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मां ने साइंस लेने से रोका, पिता ने राइटी लड़की को लेफ्टी बल्लेबाज़ बना दिया!

29 जून 2017, ICC महिला विश्वकप का सातवां मैच. टॉंटन का मैदान. भारत और वेस्टइंडीज़ आमने-सामने. कप्तान मिताली राज ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. पहले बैटिंग करने उतरी विंडीज़ टीम की शुरुआत ठीक नहीं रही. फेलिसिया वॉल्टर्स नौ रन बनाकर आउट हुईं. कप्तान स्टेफनी टेलर 16 और डियांड्रा डॉटिन सात रन बनाकर चलती बनीं. 91 रन के भीतर विंडीज़ के छह बल्लेबाज पविलियन. और 50 ओवर्स में वेस्टइंडीज़ ने आठ विकेट खोकर 183 रन बनाए. और भारत के सामने जीत के लिए 184 रन का लक्ष्य रखा.

लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत ठीक नहीं रही. पूनम राउत खाता खोले बिना आउट हो गईं. जबकि दीप्ति शर्मा भी छह रन बनाकर चलती बनी. लेकिन ओपनर स्मृति मांधना ने कप्तान मिताली राज के साथ भारतीय पारी को संभाला. और तीसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की. चेज़ करते हुए स्मृति ने वर्ल्ड कप में अपना पहला और कुल दूसरा शतक ठोका.

स्मृति मांधना ने 108 गेंदों का सामना करते हुए 106 रन की पारी खेली. जिसमें 13 चौके और दो छक्के शामिल थे. कप्तान मिताली ने 46 रन बनाकर आउट हुईं. भारत ने ये मुकाबला सात विकेट से अपने नाम किया. लेकिन भारत की जीत से ज्यादा चर्चा स्मृति मांधना की हो रही थी. वर्ल्ड कप जैसे बड़े स्टेज पर शतक लगाना, बहुत बड़ी बात है. स्मृति मांधना सुर्ख़ियों में आ गई. सोशल मीडिया पर स्मृति मांधना छा गई.

खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की वजह से टीम इंडिया 2017 महिला विश्वकप के फाइनल में पहुंची थी. जहां खिताबी मुकाबले में मिताली एंड कंपनी को इंग्लैंड के हाथों नौ रन से हार का सामना करना पड़ा. भारत की झोली में विश्वकप तो नहीं आया. लेकिन भारत को एक सितारा मिल गया. स्मृति मांधना, जो आगे चलकर बनीं वर्ल्ड की नंबर एक बल्लेबाज़. ढेरों रन बनाए. रिकॉर्ड्स बनाए. शतक पर शतक जड़े. नतीजतन, 2017 विश्वकप के बाद से अब तक स्मृति मांधना को दो बार ICC विमिंस क्रिकेटर ऑफ द ईयर के अवॉर्ड से नवाजा चुका है. और ये उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली भारतीय महिला क्रिकेटर हैं. तो चलिए इसी ख़ास मौके पर आपको बताते हैं स्मृति की लाइफ और क्रिकेट से जुड़े किस्सों के बारे में.

#विरासत में मिला क्रिकेट

स्मृति मांधना महाराष्ट्र से तालुक्क रखती हैं. मारवाड़ी फैमिली में पैदा हुईं. 18 जुलाई 1996 में जन्मीं स्मृति मांधना को क्रिकेट विरासत में मिला. पिता खुद कभी क्रिकेट खेला करते थे. तो टिपिकल इंडियन मिडल क्लास फैमिली की तरह घर में खेल को लेकर पाबंदी नहीं थी. स्मृति मांधना का क्रिकेट घर से ही शुरू हुआ. बड़े भाई का नाम श्रवण है, जो डिस्ट्रिक्ट लेवल तक क्रिकेट खेल चुके हैं. और अपने बड़े भाई को देखते हुए ही स्मृति मांधना बड़ी हुईं.

स्मृति कहती भी हैं कि उन्होंने क्रिकेट में जो कुछ भी सीखा है, अपने भाई से सीखा है. स्मृति की काबिलियत का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि सिर्फ नौ साल की उम्र में उनका चयन महाराष्ट्र अंडर-15 टीम में हो गया था. और दो साल बाद ही वो 11 साल की उम्र में महाराष्ट्र की अंडर-19 टीम में चुन ली गईं.

#कैसे राइटी से लेफ्टी बनीं स्मृति?

मौजूदा समय में स्मृति दुनिया की बेस्ट लेफ्ट हैंड बल्लेबाजों में गिनीं जाती हैं. लेकिन मज़ेदार बात ये है कि स्मृति राइटी हैं. सिर्फ बल्लेबाज़ी लेफ्ट हैंड से करती है. एक शो में जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो स्मृति ने कहा,

‘मेरा भाई लेफ्ट हैंड बल्लेबाज़ी करता है लेकिन वो भी राइटी ही है. पप्पा को उन्हें लेफ्टी बनाना था. तो बचपन से ही भैया के सामने पप्पा लेफ्ट स्टांस लेकर बल्लेबाज़ी करते थे. हालांकि पप्पा भी राइटी ही हैं. तो उन्हें देखते हुए भैया ने लेफ्ट हैंड से बल्लेबाज़ी शुरू की. और मैं भी भैया को देखते हुए लेफ्ट हैंड से बल्लेबाज़ी करने लगी. तब मुझे पता ही नहीं था कि राइट हैंड से भी बल्लेबाज़ी की जाती है. मैंने भैया की पूरी बैटिंग कॉपी की. और उन्हीं से सब कुछ सीखा. तब मेरी उम्र छह-सात साल थी.’

# 2013 में इंडिया डेब्यू 

घरेलू सर्किट में स्मृति सबसे पहले चर्चा में 2013 में आयी थी. अक्टूबर का महीना था. और वड़ोदरा में वेस्ट ज़ोन अंडर-19 टूर्नामेंट खेला जा रहा था. गुजरात के खिलाफ महाराष्ट्र के लिए खेलते हुए स्मृति ने उस मुकाबले में दोहरा शतक ठोका. स्मृति ने सिर्फ 150 गेंद का सामना करते हुए नाबाद 224 रन की पारी खेली थी. लिस्ट ए मुकाबले में दोहरा शतक ठोकने वाली वह भारत की पहली महिला क्रिकेट बनीं. हालांकि स्मृति ने अप्रैल, 2013 में भारत के लिए डेब्यू कर लिया था. बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने वनडे और T20 डेब्यू किया. लेकिन उसमें छाप नहीं छोड़ सकी.

#बोर्ड एग्ज़ाम और टेस्ट डेब्यू 

बता दें कि स्मृति के करियर में भी वो दौर आया, जब उन्हें क्रिकेट और पढ़ाई में किसी एक को चुनना था. 15 साल की उम्र में जब स्मृति ने मैट्रिक का एग्जाम दिया. तो उनके पास आगे सब्जेक्ट सेलेक्ट करने की टेंशन थी. फिर मम्मी ने साइंस लेने से मना किया. जब 2014 में स्मृति को बोर्ड एग्जाम देना था. तो उसी साल उन्हें दोहरी ख़ुशी मिली. T20I विश्व कप के लिए टीम इंडिया में जगह मिल गई. और इंग्लैंड दौरे के लिए स्मृति मांधना टेस्ट टीम में चुनी गईं. अब स्मृति दुविधा में थी कि अगर बोर्ड एग्जाम मिस किया तो आगे होटल मैनेजमेंट नहीं कर पाएंगी.

स्मृति बताती हैं,

‘इंग्लैंड दौरे के बाद मेरे मन भी जो भी सवाल थे, वो सब खत्म हो गए. उस दौरे ने मुझे क्रिकेटर के रूप में बदल दिया. पहले ही मैच में फिफ्टी लगाकर टीम को जीत दिलाना मेरे लिए काफी स्पेशल था. आठ साल में भारत को पहली बार टेस्ट में जीत मिली थी. और अब मैं अपनी मां की शुक्रगुज़ार भी हूं जिन्होंने मुझे स्कूल में साइंस लेने से मना किया था. ऐसे में मैं क्रिकेट और पढ़ाई एक साथ मैनेज नहीं कर पाती.’

बता दें कि साल 2016 में स्मृति ने होबार्ट वनडे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करियर का पहला शतक लगाया. और इसके बाद आया बुरा दौर. उसी साल स्मृति को विमिंस बिग बैश लीग खेलने का मौका मिला. और ब्रिसबेन हीट के लिए खेलते हुए चोटिल हो बैठीं. लिगामेंट इंजरी हुई. और ज़्यादातर फिजियो का कहना था कि स्मृति 2017 विश्वकप में नहीं खेल पाएंगी.

अपने उस बुरे दौर को याद करते हुए स्मृति ने एक बार बताया था कि

‘ये हास्यास्पद है. मैं गेंदबाजी करते हुए चोटिल हो गयी. बिग बैश लीग मैच के दौरान जब मैं गिरीं तो मुझे लगा कि ये गंभीर इंजरी है. और तब मेरे ज़हन में विश्वकप को लेकर ख्याल आया. 80 प्रतिशत फिजियो ने कहा कि मैं विश्वकप में हिस्सा नहीं ले पाउंगी. लेकिन नेशनल क्रिकेट एकेडमी में कुछ फिजियो और ट्रेनर थे. जिन्होंने कहा कि मैं फिट हो जाउंगी. क्योंकि मैं एक बल्लेबाज़ हूं.’

स्मृति आगे बताती हैं,

’23 जनवरी 2017 को मेरी सर्जरी हुई थी. और विश्वकप का पहला मैच ठीक पांच महीने बाद 23 जून को इंग्लैंड के साथ था. मैं हर रोज़ उठके यही सोचती थी कि मुझे पांच महीने बाद 23 जून को मैच खेलना है. मुझे वर्ल्ड कप खेलना है.’

बता दें कि 23 जून 2017 को इंजरी के बाद जब स्मृति लौटीं तो उन्होंने महज 72 गेंद में 90 रन की पारी खेलकर टीम इंडिया को जीत दिला दी. स्मृति बताती हैं कि वेस्टइंडीज़ के खिलाफ अगले मैच में मैंने जो शतक लगाया, वो स्पेशल था. लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ़ वो 90 रन की पारी दिल के काफी करीब थी. क्योंकि सिर्फ उस मैच के लिए मैंने कड़ी मेहनत की. और जब मुझे प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड मिला. तो लगा कि मेहनत का फल मिला है.

आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि इस स्टार बल्लेबाज़ ने भारत के लिए अब तक चार टेस्ट में एक शतक और दो अर्धशतक की मदद से 325 रन बनाए हैं. वहीं 62 वनडे मैच में चार शतक और 19 अर्धशतक की मदद से 2377 रन कूटे हैं. जबकि स्मृति ने 84 T20 मैच में 14 अर्धशतक की मदद से 1971 रन बनाए हैं. साल 2018 और 2021 में स्मृति को ICC विमिंस क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड से नवाज़ा गया.

क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुने जाने के बाद स्मृति ने कहा,

‘2021 ICC विमिंस क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुने जाने पर गौरवान्वित महसूस कर रही हूं. मैं साथी खिलाड़ियों, कोच, मेरी फैमिली, दोस्त और फैन्स का शुक्रिया अदा करती हूं जिन्होंने मेरी काबिलियत पर भरोसा दिखाया. और इस सफ़र में मेरा साथ दिया. ‘

बता दें कि 2021 में स्मृति ने 22 इंटरनेशनल मैचों में 38.86 की औसत से कुल 855 रन बनाए. जिसमें एक शतक और पांच अर्धशतक शामिल हैं. गोल्ड कोस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ स्मृति ने डे-नाइट टेस्ट में 127 रन की पारी खेली थी.


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