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बिंदरखिया तुम कहां हो, दुनिया तुम्हें ढूंढ रही है!

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तारीख थी 17 नवंबर, 2003. चंडीगढ़ में मैं स्कूटर पर बैठकर ‘सपरिवार’ एक शादी में जा रहा था. रास्ते में ट्रिब्यून अखबार का ऑफिस है. चौराहे पर LCD स्क्रीन लगी है जिस पर न्यूज़ फ्लैश होती रहती है. वहां मैंने वो खबर पढ़ी और लड़कपन की उम्र में गहरा धक्का लग गया.

स्कूटर चलता रहा. मैं तब तक स्क्रीन देखता रहा, जब तक कुछ पेड़ों ने मेरी आंखों के सामने से उसे ढंक नहीं लिया. खबर थी ‘पॉप सिंगर बिंदरखिया नो मोर’. मैं हैरान था. यकीन नहीं हो रहा था. कंफर्म करने के लिए पापा से पूछा, “पापा बिंदरखिया की डेथ हो गई?” वो बोले, “हां कल रात हुई”. मैंने सुना और शादी का सारा चाव उतर गया. पंजाबी गायकी का बेहद कीमती और काबिल सितारा सुरजीत बिंदरखिया अब हमारे बीच नहीं था.

Remember-Bindrakia

पूरा नाम सुरजीत सिंह बिंदरखिया. 13 साल बीत गए हैं उनको गए. आज उनका जन्मदिन है. याद आती है, हम यूट्यूब का रुख करते हैं.

‘तू नी बोलदी रकाने तू नी बोलदी तेरे च तेरा यार बोलदा’. गाने में ज़ोरदार आवाज और वीडियो एकदम देसी. आज भी किसी पार्टी में ये गाना बजता है तो आदमी-औरत, बूढ़े-बच्चे सब चार्ज-अप हो जाते हैं. सुनिए आपने पार्टी फंक्शन में बहुत सुना होगा.

आज भी उनके गाने वैसे ताज़ादम हैं. यहां वो दलील न लगाएं है कि जब कोई चला जाता है तो ज्यादा अच्छा लगने लगता है. यह गायक सही में फॉरएवर वाला है. ‘लक टुनूं-टुनूं, लक टुनूं टुनूं.’

बिंदरखिया ने 90 के दशक की शुरुआत से ही नाम कमाना शुरू कर दिया था. ऊंची हेक. तीखी आवाज़ और गले के अंतिम छोर से आती बुलंद और सुरीली आवाज. पर अब भी कुछ खाली खाली सा था. कुछ इनकंप्लीट. तो उन्होंने शमशेर संधू और अतुल शर्मा के संग कुछ एलबम निकाली. शमशेर एक के बाद एक बढिया गाने लिखते रहे, अतुल म्यूज़िक देते रहे और बिंदरखिया नित-निखरती आवाज में गाते रहे. ये तिकड़ी उन्हें बहुत आगे ले गई. मिड नाइंटीज में बिंदरखिया की एलबम आई ‘दुपट्टा तेरा सत रंग दा’. ये एक टर्निंग प्वांट था उनके करियर में. टाइटल ट्रैक खूब चला. इतना कि UK में भी पहले नंबर पर रहा.

क्या खास था बिंदरखिया के गानों में?

इनके गानों में ‘सरदारी’ और आशिकी साथ-साथ चलती थी. और फिर लगता था पॉप म्यूज़िक का तड़का. जैसे कि आप गाना सुनो ‘जट दी पसंद’.

शांत रहने वाला ये गायक खूब सेंसेटिव भी था. इनका गाना है ‘पेके हुंदे मावां नाल.’ मतलब मायके तो तब तक ही होते हैं जब तक मां ज़िंदा होती है.

और बिंदरखिया असली परफॉर्मर था. प्लेबैक में भी हिट. और मंच पर तो रंग देखने लायक होता था.

बोलियां सुनने का शौक है तो ये कुछ और भी है.

बैंस से बिंदरखिया तक का सफर

15 अप्रैल 1962 में एक छोटे से गांव ‘बिंदरख’ में जन्मे थे सुरजीत. असली नाम था, सुरजीत सिंह बैंस. पापा पहलवान थे इसलिए चाहते थे कि सुरजीत भी पहलवान के तौर पर नाम कमाए. सुरजीत भी खूब कुश्ती लड़े. कॉलेज के दिनों में कुछ चैंपियनशिप भी जीते. शुरुआती दिनों में वह कालेज की भांगड़ा टीम के लिए बोलियां डालते थे. वहीं से शुरुआत हुई. उसके बाद लोग सुरजीत सिंह बैंस को भूल गए,  उन्हें याद रहा तो बिंदरख का एक मुंडा- बिंदरखिया. सुरजीत बिंदरखिया.

साल 2003 में एलबम आई ‘इश्के दी अग’. इसके गाने भी एक से एक धाकड़. हेडफोन लगाकर फुल वॉल्यूम में सुनें. नाचने को मन करेगा. सुनेंगे तो समझेंगे कि क्यों यह बंदा पंजाबी म्यूजिक का डीजे किंग कहा जाता था.

इस एलबम में एक गाना और भी था. सैड सॉन्ग. ‘मैं कल तक नहीं रहना’. मतलब अब मुझे और नहीं रहना.

बिंदरखिया के ये बोल कुछ ही दिनों बाद सच हो गए. शुक्रवार की वो रात शायद कई लोगो के दिलों में एक दर्द देने तो उतावली बैठी थी. महज़ 41  की उम्र में 17 नवंबर, 2003 को इस फनकार ने हमें अलविदा कह दिया .उनकी विदाई और आखिरी सलामी के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा. पंजाबी म्यूजिक के अमिताभ बच्चन गुरदास मान ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कुछ पंक्तियां गाईं:

“माँ बोली इतिहास दा वेहड़ा जद वी गूंजेगी, बिंदरखिये दी याद किसे कोने विच गूंजेगी… जदो दुपट्टे सत रंगें नाल अंखियां पूंजेगी, वे बिंदरखिये दी आवाज़ किसे कोने विच गूंजेगी… तू सुरजीत रहेगा दुनिया तैनू ढूंढेगी, वे बिंदरखिये दी आवाज़ साडे दिल विच रहेगी”


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