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सोशल मीडिया पर गालियों से बचना है तो 'बच्चन अन्ताब' बन जाओ

vineet singh विनीत दी लल्लनटॉप के रीडर और पक्के वाले दोस्त हैं. बलिया से हैं. जहां से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे. उन्हीं ने देवस्थली विद्यापीठ स्कूल खोला था जिस स्कूल में पढ़े हैं विनीत. पढ़ लिख के पथरा हुए तो चले गए बंबई. वहां टाटा कंपनी में कोई बड़ी जिम्मेदारी वाला काम संभाल रहे हैं. अपनी पोस्ट का नाम अंग्रेजी में बताया है. लेकिन वो इत्ता लंबा था कि हम भूल गए. दोबारा पूछ के कॉपी पेस्ट कर देंगे. उनका एक दोस्त है मकालू. जिसके किस्से वो लल्लन के लिए लिखते हैं. हमको पढ़के मजा आया, आप भी पढ़िए.


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मकालू मिला. छूटते ही पूछा- गुरु परेशान दिखाई दे रहे हो?
मैंने कहा- बिल्कुल परेशान हूं, बल्कि यूं कहो आहत हूं.
क्या हो गया? मकालू थोड़ा टेंशन में आ गया.

मैंने कहा- मित्र विचित्र समस्या है. क्या बताऊं जब भी मैं फेसबुक पर कुछ भी लिखता हूं, लोग इतनी गालियां देते हैं कि गालियों से मेरा फेसबुक वॉल गीला हो जाता है. कई बार तो मेरा फोन भी हैंग हो जाता है. सपने में भी गालियां सुनाई देती हैं. अब तो हालात इतने बुरे हो गए हैं कि कुछ भी पोस्ट करते समय मेरे हाथ कांपते हैं.

मकालू मुस्कराते हुए किसी ज्योतिषी की तरह बोला- गुरू तुम्हारे पोस्ट पर लाइक से ज्यादा कमेंट आते हैं, हैं ना?

हां.

और तुम्हारे पोस्ट राजनीतिक होते हैं?

मैंने कहा- हां. तुम्हें कैसे पता? तुम तो फेसबुक पर भी नहीं हो. खैर तुम्ही बताओ मैं क्या करूं. अगर प्रधानमंत्री की तारीफ नहीं की तो लोग आपिया कहते हैं. तारीफ करूं तो भक्त. केजरीवाल और राहुल गांधी की तारीफ करने पर तो अलग ही लेवल की गालियां मिलती हैं और बुराई करने पर तो गालियां तय हैं ही. कुल मिलाकर कर यूं समझ लो कि जहां एक के बारे में कुछ लिखा नहीं कि बाकी सभी मिलकर गालियां देने लगते हैं. समझ नहीं आता प्रोफाईल फोटो बदलने के अलावा आखिर लिखूं क्या?

मकालू बोला -एक रास्ता है. बल्कि गुरु मंत्र कह सकते हो. अगर मानोगे तो बताऊं.

मैंने कहा- जल्दी बताओ. बड़ा एहसान होगा.

मकालू बोला- अमिताभ बच्चन को जानते हो?

सदी के महानायक. भला उन्हें कौन नहीं जानता. सीधे उपाय बताओ. मैंने खीजते हुए कहा.

मकालू बोला- गुरु उनसे सीखो बिना किसी विवाद के जीना. ऐसा जीवन कि सभी कहें आप सबसे बेहतरीन हैं, अवगुण विहीन हैं, महामानव हैं, महापुरुष हैं.

मकालू फिर पूछ पड़ा- अच्छा ये बताओ किसी को भी गालियां या लानते कब मिलती हैं?

मेरे जवाब देने से पहले मकालू ने खुद जवाब भी दे दिया- गुरु गालियां तब मिलती है जब या तो आपका किसी मुद्दे पर अच्छा या बुरा कोई राजनीतिक या तार्किक पक्ष हो या तो कोई गलती हो गई हो. और इस झमेले से बचना है तो बच्चन साहब से सीख सकते हो कैसे वो बड़ी समझदारी से गालियों की रासलीला वाली परिधि से बाहर निकल गए हैं. लेकिन उनकी ये स्थिति हमेशा से ऐसी न थी. बहुत गालियां खा के सीखा है उन्होंने भी. बच्चन साहब को ये ज्ञान तब हुआ जब वो इलाहाबाद से चुनाव लड़े. जीते. और फिर राजनीतिक षड्यंत्र में, बोफोर्स घोटाले में घसीट लिए गए. उस वक्त उन्हें सामाजिक रूप से बहुत बेआबरू होना पड़ा.

फिर मिस यूनिवर्स के आयोजन में दिवालिया हो गए. और आर्थिक रूप से बेआबरू होना पड़ा. अमर सिंह तब काम के आदमी थे. तो कुछ उनकी मदद से और बाकी अपने हुनर से इस संकट से ऊबर भी गए.

फिर इनकी सारी ज्ञान इन्द्रिया खुल गईं. समझ गए कि ये सब मोह माया है. अब कोई इनसे पूछता है- बच्चन साहब देश में ये फलां घटना घटित हुई है, क्या कहना चाहेंगे?

बच्चन साहब- अंअंअंअंअं…. जी माफ करिए मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

जी अमर सिंह आपको गरियाए फिर रहे हैं?

जी अगला सवाल प्लीज..

जी मुलायम सिंह यादव जी के पारिवारिक विवाद पर कुछ कहेंगे?

अंअंअंअअं……जी ….जया जी सपा से सांसद है मेरा राजनीति से कोई लेना देना नहीं है.

गुरु देखा नहीं पीछे जब आमिर खान की जबान फिसल गई थी और आमिर ने बीवी की कही एक बात मंच पर क्या दोहरा दी. फिर जनता ने गालियों से गीला कर दिया और हाथ से विज्ञापन गया वो अलग. वो अलग बात है कि अगली फिल्म में सब हिसाब बराबर कर लिया आमिर ने. तो कुल मिलाकर कम बोलने का ही नतीजा है की बच्चन साहब सबके चहेते बनें हुए हैं और उनका कोई दुश्मन नहीं. जो भी सत्ता में आए और बुला दे उसी का विज्ञापन कर देते हैं. चाहें पोलियो का करा लो, स्वच्छ भारत का करा लो, गुजरात के गधों का करा लो या यूपी में है दम-अपराध यहां कम. फिर हाजमोला से लेकर तेल तक. अब महानायक के लिए सब कुछ बस सेलिंग प्रॉडक्ट है.

और हां होली, दिवाली, ईद, बकरीद, पोंगल, ओणम किसी भी धर्म के त्योहार की बधाई देना नहीं भूलते. सच में संस्थान हैं बच्चन साहब, अगर मेरी बात की गहराई को समझ गए तो तुम भी निर्विवाद रूप से सबके चहेते बन सकते हो. बशर्ते बच्चन साहब से थोड़ा सा भी सीख पाए. फिर तुम्हें इतना लाइक मिलेगा कि बटोर भी नहीं पाओगे. समझ गए तो ठीक वर्ना किसी ना किसी एक पक्ष के भक्तों से गाली खाने के लिए तैयार रहो.

मकालू एक सांस में इतना कुछ बोल गया कि कुछ मुझे बातें समझ में आईं और कुछ कान के बाहर ही ढेर हो गईं।

अब मकालू जा चुका है. और मैंने भी निर्णय ले लिया है, थोड़ी मेहनत के बाद अब मेरा चाकलेट-डे से लेकर गांधी जयंती तक का पोस्ट तैयार है लाइक बटोरने के लिए. मोह माया के चक्कर में गालियां कौन खाए भला.


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