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60 साल की दो औरतें, 700 मेडल, अब इनकी कहानी पर अनुराग कश्यप पिक्चर बना रहे

मनमर्ज़ियां के बाद अनुराग कश्यप की अगली फिल्म आ रही है लेकिन इसमें वो सिर्फ पैसा लगा रहे हैं. फिल्म का नाम है ‘सांड की आंख’. ये नाम भी बड़ी रस्साकस्सी के बाद रखा गया है. इसकी अलग कहानी है. फिलहाल बात फिल्म की कहानी की करेंगे. अनुराग की ये फिल्म यूपी की दो उम्रदराज़ शूटर्स के ऊपर बन रही है. कौन लोग हैं ये? ऐसी क्या खास कहानी है इनकी? उनके रोल कौन करेगा? डायरेक्ट कौन कर रहा है? स्क्रीन सरकाओ, सारे जवाब पाओ.

शूटर दादियों की कहानी

इनकी कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि यूपी के एक गांव की दो महिलाएं हैं, जिन्होंने 60 साल की उम्र पार करने के बाद अपना शूटिंग यानी निशानेबाजी शुरू की. इन महिलाओं का का नाम है प्रकाशी और चंद्रो तोमर. प्रकाशी 19 साल पहले अपनी पोती का एडमिशन गांव के ही शूटिंग रेंज में करवाने गईं. बच्ची नर्वस थी, तो खुद ही एक गोली दागकर दिखा दिया. दादी ने बुल्स आई हिट कर दी थी. मतलब छर्रा निशाना लगाने वाले बोर्ड के बीचों-बीच जा लगा था. पास में खड़े कोच को लगा तुक्का फिट हुआ है. कहा दोबारा निशाना लगाओ. दादी ने दूसरी बार भी सांड की आंख में गोली मार दी. कोच ने कहा शूटिंग करो. लेकिन परिवार वगैरह का दबाव ज़्यादा था. कोच ने कहा, हफ्ते में एक दिन ही आ जाया करो प्रैक्टिस करने. बात तय हो गई. प्रकाशी को देखने के बाद उनकी देवरानी चंद्रा को भी शूटिंग का मन किया. रेंज में जाकर ट्राय किया, तो इनका भी निशाना कमाल. अब देवरानी-जेठानी साथ में शूटिंग करने लगीं. दोनों ही कमाल की निशानेबाज. धीरे-धीरे कॉम्पटीशन में हिस्सा लेने शुरू किया. अवॉर्ड-मेडल जीतने शुरू किए. सैकड़ों मेडल दोनों के घर में पड़े हुए हैं. पिछले 20 साल से खुद भी शूटिंग कर रहीं हैं साथ में गांव की बच्चियों को ट्रेनिंग भी देती हैं. ये दोनों महिलाएं यूपी में बागपत जिले के जौहरी गांव से आती हैं. किसी ने सही कहा है, हीरे की पहचान जौहरी को ही होती है.

ओरिजिनल शूटर दादियां प्रकाशी और चंद्रा तोमर.
ओरिजिनल शूटर दादियां प्रकाशी और चंद्रा तोमर.

कौन-कौन काम कर रहा है?

ये फिल्म पूरी तरह से इन दो महिलाओं और इनकी जर्नी के आस-पास घूमती. फिल्म में तापसी पन्नू प्रकाशी और भूमि पेडनेकर चंद्रा तोमर का रोल कर रही हैं. साथ में प्रकाश झा (डायरेक्टर- गंगाजल, राजनीति) और विनीत कुमार सिंह (मुक्काबाज, अग्ली) भी अहम किरदारों में नज़र आएंगे.

अब तक फिल्म की जितनी भी तस्वीरें बाहर आई थीं, सबमें तापसी और भूमि का चेहरा छुपाकर रखा गया था.
शूटिंग के दौरान गोबर थापती तापसी और भूमि. अब तक फिल्म की जितनी भी तस्वीरें बाहर आई थीं, सब में तापसी और भूमि का चेहरा छुपाकर रखा गया था. 

विवाद किस बारे में हुआ था?

अगर ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ देखी है, तो ‘ओ वुमनिया’ गाना याद होगा. उसी गाने से ‘वुमनिया’ शब्द उठाकर अनुराग इस फिल्म का नाम रखना चाहते थे. उन्हें लगा उनकी फिल्म का गाना है, जब चाहें तब इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन जब फिल्म के लिए टाइटल रजिस्टर कराने पहुंचे, तो पता चला कि ये टाइटल तो फिल्ममेकर प्रीतिश नंदी अपनी प्रोडक्शन कंपनी के लिए पहले ही रजिस्टर करवा चुके हैं. प्रीतिश इस नाम से एक वेब सीरीज़ बनाना चाहते थे. वो वेब सीरीज़ ‘फोर मोर शॉट्स’ नाम से बनकर रिलीज़ भी हो चुकी है. जब उस टाइटल का इस्तेमाल नहीं हुआ, तो अनुराग ने प्रीतिश से उसे इस्तेमाल करने की इजाज़त मांगी. लेकिन प्रीतिश नंदी की कंपनी ने कहा कि अगर अनुराग ये टाइटल इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इसके लिए पीएनसी (प्रीतिश नंदी कम्यूनिकेशंस) को एक करोड़ रुपए देने पड़ेंगे. पहले तो अनुराग ने ट्वीट कर प्रीतिश पर अपना गुस्सा निकाला और फिर अपनी फिल्म ‘सांड की आंख’ नाम से अनाउंस कर दी.

फिल्म अनाउंमेंट के दौरान डायरेक्टर तुषार, शूटर दादियां, अनुराग कश्यप और साथ में फिल्म की दोनों मेन लीड हीरोइनें तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर.
फिल्म अनाउंमेंट के दौरान डायरेक्टर तुषार, शूटर दादियां, अनुराग कश्यप (बाएं से दाएं) और साथ में फिल्म की दोनों लीड हीरोइनें तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर (नीचे वाले रो में).

पोस्टर क्या कह रहा है?

‘सांड की आंख’ का फर्स्ट लुक 16 अप्रैल को रिलीज़ किया गया. इस पोस्टर में तापसी और भूमि अपने कैरेक्टर के लुक में नज़र आ रही हैं. बूढ़ी, घाघरा-शर्ट के साथ माथे पर दुपट्टा और हाथ में पिस्तौल लिए. साथ में ये भी लिखा है कि ‘तन बूढ़ा होता है, मन बूढ़ा नहीं होता’. वहीं दूसरे पोस्टर पर हमें उनकी इस जर्नी की एक झलक मिलती है. ये पोस्टर कहता है कि इन्होंने अपनी बेड़ियां खुद तोड़ीं. 60 की उम्र में वो खुद भी से भी बड़ी हो गईं. और 700 मेडल्स के साथ दुनिया पर छा गईं. मुंबई मिरर से बात करते हुए तापसी ने बताया था कि उन्हें इस फिल्म में बूढ़ी दिखाने के लिए चेहरे पर झुर्रियां लाने के लिए रबर की मदद लेनी पड़ती है. और इसी तरह उन्हें तकरीबन पूरा दिन गुज़ारना होता है. इस मेकअप में तीन घंटे लगते हैं. बावजूद इसके जबसे ये पोस्टर्स रिलीज़ किए गए हैं, उन्हें मेकअप के लिए ट्रोल किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों का कहना है कि फिल्म के पोस्टर्स में दोनों हीरोइनों का मेकअप एकदम फर्जी लग रहा है.

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कौन बना रहा है?

अगर कुछ रिपोर्ट्स की मानें, तो इस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़कर अनुराग कश्यप काफी इंप्रेस हो गए थे. एक बार को वो खुद ये फिल्म डायरेक्ट करना चाहते थे. लेकिन बाद में वो इस फिल्म से बतौर प्रोड्यूसर जुड़ गए. इस फिल्म को डायरेक्ट कर रहे हैं तुषार हीरानंदानी. तुषार इससे पहले ‘मैं तेरा हीरो’, ‘एनीबडी कैन डांस (एबीसीडी)’ ‘एक विलेन’, ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ और ‘ग्रैंड मस्ती’ जैसी फिल्मों का स्क्रीनप्ले लिख चुके हैं. ‘सांड की आंख’ से वो बतौर डायरेक्टर अपना डेब्यू करने जा रहे हैं.

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कब आ रही है?

9 फरवरी, 2019 को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अनुराग ने फिल्म की अनाउंसमेंट की थी. इसके बाद से लगातार बागपत में ही फिल्म की शूटिंग चल रही थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म की 60 फीसदी शूटिंग पूरी भी हो चुकी है. रिलीज़ की एक्जैक्ट तारीख तो नहीं बताई गई है लेकिन इसे दीवाली पर थिएटर्स में उतारने की तैयारी चल रही है.


वीडियो देखें: रैपिड फायर: तापसी पन्नू की फेवरेट मिठाई,डायरेक्टर,गाना, फिल्म

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