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श्रिया सरन की कमाल कहानी, जब लोगों ने अपनी ओछी सोच के चलते माफ़ी मांगने पर मजबूर किया

श्रिया सरन. वो एक्ट्रेस जिन्होंने शुरुआत की तेलुगु सिनेमा से. वहां की बड़ी एक्ट्रेस बनीं. फिर तमिल फिल्मों में हाथ आज़माया. वहां के टॉप एक्टर्स के साथ काम किया. और अपनी अलग पहचान बनाई. वो एक्ट्रेस जिन्हें हिन्दी भाषी ऑडियंस भी भली-भांति पहचानती है. वो एक्ट्रेस जिन्हें नॉर्थ और साउथ का गैप कम करने वाली एक्ट्रेस कहा जाता है. तेलुगु, तमिल, हिन्दी, अंग्रेजी और मलयालम में 80 से ज्यादा फिल्में करने वाली श्रिया की लाइफ और करियर से जुड़ी कुछ बातें आपके साथ साझा करेंगे.

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# बेटी के प्यार के लिए मां-बाप अपना घर पीछे छोड़ आए

11 सितंबर 1982 को हरिद्वार की एक मिडल क्लास फैमिली में श्रिया का जन्म हुआ. श्रिया की शुरुआती पढ़ाई रानीपुर के डीपीएस में हुई. जहां उनकी मां केमिस्ट्री पढ़ाती थीं. उनके पिता BHEL में काम करते थे. श्रिया के करियर को शेप अप करने में उनके दोनों पेरेंट्स का बराबर हाथ था. दरअसल, पिता की वजह से ही उन्हें अपनी पहली फिल्म देखने का मौका मिला. BHEL के कम्पाउंड में झनकार नाम का ओपन एयर थिएटर था. जहां श्रिया ने अपनी लाइफ की पहली फिल्म देखी. हालांकि, उस समय उन्हें एक्टिंग के कीड़े ने नहीं काटा था. उस समय श्रिया को मतलब था तो सिर्फ डांस से. वो भी कथक से. उनकी इच्छा थी पद्म श्री शोवना नारायण से कथक सीखने की. लेकिन यहां एक समस्या थी.

Shriya Saran Childhood
श्रिया के स्कूल टाइम की फोटो.

श्रिया उन दिनों हरिद्वार में रहती थीं. और शोवना दिल्ली में कथक सिखाती थीं. इतनी छोटी बच्ची को अकेले दिल्ली भेजना भी संभव नहीं था. लेकिन बच्ची का दिल भी कथक में बस रहा था. यहां पर मां ने एक फैसला लिया, जो दूरदर्शी साबित हुआ. अपनी बच्ची को अपने साथ लेकर दिल्ली आ गईं. शोवना नारायण से मुलाकात की. उन्होंने 14 साल की श्रिया को डांस सिखाने के लिए हामी भर दी. उनकी मां ने रानीपुर की डीपीएस छोड़कर डीपीएस, मथुरा रोड जॉइन कर लिया. श्रिया भी उसी स्कूल में पढ़ने लगीं. दोनों मां-बेटी टीचर्स कम्पार्टमेंट में रहने लगीं. मां पहले अपनी स्कूल की ड्यूटी से फ्री होतीं. उसके बाद बेटी को पंडारा रोड लेकर जाती. उसकी डांस क्लास के लिए. श्रिया लगातार अपने डांस पर काम कर रही थीं. कुछ समय बाद ही उनके पिता भी ट्रांसफर लेकर दिल्ली आ गए.


# बनारस की गलियों का गाना, जो साउथ तक पहुंच गया

श्रिया की स्कूली पढ़ाई पूरी होने को आई. जिसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज में दाखिला ले लिया. श्रिया पढ़ाई में भले ही अव्वल थीं. लेकिन कथक को लेकर अभी भी बचपन जैसा नादानी भरा प्यार था. वो अपनी शोवना दीदी के डांस ग्रुप के साथ देशभर में ट्रैवल करतीं. डांस के अलावा उनकी कोई और रुचि नहीं थी. शोवना नारायण भी श्रिया के कथक प्रेम से पूरी तरह अवगत थीं. इसलिए जब उनके पास एक म्यूज़िक वीडियो के लिए एक्ट्रेस-कम-डांसर की रिक्वायरमेंट आई, तो उन्होंने सबसे पहले श्रिया का नाम सुझाया. श्रिया ने उनकी बात मानकर ऑडिशन दिया. और सिलेक्ट हो गईं.

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शोवना नारायण ने म्यूज़िक वीडियो के लिए श्रिया का नाम रिकमेंड किया.

रेणु नाथन नाम की सिंगर अपना डेब्यू एलबम ‘ये याराना’ लॉन्च करने जा रही थीं. उस एलबम के गाने ‘थिरकती क्यों हवा’ के लिए श्रिया को सिलेक्ट किया गया था. वीडियो बनारस में शूट हुआ. जहां आप श्रिया को गलियों और घाट पर दौड़ते देख सकते हैं. ‘इंडियन ओशन’ वाले अमित किलम ने गाने के लिए म्यूज़िक दिया. और वीडियो डायरेक्ट करने की ज़िम्मेदारी ली शिवम नायर ने. जिन्होंने आगे चलकर ‘आहिस्ता आहिस्ता’ और ‘नाम शबाना’ जैसी फिल्में भी डायरेक्ट की थीं. श्रिया का ये हिंदी भाषी गाना भले ही नॉर्थ में शूट हुआ. लेकिन इसकी किस्मत थी दूर टक ट्रैवल करने की. वो दौर सोशल मीडिया का दौर नहीं था. कि देश के एक हिस्से से वायरल हुआ कंटेंट पूरे देश में घूम रहा है. फिर भी श्रिया का गाना बड़ी दूर तक जा पहुंचा. बनारस से करीब 1200 किलोमीटर दूर हैदराबाद तक. प्रड्यूसर रामोजी राव अपनी नई आगामी तेलुगु फिल्म के लिए नया चेहरा ढूंढ रहे थे. श्रिया का म्यूज़िक वीडियो देखने के बाद उनकी तलाश पर फुल स्टॉप लग गया. श्रिया को हैदराबाद बुलाया गया. प्रोजेक्ट पर ब्रीफ किया गया. एक्टिंग में करियर न तलाशने वाली श्रिया ने फिल्म को हां कर दी. ये तेलुगु फिल्म थी 2001 में आई ‘इश्तम’. फिल्म ने श्रिया के फिल्मी करियर के लिए कोई करिश्मा नहीं किया. न ही उनकी एक्टिंग को यहां सराहा गया. इसकी वजह थी कि उस वक्त श्रिया को बिल्कुल भी एक्टिंग नहीं आती थी. जैसा डायरेक्टर कहता, वो ठीक वैसा ही कर देतीं. काम खत्म.

Shriya In Thirakti Kyun Hawa 1
‘थिरकती क्यों हवा’ के एक शॉट में श्रिया.

‘इश्तम’ के बाद आई उनकी अगली फिल्म ने भरोसा बांधा. कि वो एक सफल फिल्मी करियर की महत्वाकांक्षा रख सकती हैं. फिल्म थी नागार्जुन स्टारर ‘संतोष्म’. फिल्म ने ‘बाजे फाड़ दिए गुरु’ टाइप बिज़नेस किया. क्रिटिक्स ने अपने कॉलम्स में श्रिया के काम की तारीफ़ें की. ‘संतोषम’ने श्रिया को तेलुगु ऑडियंस के बीच एक हाउसहोल्ड नेम बना दिया. उनके करियर के लिए गेम चेंजर साबित हुई. ‘संतोषम’के बाद श्रिया तेलुगु इंडस्ट्री में अपने पांव जमाती चली गईं. उन्होंने चिरंजीवी के साथ ‘टैगोर’, प्रभास के साथ ‘छत्रपति’ और नागार्जुन के साथ ‘नेनुनानू’ जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया.


# हीरो को आई लव यू बोलना था और हंसने लगीं

श्रिया हिंदी भाषी बेल्ट से ताल्लुक रखती हैं. हिंदी और अंग्रेजी के अलावा उनकी किसी दूसरी भाषा पर मजबूत पकड़ नहीं थी. फिर भी उनका डेब्यू तेलुगु फिल्म से हुआ. यहां किस्मत कनेक्शन वाला सीन था. वो किस्मत ही थी जिसने श्रिया की मर्ज़ी नहीं चलने दी. वरना उनकी पहली फिल्म एक हिंदी फिल्म होती. दरअसल, श्रिया ने अपने कॉलेज के दिनों में एक हिंदी फिल्म के लिए ऑडिशन दिया था. जिसे डायरेक्ट कर रहे थे गौतम वासुदेव मेनन. उस फिल्म के ज़रिए आर माधवन हिंदी सिनेमा में अपना पहला कदम रखने जा रहे थे. श्रिया ऑडिशन देने पहुंचीं. उनके सामने थे माधवन. श्रिया को एक सीन दे दिया गया. जहां उन्हें मैडी की आंखों में देखकर उन्हें आई लव यू बोलना था. श्रिया ने इसके बाद इतिहास के सबसे अनरोमांटिक ‘आई लव यू’ की झड़ी लगा दी. डायलॉग खत्म होने से पहले उनकी हंसी फूट पड़ती. और ऐसा एक नहीं, अनेकों बार हुआ. मैडी ने उन्हें समझाने की कोशिश की. लेकिन श्रिया की हंसी रुकने का नाम न ले. सरप्राइज़ की बात नहीं थी लेकिन वो रोल उन्हें नहीं मिला. मैडी के साथ लीड में फाइनल हुईं दिया मिर्ज़ा. वो फिल्म थी ‘रहना है तेरे दिल में’.

Muslim Girl
‘आवरापन’ में इमरान हाशमी और श्रिया सरन.

श्रिया के हिंदी फिल्म डेब्यू की इच्छा भले ही ‘रहना है तेरे दिल में’ से पूरी नहीं हो पाई. लेकिन ये इच्छा पूरी हुई ज़रूर. वो भी ‘रहना है’ के दो साल बाद. फिल्म थी 2003 में आई ‘तुझे मेरी कसम’. रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूज़ा स्टारर फिल्म में श्रिया ने सपोर्टिंग किरदार निभाया. बहुतायत में लोग मानते हैं कि बतौर लीड, श्रिया की पहली हिंदी फिल्म थी ‘आवारापन’. वो फिल्म जिसके गाने दिल में उतर जाते हैं. लेकिन ये सच नहीं है. हालांकि, इंटरनेट पर अनेकों जगह यही लिखा है कि इमरान हाशमी स्टारर ‘आवारापन’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में बतौर लीड एक नई शुरुआत की. 2004 में ही वो बतौर लीड एक हिंदी फिल्म में फीचर कर चुकी थी. फिल्म थी ‘थोड़ा तुम बदलो थोड़ा हम’. किसी भी लिहाज़ से ये फिल्म यादगार साबित नहीं हुई. ये भी एक वजह है कि ज्यादातर लोगों ने फिल्म का नाम तक नहीं सुना.

उनके करियर की सबसे मेमोरेबल हिंदी फिल्म ‘आवारापन’ ही रही. जहां श्रिया ने एक मुस्लिम लड़की का किरदार निभाया. अपने किरदार की जुबां समझने के लिए उन्होंने उर्दू भी सीखी. क्रिटिक्स ने भी रिलीज़ के बाद उनकी परफॉरमेंस की तारीफ की. श्रिया ने ‘आवारापन’ के बाद ‘मिशन इस्तान्बुल’ साइन की. जहां उन्होंने जर्नलिस्ट का रोल निभाया. श्रिया ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म में उनका किरदार बरखा दत्त से प्रेरित था. ‘मिशन इस्तान्बुल’ को ठंडा रिस्पॉन्स मिला. ऐसा ही हाल उनकी ‘एक: द पावर ऑफ वन’ और ‘गली गली चोर है’ का भी हुआ. श्रिया चाहती थीं कि उन्हें एक इंडियन स्टार के तौर पर पहचाना जाए. इसलिए तेलुगु और तमिल सिनेमा में सफल करियर होने के बावजूद वो ऐसा ही मैजिक हिंदी सिनेमा में भी रीक्रिएट करना चाहती थीं. लेकिन ‘आवारापन’ के बाद कोई भी हिंदी फिल्म उनकी ये हसरत पूरी नहीं कर पाई. सिर्फ 2015 तक. उस साल आई ‘दृश्यम’ एक बड़ी हिट साबित हुई. फिल्म में श्रिया ने अजय देवगन की पत्नी का किरदार निभाया था.


# जब लोगों ने अपनी ओछी सोच के लिए श्रिया के कान पकड़वा दिए

श्रिया एक इंडियन स्टार के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थीं. इसलिए तेलुगु इंडस्ट्री में डेब्यू के कुछ समय बाद ही उन्होंने तमिल सिनेमा का रुख लिया. 2003 में आई ‘एनक्कु 20 उनक्कु 18’ उनकी पहली तमिल फिल्म बनी. लेकिन दुर्भाग्यवश कोई भी मार्क छोड़ने में नाकाम रही. ठीक एक साल बाद श्रिया ने फिर तमिल सिनेमा में कमबैक करने की कोशिश की. फिल्म ‘मलै’ के ज़रिए. लेकिन यहां फिल्म और उनकी परफॉरमेंस के हिस्से कोई पॉज़िटिव रिस्पॉन्स नहीं आया. ‘मलै’ भले ही कर के भूलने लायक फिल्म रही हो. लेकिन इसकी वजह से श्रिया को अपने करियर की सबसे बड़ी फिल्म मिली. वो फिल्म जिसने उन्हें नैशनल स्टार बना दिया.

‘नायक’ और ‘इंडियन’ जैसी फिल्में बना चुके शंकर अपने नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे. जिसके लिए उन्होंने रजनीकांत को पहले ही साइन कर लिया था. ज़रूरत थी तो बस फिल्म की लीडिंग लेडी की. तलाश जारी थी. तभी उन दिनों शंकर ने ‘मलै’ देख डाली. श्रिया के काम ने उन्हें प्रभावित किया. इतना कि एक दिन उन्होंने फोन उठाकर श्रिया को कॉल कर डाला. कहा कि मैंने तुम्हारी फिल्म देखी. जहां मुझे तुम्हारी परफॉरमेंस और लुक ने काफी इम्प्रेस किया. अगली लाइन एक सवाल था. कि क्या तुम रजनीकांत की हीरोइन बनना चाहोगी. श्रिया के लिए सपने जैसी प्रतीत ये वास्तविकता बदलती, उससे पहले ही उन्होंने हां बोल दिया. श्रिया चेन्नई पहुंची. उन्होंने शंकर से मुलाकात की. शंकर उनके काम से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने किसी मेक अप या स्क्रीन टेस्ट तक की ज़रूरत नहीं समझी. बस अपने रोल की तैयारी के लिए उनके हाथ में रजनीकांत की कुछ फिल्में थमा दीं.

Rajnikant And Shriya
‘शिवाजी: द बॉस’ का वो सीन जहां श्रिया का किरदार रंग भेद पर रजनीकांत के किरदार को शादी के लिए टालता रहता है.

रजनीकांत और श्रिया स्टारर ये फिल्म थी ‘शिवाजी: द बॉस’. जिसे सिर्फ तमिल जनता ने ही नहीं. बल्कि हिंदी ऑडियंस ने भी खूब पसंद किया. अब तक ये फिल्म टीवी पर आती रहती है. ‘शिवाजी’ रिलीज़ होने के बाद श्रिया की पहचान सिर्फ रजनीकांत की हीरोइन होने तक ही सीमित नहीं रही. क्रिटिक्स ने भी उनके काम को सराहा. लिखा कि फिल्म के ज़रिए श्रिया ने साबित कर दिया कि वो एक्टिंग कर सकती हैं. जिस एक्ट्रेस को अब तक सिर्फ ग्लैमर अपील बढ़ाने के लिए देखा जा रहा था. उसके लिए ये एक बड़ा कॉम्प्लिमेंट ही था. ‘शिवाजी’ उनके लिए दो वजहों से यादगार फिल्म रही. पहली हमने आपको बता दी. और दूसरी नॉट सो गुड टाइप मेमरी है.

हुआ यूं कि ‘शिवाजी’ बॉक्स ऑफिस पर भौकाल काट रही थी. तगड़ा बिज़नेस कर रही थी. टीम ने 11 जनवरी, 2008 को फिल्म की सिल्वर जुबिली मार्क करने के लिए एक फंक्शन ऑर्गनाइज़ किया. जहां उस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे एम करुणानिधि को भी इंवाइट किया गया. रजनीकांत पहले से ही मंच पर मौजूद थे. श्रिया भी पहुंची. लेकिन उन्हें क्या पता था कि फंक्शन अटेंड करना उनके लिए भयावह मेमरी बन जाएगी. फंक्शन अटेंड करने के कुछ समय बाद ही श्रिया को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. लोगों ने उनकी ड्रेस को इसकी वजह बताया. पॉइंट टू बी नोटेड, अपनी सोच या नज़र को नहीं. बल्कि उनकी ड्रेस को. कहने लगे कि श्रिया ने जानबूझकर हिंदू संस्कृति को आहत किया है.

Shriya Saran Dress Controversy
‘देखने वालों की नज़र में नहीं, बल्कि श्रिया की ड्रेस में खोट था.’ क्या मूर्खता.

श्रिया स्लिप ऑन फ्लेयर ड्रेस पहनकर पहुंची थीं. जिसपर हिंदू मक्कल कतची नाम की संस्था ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. मामला हद से आगे बढ़ता देख श्रिया को माफी मांगनी पड़ी. ऐसी गलती के लिए, जो उनकी थी भी नहीं. उन्होंने कहा कि वो एक हिंदी फिल्म की शूटिंग कर रही थीं. और सीधा उसके सेट से ही फंक्शन पर पहुंची थीं. तमिल और हिंदू भावनाओं को आहत करने का उनका कोई इरादा नहीं था. पैट्रीयार्की वन, श्रिया सरन ज़ीरो.

नॉर्थ इंडियन बंधु इस वाकये पर ये न सोचें कि ऐसा सिर्फ साउथ में ही होता है. हम तो बड़ी विकसित मानसिकता वाले लोग हैं. ऐसा है तो प्रियंका चोपड़ा वाला इंसीडेंट याद कर लीजिए. जब वो प्रधानमंत्री मोदी से मिलने पहुंची थीं. उन्होंने नी लेंथ ड्रेस पहनी थीं. जिसपर जनता ने हो हल्ला मचा दिया. कि हाय राम, घुटने दिख गए. टांगें दिख गईं. किसी ने भी खुद की नज़र को कसूरवार ठहराना ज़रूरी नहीं समझा.


# थोड़ा सिनेमा अपने लिए, बाकी दुनिया का रहा

हम आपको बता चुके हैं कि श्रिया अब तक पांच भाषाओं में 80 के करीब फिल्में कर चुकी हैं. उनकी फिल्मोग्राफी में क्रिटिकली अकलेम्ड सिनेमा से लेकर फुल ऑन मास फिल्म्स भी शामिल हैं. अच्छे सिनेमा और प्योर एंटरटेनमेंट के पैमाने पर उनकी कौन-सी फिल्में खरी उतरती हैं, उन्हीं के बारे में जानेंगे.

#1. मिडनाइट्स चिल्ड्रन

कुछ फिल्में होती हैं जो एक्टर्स अपनी ऑडियंस के लिए करते हैं. अपने फैन बेस को खुश रखने के लिए. कुछ होती हैं जो फिल्म इंडस्ट्री में रिश्ते बनाए रखने के लिए की जाती हैं. फिर आती हैं वो चंद, मुट्ठीभर फिल्में जिन्हें हर एक्टर सिर्फ अपने लिए करता है. अपनी कला को निखारने के स्वार्थ के चलते. श्रिया के लिए ‘Midnight’s Children’ ऐसी ही फिल्म थी. दीपा मेहता के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म सलमान रश्दी के इसी नाम से लिखे नॉवल पर आधारित थी. श्रिया और दीपा इससे पहले ‘कुकिंग विद स्टेला’ पर भी काम कर चुके थे. ‘Midnight’s Children’ में श्रिया ने एक झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली लड़की का किरदार निभाया. श्रिया स्लम वाली ज़िंदगी से कनेक्ट नहीं कर पा रही थीं. इसलिए दीपा की सलाह पर उन्होंने दो महीनों तक मुंबई के स्लम्स में काम किया. वहां की दुनिया को समझने के लिए.

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फिल्म में श्रिया की परफॉरमेंस को उनके करियर की बेस्ट परफॉरमेंसेस में से एक माना जाता है.

#2. कंतास्वामी

श्रिया के करियर के पोस्ट-शिवाजी फेज़ का हिस्सा है ‘कंतास्वामी’. सिनेमा के लिहाज़ से ये कोई महान फिल्म नहीं थी. एंटरटेनमेंट के लिए बनी फिल्म थी. जहां श्रिया के साथ थे विक्रम. तमिल सिनेमा के दिग्गज. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक सक्सेस साबित हुई. सिर्फ इतना ही नहीं, इस हीरो सेंट्रिक फिल्म में श्रिया के हिस्से भी फेवरेट हीरोइन का विजय अवॉर्ड और बेस्ट एक्ट्रेस का अमृता मातृभूमि अवॉर्ड आया.

Glamour Appeal
उनकी अधिकतर फिल्मों की तरह यहां भी उन्हें ग्लैमर अपील के लिए रखा गया.

‘कंतास्वामी’ भले ही श्रिया के करियर की बड़े बजट वाली फिल्मों में शामिल है. लेकिन कहना गलत नहीं होगा कि यहां उनका रोल ग्लैमर अपील बढ़ाने के लिए ही रखा गया था.


#3. मनम

श्रिया से जब भी सवाल किया गया कि वो फिल्म इंडस्ट्री में किसे अपना सबसे करीबी दोस्त मानती हैं. तो उन्होंने हर बार एक ही जवाब दिया. नागार्जुन. वो नागार्जुन ही थे जिनकी फिल्म ‘संतोषम’से श्रिया को अपने करियर का पहला बड़ा ब्रेक मिला था. अब ‘मनम’ में वो एक बार फिर नागार्जुन के साथ स्क्रीन शेयर करने जा रही थीं. और सिर्फ नागार्जुन के साथ ही नहीं. बल्कि, अक्किनेनी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ. अक्किनेनी नागेश्वर राव, नागार्जुन और चैतन्या. तेलुगु सिनेमा के लिए भी ये एक बड़ी फिल्म थी. इतनी समृद्ध फिल्म फैमिली के तीन सदस्य जो पहली बार एक साथ आ रहे थे.

Shriya And Nagarjun
‘संतोषम’ के बाद श्रिया और नागार्जुन की जोड़ी फिर लौटी.

रिलीज़ के बाद फिल्म कमर्शियल और क्रिटिकल सक्सेस के बीच का बैलेंस साधने में कामयाब रही. लंबी चौड़ी स्टार कास्ट होने के बावजूद श्रिया का काम नोटिस में आया. और सिर्फ नोटिस में ही नहीं, बल्कि उनके हिस्से पॉज़िटिव रिस्पॉन्स आया.


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