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RRB गोरखपुर भर्ती: मीडिया को झूठा बताने वाले रेल मंत्री इन सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे?

20 जून 2020. रात के करीब साढ़े दस बजे रेलमंत्री पीयूष गोयल ने एक वीडियो ट्वीट किया. ये वीडियो RRB गोरखपुर के द्वारा निकाली गई असिस्टेंट लोको पायलट की भर्ती के बारे में था. असिस्टेंट लोको पायलट के 1681 पदों के लिए ये भर्ती 2018 में आई थी. जुलाई 2019 में इसका फाइनल रिजल्ट आया. लेकिन अब तक सारे अभ्यर्थियों को जॉइनिंग नहीं मिली. जॉइनिंग नहीं मिली तो अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू किया. इस मुद्दे को दी लल्लनटॉप ने प्रमुखता से उठाया. लेकिन भर्ती प्रक्रिया को पूरी करने के बजाय 20 जून को पीयूष गोयल ने वीडियो ट्वीट कर मीडिया संस्थानों पर भ्रामक जानकारी साझा करने का आरोप लगा दिया.

कौन फैला रहा भ्रामक जानकारी?

#पीयूष गोयल ने जो वीडियो ट्वीट किया है उसमें कहा गया है कि 1579 कैंडिडेट्स को फाइनली सेलेक्ट किया गया.  1579 कैंडिडेट्स (1377+202) के सेलेक्शन की बात दी लल्लनटॉप ने भी अपनी स्टोरी में की है.

# वीडियो में 882 कैंडिडेट्स को अपॉइंट मिलने की बात कही गई है. जो कि सही है. 1377 कैंडिडेट्स का पहला पैनल आया था. 1099 कैंडिडेट्स को डिविजन अलॉट हुआ, बाकियों को नहीं. दी लल्लनटॉप का सवाल ये था कि बाकी कैंडिडेट्स को डिविजन अलॉट क्यों नहीं किया गया? उन्हें अपॉइंटमेंट कब मिलेगा?

17 फरवरी 2020 को रेलवे ने बताया कि हमारे पास वैकेंसी केवल 865 थी. गलती से 1681 के लिए आवेदन मंगा लिया गया था.r Vacancy
17 फरवरी 2020 को रेलवे ने बताया कि हमारे पास वैकेंसी केवल 865 थी. गलती से 1681 के लिए आवेदन मंगा लिया गया था.

# वीडियो में ये भी कहा गया है कि नॉर्थ ईस्ट रेलवे ने अतिरिक्त वैकेंसी जारी की. जिसके लिए चार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है. दी लल्लनटॉप ने भी यही बात लिखी है. रेलवे ने खुद लेटर जारी कर स्वीकारा है कि गलती से ज्यादा वैकेंसी जारी हो गई थी. नॉर्थ ईस्ट रेलवे गोरखपुर के सीपीओ शैलेंद्र कुमार ने भी फोन पर बात करते हुए इस बात को स्वीकार किया था. शैलेंद्र कुमार के मुताबिक,

वैकेंसी हमारे पास मार्च 2021 तक के लिए लगभग 900 की थी. गलती क्या हुई कि 450 की वैकेंसी थी बनारस में और वो दो बार फीड हो गई. इस तरह से 450 वैकेंसी बढ़ गई. अब जब वैकेंसी बढ़ गई है, तो हमने बोर्ड को लेटर लिखा है कि वैकेंसी हमारे पास सरप्लस हो गई है. तो बोर्ड की ओर से कार्रवाई चल रही है. जिस स्टाफ ने गलती की है, उसके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई हो रही है.

यानी कि तीन परीक्षा, मेडिकल, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन आदि भर्ती की पूरी प्रक्रिया हो जाने के बाद रेलवे ये कह रहा है कि गलती से इतनी सीटों के लिए वैकेंसी निकल गई थी. हमारे पास इतनी सीटों के लिए वैकेंसी नहीं है. एक बार सोचकर देखिए, कितना हास्यास्पद लगता है ये कि सरकार ने कोई वैकेंसी निकाली. उस पर एग्जाम कराए. लोगों को सेलेक्ट भी कर लिया. लेकिन जब जॉइनिंग की बारी आए तो कह दिया कि गलती से वैकेंसी निकल गई थी, हमारे पास सीट खाली नहीं है.

20 फरवरी 2020 को NER ने पत्र लिख कर रेलवे बोर्ड से सरप्लस कैंडिडेट्स को ट्रांसफर करने की बात कही.
20 फरवरी 2020 को NER ने पत्र लिख कर रेलवे बोर्ड से सरप्लस कैंडिडेट्स को ट्रांसफर करने की बात कही.

पीयूष गोयल ने जो वीडियो ट्वीट किया है उसमें सरप्लस हो रहे कैंडिडेट्स को दूसरे जोन में एडजस्ट करने की बात भी कही गई है. ये बात दी लल्लनटॉप की स्टोरी में भी है. दी लल्लनटॉप से बात करते हुए शैलेंद्र कुमार ने भी दूसरे जोन में कैंडिडेट्स को ट्रांसफर करने की बात कही है. उन्होंने बताया,

हमारे पास दो ही ऑप्शन हैं. या तो हम वैकेंसी रद कर दें या फिर किसी दूसरे जोन में ट्रांसफर करें. पहला ऑप्शन सही नहीं है, क्योंकि इससे कैंडिडेट का नुकसान होगा. वैकेंसी रद नहीं की जाएगी. इसलिए हमारे पास जो सरप्लस कैंडिडेट हैं, उन्हें दूसरे जोन में भेजन की बात चल रही है. इसके लिए हमने रेलवे बोर्ड को लेटर भी लिखा है.

17 फरवरी 2020 को नॉर्थ ईस्ट रेलवे ने RRB गोरखपुर को लेटर लिखा. कहा कि हमारे 865 सीट ही है. इससे ज्यादा लोगों को हम जॉइनिंग नहीं दे पाएंगे. 20 फरवरी को नॉर्थ ईस्ट रेलवे एक लेटर रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली को भी लिखा. कहा कि गलती से ज्यादा वैकेंसी निकल गई थी. सरप्लस कैंडिडेट्स को दूसरे ज़ोन में समायोजित किया जाए. लेकिन 4 महीने बीत चुके हैं. पीयूष गोयल को बताना चाहिए कि दूसरे जोन मेंं कैंडिडेट्स को एडजस्ट करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है?

पीयूष गोयल को ये भी बताना चाहिए कि जिन जगहों पर RRB गोरखपुर के कैंडिडेट्स को समायोजित किया जाएगा वहां की वेटिंग लिस्ट में मौजूद कैंडिडेट्स का क्या होगा? क्योंकि जब भी किसी भर्ती का फाइनल रिजल्ट आता है तो उसमें कुल सीटों के डेढ़ गुना कैंडिडेट्स को पास किया जाता है. ताकि खाली रह गई सीटों को भरा जा सके. इसलिए पीयूष गोयल को उस जोन के वेटिंग लिस्ट में शामिल कैंडिडेट्स को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

अब आते हैं रेलवे के आखिरी दावे पर. रेलवे का कहना है कि इतनी पारदर्शिता के बावजूद मीडिया का एक धड़ा अपॉइंटमेंट के बावजूद नौकरी न दिए जाने से जुड़ी भ्रामक जानकारी का प्रसार कर रहा है. जो सरासर गलत और फेक है. ऊपर हमने रेलवे के दावों को बताया है. दी लल्लनटॉप की स्टोरी में जो बातें लिखी गई हैं. उनके बारे में भी बताया है.

स्टोरी आप यहां पढ़ सकते हैं.

इस लिंक पर वीडियो देख सकते हैं.

और ये वो वीडियो है जिसे पीयूष गोयल के वीडियो में भ्रामक और फेक बताया जा रहा है.

ये दी लल्लनटॉप के डेली न्यूज बुलेटिन दी लल्लनटॉप शो का हिस्सा है. पूरा वीडियो आप यहां देख सकते हैं.

जो हमने लिखा और कहा है वही रेलवे भी कह रहा है और हम पर ही भ्रामक जानकारी देने का आरोप भी लगा रहा है. पिछले दस महीने से सेलेक्टेड कैंडिडेट्स अपॉइंटमेंट पाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्ली से गोरखपुर तक रेलवे बोर्ड का चक्कर काट रहे हैं. और जब हमने इस मामले को उठाया तो हम पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगा दिया गया. भर्ती में पारदर्शिता का दावा करने वाला रेलवे आखिर क्यों नहीं बताता कि जब 865 सीटें ही थीं तो फिर 1681 पदों के लिए तीन-तीन लेवल के एग्जाम, मेडिकल, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कैसे हो गया? फरवरी 2018 में वैकेंसी आई और अगस्त 2019 में पहला पैनल आया. इस बीच कहीं भी रेलवे को ये बात क्यों नहीं पता चली कि जितने पोस्ट के लिए वो एग्जाम करा रहे हैं, वास्तव में उतनी पोस्ट है ही नहीं?

18 जून 2020 को रेलवे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विश्व की सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में से एक असिस्टेंट लोको पायलट और टेक्नीशियन की भर्ती को पूरा करने का दावा किया. लेकिन रेल मंत्रालय और पीयूष गोयल ये बताना भूल गए कि आखिर क्यों इसी भर्ती में कैंडिडेट्स को जॉइनिंग लेटर भेजने के बाद अंडर प्रोसेस कर दिया गया? ये मामला RRB मुंबई का है. जहां कैंडिडेट्स को जॉइनिंग लेटर तक भेज दिया गया था. लेकिन जॉइनिंग से एक दिन पहले उन्हें ई-मेल कर बताया गया कि उन्हें अंडर प्रोसेस कर दिया गया है. अभी उन्हें जॉइनिंग नहीं मिलेगी. इस स्टोरी को आप यहां पढ़ सकते हैं.

किसी भी वैकेंसी के लिए कैंडिडेट सालों-साल मेहनत करते हैं. वैकेंसी आती भी कई साल में एक बार है. ऐसे में जब सारी प्रक्रिया पूरी हो जाए और उसके बाद ये पता चले कि वैकेंसी तो है ही नहीं या फिर सीटें गलती से बढ़ गई हैं, तो ये एक क्रूर मजाक से ज्यादा और कुछ नहीं लगता.


जॉइनिंग से ठीक पहले ‘अंडर प्रोसेस’ क्यों कर दिए गए ये असिस्टेंट लोको पायलट कैंडिडेट्स?

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