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ये कौन सा खीरा है, जो 10-20 नहीं बल्कि 2.5 लाख रुपये किलो तक बिकता है?

जाफना. यह श्रीलंका के उत्तरी छोर पर स्थित एक शहर है. 31 साल के एंथनी विग्राडो यहां रहते हैं. सूरज डूबने के बाद एंथनी ने पाक की खाड़ी (Palk Bay) के पानी में छलांग लगाई. उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें वहां से एक बेशकीमती खजाना मिलेगा. जोकि पिछले 12 सालों से उनकी आय का जरिया है. एंथनी ने लगभग 10 घंटे तक खोजबीन की. लेकिन उन्होंने पाया कि उन्हें हमेशा की अपेक्षा बहुत थोड़ी ही मात्रा में वह चीज मिली. बहुत निराश हुए. आप सोच रहे होंगे यह खजाना क्या है? इस खजाने का नाम है- समुद्री खीरा!

समुद्री खीरे की कीमत तुम क्या जानो?

समुद्री खीरा. पहली बात तो इसका खीरे से कोई लेना देना नहीं है. यह एक जीव है. इसे समुद्री खीरा इसलिए कहते हैं, क्योंकि यह खीरे की तरह दिखता है. यह कोमल चमड़ी वाला और ट्यूब जैसे शरीर वाला होता है. यह पोषक तत्वों के रीसाइक्लिंग में भी बड़ा उपयोगी होता है. समुद्र की अम्लीयता को घटाने में भी ये बड़े कारगर होते हैं. समुद्री खीरे की मांग चीन में और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बहुत है. क्योंकि उनका उपयोग पारंपरिक दवा बनाने के लिए भी होता है. इसको सूखे रूप में ही खाया जाता है, जिसे बेशे-डे-मेर (Beche-De-Mer) या त्रेपांग (Trepang) कहते हैं.

चीन में कुछ लोगों द्वारा इसे कामोत्तेजक दवा (Aphrodisiacs Medicine) के रूप में भी इस्तेमाल कर लिया जाता है. इन्हीं सब वजहों से इस जीव का व्यापार मछुआरों के मुंह में पानी ला देता है. पिछले कई दशकों से इसकी कीमत भी तेजी से बढ़ ही रही है.साल 1980 में समुद्री खीरे की कीमत करीब 5000 रुपए प्रति किलोग्राम थी. जो अब बढ़कर 21,000 रुपए प्रति किलोग्राम हो चुकी है. कुछ विशेष प्रजातियों के समुद्री खीरों की कीमत तो 2.5 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक होती है.

समुद्री खीरा इतना कीमती क्यों है?

आपके खाने वाला खीरा ₹20 प्रति किलो हो सकता है, लेकिन समुद्री खीरा लगभग ₹20,000 प्रति किलो होता है. इसको खा पाना सबके बस की बात नहीं है. कई दशकों से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के रईस लोग इसे एक प्रोटीन स्रोत के तौर पर खाते आ रहे हैं. 1980 के दशक से इसकी मांग अचानक बढ़ गई. चीन में मिडिल क्लास धीरे-धीरे बढ़ रहा था, तो ज्यादा से ज्यादा लोग के पास इसे खाने के लिए पैसा आने लगा. आज के समय में कंपनियां समुद्री खीरे को अच्छे से सुखा कर, उसको फैंसी पैकेटों में भरकर सप्लाई करती हैं. जिसका प्रयोग लोग गिफ्ट देने में भी करते हैं. जापानी समुद्री खीरा सबसे महंगा माना जाता है. एशिया में खासकर दक्षिण पूर्व एशिया में सदियों से इसका प्रयोग जोड़ों की समस्याओं जैसे आर्थराइटिस आदि के इलाज में हो रहा है. और हाल ही में यूरोप में भी लोगों ने इसका प्रयोग दवा के रूप में करना शुरू कर दिया है.

धीरे-धीरे फार्मास्यूटिकल कंपनियों की भी इसमें रूचि बढ़ रही है. और इन्हीं सब को देखकर कई देश समुद्री खीरे के व्यापार में अपनी धाक जमाना चाहते हैं. इसको आप इस बात से देख सकते हैं कि 1996 से 2011 के बीच समुद्री खीरों के निर्यात करने वाले देशों की संख्या 35 से 83 हो गई है. जितना ज्यादा लोग समुद्र खीरों का व्यापार कर रहे हैं, उतना ही इसकी संख्या कम होती जा रही है और उसको निकालना उतना ही कठिन होता जा रहा है. इसलिए इसके दाम भी सरपट दौड़ रहे हैं.

बढ़ गई स्मगलिंग

बड़ी सीधी बात है.अगर यह बेशकीमती है, तो ज्यादा से ज्यादा लोग इसको पाना चाहेंगे. और इसी चक्कर में कुछ लोग स्मगलिंग का सहारा लेते हैं. पिछले कुछ सालों में पाक की खाड़ी और मन्नार की खाड़ी में समुद्री खीरे का शिकार बहुत ही ज्यादा हो रहा है. जिसकी वजह से इसकी कुछ महंगी प्रजातियों की जनसंख्या तो लगभग 60% तक गिर गई है. श्रीलंका इस समय समुद्री खीरे की स्मगलिंग का बड़ा अड्डा बन चुका है. श्रीलंका के उत्तरी तट पर लगभग 10,000 मछुआरों के परिवार रहते हैं. एंथनी, जिनकी कहानी हमने आपको ऊपर सुनाई है, वे भी इन्हीं में से एक है. उनका कहना है,

“अवैध मछुआरे हमारी सीमाओं के पार आ रहे हैं और उन जगहों से समुद्री खीरों को इकट्ठा कर रहे हैं, जहां हम लोग सामान्य रूप से गोता लगाते हैं. हम अपनी आय और अपना धन उनसे खो रहे हैं.”

 

चामारी दिसानायके, जोकि श्रीलंका की यूनिवर्सिटी में जीव विज्ञान के प्रवक्ता हैं, उन्होंने समुद्री खीरों के बारे में बताया

“ओवरफिशिंग के कारण इनकी जनसंख्या घट रही है. इससे जैव विविधता प्रभावित होती है. और इससे तट पर रहने वाले मछुआरों, जोकि इसी पर निर्भर है, उनकी  जीविका भी प्रभावित होती है.” 

मछुआरों ने यह भी बताया की ये स्मगलर अवैध नावों से आते हैं और स्थानीय मछुआरों द्वारा बनाए गए ढांचों या उनकी नावों आदि को तोड़ देते हैं. कुछ मछुआरों ने तो अपने लोन को ना चुकाने की स्थिति में आत्महत्या भी कर ली है.

स्मगलिंग में कौन शामिल?

ऐसी स्मगलिंग होने के कई कारण हैं, इसमें एक बड़ा कारण है कि अलग-अलग देशों में समुद्री खीरों से जुड़े नियमों में कई अंतर है. और इसी का फायदा ये स्मगलर उठा लेते हैं. श्रीलंका समुद्री खीरों के निर्यात के लिए कुछ मछुआरों को लाइसेंस देता है. वहीं भारत में देखें तो यहां 2001 से ऐसे जीवों के व्यापार पर पूरी तरह से बैन है. जैसे-जैसे इन जीवों की कीमतों में उछाल आ रही है. इनकी स्मगलिंग और बढ़ रही है. समुद्री खीरों की मांग की वजह से मेक्सिको में घातक हिंसा हुई. जापान में भी कई अपराधी संगठन है, जो इस स्मगलिंग में शामिल है.

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भारत-श्रीलंका में समुद्री खीरे की करोड़ों में होती है तस्करी(फोटो:AP,Pixabay)

अफ्रीकी देश तंजानिया मुख्य भूमि और जंजीबार के बीच भी समुद्री खीरों की स्मगलिंग बढ़ रही है. भारत और श्रीलंका में यह समस्या सबसे ज्यादा है, अभी पिछले साल ही अगस्त में कुछ स्मगलरों को इंडियन कोस्ट गार्ड ने 1000 किलोग्राम समुद्री खीरों के साथ पकड़ा था. इसकी कीमत जान कर आप चौक जाएंगे. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 5.18 करोड़ रुपए थी. पिछले कई सालों से श्रीलंका और भारत दोनों इस अपराध से लड़ने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं. लोग गिरफ्तार भी हो रहे हैं. भारी संख्या में स्मगलिंग किए जा रहे समुद्री खीरों को जब्त भी किया जा रहा है, लेकिन इनकी स्मगलिंग कम होने का नाम नहीं ले रही है.

भारत ने उठाए कदम

भारत में समुद्री खीरा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित है. लेकिन समुद्री खीरों की स्मगलिंग भारत के तटीय इलाकों में भारी पैमाने पर हो रही है. खासकर लक्षद्वीप के आसपास. लेकिन भारत अब इसके लिए और सतर्क हो गया है. फरवरी 2020 में लक्षद्वीप में समुद्री खीरों के लिए, दुनिया का पहला संरक्षण क्षेत्र बनाया गया है. इस समस्या से निपटने के लिए लक्षद्वीप में Anti-poaching Camps (अवैध शिकार विरोधी कैंप) भी बनाए गए हैं. स्मगलिंग को रोकने के लिए सीबीआई ने भी कुछ कदम उठाए हैं, सीबीआई ने अप्रैल 2020 में लक्षद्वीप के वन विभाग से स्मगलिंग के केस को अपने अंडर में ले लिया था. स्मगलिंग को रोकने के लिए भारत में लक्षद्वीप Sea Cucumber Protection Task Force भी बनाया गया है. पिछले साल इस टास्क फोर्स ने कई स्मगलरों को पकड़ा भी था.


ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे नीलोत्पल ने लिखी है.


 वीडियो-आधी रात को क्यों ब्लू लाइट मारने लगा समुद्र का पानी?

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