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कैप्टन विकास खत्री ने बर्फ में सुराग देख आतंकी अड्डा ढूंढा, फिर वो काम किया कि मिसाल बन गए

कैप्टन विकास खत्री को उनकी चतुराई भरी कार्रवाई के लिए शौर्य चक्र से नवाजा गया है.

स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को इस साल के वीरता पुरस्कारों यानी गैलेंट्री अवॉर्ड्स का ऐलान किया गया. कुल 6 जवानों को शौर्य चक्र दिया गया. शांतिकाल के वीरता पुरस्‍कारों में अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र आते हैं. शांति के समय अशोक चक्र देश का सर्वोच्‍च वीरता पुरस्‍कार है. अशोक चक्र, कीर्ति चक्र के बाद शौर्य चक्र सबसे बड़ा पुरस्कार है. हम एक-एक कर शौर्य चक्र विजेताओं की बहादुरी के किस्से बता रहे हैं. इस कड़ी में बात कैप्टन विकास खत्री की.

2 आतंकवादी मारे, 1 को पकड़ लिया

आर्मी ऑफिसर विकास खत्री जम्मू-कश्मीर में 12000 फुट की ऊंचाई पर जीरो डिग्री से भी कम तापमान में पीर पंजाल पहाड़ियों पर ड्यूटी कर रहे थे. उनके जिम्मे तकरीबन 4 किलोमीटर का इलाका था. इस इलाके पर चौकन्नी नजर रखना उनका काम था. 12-13 दिसंबर 2020 की रात उन्होंने इलाके में कुछ संदिग्ध गतिविधि देखी. उनकी शंका बढ़ गई. उन्होंने फौरन सतर्क होकर एक्शन लिया, और बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया.

हुआ ये कि कैप्टन विकास खत्री ने रात को बर्फ पर पैर के ताजा निशान देखे. उन्होंने निशान का पीछा किया. ये निशान उन्हें एक पगडंडी से होते हुए आतंकवादी ठिकाने तक ले गए. उन्होंने वहां पर आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाया. इसके बाद चतुराई से इलाके की घेराबंदी कर दी. उन सभी रास्तों को बंद कर दिया, जहां से आतंकवादियों के भागने का अंदेशा था. इसके बाद उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चलाया. इस ऑपरेशन में दो आतंकवादियों को मार गिराया. जो आतंकवादी मारे गए, उनमें एक विदेशी था. यही नहीं, कैप्टन खत्री ने एक आतंकवादी को जिंदा भी पकड़ लिया.

शौर्य चक्र किसे दिया जाता है?

इसी अदम्य साहस और वीरता के लिए कैप्टन खत्री को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है. ये ऐसा सम्मान है जो सेना, सिविलियन पुलिस और आम नागरिकों को भी दिया जा सकता है. सेना में किसी भी रैंक के ऑफिसर (महिला/पुरुष), नेवी, एयरफोर्स, किसी भी रिजर्व फोर्स, प्रादेशिक सेना, नागरिक सेना और कानूनी रूप से गठित अन्य सैनिक को ये दिया जा सकता. सशस्त्र बलों की नर्सिंग सेवाओं के मेंबर को कार्यक्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए ये सम्मान दिया जा सकता है. किसी भी आम नागरिक को फिर चाहें वो किसी भी जेंडर का हो इस सम्मान का हकदार हो सकता है. सिविल पुलिस फोर्स, सेंट्रल पैरा-मिलिट्री फोर्सेस, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स को भी ये सम्मान दिया जा सकता है. शौर्य चक्र असाधारण वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है. यह मरणोपरांत भी दिया जा सकता है. ‘शौर्य चक्र’ शांति काल में दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा सैन्य पराक्रम मेडल है.

इस पदक की शुरुआत 4 जनवरी 1952 को हुई थी. पहले इसका नाम अशोक चक्र क्लास-2 था. फिर 26 जनवरी 1967 को नाम बदलकर शौर्य चक्र किया गया. इस पदक का फीता हरे रंग का होता है, जिस पर तीन सीधी रेखाएं बनी होती हैं. इस फीते से बंधा होता है पदक. जो कि कांसे का होता है और इसके बीच में अशोक चक्र बना होता है. पदक के पिछले हिस्से पर हिंदी और अंग्रेजी में शौर्य चक्र लिखा होता है. भारतीय वायुसेना की वेबसाइट के मुताबिक पदक विजेता को हर महीने 1500 रुपये की राशि दी जाती है.

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