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राइफलमैन मुकेश कुमार, गोली लगने की परवाह किए बिना आतंकी से भिड़ गए और उसे ढेर किया!

14 अगस्त को वीरता पुरस्कारों यानी गैलेंट्री अवॉर्ड्स का ऐलान किया गया. इस दौरान कुल 6 जवानों को शौर्य चक्र दिया गया. शांतिकाल के वीरता पुरस्‍कारों में अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र आते हैं. शांति के समय अशोक चक्र देश का सर्वोच्‍च वीरता पुरस्‍कार है. अशोक चक्र और कीर्ति चक्र के बाद शौर्य चक्र सबसे बड़ा पुरस्कार है. हम एक-एक कर शौर्य चक्र विजेताओं की बहादुरी के किस्से बता रहे हैं. इस कड़ी में बात राइफलमैन मुकेश कुमार की.

Mukesh Kumar
मुकेश कुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है.

आतंकी से भिड़ गए मुकेश कुमार

जम्मू-कश्मीर के एक गांव में बीती 16 जुलाई की देर रात खुफिया जानकारी के आधार पर एक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. राइफलमैन मुकेश कुमार भी इसका हिस्सा थे. आतंकी जिस घर में छुपे थे, वहां से 5 बजकर 10 मिनट पर आतंकियों के कब्जे से नागरिकों को छुड़ा लिया गया.

इसी बीच मुकेश को एक रेडियो कॉल मिला. उन्हें अंदाजा हो गया कि कोई संदिग्ध उनकी घेराबंदी के पास आ रहा है. मुकेश ने अपनी फायरिंग बंद कर दी ताकि किसी नागरिक की जान ना जाए. लेकिन वो सतर्क थे. सामने जो शख्स था, उसके कपड़ों में छुपे हथियार को भांपने की कोशिश कर रहे थे.

उन्होंने उसे ललकारा तो नागरिक जैसा भेस बनाए आतंकी ने अपना हथियार निकालना चाहा. तभी राइफलमैन मुकेश आतंकी से भिड़ गए. अचानक हुए हमले से आतंकी भी संभल नहीं पाया. मुकेश ने गोली चलाने की जगह आतंकी पर बंदूक की बट से वार किया.

इस संघर्ष में मुकेश भी चोटिल हुए. उन्हें गोली लगी थी. लेकिन उन्होंने परवाह नहीं करते हुए आतंकी को काबू कर लिया. इस दौरान ना तो किसी नागरिक को कोई चोट आई और ना ही मुकेश के किसी साथी को. गोली लगने के बाद भी मुकेश ने साहस का परिचय दिया और आतंकी के साथ हैंड-टू-हैंड लड़ाई की. इसमें आतंकी मारा गया. इस वीरता के लिए राइफलमैन मुकेश कुमार को शौर्य चक्र दिया गया है.

शौर्य चक्र किसे दिया जाता है?

शौर्य चक्र असाधारण वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है. ‘शौर्य चक्र’ शांति काल में दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा सैन्य पराक्रम मेडल है. ये ऐसा सम्मान है जो सेना, सिविलियन पुलिस और आम नागरिकों को भी दिया जा सकता है. सेना में किसी भी रैंक के ऑफिसर (महिला/पुरुष), नेवी, एयरफोर्स, किसी भी रिजर्व फोर्स, प्रादेशिक सेना, नागरिक सेना और कानूनी रूप से गठित अन्य सैनिक इसके पात्र हो सकते हैं. सशस्त्र बलों की नर्सिंग सेवाओं के मेंबर को कार्यक्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए भी ये सम्मान मिल सकता है. कोई भी आम नागरिक, चाहे वो किसी भी जेंडर का हो, इस सम्मान का हकदार हो सकता है. सिविल पुलिस फोर्स, सेंट्रल पैरा-मिलिट्री फोर्सेस, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के सदस्य को भी ये सम्मान दिया जा सकता है.

Shaurya Chakra
शौर्य चक्र.

इस पदक की शुरुआत 4 जनवरी 1952 को हुई थी. पहले इसका नाम अशोक चक्र क्लास-2 था. फिर 26 जनवरी 1967 को नाम बदलकर शौर्य चक्र किया गया. इस पदक का फीता हरे रंग का होता है, जिस पर तीन सीधी रेखाएं बनी होती हैं. इस फीते से बंधा होता है पदक, जो कि कांसे का होता है. इसके बीच में अशोक चक्र बना होता है. पदक के पिछले हिस्से पर हिंदी और अंग्रेजी में शौर्य चक्र लिखा होता है. भारतीय वायुसेना की वेबसाइट के मुताबिक, पदक विजेता को हर महीने 1500 रुपये की राशि दी जाती है.


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