Submit your post

Follow Us

मधुबाला को खटका लगा हुआ था इस हीरोइन को दिलीप कुमार के साथ देखकर

81272494 10217575384309629 7676583695989342208 N गुज़रे ज़माने की एक्ट्रेस निम्मी के लिए ये ट्रिब्यूट मुन्ना के. पाण्डेय ने लिखा है.

वे बिहार के सिवान में जन्मे. नाटक, रंगमंच और सिनेमा विषयों पर लिखते रहते हैं. नटरंग, सामयिक मीमांसा, संवेद, सबलोग, बनास जन, परिंदे, जनसत्ता, प्रभात खबर जैसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख या शोध पत्र छप चुके हैं. हिंदी प्रदेशों के लोकनाट्य रूपों और भोजपुरी साहित्य-संस्कृति में उनकी विशेष दिलचस्पी है.

डॉ. पाण्डेय अभी सत्यवती कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के हिंदी-विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं.

*** ***

दूरदर्शन का एक एहसान ता-उम्र रहेगा. उसने हमें सिनेमाई लैजेंड्स की फ़िल्में देखने का मौका दिया. अब मनोरंजन के सौ तरीके हमारे आसपास उपलब्ध हैं. उस समय दूरदर्शन बड़ी नेमत लगता था. विशिष्ट होने का भाव भी देता था. कल बीते ज़माने की लोकप्रिय अदाकारा निम्मी नहीं रहीं. निम्मी से पहला परिचय इसी दूरदर्शन से हुआ और दूसरा मेरी नानी के रास्ते. कुछ गीतों को मैंने नानी से सुनकर मन में पक्का किया. वे निम्मी के ही गीत थे.

जिया बेक़रार है, छाई बहार है. आजा मोरे बालमा, तेरा इंतज़ार है.
सूरज देखें, चंदा देखें, सब देखें, हम तरसे हो. जैसे बरसे कोई बदरिया, ऐसे अखियां बरसे.

निम्मी का फिल्मी करियर अपने उरूज़ पर था. तब उन्होंने फ़िल्म जगत को अलविदा कह दिया. उनकी पचास से ज़्यादा फिल्मों की सूची को देखना रोचक है. महबूब खान, राजकपूर जैसे निर्माता-निर्देशक के साथ काम किया. मधुबाला, श्यामा, सुरैया, माला सिन्हा, नरगिस, दिलीप कुमार, देवानंद, राजकपूर, प्रेमनाथ, राजेन्द्र कुमार, धर्मेंद्र जैसे आला कलाकार उनके फिल्मी करियर के साथी रहे.

फ़िल्मी दुनिया में दस्तक

नवाब बानो – यही असल नाम रहा निम्मी का. फिल्मी नाम ‘निम्मी’ राजकपूर की देन है. निम्मी आगरे की थी, पर पाकिस्तान के एबटाबाद में रहने चली गई थीं. बंटवारे के बाद बॉम्बे आ गईं. उनकी मां फ़िल्मी जमात से थी. इसलिए परिवार का फिल्म वालों से परिचय था.

महबूब खान फिल्मी संसार के बड़े निर्माता-निर्देशक थे. सो एक रोज़ निम्मी ‘अंदाज़’ के सेट पर नानी के साथ जा पहुंची. वहां राजकपूर एक हीरोइन की तलाश में थे. अपनी फिल्म ‘बरसात’ में प्रेमनाथ के ऑपोज़िट सेकेंड लीड के लिए. निम्मी नए नामकरण और एक छोटे स्क्रीन टेस्ट के साथ सेल्युलॉयड पर आ गईं.

आइए, फिल्म का एक सीन देख लेते हैं.

सिनेमाई ज़बान में कहें तो यह एंट्री ग्रैंड थी. ‘जिया बेक़रार है, बरसात में हमसे मिले तुम सजन’ सरीखे गीत बेहद चर्चित रहे. फिर तो उनके हिस्से शानदार बैनर्स आए. बेमिसाल एक्टर्स के साथ काम मिलने लगा. एक से बढ़कर एक गीतों की दौलत भी मिली. ‘दाग’, ‘दीदार’, ‘आन’, ‘बसंत बहार’, ‘उड़न खटोला’, ‘राजमुकुट’, ‘सज़ा’, ‘पूजा के फूल’, ‘भाई-भाई’ जैसी अनेक फिल्में.

‘नैन मिले चैन कहां, दिल है वहीं तू है जहां’, ‘दिल का दीया जलाके गया, ये कौन मेरी तन्हाई में’, ‘न मिलता ग़म तो बर्बादी के अफ़साने कहां जाते.’ ऐसे कितने सदाबहार गीत हम सबके ज़ेहन में उनकी अमानत के तौर पर रह गए हैं. ‘भाई-भाई’ फ़िल्म का ‘इस दुनिया में सब चोर-चोर’ गीत जिस शोखी के साथ निम्मी ने निभाया है, वह उनकी क़ाबिलियत का एक अलग स्तर है.

अपनी अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेज़ेंस को वह अपनी पहली ही फ़िल्म में दिखा चुकी थीं. याद कीजिए ‘बरसात’ का वह दृश्य, जहां वे ऊंचाई से अपने नायक को देखती हुई खुद से कहती है –

“अगर किसी दिन मैंने तुम्हें किसी दूसरी लड़की के साथ देखा तो याद रखना..”

एक प्रेमिका की पीर का अद्भुत दृश्य है. राजेन्द्र कुमार और साधना के साथ ‘मेरे महबूब’ आधिकारिक तौर पर निम्मी की अंतिम फ़िल्म है.

फिल्मजगत में थोड़ी सी रेतीली सफलता जीरे-भर लोगों को लकी कबूतर बना देती है. वहीं दुनिया की हज़ार नेमतें, इज़्ज़त, शौहरत, दौलत पाकर भी निम्मी उतनी ही ज़मीनी रहीं. यही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत रही जो उन्हें दूसरों से अलग करती थी. राजकपूर ने हमेशा उनको अपनी बहन-सा मान दिया. निम्मी ने ‘आन’, ‘मदर इंडिया’, ‘अंदाज़’, ‘रेशमा और शेरा’ जैसी शानदार फिल्मों के लेखक सैय्यद अली रज़ा से शादी रचाई. इस प्यारे जोड़े के हिस्से कोई साहिबे-औलाद न हुई. सो निम्मी ने अपनी बहन के लड़के को गोद लिया.

जब दोस्ती के बीच प्यार अड़चन बनने लगा था 

एक और किस्सा निम्मी और मधुबाला की दोस्ती से जुड़ा हुआ है. टीवी प्रस्तोता और वेटेरन अभिनेत्री तबस्सुम ने इस किस्से का मज़मून दिया. दिलीप साहब और निम्मी में खूब बनती थी. उन दिनों मधुबाला और दिलीप कुमार के प्रेम की चर्चा भी थी. निम्मी के साथ ऐसा कुछ नहीं था. वह मधुबाला की अच्छी सखी थीं. दिलीप साहब के साथ ‘आन’ में काम कर रहीं थीं. मधुबाला को निम्मी का दिलीप कुमार से इतना घुलना-मिलना रुचा नहीं. सो उन्होंने एक दिन निम्मी से कह दिया –

“तुम्हें यूसुफ साहब अच्छे लगते हैं, तो मैं तुम्हारे लिए उन्हें छोड़ दूंगी.”

निम्मी ने सखी के कहन का मीटर समझ लिया. वह पलट कर बोली – “मुझे मेरा दान में नहीं चाहिए.”

Dilip Kumar And Nimmy
किसी फिल्म के सीन में दिलीप कुमार और निम्मी

निम्मी चली गईं, लेकिन बहुत कुछ छोड़ गईं हैं

निम्मी उर्फ नवाब बानो हिंदुस्तानी सिनेमा का चमकता सितारा थीं. जो जितना आसमान में चमका, उतना ही ज़मीन पर. यह सितारा 18 फरवरी 1933 को इस दुनिया में आया. कल डूब चला. लेकिन उसने अपने पीछे हम सबके हिस्से की खूबसूरत हाज़िरी बनाए रखी है. अपनी फिल्मों से, अपने सदाबहार गीतों से. वह माज़ी आने वाली सदियों में हिंदुस्तानी सिनेमा का एक प्रतिनिधि बना रहेगा.

Nimmi Old Age
उम्र के दो अलग दौर में निम्मी

‘सज़ा’ (1951) फ़िल्म का निम्मी का वह गीत आज विदा गीत की तरह कानों में बज रहा है –

“तुम न जाने किस जहां में खो गए.
हम भरी दुनिया में तन्हा हो गए.
मौत भी आती नहीं, आस भी जाती नहीं.
दिल को ये क्या हो गया, कोई शै भाती नहीं.
लूटकर मेरा जहां, छुप गए हो तुम कहां.
तुम कहां, तुम कहां, तुम कहां…”

अलविदा निम्मी जी!

*** ***

Video: क्यों नामी एक्टर और स्टार लोग महमूद से डरते थे? (बॉलीवुड क़िस्से)

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

न्यू मॉन्क

दुनिया के पहले स्टेनोग्राफर के पांच किस्से

अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन के अवसर पर पढ़िए गणपति से जुड़ी कुछ रोचक बातें.

यज्ञ में नहीं बुलाया गया तो शिव ने भस्म करवा दिया मंडप

शिव से बोलीं पार्वती- 'आप श्रेष्ठ हो, फिर भी होती है अनदेखी'.

नाम रखने की खातिर प्रकट होते ही रोने लगे थे शिव!

शिव के सात नाम हैं. उनका रहस्य जानो, सीधे पुराणों के हवाले से.

ब्रह्मा की हरकतों से इतने परेशान हुए शिव कि उनका सिर धड़ से अलग कर दिया

बड़े काम की जानकारी, सीधे ब्रह्मदारण्यक उपनिषद से.

एक बार सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी झूठ बोला था

राजा हरिश्चंद्र सत्य का पर्याय हैं. तभी तो कहा जाता है- सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र. पर एक बार हरिश्चंद्र ने भी झूठ कहा था. क्यों कहा था?

जटायु के पापा का सूर्य से क्या रिश्ता था?

अगर पूरी रामायण पढ़े हो तो पता होगा. नहीं पता तो यहां पढ़ो.

ब्रह्मा की पूजा से जुड़ा सबसे बड़ा झूठ, बेटी से नहीं की थी शादी

कहते हैं कि बेटी सरस्वती से विवाह कर लिया था ब्रह्मा ने. इसीलिए उनकी पूजा नहीं होती. न मंदिर बनते हैं. सच ये है.

उपनिषद् का वो ज्ञान, जिसे हासिल करने में राहुल गांधी को भी टाइम लगेगा

जानिए उपनिषद् की पांच मजेदार बातें.

औरतों को कमजोर मानता था महिषासुर, मारा गया

उसने वरदान मांगा कि देव, दानव और मानव में से कोई हमें मार न पाए, पर गलती कर गया.

राम-सीता की शादी के लिए नहीं हुआ था कोई स्वयंवर

न स्वयंवर हुआ था, न उसमें रावण आया था: रामायण का एक कम जाना हुआ सच.