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वो फिल्ममेकर जिसकी नौकरी, मधुबाला की फोटो खींचने से लगी थी

यश जौहर. इन्हें लोग आमतौर पर यश चोपड़ा समझ लेते हैं. लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. यश चोपड़ा और यश जौहर दो अलग-अलग लोग हैं. हालांकि ऐसा दोनों के बॉलीवुड कनेक्शन से हो जाता होगा. खैर, अब तो दोनों ही नहीं हैं. लेकिन यकायक यश जौहर और चोपड़ा में अंतर बताने की नौबत इसलिए आ गई क्योंकि 26 जून को यश जौहर का देहांत हुआ था. वो 6 सितंबर, 1929 को अविभाजित भारत के लाहौर प्रांत में पैदा हुए थे. उन्हें हम बतौर फिल्म निर्माता और करण जौहर के पिता के रूप में जानते हैं. इसी मौके पर उनके जीवन से जुड़े कुछ किस्से आपके लिए लाए हैं, नोश फ़रमाइए:

पहले यश जोहर और यश चोपड़ा का कंफ्यूजन दूर कर लीजिये. बाएं वाले हैं यश जोहर जो अवार्ड के साथ हैं और दूसरी तरफ हैं यश चोपड़ा.
पहले यश जौहर और यश चोपड़ा का कंफ्यूजन दूर कर लीजिये. बाएं वाले हैं यश जौहर जो अवार्ड के साथ हैं और दूसरी तरफ हैं यश चोपड़ा.

#. यश जौहर जन्मे तो लाहौर में थे लेकिन उनका बचपन और जवानी शिमला से लेकर दिल्ली तक फैली हुई थी. दिल्ली में उनके पापा की मिठाई की दुकान थी. ‘नानकिंग स्वीट्स’ नाम था. अपने 9 भाई-बहनों में सबसे ज़्यादा पढ़े-लिखे होने की वजह से उन्हें ही दुकान पर बैठा दिया जाता. ये चीज़ उन्हें अच्छी नहीं लगती थी. माता जी को सब पता था. ऐसे ही एक दिन दुकान पर बैठे थे, तो मां ने समझाया कि ‘तुम हलवाई की दुकान संभालने के लिए नहीं बने हो. बंबई चले जाओ और अपने मन की जिंदगी जियो.’ इसके लिए जो कांड उन्होंने किया वो बहुत यादगार है.

अपने बेटे करण के साथ यश जौहर.
अपने बेटे करण के साथ यश जौहर.

यश जौहर की मां ने उनके जाने से 1 हफ्ते पहले ही घर से गहने और कुछ पैसे गायब कर दिए. घर में हंगामा भी मचा दिया कि चोरी हो गई है. इसके लिए बेचारा सिक्योरिटी वाला स्टाफ पीट दिया गया. लेकिन ये तो अपने बेटे को बंबई भेजने के लिए रकम जुगाड़ने की भूमिका थी. यश तो बंबई भी चले गए लेकिन उन्हें इस बात की कानों-कान खबर नहीं हुई. उन्हें इस पैसे की सच्चाई बहुत बाद में पता चली.

#. बंबई तो पहुंच गए लेकिन वो घर से मिले पैसे कितने दिन काम आते. नौकरी ढूंढने निकले. टाइम्स ऑफ़ इंडिया अखबार के ऑफिस गए और पूछ लिया कि कोई काम-धाम है क्या? बदले में उन्हें वहां के फोटोग्राफर दुबे जी के पास पहुंचा दिया गया. अब घुमाई चालू थी. फोटो खींचते हुए दुबे आगे-आगे और जौहर जी पीछे-पीछे. उन दिनों फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ की शूटिंग चल रही थी. उसी के सेट वगैरह का फोटो लेने दुबे गए थे. ऐसे में यश जौहर को भी सेट पर एंट्री मिल जाती थी.

किस्मत में मधुबाला की फोटो खींचना लिखा था तो दुबे बीमार हो गए. उस दिन यश जौहर सेट पर फोटो खींचने गए. मधुबाला के बारे में ये कहा जाता था कि वो किसी को अपनी तस्वीर नहीं लेने देती थीं. लेकिन यश जौहर पढ़े-लिखे थे और अंग्रेजी भी बोल लेते थे. उन्हें तमीज़दार देखकर मधुबाला इम्प्रेस हो गईं. और इतनी ज़्यादा इम्प्रेस हो गईं कि अपना गार्डन भी घूमा लाईं और तस्वीरें भी खिंचा लीं. इसके बाद तो यश की चांदी हो गई. ऑफिस में जॉब भी मिल गई और भाव भी मिलने लगा. मैं अपने साथ भी ऐसा ही कुछ होने का इंतज़ार कर रहा हूं. 😉

फिल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' के एक सीन में मधुबाला.
फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के एक सीन में मधुबाला.

#. यश जौहर के बारे में ऐसा कहा जाता था कि वो बड़े पुजारी आदमी थे. दिखाने वाले नहीं सच में. सेक्युलर टाइप के थे. उनकी आदत थी कि रोज सुबह नहा-धोकर तौलिया लपेट लेते और तीन मिनट प्रार्थना करते. घर में ही छोटा सा मंदिर था वहीं खड़े होकर सभी धर्मों को समेट लेते थे. ये सब हम नहीं कह रहे उनके ही बेटे करण जौहर ने बताया है अपनी आत्मकथा में.

करण की आत्मकथा 'एन अनसूटेबल बॉय' और अपनी किताब का विमोचन करते करण जोहर के साथ शाहरुख़ खान.
करण की आत्मकथा ‘एन अनसूटेबल बॉय’ और अपनी किताब का विमोचन करते करण जौहर के साथ शाहरुख़ खान.

#. यश जौहर ने बतौर निर्माता पहली फिल्म बनाई थी ‘दोस्ताना’ जिसमें अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा लीड रोल में थे. ये फिल्म हिट थी. लेकिन इसके बाद उनकी ज़्यादा फ़िल्में चली नहीं. इसलिए वो फिल्म प्रोड्यूस करने के साथ इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का बिज़नेस भी करते थे. लेकिन फिर जब करण फ़िल्में बनाने लगे तब उनका प्रोडक्शन हाउस चल निकला. साल 2004 में उनके मरने से पहले ही न्यूयॉर्क में फिल्म ‘कल हो न हो’ की शूटिंग के दौरान जुलाई में करण को एक भविष्य बताने वाली एक महिला ने उनके पिता की बीमारी के बारे में बता दिया था.

फिल्म 'कल हो न हो' का पोस्टर.
फिल्म ‘कल हो न हो’ का पोस्टर.

करण के दोस्त मिक्की कांट्रेक्टर की फ्रेंड रीटा ने करण को बताया कि आने वाला अगस्त का महीना उनके लिए कोई बुरी खबर लेकर आएगा. ये अगला ही महीना था. अगस्त की शुरुआत में ही करण को यश जौहर ने बताया कि उन्हें कैंसर है. उस दौरान फिल्म के टाइटल सांग ‘कल हो न हो’ की शूटिंग चल रही थी. करण बताते हैं कि सेट पर मौजूद सभी लोग बहुत दुखी थे और उनके लिए उस गाने के मायने हमेशा के लिए बदल गए.


वीडियो देखें-  वो दस हिंदी फ़िल्में, जो कोरियन फिल्मों की हूबहू कॉपी थीं

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