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'शिकारा' के ट्रेलर की 6 बातें: मूवी 30 साल पहले हुए लाखों कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को दिखाएगी

‘शिकारा- दी अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ कश्मीरी पंडित्स’. शॉर्ट में सिर्फ ‘शिकारा’. विधु विनोद चोपड़ा की अपकमिंग मूवी. इसका ट्रेलर छह जनवरी, 2020 को रिलीज़ हुआ है. इससे पहले 19 दिसंबर, 2019 को फिल्म का ऑफिशियल मोशन पोस्टर रिलीज़ किया गया. फिल्म सात फरवरी, 2020 को रिलीज़ होगी. फिल्म किस बारे में है, इसका थोड़ा बहुत अंदाज़ा तो ट्रेलर के डिस्क्रिप्शन से ही हो जाता है. साथ ही ट्रेलर भी हमें मूवी के प्लॉट की झलकी दे देता है. आइए ट्रेलर की थोड़ी चीर-फाड़ करके ‘शिकारा’ के बारे में और कुछ जानने की कोशिश की जाए.

# कहानी-

अपने ही देश में शरणार्थी होने की पीड़ा क्या होती है? साल 1990 ने स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा मजबूरन किया गया विस्थापन देखा. इसमें 4,00,000 से अधिक कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी छोड़कर भागना पड़ा. लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी, उनमें से ज्यादातर लौटने में नाकाम रहे हैं. ‘शिकारा’, दुर्गम बाधाओं से उबरने की कहानी है. ये एक ऐसी प्रेम की कहानी भी है, जिस प्रेम की आग 30 बरस के निर्वासन के दौरान भी बुझ नहीं पाई. सबसे बुरे ‘काल’ की एक ‘कालातीत’ प्रेम कहानी.

ये ‘शिकारा’ के ट्रेलर का यू-ट्यूब डिस्क्रिप्शन है. इससे पता लगता है कि ‘शिकारा’ कहानी है, विस्थापित कश्मीरी पंडितों की. लेकिन चूंकि ये एक फिल्म है, कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं, तो फिल्म में एक कहानी भी है. शांति धर नाम की एक कश्मीरी पंडित लड़की और शिव कुमार धर नाम के एक कश्मीरी पंडित लड़के की लव स्टोरी.

# ट्रेलर कैसा है-

कुछ न होने न दुःख, ज़रा सा लगे,
तेरे होने से, घर भरा सा लगे.

ट्रेलर शुरू होता है एक बेहद रोमांटिक और प्यारे सीन से. शांति और शिव एक-दूसरे की बाहों में अपनी ज़िंदगी के सबसे हसीन पलों को जी रहे होते हैं. और फिर…

एक हिटलिस्ट. एक अल्टीमेटम. कश्मीरियों को, कश्मीरी पंडितों को, कश्मीर छोड़कर जाने के लिए कहने वाला.
एक हिटलिस्ट. एक अल्टीमेटम. कश्मीरियों को, कश्मीरी पंडितों को, कश्मीर छोड़कर जाने के लिए.

…और फिर आनंद यू टर्न लेकर दर्द में और प्रेम, नफ़रत में बदल जाता है. सामने एक घर जलने लगता है. फिर सारा कश्मीर जलने लगता है. ये 19 जनवरी, 1990 की रात है. दीवारों पर पोस्टर्स लग गए हैं. हिटलिस्ट. लिखा है-

एक महीने में कश्मीर से चले जाओ वरना गोली मार देंगे.

ट्रेलर में एक डायलॉग है, जो ये एक कश्मीरी मुस्लिम फिल्म में कहता दिखता है-

हम यहां इलेक्शन नहीं सिर्फ जंग जीत सकते हैं.

ये डायलॉग हमें मार्च 1987 में हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की याद दिलाता है. ये चुनाव ऐतिहासिक थे. घाटी की इस्लामिक पार्टियां मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (MUF) के बैनर तले एक साथ लड़ी थी और सब यही मानकर चल रहे थे कि MUF इस चुनाव में अच्छे नतीजे लेकर आएगा. इस संभावना पर बात होने लगी थी कि कांग्रेस – नेशनल कॉन्फ्रेंस की नाव किनारे भी लग सकती है.

ट्रेलर के एक सीन में अपना मेकअप छुपाती शांति. ताकि मुस्लिम अतिवादियों को उसके हिंदू होने का पता न चले.
ट्रेलर के एक सीन में अपना मेकअप छुपाती शांति. ताकि मुस्लिम अतिवादियों को उसके हिंदू होने का पता न चले.

लेकिन जब नतीजे आए तो MUF सिर्फ 4 सीटों पर विजेता घोषित किया गया. सीएम बने एक बार फिर फारूक अब्दुल्ला. कई टिप्पणीकारों ने माना है कि केंद्र की राजीव गांधी सरकार के इशारे पर इस चुनाव के दौरान धांधली हुई. नतीजों से मायूस होने वाले लोगों में व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा होने लगा. MUF से जुड़े कई लोगों ने इस हार के बाद चरमपंथ और आतंकवाद का रास्ता पकड़ लिया. मिसाल के लिए सैयद सलाहुद्दीन. 1989 से कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने बड़े पैमाने पर पैर पसारने शुरू कर दिए.

यूं ये साफ़ है कि मूवी में कश्मीरी पंडितों के अलावा कश्मीरी मुस्लिमों का पक्ष भी दिखाया जाएगा.

ट्रेलर में केवल विस्थापन का ही नहीं, शरणार्थी होने का दर्द भी दिखाया गया है. इस शरणार्थी शिविर वाले सीन को देखकर ‘भाग मिल्खा भाग’ की याद आती है.

लेफ्ट में पाकिस्तान से विस्थापित हुए लोगों का शिविर (भाग मिल्खा भाग). राईट में कश्मीर से विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों का शिविर (शिकारा).
लेफ्ट में पाकिस्तान से विस्थापित हुए लोगों का शिविर (भाग मिल्खा भाग). राईट में कश्मीर से विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों का शिविर (शिकारा).

ट्रेलर में टमाटर बांट रहे एक नेता वाले सीन से ये भी पता चलता है कि कैसे राजनीतिक दल हर मुद्दे को अपने फायदे के लिए यूज़ करते हैं. और कैसे मुद्दों का हल ढूंढना उनका मकसद नहीं है.

ट्रेलर में कुछ रियल फुटेज भी यूज़ की गई हैं, जो घटनाओं और त्रासदियों को और इंटेंस बनाती हैं.

जब सिर्फ नफरतें बची रह जाएं, तो प्रेम आपका इकलौता अस्त्र है!

# क्रू और कास्ट-

दोनों लीड एक्टर्स नए हैं. शिव कुमार धर का रोल किया है आदिल खान ने और शांति बनी हैं सादिया. फिल्म से एआर रहमान भी जुड़े हैं. लेकिन म्यूज़िक डायरेक्टर नहीं, बैकग्राउंड म्यूज़िक डायरेक्टर के लिहाज़ से. और उनका कमाल ट्रेलर में दिखाए गए इंटेंस सीन में बखूबी दिखता है.

गीतों के लिए म्यूज़िक संदेश शांडिल्य ने दिया है. लिरिक्स हैं इरशाद कामिल की. इन दोनों की जोड़ी का कमाल ‘चमेली’ और ‘सोचा न था’ में सुनने को मिला था. ‘जब वी मेट’ के एक गीत ‘आओगे जब तुम’ को मेलोडियस बनाने में भी इस जोड़ी का ही हाथ था.

फिल्म के ट्रेलर को देखकर इसके सिनेमाटोग्राफ़र की तारीफ़ किए बिना नहीं रहा जा सकता. रंगराजन रामबर्धन. इससे पहले के उनके नोटेबल प्रोजेक्ट में शामिल है- ‘चुंबक’ और ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’. कश्मीर के सारे रंग अपने सबसे उजले शेड में दिखाने में रंगराजन पूरी तरह सफल रहे हैं. कम से कम ट्रेलर से तो यही लगा.

जलते कश्मीर के इस सीन को देखकर सिनेमाटोग्राफ़ी और एडिटिंग टीम के बारे में और जानने की इच्छा होती है.
जलते कश्मीर के इस सीन को देखकर सिनेमाटोग्राफ़ी और एडिटिंग टीम के बारे में और जानने की इच्छा होती है.

ये पूरा प्रोजेक्ट जम्मू और कश्मीर में शूट हुआ है. शिवपोरा, पटनीटॉप और जम्मू के अन्य इलाकों के साथ कश्मीरी पंडितों के शिविरों में भी शूटिंग की गई है. शूटिंग के दौरान विधु और उनकी टीम गांदरबल के पास वंधमा की उस जगह भी गई, जहां 1998 का कुख्यात नरसंहार हुआ था, जिसमें 23 कश्मीरी पंडितों को मारा गया था. इसमें चार बच्चे और नौ औरतें भी शामिल थीं.

# विधु विनोद चोपड़ा और शिकारा-

मूवी को प्रोड्यूस किया है फॉक्स स्टार स्टूडियो के साथ मिलकर विधु विनोद चोपड़ा ने. मूवी को डायरेक्ट किया है विधु विनोद चोपड़ा ने. इसकी एडिटिंग का डिपार्टमेंट में उन्होंने ही देखा है. इसे लिखा भी उन्होंने ही है, राहुल पंडित और अभिजात जोशी के साथ मिलकर.

यानी अगर ड्रीम प्रोजेक्ट की कोई डेफिनेशन होगी, तो ‘शिकारा’ विधु विनोद चोपड़ा का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जा सकता है.

पिछली हिंदी फिल्म जो उन्होंने डायरेक्ट की, वो ‘एकलव्यः द रॉयल गार्ड’ थी जो 10 साल पहले आई थी, जिसमें अमिताभ बच्चन और सैफ अली खान लीड थे. हालांकि 2015 में उन्होंने हॉलीवुड डेब्यू भी किया था जब ‘ब्रोकन हॉर्सेज़’ डायरेक्ट की थी. ‘परिंदा’ (1989) और ‘1942: अ लव स्टोरी’ (1994) बतौर डायरेक्टर उनकी सबसे शानदार फिल्में मानी जाती हैं. इसके अलावा उन्होंने ‘पीके’ (2014), ‘3 इडियट्स’ (2009), ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ (2006) और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ जैसी बेहद कामयाब फिल्में प्रोड्यूस की हैं.

'परिंदा' जैसी सशक्त फिल्म डायरेक्ट कर चुके हैं विधु विनोद चोपड़ा.
‘परिंदा’ जैसी सशक्त फिल्म डायरेक्ट कर चुके हैं विधु विनोद चोपड़ा.

विधु खुद भी श्रीनगर से ही आते हैं. अपने जीवन के शुरुआती साल उन्होंने श्रीनगर में ही बिताए थे. उन्होंने अपनी स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई यहीं से की. जब कश्मीर में 1989-90 में आतंकवाद उभरा और कश्मीरी पंडितों को टारगेट करके अपने घरों से बेदख़ल किया गया, तो उसका असर विधु के परिवार पर भी पड़ा था.

इससे पहले विधु ने 18 साल पहले भी घाटी में अपनी फिल्म शूट की थी. वो भी कश्मीर में आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर बनी थी. फिल्म थी ‘मिशन कश्मीर’ जो 2000 में रिलीज हुई. उसमें ऋतिक रोशन, संजय दत्त और प्रीति जिंटा लीड रोल में थे.

# मोशन पिक्चर-

मोशन पिक्चर के बैकग्राउंड में दो आवाज़ें हैं. एक लड़का और लड़की. कहते हैं- 19 जनवरी, 2020. 30 साल बाद हमारी कहानी सुनी जाएगी.

ये दोनों कौन हैं? साफ़ है कि ये दोनों विस्थापित कश्मीरी पंडित हैं. शांति और शिव. तीस साल बाद अपनी प्रेम कहानी सुना रहे हैं. साथ में सुना रहे हैं, कश्मीर का दर्द. 19 जनवरी, 2020 की बात इसमें इसलिए की गई थी, क्योंकि पहले ये मूवी इसी दिन रिलीज़ होनी थी, बाद में रिलीज़ पोस्टपॉन हुई. बहरहाल ट्रेलर देखकर यही कहना होगा कि मूवी धांसू होने जा रही है. ख़ास तौर पर स्क्रिप्ट, लोकेशन और इमोशन के लिहाज़ से. वो क्या कहते हैं-

पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं.

# अंततः-

कोई संयोग नहीं कि फिल्म की मुख्य महिला किरदार का नाम शांति है. यही नाम विधु की मां का भी है. शांति देवी चोपड़ा.

जिस साल कश्मीरी पंडितों का विस्थापन हो रहा था, उसी साल विधु की मां, अपने बेटे की फिल्म ‘परिंदा’ के प्रीमियर के लिए मुंबई आई थीं लेकिन तभी कश्मीर में ख़ून-ख़राबा होने लगा और वे अपने ही घर यानी कश्मीर वापस न जा सकीं. विधु याद करते हैं-

मेरी मां सिर्फ एक हैंडबैग के साथ परिंदा के प्रीमियर के लिए वहां आई थीं और वो वापस नहीं जा सकीं. सात-आठ साल बाद जब हम लोग अपना घर देखने गए, तो अपने बर्बाद कर दिए घर को देखकर मन में पीड़ा होने के बाद भी उन्होंने कश्मीरी में कहा – ‘मैं माफ करती हूं.’ ये हमारा कल्चर था.

फॉक्स स्टार हिंदी जिनके यू ट्यूब चैनल पर ‘शिकारा’ का ट्रेलर रिलीज़ हुआ था, वहीं पर, उसी दिन, एक और वीडियो रिलीज़ किया गया. इस वीडियो में विधु की मां की जीवन यात्रा के कुछ फुटेज दिखाए गए हैं. ये वीडियो उनको एक ट्रिब्यूट है-


वीडियो देखें:

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