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वॉर्न का बैट्समैन चेला, जिसने बॉल से इंडिया के छक्के छुड़ाने से पहले की छप्परफाड़ कमाई

रिकी पॉन्टिंग. ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल कप्तान के जीवन की सबसे बड़ी निराशा क्या थी? सवाल दो नंबर का है तो जवाब एक लाइन में होना चाहिए. नहीं पता तो पढ़िए- 2004-05 में इंडिया टूर न कर पाना. अब हर सिक्के (शोले वाला छोड़कर) के दो पहलू होते हैं तो इस निराशा का भी है.

माइकल क्लार्क. ऑस्ट्रेलिया के एक और सफल कप्तान. उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशियों का जिक्र 2004-05 के इंडिया टूर के बिना पूरा ही नहीं होगा. यही वह टूर था जिसने क्लार्क को ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम का परमानेंट मेंबर बना दिया. वो भी उस दौर में जब कंगारुओं के लिए खेलना बहुत मुश्किल माना जाता था. खुद क्लार्क वनडे में लगातार अच्छा करने के बाद भी टेस्ट टीम में एंट्री नहीं कर पा रहे थे. उस दौर में ऑस्ट्रेलियन टेस्ट टीम में एंट्री के लिए उम्र 30 के आसपास होने का एक अलिखित नियम सा था. क्लार्क तो बस 23 साल के थे.

# सबसे चैलेंजिंग टूर

लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पॉन्टिंग का अंगूठा टूट गया. कंगारुओं के हाथ से मैच तो गया ही, एक कठिन टूर से पहले कप्तान ने भी साथ छोड़ दिया. क्लार्क को पॉन्टिंग की जगह टीम में एंट्री मिली. टूर से पहले सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड से बात करते हुए पॉन्टिंग ने कहा था,

‘आप शायद सोच रहे होंगे कि माइकल खेलेगा. यह उसके लिए काफी मुश्किल परीक्षा होगी. वर्ल्ड क्रिकेट में भारत से ज्यादा चैलेंजिंग कोई टूर नहीं है. लेकिन वह अच्छा करेगा. वह एक कॉन्फिडेंट युवा है, उसकी तैयारी अच्छी है, वह स्पिनर्स को अच्छा खेलता है.’

2003 के इंडिया टूर में क्लार्क ने वनडे में अच्छा प्रदर्शन किया था. पॉन्टिंग को यकीन था कि वह इसे दोहरा सकते हैं. बाकी का ऑस्ट्रेलिया तो पहले से ही क्लार्क पर निसार था. तभी तो उन्होंने अप्रैल 2004 में ही ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी स्पोर्टिंग-ब्रांड डील झटक ली थी. टेस्ट डेब्यू से पहले ही वह डनलप स्लैज़ेन्जर के साथ साढ़े 12 लाख ऑस्ट्रेलियन डॉलर की डील साइन कर चुके थे. यह 2001 में स्टीव वॉ और इंडियन ब्रांड MRF के बीच हुई रिकॉर्ड डील से काफी बड़ी डील थी.

ख़ैर, क्लार्क इंडिया आए और छा गए. पहला टेस्ट बेंगलुरु में था. मुंबई के साथ हुए प्रैक्टिस मैच में ओपन करते हुए क्लार्क ने हाफ-सेंचुरी मारी थी. लेकिन टीम की शुरुआती जगहें तो फुल थीं. लैंगर और हेडेन ओपनर, तीसरे नंबर पर साइमन कैटिच फिर डेमियन मार्टिन, लेहमन. ये पांच तो पक्के थे. बचा छठा और सातवां नंबर. तो क्लार्क को मौका मिला छठे नंबर पर. गिलक्रिस्ट से पहले.

# डूब गए हॉज

उस दौर में हमारे लिए दूरदर्शन ही एक सहारा था और वहां टेस्ट मैच अलग अंदाज में दिखाते थे. सुबह और शाम एक-एक घंटे का खेल. शाम को स्कूल से आकर हमने टीवी खोला. देखा कि ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी का 80वां ओवर फेंकने अनिल कुंबले आए. उनकी पहली गेंद पर क्लार्क ने चहलकदमी कर लेग स्टंप से कुछ दूर जाते हुए जो छक्का मारा था भाईसाब, उसकी नकल हमने अगले कई सालों तक उतारी थी.

अपने पहले ही टेस्ट में क्लार्क ने 151 मार दिए. वो भी इंडिया में. सालों तक अपने बेडरूम में रिकी पॉन्टिंग की तस्वीर टांगने वाले क्लार्क ने एक ही पारी में पॉन्टिंग की सीट कब्जा ली. इसके साथ ही खतरे में पड़ गया उस वक्त 46.56 का फर्स्ट क्लास ऐवरेज रखने वाले ब्रैड हॉज का टेस्ट करियर.

दरअसल पॉन्टिंग की चोट के बाद हॉज और फर्स्ट क्लास में 37 से थोड़ी ज्यादा के एवरेज वाले क्लार्क में होड़ थी. सेलेक्टर्स ने क्लार्क को तवज्जो दी और इस बात ने हॉज के करियर को डुबो दिया. हॉज ऑस्ट्रेलिया के लिए सिर्फ छह टेस्ट ही खेल पाए. इस दौरान लगभग 56 की ऐवरेज, एक डबल सेंचुरी मारने के बाद भी वह अपना भाग्य नहीं बदल पाए.

# ले लिया बदला

डेब्यू पर सेंचुरी. एक झटके में ऑस्ट्रेलिया के तमाम दिग्गजों में एंट्री. ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 217 रन से जीता. पिछले 35 साल से भारत में टेस्ट सीरीज ना जीती ऑस्ट्रेलिया इस शुरुआत से बेहद खुश हुई. अखबार क्लार्क की प्रशंसा से भर गए. ये सेंचुरी क्लार्क के लिए एक और वजह से खास थी. पांच साल पहले, दिसंबर 1999 में क्लार्क ने अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था.

क्लार्क ऑस्ट्रेलिया टूर पर आई भारतीय टीम के खिलाफ न्यू साउथ वेल्स के लिए उतरे थे. उन्हें इस मैच में अनिल कुंबले ने बोल्ड किया था. क्लार्क ने अपने टेस्ट करियर की पहली बॉल भी अनिल कुंबले की ही खेली. फिर ऑस्ट्रेलिया के 389वें टेस्ट प्लेयर के रूप में उन्होंने कुंबले का बदला पूरी इंडियन टीम से लिया. शेन वॉर्न के चेले रह चुके क्लार्क ने इस मैच में एक ओवर बोलिंग भी की.

# जीनियस माइकल

दूसरा टेस्ट 14 अक्टूबर से चेन्नई में होना था. 13 तारीख को टीम के वाइस-कैप्टन लेहमन का बयान आया कि वह तीसरे टेस्ट से बाहर बैठ सकते हैं. क्योंकि वह क्लार्क जैसे जीनियस के रास्ते में नहीं आना चाहते. लेहमन ने कहा,

‘यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में मैं इस (दूसरे) टेस्ट के बाद सोचूंगा. अगर मैं सेलेक्टर होता तो यही सोचता कि माइकल क्लार्क को अगले 10-12 साल तक हर टेस्ट मैच खेलना चाहिए. अगर कोई लड़का अपने पहले टेस्ट की पहली इनिंग्स में ऐसी जीनियस पारी खेलता है तो आपको उसे खेलते देना होगा.’

यहां बता देना जरूरी है कि लेहमन को हर टेस्ट के 15,000 डॉलर मिलते थे. अगर वह लगातार नहीं खेलते तो उनका 650,000 डॉलर प्रति सीजन का कॉन्ट्रैक्ट भी खतरे में पड़ जाता. ये अलग बात है कि ऑस्ट्रेलियन सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन ट्रेवर होंस ने उनकी पेशकश सिरे से नकार दी.

Michael Clarke Darren Lehman 800
Michael Clarke बाद में Australia Captain और Darren Lehmann कोच बने (क्रिकेट एयू से साभार)

दूसरे टेस्ट में कुंबले ने 13 विकेट लिए. सहवाग ने 155 मारे और मैच ड्रॉ रहा. इस मैच में क्लार्क और लेहमन दोनों कुछ खास नहीं कर पाए. तीसरे टेस्ट में पॉन्टिंग वापस नहीं आए लेकिन क्लार्क और लेहमन में होड़ जरूर लग गई, टीम से बाहर होने की. अब क्लार्क को टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए उससे भिड़ना था जिसे वह पिता जैसा मानते थे.

# मुंबई मेमोरीज

ऑस्ट्रेलिया ने तीसरा टेस्ट 342 रन से जीत लिया. क्लार्क ने दोनों जबकि लेहमन ने एक पारी में हाफ सेंचुरी मारी. ऑस्ट्रेलिया ने 35 साल बाद भारत में टेस्ट सीरीज जीत ली थी. चौथे टेस्ट के लिए पॉन्टिंग वापस आ चुके थे. यह मैच मुंबई में होना था. लेहमन ने मैच में एक ही इनिंग खेली और क्लार्क ने दो. क्लार्क को इसका फायदा मिला और चौथे टेस्ट में लेहमन नहीं खेले.

इंडिया ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग की. जेसन गिलेस्पी (4 विकेट) और नाथन हॉरित्ज़ (3 विकेट) के आगे टीम 41.3 ओवर्स में 104 पर खेत रही. कप्तान द्रविड़ सबसे ज्यादा 31 रन बनाकर नॉटआउट रहे. जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने डेमियन मार्टिन की हाफ सेंचुरी के दम पर 203 रन बनाए. टेस्ट के पहले 95 ओवर्स में ही 18 विकेट गिरे और पिच पर बवाल होने लगा. भारत के लिए कुंबले ने पांच और मुरली कार्तिक ने चार विकेट निकाले. जाहिर था, पिच में स्पिनर्स के लिए काफी कुछ था.

99 रन से पिछड़ने के बाद भारत दोबारा बैटिंग करने उतरा. इस बार भी दोनों ओपनर्स 14 के टोटल पर वापस जा चुके थे. लेकिन अब द्रविड़ ने दिमाग लगाना शुरू कर दिया था. तीसरे नंबर पर खुद नहीं आए. लक्ष्मण को भेजा. लक्ष्मण के 69, सचिन के 55 और द्रविड़ तथा कैफ की 25 और 27 रन की पारियों की बदौलत भारत ने किसी तरह 205 रन बनाए. ये तो स्कोरकार्ड बताता है. लेकिन असली बात तो ये थी कि उस दिन वानखेड़े में लोगों ने जो देखा वो आज तक नहीं भूले हैं.

Michael Clarke Shane Warne 800
Shane Warne ने वनडे से रिटायर होने के बाद अपनी 23 नंबर की जर्सी Michael Clarke को सौंपी थी. क्लार्क कई बार कह चुके हैं कि वॉर्न ने उनकी काफी मदद की थी. (ट्विटर)

179 के टोटल पर भारत ने सिर्फ चार विकेट खोए थे. इसी मैच से डेब्यू करने वाले स्पिनर हॉरित्ज़ दूसरी पारी में लक्ष्मण और सचिन को आउट कर चुके थे. क्रीज़ पर राहुल द्रविड़ और मोहम्मद कैफ थे. तभी पॉन्टिंग ने फॉर अ चेंज क्लार्क को बॉल थमा दी.

कट टू क्लार्क का दूसरा ओवर, चौथी बॉल. भारत का स्कोर 182, चार विकेट के नुकसान पर. बॉल ऑफ स्टंप के बाहर पड़ी और बाहर की तरफ ही निकली. द्रविड़ ने फ्रंट फुट पर आकर विकेट कवर करते हुए बल्ला जमीन से सटाया और उठती हुई बॉल उनके दाहिने हाथ से टकराकर गिलक्रिस्ट के दस्तानों में चली गई. क्लार्क का पहला टेस्ट विकेट, उस बल्लेबाज का जिसके नाम सबसे ज्यादा गेंदें खेलने का रिकॉर्ड है.

अब क्रीज पर आए एक और डेब्यूटांट, विकेटकीपर दिनेश कार्तिक. कार्तिक ने कुल 6 गेंदें खेली. सातवीं गेंद पर वह वापस पैवेलियन जा रहे थे. क्लार्क की इस गेंद को कार्तिक ने लेग साइड की तरफ खेलना चाहा. बॉल हल्का सा टर्न हुई, बैट के ऊपरी हिस्से से टकराकर सिली पॉइंट की ओर उछली और रिकी पॉन्टिंग ने अपनी बाईं ओर गोता मारकर बेहतरीन कैच लपका. क्लार्क का दूसरा विकेट.

अब आए अनिल कुंबले. पॉन्टिंग ने दोनों एंड से स्पिनर्स लगा दिए.

क्लार्क चार ओवर में छह रन देकर दो विकेट ले चुके थे. उनका साथ देने के लिए बुलाए गए दो विकेट ले चुके हॉरित्ज़. दोनों ने इंडिया पर प्रेशर बनाना शुरू किया. पारी का 65वां ओवर. तीसरी बॉल. कैफ ने पैर आगे निकाले और बॉल के रास्ते में धर दिए. जोरदार अपील, और आउट. 195 पर गिरा भारत का सातवां विकेट.

अब आए हरभजन सिंह. ओवर की पांचवीं गेंद. भज्जी ने उसे शरीर से दूर खेलना चाहा, बॉल ने बल्ले का किनारा लिया और स्लिप में खड़े मैथ्यू हेडेन ने बाकी का काम पूरा कर दिया. 195 पर ही गया भारत का आठवां विकेट भी.

क्रीज पर मुरली कार्तिक. 67वें ओवर की चौथी बॉल. बाएं हाथ के कार्तिक के लिए बॉल मिडल स्टंप की लाइन पर गिरकर लेग स्टंप की तरफ बढ़ी. कार्तिक का बल्ला और पूरा शरीर ऑफ स्टंप के बाहर. बॉल सीधे जाकर लेग स्टंप से टकराई और पूरे हुए क्लार्क के पांच विकेट. भारत 199 पर नौ.

69वें ओवर की दूसरी बॉल, ज़हीर खान ने उसे पैडल स्वीप करना चाहा. बॉल सीधे पैड पर लगी और टीम इंडिया 205 पर ऑलआउट.

माइकल क्लार्क के नाम के आगे लिखा गया, 6.2 ओवर्स, नौ रन और छह विकेट. यह आंकड़े किसी भी काल में रनों के आधार पर बोलिंग के बेस्ट फिगर्स में शामिल हो सकते हैं. मुरली कार्तिक, हरभजन सिंह और कुंबले की बदौलत भारत ने यह टेस्ट जीत लिया. पॉन्टिंग ने पिच को खूब भला-बुरा कहा. टेक्निकली सिर्फ दो दिन चले इस टेस्ट के लिए भारत की खूब आलोचना हुई. इन सबके बीच क्लार्क अमर हो गए.

इसके चार साल बाद क्लार्क ने एक बार फिर से कुछ ऐसा ही किया. इस बार सिडनी में उन्होंने भारतीय पारी के आखिरी तीन विकेट लिए. क्लार्क ने यह कारनामा सिर्फ 11 गेंदों में अंजाम दिया. 2 अप्रैल 1981 को जन्मे क्लार्क का आज जन्मदिन है.


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