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किस्सा सुनील गावस्कर के आखिरी टेस्ट का, जिसे टीम इंडिया भुला देना चाहती है

सुनील गावस्कर. टेस्ट क्रिकेट के सबसे शानदार बल्लेबाजों में से एक. लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर गावस्कर की बैटिंग के फैंस पूरी दुनिया में हैं. एक वक्त था जब टेस्ट क्रिकेट के तमाम टॉप रिकॉर्ड इन्हीं के नाम थे. 1987 में पाकिस्तान के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के बाद गावस्कर रिटायर हो गए. यह सीरीज बल्ले से उनके लिए इतनी खास नहीं रही थी. गावस्कर ने उस सीरीज के पांच में से चार मैच खेले थे. इन मैचों की छह पारियों में वह 295 रन ही बना पाए. सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की लिस्ट में वह सातवें नंबर पर थे.

पांच मैचों की सीरीज के पहले चार मैच ड्रॉ रहे थे. आखिरी मैच बेंगलुरु में खेला जाना था. गावस्कर पहले ही बता चुके थे कि इस सीरीज के बाद वह नहीं खेलेंगे. यह मैच उनके बेहतरीन टेस्ट करियर का आखिरी टेस्ट था. सामने वो टीम थी जिसने कभी भारत को उसी के घर में टेस्ट सीरीज में नहीं हराया था. दोनों टीमों की कमान उस वक्त के दिग्गज ऑलराउंडर्स, इमरान खान और कपिल देव के हाथों में थी. भारतीय फैंस ने सोचा था कि टेस्ट क्रिकेट के महानतम ओपनर को भव्य विदाई दी जाएगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. 17 मार्च 1987 को खत्म हुए इस टेस्ट में खूब ड्रामा हुआ था.

# प्रेशर में इमरान

पाकिस्तानी कप्तान इमरान इस सीरीज में ऐसी टीम के साथ आए थे जिसका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं था. इसके साथ ही टीम के अंदर की बातें भी बाहर आने लगी थीं. ऐसा करने वाला भी कोई बाहर का नहीं था. टीम के मिडल ऑर्डर बैट्समैन क़ासिम उमर ने ड्रेसिंग रूम के शर्मिंदा करने वाले सीक्रेट्स खोलने शुरू कर दिए थे. उन्होंने इमरान को खुदपसंद और प्रदर्शित पक्षपात करने वाला करार दे दिया. बाद में वह इससे भी आगे निकल गए. इंडिया टूर में ना चुने जाने के बाद उन्होंने कहा कि इमरान समेत ज्यादातर प्लेयर्स ड्रग एडिक्ट हैं. अपने होटल रूम में अक्सर लड़कियां लाते हैं और शराब में डूबे रहते हैं.

Imran Khan/emma Premiere
अपने खेल के साथ मैदान से बाहर की अपनी लाइफस्टाइल के लिए भी बहुत चर्चित थे Imran Khan. तस्वीर में वह अपनी पहली बीवी Jemima और इटैलियन एक्टर Greta Scacchi के साथ दिख रहे हैं. (गेटी)

ऐसे माहौल में पाकिस्तानी टीम भारत आई थी. सीरीज के पहले चार मैचों में कुछ भी पॉजिटिव नहीं दिखा. चौथे मैच तक आते-आते तो दर्शक भी बेकाबू हो गए. डेड विकेट पर दोनों टीमों का डिफेंसिव गेम देख लोग ऊब चुके थे. अहमदाबाद में हुए चौथे टेस्ट में क्राउड ने जमकर बवाल काटा. बाउंड्री पर खड़े पाकिस्तानी प्लेयर्स पर पत्थर और सड़े हुए फल फेंके गए. गुस्साए इमरान खान ने दो बार अपने प्लेयर्स के साथ मैदान छोड़ दिया.

# फिर बना ‘स्पोर्टिंग’ विकेट

इमरान का आरोप था कि भारत ने जानबूझकर घटिया विकेट बनाए और नेगेटिव क्रिकेट खेल रहे हैं. जबकि कपिल का मानना था कि पाकिस्तानी बहुत डिफेंसिव हो रहे हैं. तमाम आलोचनाओं के बाद BCCI ने आखिरी टेस्ट के लिए स्पोर्टिंग ट्रैक बनाने का फैसला किया. मैच से पहले पिच देखने के बाद इमरान ने अपनी टीम में तीन तेज गेंदबाज (वसीम अकरम, सलीम जाफर और इमरान खुद) चुने. इनके साथ उन्होंने ऑलराउंडर मंज़ूर इलाही को भी टीम में रखा. मंज़ूर मीडियम फास्ट बोलिंग भी करते थे. ऑफ स्पिनर तौसीफ अहमद और इक़बाल क़ासिम को भी टीम में जगह मिली.

इमरान ने टॉस जीता और पहले बैटिंग का फैसला किया. पिच पहली बॉल से टर्न हो रही थी. मनिंदर सिंह, रवि शास्त्री और शिवलाल यादव की तिकड़ी ने पाकिस्तान को खूब परेशान किया. इनकी स्पिन के आगे पाकिस्तान सिर्फ 116 पर सिमट गई. सलीम मलिक ने सबसे ज्यादा 33 रन बनाए. भारत के लिए मनिंदर ने सात विकेट लिए. उस मैच को देखने वाले बताते हैं कि उस दिन मनिंदर को खेलना लगभग नामुमकिन था. उनकी हर बॉल विकेट लेती हुई दिख रही थी. पहले दिन भारत ने भी बैटिंग की और दो विकेट खोकर 68 रन बनाए. दोनों ओपनर्स गावस्कर और श्रीकांत 21-21 रन बनाकर आउट हो चुके थे. दोनों विकेट तौसीफ के खाते में गए थे.

Manindar Singh 800
उस मैच में Maninder Singh ने कुल 10 विकेट लिए थे

पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद पाकिस्तानी टीम ने मीटिंग की. बहुत देर तक सोच-विचार हुआ कि क्यों पाकिस्तानी बोलर्स मनिंदर जैसी कामयाबी नहीं हासिल कर पा रहे. इसके बाद टीम के वाइस कैप्टन जावेद मियांदाद ने पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी को फोन किया. दोनों की अच्छी दोस्ती थी और जावेद ने अपने दोस्त से मदद मांगी.

फोन पर बात कर जावेद ने अपने दोनों स्पिनर्स तौसीफ और क़ासिम को बेदी के होटल भेजा. वहां बेदी ने उनसे कहा कि मनिंदर ठीक वैसी बोलिंग कर रहे हैं जैसी वह खुद करते. खुद की जगह विकेट से ज्यादा काम लेते. बेदी ने कहा,

‘तुम लोग बॉल को स्पिन कराने की बहुत ज्यादा कोशिश कर रहे हो. बॉल को बहुत ज्यादा घुमा रहे हो. नॉर्मल बॉल करो और पिच को खुद से स्पिन कराने दो.’

बेदी की टिप काम आई और दोनों ने पांच-पांच विकेट लेते हुए भारत को 145 पर समेट दिया. यह पाकिस्तानी मीटिंग में तय किए गए लक्ष्य से भी पांच रन कम थे. दूसरी पारी में जावेद ने रमीज़ रज़ा के साथ खुद पारी की शुरुआत का फैसला किया. कप्तान इमरान ने अपने डिप्टी का सपोर्ट किया और उनकी बात मान ली. उन्होंने कपिल की सोच के उलट शुरुआत से ही अटैकिंग बैटिंग करने का फैसला किया. दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े. इसी स्कोर पर शास्त्री ने जावेद को आउट कर दिया.

Kapil Dev Imran Khan 800
Asia के पहले दो World Cup Winner Captains Kapil Dev और Imran Khan

89 पर तीन विकेट खोने के बाद जावेद और इमरान ने एक और प्रयोग किया. उन्होंने मनिंदर की बोलिंग को बेअसर करने के लिए इक़बाल क़ासिम को बैटिंग में प्रमोट किया. यह दांव चला भी. हर पल टूटते विकेट पर इक़बाल ने सलीम मलिक के साथ बहुमूल्य 32 रन जोड़े. 121 के टोटल पर मलिक को कपिल देव ने बोल्ड किया. इसके बाद इक़बाल ने इमरान खान के साथ 21 रन जोड़े. अंत में वह 33 रन बनाकर शिवलाल यादव की बॉल पर आउट हुए. विकेटकीपर सलीम यूसुफ ने 41 रन की जरूरी पारी खेली. पाकिस्तान अंत में 249 बनाकर ऑलआउट हुआ. भारत को ढाई दिन में 220 रन बनाने का लक्ष्य मिला.

वसीम अकरम के आगे टीम इंडिया ने जल्दी-जल्दी विकेट गंवाए. दिन का खेल खत्म होने तक टीम 99 पर चार विकेट खो चुकी थी. ओपनर सुनील गावस्कर का साथ दे रहे थे मोहम्मद अज़हरुद्दीन. मैच चौथे (टेक्निकली पांचवें, क्योंकि टेस्ट का चौथा दिन रेस्ट डे होता था) दिन पर खत्म होना लगभग पक्का था. दोनों ही टीमें मैच और सीरीज जीतने की हालत में थीं. गावस्कर गज़ब के टच में थे और उनका साथ दे रहे थे बेहतरीन टैलेंटेड अज़हर. चौथे दिन जब दोनों क्रीज पर आए तो भारत को सिर्फ 119 रन की जरूरत थी.

दोनों ने संभलकर खेलना शुरू किया. लेकिन टोटल 123 पर पहुंचा ही था कि कांड हो गया. अज़हर ने तौसीफ की एक शार्प ऑफ-ब्रेक को बैकफुट पर खेलने की कोशिश की लेकिन चूक गए. अज़हर को बोल्ड कर तौसीफ ने मैच पाकिस्तान की ओर झुका दिया. गावस्कर एक एंड पर खड़े रहे लेकिन काम बना नहीं. पाकिस्तान की मानें तो इस मैच में अंपायरों ने बेईमानी भी की थी. इस पारी में कई बार पाकिस्तानी प्लेयर्स अंपायरों से भिड़े थे. एक LBW और फिर क्लोज कैच पर जब गावस्कर आउट नहीं दिए गए तो पाकिस्तानी प्लेयर्स ने अंपायर को घेर लिया और साफ बोल दिया की बेईमानी हो रही है.

Sunil Gavaskar 800
तमाम लोग मानते हैं कि Cricket ने Sunil Gavaskar से बेहतर ओपनर नहीं देखा.

गावस्कर बॉल को लेट खेलकर सिंगल और डबल्स में रन बना रहे थे. शास्त्री के साथ मिलकर उन्होंने पारी 155 तक पहुंचाई. इसी स्कोर पर शास्त्री ने क़ासिम की बॉल पर उन्हीं को कैच थमा दिया. इसके बाद बैटिंग करने आए कपिल देव. अभी स्कोर में छह रन ही जुड़े थे कि क़ासिम ने कपिल को बोल्ड कर दिया. 50 हजार से ज्यादा लोगों से भरे स्टेडियम को मानों काटो तो खून नहीं. एकदम खामोश.

गावस्कर अब भी जीत और पाकिस्तान के बीच चट्टान की तरह खड़े थे. राजा लियोनाइडस की तरह. अटूट, हार निश्चित होने के बाद भी अंत तक लड़ने को तैयार. अब उनका साथ देने आए रोजर बिन्नी. गावस्कर ना सिर्फ एक छोर थामकर खड़े थे बल्कि इसके साथ रन भी बनाने का जिम्मा उनका ही था. लेकिन लियोनाइडस की तरह गावस्कर भी मैच फिनिश नहीं कर पाए. 180 के टोटल पर उन्होंने क़ासिम की एक बॉल को डिफेंड करने की कोशिश की. बॉल टूटे विकेट पर पड़कर उछल गई, बल्ले का ऊपरी किनारा लिया और पहली स्लिप में रिज़वान उज़ ज़मान ने तेजी से आए इस ऊंचे कैच को पकड़ लिया. इसके साथ ही गावस्कर को पैवेलियन लौटना पड़ा. आखिरी बार.

185 के टोटल पर भारत का नौवां विकेट गिरा. रोजर बिन्नी का साथ देने आए मनिंदर सिंह. पाकिस्तान जीत के बेहद करीब था. यहां से बिन्नी ने अटैक करने का फैसला किया. उन्होंने तौसीफ की एक बॉल को मैदान के सबसे लंबे हिस्से की बाउंड्री के बाहर फैंस तक पहुंचा दिया. भारत को जीत के लिए सिर्फ 17 रन चाहिए थे. बिन्नी का मूड देखते हुए यह कुछ गेंदों का मैच लग रहा था. तभी तौसीफ ने एक गेंद थोड़ी तेज फेंकी. बॉल शॉर्ट थी और ज्यादा टर्न भी नहीं हुई. बिन्नी की आंखें शिकार देखते भूखे शेर की तरह चमकी. बैकफुट पर जाकर उन्होंने बल्ले को पूरी ताकत से घुमा दिया.

Sunil Gavaskar Walking 800
Out होकर पैवेलियन की तरफ जाते Sunil Gavaskar (गेटी, फाइल)

बॉल बैट पर पूरी तरह से आई नहीं. बॉल ने घूमते बल्ले का बाहरी किनारा लिया और विकेटकीपर सलीम यूसुफ के ग्लव्स में समा गई. पाकिस्तानियों ने जोरदार अपील की. अंपायर एकदम शांत खड़ा रहा, किसी नेशनल इशू पर रिएक्ट करते मोदीजी की तरह. पूरा स्टेडियम शांत. ऐसा शांत जैसे बोधिवृक्ष के नीचे बैठे गौतम बुद्ध. ये सब लगभग पांच सेकेंड तक चला.

सुनने में यह वक्त बेहद कम लगता है लेकिन ऐसे माहौल में पांच सेकेंड कई सदियों जैसे हो जाते हैं. पाकिस्तानी प्लेयर्स को ऐसा ही लगा और उन्होंने अंपायर की ओर दौड़ लगा दी. प्लेयर्स को अपनी ओर आता देख अंपायर ने धीरे से अपनी उंगली उठा दी. बिन्नी आउट हो चुके थे. भारत 16 रन से हार चुका था.

पाकिस्तान ने भारत की धरती पर अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीत ली. सुनील गावस्कर का टेस्ट करियर खत्म हो चुका था. 125 मैच, 10122 टेस्ट रन, 34 टेस्ट शतक. गावस्कर यह सब हासिल करने वाले पहले इंसान के रूप में रिकॉर्डबुक में अमर हो चुके थे.

गावस्कर की यह पारी उनकी बेस्ट इनिंग्स में शामिल की जाती है. लेकिन कई बार आपका बेस्ट भी आपको जीत नहीं दिला पाता.


66 गेंदों पर 175 रन पीटने वाले क्रिस गेल को किस बात की कसक थी?

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