी शामिल थे. अपने जजमेंट में बेंच ने यह साफ किया कि किसी भी भारतीय को सिर्फ आधार कार्ड मौजूद ना होने के लिये प्रताड़ित नहीं किया जा सकता.

-2017 के एक जजमेंट को याद करते हैं. यह वो जजमेंट था, जिसमें यह स्थापित किया गया था कि ‘राइट टू प्रिवेसी’ किसी के लिए भी एक मौलिक अधिकार है. उस बेंच में जस्टिस एस ए बोबडे भी शामिल थे.

-साल  2016 में पहली बार जिस बेंच ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाने वाला फैसला दिया, उसमें भी हमारे पूर्व चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े शामिल थे. इस फैसले के संदर्भ में धर्म और संस्कृति को लेकर जो बहस छिड़ी थी, वो अब तक खत्म होने का नाम नहीं लेती. हवा जहरीली हो जाने के बाद भी दीवाली से लेकर छठ तक कि ऐसी तस्वीरें अब भी सामने आती हैं, जहां लोग मास्क लगाकर पटाखे फोड़ते नजर आते हैं आते हैं.

-2017 की जनवरी में जस्टिस बोबड़े एक ऐसी बेंच का भी हिस्सा थे, जिसने 24 महीने की प्रेगनेंट महिला को अबॉर्शन कराने की मंजूरी दी. बेंच ने यह कहते हुए मंजूरी दी थी कि महिला के गर्भ में जो बच्चा पल रहा है, उसका सिर विकसित नहीं हुआ है. अबॉर्शन को लेकर हमारे समाज में जो भी टैबू मौजूद हैं, उन्हें देखते हुए इस फैसले को लैंडमार्क फैसला माना जाता है.

-2019 में चीफ जस्टिस बनने से ठीक पहले जस्टिस बोबडे उस कमेटी की अगुवाई कर रहे थे जो उस वक्त के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन शोषण के मामले में जांच कर रही थी. इस कमेटी ने पूर्व CJI रंजन गोगोई पर लगे सारे इल्जामों को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि कमेटी को ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो उन्हें दोषी साबित करे.

Bobde

भारत के 47वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेते पूर्व CJI S A Bobde. (फोटो: PTI)

-अब आते हैं अयोध्या भूमि विवाद के फैसले पर. ऐसा फैसला, जिसके मद्देनजर सांप्रदायिक हिंसा के डर से तरह-तरह की सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी थी. जिस बेंच ने 9 नवंबर 2019 में अयोध्या पर फैसला सुनाया, उस बेंच में जस्टिस बोबडे भी शामिल थे. इसकी अध्यक्षता की थी उस वक़्त के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने. विवादित जगह को ‘राम जन्मभूमि न्यास’ को राम मंदिर बनाने के लिए दे दिया गया. वहीं उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक पांच एकड़ जमीन दी गई. फैसला आने के बाद कम से कम बीस पुनर्विचार याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में डाली गईं. जिन्हें CJI बोबड़े के नेतृत्व में खारिज किया जाता रहा.

विवाद

हाल में जितने भी चीफ जस्टिस रहे हैं, उनका विवादों में घिरना बहुत आम रहा है. जस्टिस बोबड़े भी कोई अपवाद नहीं हैं.

1.

2020 में देश में कोरोना का भयावह दौर शुरू हुआ. मार्च के आखिर में लॉकडाउन लगने के साथ ही बड़ी संख्या में मजदूर बड़े शहरों से वापस अपने घर जाने लगे. भूखे प्यासे मजदूरों को हजारों किलोमीटर पैदल चलना पड़ा. कइयों ने चलते-चलते दम तोड़ दिया. कई दुर्घटनाओं में मारे गए.

इसके विपरीत सरकार की तरफ से कहा गया कि मजदूरों के लिए सारी व्यवस्थाएं की गईं. लेकिन मीडिया ने उनकी गलत तस्वीर पेश की. सुप्रीम कोर्ट में कई वरिष्ठ वकीलों और NGO ने याचिकाएं डालीं. मांग की गई कि देश की सर्वोच्च अदालत को मजदूरों के मामले में जरूरी कदम उठाने चाहिए. लेकिन जस्टिस एस ए बोबडे की अगुआई में यह हो ना सका.

इसके बाद ज़ोर शोर से सरकार और कोर्ट की नीतियों पर सवाल उठा. जिसका नतीजा यह हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिर में कुछ दिशा निर्देश जारी किए और सरकार से कहा कि मजदूरों के लिए निःशुल्क ट्रांसपोर्टेशन और खाने की व्यवस्था जल्द से जल्द मुहैया कराई जाए.

Lockdown
पिछले साल मार्च के आखिर में लगे लॉकडाउन की वजह से देश भर में लाखों मजदूरों को पैदल ही अपने घर वापस जाना पड़ा. (फोटो: PTI)

2.

इसी दौरान जस्टिस बोबडे को लेकर, जो सबसे बड़ा विवाद घटा वो वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के ट्वीट से जुड़ा था.  2020 के कोरोना काल में ही ट्विटर पर जस्टिस अरविंद बोबडे की एक तस्वीर वायरल हुई. इस तस्वीर में वे एक बेशकीमती बाइक हार्ले डेविडसन के साथ बिना मास्क लगाए पोज करते नजर आए. बात इतनी ही नहीं थी. यह बाइक स्थानीय बीजेपी नेता सोनबा मुसाले के बेटे रोहित सोनबा मुसाले की थी. इसके बाद ट्वीट वॉर का दौर शुरू हुआ. इसी ट्वीट वॉर में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने इसपर तीखी टिप्पणी लिख दी थी.

इस ट्वीट के फौरन बाद हंगामा शुरू हुआ. प्रशांत भूषण पर ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ का आरोप लगाया गया. जिसपर लंबा विवाद चला. और अंत में सजा के तौर पर उन्हें 1 रुपया सुप्रीम कोर्ट में जमा करना पड़ा.

3.

विवादों की फेहरिस्त और लंबी है. लेकिन एक आखिरी और रीसेंट विवाद जो बोबडे को ले कर हुआ, वो यह कि सूत्रों के मुताबिक यौन शोषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बोबडे ने आरोपी से यह पूछा कि क्या वो पीड़िता से शादी करेगा. हालांकि इसके बाद ये बात भी सामने आई कि बोबडे को ‘आउट ऑफ़ कॉन्टेक्स्ट’ ट्वीट किया था. यानी पूरी बात का एक छोटा सा हिस्सा सामने लाया गया. जिससे उसके मायने बदल गए.

यह मामला जैसे ही पबलिक डोमेन में आया, अधिकतर लोगों ने इसपर सवाल उठाए. यहां तक कि कई महिला संगठनों ने जस्टिस बोबडे के इस्तीफे की मांग की. कहा गया कि हम 21वीं सदी में अपने चीफ जस्टिस से इस तरह की बात बोलने की उम्मीद नहीं रखते.

तो ये था हमारे 47वें चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े के 18 महीने के कार्यकाल का एक संक्षिप्त ब्यौरा. 24 अप्रैल को भारत को उसका 48वां मुख्य न्यायाधीश मिल रहा है. नुथलपति वेंकट रमणा के रूप में. हम उम्मीद करते हैं उनके कार्यकाल में हमारी न्यायिक व्यवस्था को एक नई ऊर्जा मिले. लोगों का न्याय में विश्वास और पुख्ता हो.


वीडियो- चीफ जस्टिस बोबडे अपने विदाई समारोह में कौन सी बात कहते हुए इमोशनल हो गए?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.