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डेब्यू के साथ ही बड़े-बड़ों के कान काट रहे ये बच्चे दोहराएंगे अभिनव बिंद्रा का कारनामा?

हमारे देश की एक खासियत है, यहां बच्चों से सबसे पहले पढ़ाई पूरी करने की उम्मीद की जाती है. कहते हैं कि खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब, पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब. लेकिन कुछ बच्चे होते हैं जिनका मन खेलकूद में ज्यादा लगता है. और फिर एक वक्त आता है जबकि फैमिली को उनका सपोर्ट करना ही पड़ता है. कभी ये वक्त देरी से तो कभी जल्दी आता है.

लेकिन कई बार ये वक्त एकदम सही टाइम पर आता है और ऐसे बच्चे कमाल कर जाते हैं. हमारी टोक्यो 2020 स्पेशल सीरीज उम्मीद के छठे एपिसोड में आज बात ऐसे ही बच्चों की, जो अपने टैलेंट और फैमिली सपोर्ट के दम पर कई दफा वर्ल्ड चैंपियन बन चुके हैं. और अब पूरे देश को टोक्यो 2020 ओलंपिक्स में उनसे मेडल की उम्मीद है.

# कौन हैं Saurabh-Manu?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा. देश के ये दोनों हिस्से कुछ इस कदर घुले-मिले हैं कि इनकी भाषा-बोली और खान-पान में फ़र्क करना मुश्किल है. और हमारे सौरभ चौधरी और मनु भाकर देश के इसी हिस्से से आते हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मेरठ से आने वाले सौरभ के पिता किसान हैं. सौरभ के भाई नितिन ने उन्हें शूटिंग की ओर मोड़ा और उन्होंने 13  की उम्र में शूटिंग को अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया. इस फैसले में परिवार ने भी उनका साथ दिया और सौरभ हर रोज, घर से 15 किलोमीटर दूर प्रैक्टिस के लिए जाने लगे.

दूसरी ओर मनु भाकर की कहानी थोड़ी अलग है. हरियाणा के झज्जर की रहने वाली मनु के पिता मर्चेंट नेवी में चीफ इंजिनियर हैं. 14 साल की उम्र तक मनु बॉक्सिंग, टेनिस, स्केटिंग और मणिपुरी मार्शल आर्ट्स खेलती थीं. इन इवेंट्स में उन्होंने कई नेशनल मेडल्स भी जीत रखे थे.

लेकिन अप्रैल 2016 में मनु पहली बार शूटिंग रेंज पहुंचीं और सोचा कि यहां भी हाथ आजमा ही लेते हैं. हाथ आजमाया और ऐसा आजमाया कि 15 दिन बाद ही हरियाणा ओपन टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीत लिया. बस यहीं से मन बन गया कि अब उन्हें शूटिंग ही करनी है. और उनके इस फैसले को साथ मिला मनु के पिता का.

मनु ने शूटिंग शुरू कर दी. और शुरू करते ही साल 2017 की एशियन जूनियर चैंपियनशिप का सिल्वर मेडल जीत लिया. लेकिन असली कमाल तो हुआ इसी साल हुई नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में. यहां भाकर ने कई बार की नेशनल चैंपियन, तमाम नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाली सुपरस्टार हीना सिद्धू को न सिर्फ हराया बल्कि उनका नेशनल रिकॉर्ड भी तोड़ डाला. इस इवेंट में मनु ने कुल नौ गोल्ड मेडल जीते.

फिर आया साल 2018. स्कूल-कॉलेज के बच्चों के लिए शुरू हुए ‘खेलो इंडिया गेम्स’. सौरभ और मनु दोनों ही अपने स्कूलों की तरफ से इसमें भाग लेने पहुंचे. और इसी टूर्नामेंट में इन्होंने खुद को अनाउंस कर दिया. दोनों ही शूटर्स ने अपने-अपने इवेंट के गोल्ड मेडल जीत लिए. इतना ही नहीं, इन दोनों ने इस दौरान नए नेशनल रिकॉर्ड भी बना डाले. सौरभ ने क्वॉलिफिकेशन तो मनु ने फाइनल में नए नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किए.

स्कूल गेम्स के बाद 2018 में ही नंबर आया एशियन गेम्स का. सिर्फ 16 साल के सौरभ चौधरी ने यहां धमाल मचाया और बन गए एशियन गेम्स का गोल्ड जीतने वाले सबसे युवा शूटर. उन्होंने इसी साल हुए यूथ ओलंपिक्स का गोल्ड मेडल भी जीता. साथ ही इसी साल सौरभ ने जूनियर वर्ल्ड कप में तीन और गोल्ड मेडल जीते. इनके साथ उन्होंने इसी साल की शूटिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी एक गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.

इधर मनु ने इसी साल मैक्सिको में हुए वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड बना डाला. यहां दो गोल्ड मेडल जीतने वाली 16 साल की मनु वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतने वाली सबसे युवा भारतीय शूटर बन गईं. मनु ने इसी साल हुए कॉमनवेल्थ गेम्स और यूथ ओलंपिक्स में भी गोल्ड मेडल जीते. अर्जेंटीना में हुए यूथ ओलंपिक्स में मनु ने एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता. इतना ही नहीं उन्होंने इसी साल हुए जूनियर वर्ल्ड कप में भी तीन गोल्ड मेडल्स जीत लिए.

# खास क्यों है ये जोड़ी?

अपने इंटरनेशनल डेब्यू में ही सौरभ-मनु ने सोना बरसा दिया. ये जहां भी जाते, गोल्ड ही गोल्ड लाते. साल 2018 के अंत तक ये दोनों बच्चे इंडियन शूटिंग के सुपरस्टार बन चुके थे. ऐसे में जब साल 2019 में नेशनल राइफल असोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI)के सामने ओलंपिक्स की नई कैटेगरी 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम के लिए जोड़ी बनाने का चैलेंज आया, तो उन्होंने आंख बंद कर अपने इन दो स्टार्स को एकसाथ कर दिया. इस बारे में पिस्टल टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच समरेश जंग ने ESPN से कहा था,

‘NRAI की सेलेक्शन पॉलिसी साफ है. इसमें हम पुरुषों के नंबर वन को महिलाओं के नंबर वन के साथ पेयर करते हैं.’

साथ आते ही सौरभ-मनु ने धमाके करने शुरू कर दिए. उन्होंने पहले दिल्ली, फिर बीजिंग, म्यूनिख और रियो में लगातार चार वर्ल्ड कप जीत लिए. म्यूनिख में तो उन्होंने अपना ही पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड भी तोड़ डाला. इसके बाद साल 2020 में कोविड-19 के चलते सारे इवेंट्स की रुक गए. लेकिन सौरभ-मनु की जोड़ी नहीं रुकी. उन्होंने साल 2021 में शूटिंग रेंज में वापसी करते ही फिर से गोल्ड मेडल जीत लिया.

यानी जोड़ी बनने के बाद पहले पांच वर्ल्ड कप में पांच गोल्ड मेडल. सौरभ और मनु की जोड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, वर्ल्ड कप समेत लगभग हर कंपटिशन में जीत दर्ज कर चुकी है. सौरभ ने अब तक जितने भी सीनियर वर्ल्ड कप खेले हैं, हर बार कोई ना कोई मेडल जीता है. उनके नाम आठ गोल्ड मेडल समेत कुल 12 वर्ल्ड कप मेडल हैं. जबकि मनु के नाम नौ गोल्ड समेत 13. ये जोड़ी अब तक सिर्फ एक वर्ल्ड कप में हारी है. सिर्फ 19-19 साल के ये शूटर्स किसी से नहीं डरते और यही इनकी सबसे बड़ी खासियत है.

# इनसे ‘उम्मीद’ क्यों?

एक लाइन में कहें तो ‘रिकॉर्ड बोलता है.’ ये जोड़ी जब भी शूटिंग रेंज में उतरती है, मेडल लेकर ही लौटती है. सीनियर डेब्यू के बाद से ही ये दोनों लगातार गोल्ड पर गोल्ड जीत रहे हैं. इस जोड़ी ने एक साथ अभी तक कुल छह वर्ल्ड कप खेले हैं. और इन छहों वर्ल्ड कप में भारत के नाम मेडल आए हैं. छह में से पांच बार इस जोड़ी ने गोल्ड जबकि एक बार सिल्वर मेडल जीता है.

इनकी कंसिस्टेंसी का जलवा ऐसा कि जून 2021 के वर्ल्ड कप में जब ये फाइनल में हारे तो लोग चौंक गए. किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था कि सौरभ और मनु की जोड़ी हार गई. सौरभ-मनु की जोड़ी ने जीता सोनाजैसी ख़बरें लिखने और पढ़ने के आदी लोगों के लिए यह नई बात थी. और शायद चिंता का सबब भी. लेकिन इस चिंता के बीच भी इनका पिछला प्रदर्शन देख मेडल तो पक्का ही दिख रहा है.

हालांकि इसके लिए इन्हें रूस की वितालिना बात्साराश्किना और अर्तेम चेरनोसोव और ईरान की गुलनौश सेघतोल्लाही और जावाद फोरुघी से खासतौर से सावधान रहना होगा. इन दोनों ने 2021 वर्ल्ड कप में गोल्ड और ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. साथ ही चाइनीज और कोरियन शूटर्स को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता. लेकिन अगर एक लाइन में कहना हो तो टोक्यो 2020 ओलंपिक्स में यह जोड़ी मेडल लाने की बड़ी दावेदार है. और अगर ये मेडल गोल्ड हुआ तो अभिनव बिंद्रा के बाद ये ओलंपिक्स गोल्ड जीतने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय भी बन सकते हैं.


रियो में निराश किया पर क्या अब टोक्यो ओलंपिक्स में भारत के लिए मेडल लाएंगी मीराबाई चानू?

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