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जानिए, ट्रंप और किम जोंग उन की दोस्ती से किसको क्या फायदा हुआ है

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नहीं होना था, नहीं होना था, लेकिन हो गया….

परदेस के आखिर में एक गाना था. कव्वाल बैठे हुए. फतेहपुर सीकरी का सेट. शाहरुख खान और महिमा चौधरी इधर-उधर दौड़ते हुए. गाने में कवि कहना चाहता है कि प्यार नहीं होना था दोनों में, मगर हो गया. डॉनल्ड ट्रंप और किम जोंग-उन. इन दोनों की मुलाकात निपट गई. उनकी तस्वीरें देखकर हमको यही गाना याद आया. पिछले कुछ टाइम से दुनिया की मीडिया इस एक ग्राउंड पर कॉमन हुई पड़ी थी. तब से, जब से किम जोंग-उन और साउथ कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन मिले थे. और ये बात हुई कि ट्रंप शांति वाला नोबल ले जाएंगे. क्योंकि वही तो हैं, जिन्होंने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम को उनकी मांद से बाहर निकालने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है.

मई में होने वाली मुलाकात को ना कहते हुए ट्रंप ने एक चिट्ठी लिखी थी. इसमें किसी स्कूल के बच्चे का सा आक्रोश था. कि अमेरिका को बातचीत की कोई जरूरत नहीं, वो तो नॉर्थ कोरिया की जरूरत है (फोटो: रॉयटर्स)
मई में होने वाली मुलाकात को ना कहते हुए ट्रंप ने एक चिट्ठी लिखी थी. इसमें किसी स्कूल के बच्चे का सा आक्रोश था. कि अमेरिका को बातचीत की कोई जरूरत नहीं, वो तो नॉर्थ कोरिया की जरूरत है (फोटो: रॉयटर्स)

एक मिनट में हिस्ट्री जानें
कोरियन युद्ध खत्म हुआ. मगर नॉर्थ और साउथ कोरिया दुश्मन बने रहे. नॉर्थ ने परमाणु हथियार बनाने शुरू किए. अमेरिका उसको धमकी देता रहा. उसके ऊपर प्रतिबंध लगाता रहा. इसके जवाब में नॉर्थ कोरिया आएदिन न्यूक्लियर टेस्ट करता रहा. ये सब चल रहा था कि ट्रंप आ गए. फिर धमकियां ट्विटर पर दी जाने लगीं. आए दिन वो नॉर्थ कोरिया को धमकी देते. कि अमेरिका को गुस्सा आया, तो नॉर्थ कोरिया का नामो-निशान मिट जाएगा. नॉर्थ कोरिया के किम जोंग-उन उनको धमकी देते. कि अमेरिका उनकी मिसाइलों के ठिकाने पर है. इस तनातनी में साउथ कोरिया और जापान की सांसें थमी थीं. क्योंकि वो मानचित्र पर नॉर्थ कोरिया के सबसे करीब हैं. तानाशाह के किसी पागलपन का सबसे पहला असर उनके ऊपर ही होता. और ये दोनों देश लड़ने के मूड में नहीं थे. धमकाते-धमकाते समझौते की राह बनी. हां-ना के बीच सिंगापुर में किम और ट्रंप मिले. और इस तरह इतिहास बना.

ये अप्रैल 2018 की फोटो है. जब किम जोंग-उन साउथ कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन से मिले. दोनों देशों की सीमा के पास एक ऐसी जगह में, जहां सेनाएं तैनात नहीं हैं. इस मुलाकात के बाद उम्मीद जगी. कि चीजें बेहतरी की राह पर हैं (फोटो: रॉयटर्स)
ये अप्रैल 2018 की फोटो है. जब किम जोंग-उन साउथ कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन से मिले. दोनों देशों की सीमा के पास एक ऐसी जगह में, जहां सेनाएं तैनात नहीं हैं. इस मुलाकात के बाद उम्मीद जगी. कि चीजें बेहतरी की राह पर हैं (फोटो: रॉयटर्स)

इस मुलाकात में अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच जो खास बातें हुईं, वो पॉइंट में जान लीजिए-

नॉर्थ कोरिया को क्या फायदा हुआ-

1. अमेरिका ने ज्यादा दिया. उत्तर कोरिया फायदे में रहा.
2. अमेरिका ने वादा किया. कि कोरियन युद्ध अब जल्द खत्म हो जाएगा. वो युद्ध जो 1950 से 1953 तक चला. लड़ाई मैदान पर खत्म हुई. मगर वैसे कभी खत्म नहीं हुई. दोनों तरफ से बंदूक तने रहे.
3. ट्रंप ने दिल खोलकर किम की तारीफ की (खुद की भी की, हमेशा की तरह).
4. अमेरिका दुनिया का नंबर वन है. उत्तर कोरिया छोटा सा. किम की सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही कि वो कूटनीति के स्तर पर भी ट्रंप की बराबरी में थे. मतलब, एकदम बराबर. अब वो तस्वीर याद कीजिए. अभी कनाडा में हुए जी-7 समिट की. जिसमें ट्रंप बैठे थे और मर्केल उनके सामने खड़ी थीं. ट्रंप उन सब देशों के साथ अकड़ दिखा रहे हैं. यूरोप-चीन, सबसे भिड़े हुए हैं. मानो अमेरिका को किसी की नहीं पड़ी. बाकी सबको गरज हो, तो अमेरिका की माने. वरना अपना-अपना देख ले. ऐसे में नॉर्थ कोरिया चाहे, तो इस बराबरी वाले ट्रीटमेंट पर फूल कर कुप्पा हो सकता है.
5. अमेरिका ने वादा किया. कि वो साउथ कोरिया के साथ मिलकर उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी आक्रामकता खत्म करेगा. मतलब, नो वॉर. दोनों देश जो साथ मिलकर नॉर्थ कोरिया को धमकाने के लिए जो सैन्य अभ्यास करते हैं, वो भी नहीं होगा अब.

किम और ट्रंप की मीटिंग का हाल ये था, मानो शाहरुख खान हाथ में गुलाब लेकर छज्जे पर चल रहे हों. एक-एक पंखुड़ी लेकर कयास लगाते हुए. सी लव्स मी, सी लव्स मी नॉट. ऐसा बोलते हुए. बहुत ऑन-ऑफ की स्थिति थी (फोटो: रॉयटर्स)
किम और ट्रंप की मीटिंग का हाल ये था, मानो शाहरुख खान हाथ में गुलाब लेकर छज्जे पर चल रहे हों. एक-एक पंखुड़ी लेकर कयास लगाते हुए. सी लव्स मी, सी लव्स मी नॉट. ऐसा बोलते हुए. बहुत ऑन-ऑफ की स्थिति थी (फोटो: रॉयटर्स)

अमेरिका को क्या मिला?

1. नॉर्थ कोरिया (माने किम जोंग उन) ने वादा किया. कि वो बात करना जारी रखेगा. डिप्लोमसी में बातचीत बड़ी चीज होती है. कुछ हो न हो, अलग चीज है. बात होती रहे, तो आस बंधी रहती है. कि चलो, कुछ और नहीं तो कम से कम ये तो हो ही रहा है.
2. वादा. कि नॉर्थ कोरिया अपने परमाणु हथियारों का जखीरा खत्म कर देगा. धीरे-धीरे. कई चरणों में.
3. अमेरिका को चैन भी मिला है. कि हाल-फिलहाल उत्तर कोरिया से कोई न्यूक्लियर टेस्ट या मिसाइल लॉन्चिंग की खबर तो नहीं ही आएगी.

ये मेरी पसंदीदा फोटो है. ट्रंप की पीठ पर किम का हाथ. इस तस्वीर में ट्रंप की वो सुपीरियॉरिटी नहीं है, जिसको उन्होंने अपना ट्रेडमार्क स्टाइल बनाया हुआ है. वो हावी नहीं हैं साथ वाले पर. बल्कि साथ वाला ज्यादा सहूलियत में है (फोटो: रॉयटर्स)
ये मेरी पसंदीदा फोटो है. ट्रंप की पीठ पर किम का हाथ. इस तस्वीर में ट्रंप की वो सुपीरियॉरिटी, वो आक्रामकता नहीं है, जिसे उन्होंने अपना ट्रेडमार्क स्टाइल बनाया हुआ है. वो हावी नहीं हैं साथ वाले पर. बल्कि साथ वाला ज्यादा सहूलियत में है (फोटो: रॉयटर्स)

ऐतिहासिक यही है कि शुरुआत हुई
ले-देकर इतना ही हुआ है. बुनियादी बात यही है. इसी पर दुनियाभर के अखबार पन्ने पर पन्ने खपा रहे हैं. अंग्रेजी में कहावत है- ब्रेकिंग द आईस. वो ही हुआ इस समिट में. उत्तर कोरिया और अमेरिका एक साथ बैठे. बात की. कई बातों पर राजी हुए. आगे चीजें बेहतर हों, इसका रास्ता यहीं से शुरू होना था. शुरू हो गया. अभी रास्ता चलना बाकी है. जो ऐतिहासिक है, वो यही शुरुआत है. उम्मीद है कि दोनों पक्ष अपने-अपने वादे पर गंभीर रहेंगे. वादा निभाने में जुटे रहेंगे. उम्मीद ये भी है कि ट्रंप को मूड स्विंग नहीं होगा. और वो ट्विटर पर धमकियां देते नहीं मिलेंगे. उम्मीद है कि किम को समझ आएगा. कि उनके देश की, उनके लोगों की बेहतरी जंग लड़ने और परमाणु हथियार बनाने में नहीं है. न ही अलग-थलग रहकर मिस्ट्री आइलैंड बने रहना उनके फायदे में है. उन्हें कारोबार चाहिए. निवेश चाहिए. उन्हें चाहिए कि उनके ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंध खत्म हों. और इस सबके लिए उन्हें थोड़ी समझदारी दिखानी होगी. सहयोग करना होगा. बचा साउथ कोरिया. तो इस त्रिकोण में बस वही है, जो सबसे ज्यादा शांति चाह रहा है. पूरी सिंसियेरिटी से. ईमानदारी से.

नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की टीम का एक शख्स दस्ताने पहनकर पेन साफ करता हुआ. समझौते पर दस्तखत के लिए ट्रंप के पास एक चमचमाती कलम थी. इसके ऊपर उनके खुद का सिग्नेचर मार्क था. ऐसा ही एक पेन किम की ओर भी बढ़ाया गया. लेकिन उन्होंने वो लिया नहीं. किम की टीम ने किम को अलग पेन दिया. साफ करके. जांच-परखकर. मतलब किम सिंगापुर आ तो गए थे, लेकिन अपना वो रोलां भी साथ लाए थे (फोटो: रॉयटर्स)
नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की टीम का एक शख्स दस्ताने पहनकर पेन साफ करता हुआ. समझौते पर दस्तखत के लिए ट्रंप के पास एक चमचमाती कलम थी. इसके ऊपर उनके खुद का सिग्नेचर मार्क था. ऐसा ही एक पेन किम की ओर भी बढ़ाया गया. मगर किम की टीम ने किम को अलग पेन दिया. साफ करके. जांच-परखकर. मतलब किम सिंगापुर आ तो गए थे, लेकिन अपना वो मशहूर मिस्ट्री स्टाइल भी साथ लाए थे (फोटो: रॉयटर्स)

जाते-जाते थोड़ा हंस लीजिए
इस मीटिंग के लिए वाइट हाउस ने एक खास ट्रेलर बनाया. ड्रामे से भरा. इसमें लड़ाई की फुटेज भी थी. लड़ाकू विमान भी थे. ये दिखाने के लिए कि अगर बातचीत कामयाब नहीं होती है, तो जंग होगी. कि नॉर्थ कोरिया अपनी जिद की वजह से कितना पिछड़ा और गरीब है. बहुत फनी बन पड़ा है ये विडियो. देखकर हंसी आती है. कि ये क्या बेतुकी और बचकानी चीज बनाई है. इसका लॉजिक क्या है? इसका वॉइसओवर कुछ यूं था-

डेस्टनी पिक्चर्स पेश करते हैं अवसरों की एक कहानी. नई कहानी. नई शुरुआत. शांति और अमन की शुरुआत. दो लोग, दो लीडर्स और एक किस्मत.

ये शुरुआती फुटेज है विडियो का. किसी घाटी से शुरू होता हुआ. डेस्टनी पिक्चर्स ऐसे लिखा है कि 'नीरजा गुलेरी प्रेजेंट्स' याद आ जाता है (फोटो: यूट्यूब)
ये शुरुआती फुटेज है विडियो का. किसी घाटी से शुरू होता हुआ. डेस्टनी पिक्चर्स ऐसे लिखा है कि ‘नीरजा गुलेरी प्रेजेंट्स’ याद आ जाता है (फोटो: यूट्यूब)

बड़ी स्क्रीन नहीं थी, तो ट्रंप ने आईपैड पर विडियो दिखाया
डेस्टनी पिक्चर्स नाम का एक प्रॉडक्शन हाउस है. लेकिन लगता नहीं कि उसने ये फिल्म बनाई है. विडियो के दाहिने कोने पर ‘वाइट हाउस गवर्नमेंट’ लिखा हुआ था. इसमें कई जगह ट्रंप भाषण दे रहे थे. किम अलग हाथ हिला रहे थे. मिसाइल लॉन्च का फुटेज भी था, लेकिन रिवर्स में. मिसाइल दग नहीं रहा था, वापस जमीन पर लौट रहा था. ये दिखाने के लिए बातचीत कामयाब रही, तो नॉर्थ कोरिया न्यूक्लियर टेस्ट नहीं करेगा. मिसाइल लॉन्च नहीं करेगा. सवाल था- क्या ये लीडर अपने देश को तरक्की पर ले जाने का विकल्प चुनेगा? समृद्धि चुनेगा कि अलग-थलग होना चुनेगा? ये लीडर से मतलब किम जोंग उन. विडियो में दिखाया गया था कि अमेरिका और साउथ कोरिया कितने आगे बढ़ चुके हैं. जबकि नॉर्थ कोरिया एकदम बदहाल है. वहां दुकानों में सामान नहीं है.  ट्रंप ने वहां आए पत्रकारों को भी ये विडियो दिखाया. गर्व से तने वो बोले-

हमने बनाया है इसको. उम्मीद है कि पसंद आएगा. मुझे तो ये अच्छा लगा. मीटिंग के आखिर में मैंने ये किम को भी दिखाया. मुझे लगता है कि उनको भी बहुत पसंद आया. वहां मीटिंग में हमारे पास बड़ी स्क्रीन नहीं थी. सो मैंने अपने आईपैड पर भी दिखा दिया उनको.

ये कमाल का सीन है. फोटो में आगे-आगे दौड़ रहे उस घोड़े को देखिए. उसके शरीर से मानो कोई दिव्य सी रोशनी निकल रही है. अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा अगर होता होगा, तो शायद ऐसा ही होता होगा. शायद ये दिव्य घोड़ा सिंबॉलिक है. ट्रंप को दिखाने की कोशिश की गई है. जो शांति पथ पर दौड़ रहे हैं. कितना ऐप्ट होता कि ये घोड़ा दौड़ता और अगले सीन में नोबल प्राइज सेरमनी के सेट पर पहुंच जाता (फोटो: यूट्यूब)
ये कमाल का सीन है. फोटो में आगे-आगे दौड़ रहे उस घोड़े को देखिए. उसके शरीर से मानो कोई दिव्य सी रोशनी निकल रही है. बाकी घोड़े पीछे-पीछे निस्तेज से दौड़ रहे हैं. अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा अगर होता होगा, तो ऐसा ही होता होगा. शायद ये दिव्य घोड़ा सिंबॉलिक है. ट्रंप को दिखाने की कोशिश की गई है. जो शांति पथ पर दौड़ रहे हैं. कितना ऐप्ट होता कि ये घोड़ा दौड़ता और अगले सीन में नोबल प्राइज सेरमनी के सेट पर पहुंच जाता. असली फन वो होता (फोटो: यूट्यूब)

टिपिकल ट्रंप ‘टाइप’ आत्ममुग्ध विडियो है
ये विडियो देखिएगा, तो आपको बुरी क्वॉलिटी के किसी प्रोपगेंडा विडियो देखने वाली फीलिंग आएगी. किम अपने यहां ऐसे कई प्रोपगेंडा विडियो बनाते हैं. अपने लोगों को ये यकीन दिलाने के लिए वो कितने ताकतवर हैं. कि दुनिया के बाकी देश उनसे कितना डरते हैं. कि उनकी कितनी चलती है. कि अगर वो न हों, तो नॉर्थ कोरिया मिनटों में तबाह कर दिया जाएगा. उसी तर्ज पर वाइट हाउस ने एक किस्म से उनको धमकाने के लिए ये विडियो बनवाया. हमें यकीन है कि ये ट्रंप के ही दिमाग की उपज होगी. आपको अगर विडियो देखने का दिल करे, तो नीचे देख लीजिए.


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