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इंडिया की पहली वर्ल्ड कप जीत का वो हीरो जिसे उसका क्रेडिट नहीं मिला

राइट अार्म फास्ट बॉलर, राइट हैंड बैट्समैन और गजब का फील्डर.

जब-जब इंडिया के पहले वर्ल्ड कप जीतने की बात आती है, कपिल देव की वो तस्वीर सामने आती है जहां वो कप उठा रहे हैं. इस तस्वीर में मशहूर लॉर्ड्स गैलरी पर कपिल देव ट्रॉफी उठाते हुए दिखते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि ये जीत कपिल देव के शानदार प्रदर्शन के चलते मिली. मगर इंडिया के फाइनल तक पहुंचने में एक और खिलाड़ी का बड़ा हाथ था और इस खिलाड़ी को उतना क्रेडिट नहीं मिला जितना मिलना चाहिए था.

खिलाड़ी का नाम रॉजर बिन्नी. भारत के लिए खेलने वाला पहला एंग्लो इंडियन क्रिकेटर. 1983 के उस वर्ल्ड कप में, जहां इंडिया अपने तीनों प्रैक्टिस मैच हार गया था, रॉजर बिन्नी ने पूरे टूर्नामेंट में 18 विकेट लिए. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल का वो मुकाबला जब बिन्नी ने अपने 8 ओवरों में 2 मेडन फेंके और 29 रन देकर 4 विकेट लिए. इंडिया उस मैच में अपने 247 रनों के लक्ष्य को डिफेंड कर रहा था. रॉजर की बेहतरीन मीडियम फास्ट गेंदबाजी के चलते ऑस्ट्रेलिया 129 रनों पर ढेर हो गई थी.

रॉजर बिन्नी की किफायती गेंदबाजी के बूते इंडिया ये कप जीती थी.

फाइनल मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ था. टीम के सामने वर्ल्ड कप जीतने का मौका था मगर बैटिंग एक बार फिर नहीं चली. टीम ने पहले बैटिंग करते हुए 183 रन बनाए. वेस्टइंडीज की मजबूत टीम के सामने ये स्कोर कुछ नहीं था. ये वो टीम थी जो पिछले दो वर्ल्ड कप जीत चुकी थी. 1975 और 1979 के वर्ल्ड कप विजेता टीम के सामने टीम इंडिया की बॉलिंग ने कमाल कर दिया.

इस मैच में किफायती गेंदबाजी करने वालों में रॉजर बिन्नी का भी नाम था. बिन्नी ने 10 ओवर फेंके और एक मेडन के साथ 1 विकेट लिया और सिर्फ 23 रन दिए. वेस्टइंडीज 140 पर ऑल आउट हो गई. इंडिया को अपना पहला वर्ल्ड कप उठाने का मौका मिला. रॉजर बिन्नी ने अपने करियर में 27 टेस्ट और 72 वनडे मैच खेले. टेस्ट में 47 विकेट और वनडे में 77 विकेट इनके नाम हैं.

इस वीडियो को देखकर आनंद लीजिए: 

रॉजर बिन्नी का नाम क्रिकेट में ही नहीं, जेवलिन थ्रो से लेकर फुटबॉल तक में आता है. बिन्नी एक वक्त तक नेशनल लेवल के भाला फेंक खिलाड़ी थे. कर्नाटक की रणजी टीम के कप्तान भी रहे. इंडिया को वर्ल्ड कप जिताने के बाद उन्हें एक और वर्ल्ड कप जितवाने के लिए याद किया जाता है. बिन्नी उस टीम के कोच थे जिसने साल 2000 में अंडर 19 वर्ल्ड कप जीता था. वो टीम मोहम्मद कैफ की कप्तानी में जीत कर आई थी. साथ में युवराज सिंह भी थे. बाद में बिन्नी बंगाल रणजी टीम के कोच बने और साल 2012 में नेशनल सलेक्टर के पद पर बैठे.

स्टुअर्ट और रॉजर बिन्नी.

बतौर सलेक्टर बिन्नी के बारे में एक दिलचस्प किस्सा ये मिलता है कि 2014 में उनके पद पर रहते हुए बेटे स्टुअर्ट बिन्नी का टीम इंडिया के लिए सलेक्शन हुआ. इस पर तमाम बातें हुईं कि बाप ने बेटे को सलेक्ट किया है. इसके जवाब में सीनियर बिन्नी ने कहा कि जब-जब बेटे का नाम सेलेक्शन के लिए आया, वो मीटिंग छोड़ बाहर चले गए.

स्टुअर्ट का सलेक्शन कमेटी के दूसरे सदस्यों ने किया है और ये पूरी तरह से निष्पक्ष हुआ है. खैर, स्टुअर्ट बिन्नी इंटरनेशनल करियर में वो मुकाम नहीं हासिल कर पाए जहां तक पिता रॉजर पहुंचे थे. रॉजर बिन्नी को इंडियन क्रिकेट में अपने ऑल राउंड प्रदर्शन और कपिल के हाथों वर्ल्ड कप उठवाने के लिए हमेशा याद रखा जाएगा.

वीडियो देखें: अमिताभ बच्चन ने हर वर्ल्ड कप फाइनल देखने वाले के मन की बात कही है

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