Submit your post

Follow Us

वो कैप्टन जिसे अपने ही देश, अपने ही शहर में गोलियों से भून दिया गया

तारीख- 2 जुलाई 1994. जगह- ड्रग लॉर्ड पाब्लो एस्कोबार का शहर मेडेइन. सुबह ढाई से तीन के बीच का समय. एल इंडिओ नाम के नाइटक्लब की पार्किंग. लोगों ने छह बार गोली चलने की आवाज सुनी, हर गोली के साथ कोई चिल्लाता- Goaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaal. गोल में इतने A इसलिए हैं क्योंकि लैटिन अमेरिका, यानी दक्षिणी अमेरिकी कॉमेंट्रेटर गोल होने पर ऐसे ही चिल्लाते हैं. कोलंबिया के इस दूसरे सबसे बड़े शहर के लोगों के लिए गोलियों की आवाज कोई बड़ी बात नहीं थी.

गोली चलाने वालों ने अपना काम किया और वहां से चले गए. कई मिनटों तक कोई गोली चलने वाली जगह पर झांकने भी नहीं आया. काफी देर बाद लोग आए. देखा कि उनकी नेशनल फुटबॉल टीम और लोकल क्लब का कैप्टन आंद्रेस एस्कोबार खून से लथपथ,  अपनी ही गाड़ी में पड़ा था. लोग उसे लेकर तुरंत अस्पताल की ओर भागे लेकिन कप्तान बच नहीं पाया.

इस घटना से ठीक सात महीने पहले यानी 2 दिसंबर, 1993 को पाब्लो एस्कोबार की मौत हो गई थी. उसके मरने के बाद के इन हालातों के बारे में पाब्लो के भाई रॉबर्टो एस्कोबार ने कहा था.

‘बॉस मर गया था अब सबको बॉस बनना था.’

बाद में रामाधीर सिंह ने इसे और आसान तरीके से बताया था,

‘सबके दिमाग में अपनी पिच्चर चल रही है, सबको अपनी पिच्चर में हीरो बनना है.’

उस वक्त कोलंबिया, खासतौर से मेडेइन में सबको हीरो बनना था. ये कोलंबिया के इतिहास का ये वो दौर था जब सड़क पर आम लोगों से ज्यादा गुंडे-बदमाश घूम रहे थे. देश के हालात बहुत खराब थे. ड्रग्स, हिंसा एकदम आम बातें थीं. पाब्लो एस्कोबार की मौत ने माहौल को और खराब कर दिया था. ये कुछ ऐसा था जैसे एक छाते के अंदर बहुत से सांप जी रहे थे और तभी छाता उड़ गया, अब सारे सांप आज़ाद थे.

————————————————————————

फुटबॉल लैटिन अमेरिका का सबसे बड़ा खेल है और इस खेल का दिग्गज यूं, पार्किंग में सरेआम मार दिया गया. आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों हुआ? इसे जानने के लिए आपको चलाना होगा यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका.

# द टू Escobars

साल 1994 की 17 जून को अमेरिका में फीफा वर्ल्ड कप शुरू हुआ. यह 15वां वर्ल्ड कप था. इसके शुरू होने से पहले पेले ने कोलंबिया को फेवरेट बता दिया था. क्वॉलिफिकेशन राउंड में कोलंबिया ने सिर्फ दो गोल खाए थे. करो या मरो वाले मैच में उन्होंने अर्जेंटीना को 5-0 से पीटा था. माराडोना के देश की यह सबसे बुरी हार थी. ऐसे में लोग पेले की बात से सहमत भी थे. लेकिन हर अंदाजा सही होना संभव नहीं होता.

Pablo Escobar’s Medellin Cartel made $5 billion per year in USA in the 80s. He controlled 80% of global cocaine sales. Rats ate $2.1bn of his money yearly. He built his own prison after ‘surrendering’. It had a football pitch, bar, jacuzzi, waterfall, strippers, spa, casino. pic.twitter.com/vJSt7RNkUw

देश के हालात से परेशान प्लेयर्स वर्ल्ड कप जीतकर अपने देश की इमेज सुधारना चाहते थे, लोगों को बताना चाहते थे कि ड्रग्स और हिंसा से हटकर भी कोलंबिया का वजूद है. लेकिन यह इतना आसान नहीं था. वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले ही उन्हें झटके लगने शुरू हो गए थे. साल 1993 में उनके सुपरस्टार गोलकीपर रेने इगीता को सात महीनों की जेल हो गई. उन्हें यह सजा एक किडनैपिंग में शामिल होने के लिए मिली थी. हालांकि उनका दावा था कि वह पाब्लो एस्कोबार से मिलने जेल में गए थे इसलिए उन्हें यह सजा मिली.

# दिखा ‘काला साया’

ख़ैर कारण जो भी रहा हो. इगीता 94 वर्ल्ड कप से बाहर हो गए. उनकी जगह मिली ऑस्कर कोर्डोबा को. कोर्डोबा भी बेहतरीन गोलकीपर थे, लेकिन यह कुछ ऐसा था जैसे लक्ष्मण के बाहर होने पर हेमंग बदानी को इंडियन टेस्ट टीम में शामिल कर लिया जाए. ऐसे हाल में उतरी कोलंबिया के सामने थी रोमानिया. कोलंबिया ने 18 जून, 1994 को अपना पहला मैच खेला.

कोलंबियन प्लेयर्स ने बहुत कोशिश की लेकिन अच्छी शुरुआत के बाद भी मैच हार गए. रोमानिया ने इस मैच में कोलंबिया की मिडफील्ड को टार्गेट किया. उन्होंने कोलंबियन मिडफील्ड को सही से ऑपरेट करने से रोका और मैच आसानी से 3-1 से जीत लिया. कोर्डोबा इस मैच में रोमानिया के प्लेयर्स के आगे बेहद कमजोर दिखे.

इस हार ने फैंस से ज्यादा कोलंबियन ड्रग लॉर्ड्स को तकलीफ दी. अपनी टीम की जीत पर उन्होंने लंबे-लंबे दांव खेले थे. इस एक हार ने करोड़ों-अरबों का नुकसान करा दिया. इस बारे में कोलंबियन पत्रकार सेजार वेलास्क्वेज ने ESPN से कहा था,

‘यह एक मनोवैज्ञानिक क्राइसिस की शुरुआत थी. और टीम इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी. कई जुआरियों को भारी चपत लगी थी. और अब यहां एक ‘काला साया’ जैसा दिखने लगा था. यह साया टीम की परफॉर्मेंस से बेहद नाराज़ था.’

फिर आई 22 जून. कोलंबिया को अब होस्ट, अमेरिका से भिड़ना था. यह मैच उन्हें हर हाल में जीतना ही था, एक और हार का मतलब वर्ल्ड कप से बाहर होना था. टीम काफी प्रेशर में थी. और ये प्रेशर सिर्फ मैच का नहीं था. टीम के डिफेंडर लुइस फेर्नान्डो अरेर्रा के भाई का कोलंबिया में मर्डर हो गया था.

# रो पड़े कोच

इस मैच से पहले कोलंबिया ने अमेरिका के साथ कई मैच खेले थे. हर बार उन्हें जीत मिली थी. इसलिए टीम इतने प्रेशर में भी टीम को उम्मीद थी. मैच से पहले हुई टीम मीटिंग खामोशी में ही बीत गई, किसी ने एक शब्द नहीं कहा. सबसे लास्ट में मीटिंग में आए कोच फ्रैंसिस्को मतुराना रो रहे थे. उन्हें रोता देख प्लेयर्स और दुखी हो गए. उनके लिए यह कुछ ऐसा था जैसे उनका पिता रो रहा हो.

दरअसल टीम को धमकी मिली थी कि अगर  बर्राबास गोमेज़ (गैब्रिएल हाइमे गोमेज़) खेले तो सभी खिलाड़ियों को मार दिया जाएगा. खिलाड़ियों के कमरों की टीवी स्क्रीन पर धमकीभरे मैसेजेस लिखे थे. किसी ने होटल की टीवी स्क्रीन्स को प्रोग्राम कर दिया था. इस बात से खिलाड़ी बेहद डरे हुए थे. गोमेज़ टीम के अहम खिलाड़ी थे. लेकिन कोच सबकी जान खतरे में नहीं डालना चाहते थे, इसलिए उन्होंने गोमेज़ को टीम से निकाल दिया.

घबराए प्लेयर्स ने अपने-अपने घरों पर फोन किया. पुलिस सुरक्षा मांगी. पुलिस ने हर प्लेयर के घर पर अपने दस्ते भेजे. ऐसी दहशत के बीच प्लेयर्स अपने जीवन का शायद सबसे बड़ा मैच खेलने उतरे. कोलंबिया ने मैच में शुरुआत अच्छी की. अमेरिकी टीम को काफी मुश्किल हो रही थी. लेकिन तभी मैच के 35वें मिनट में एक अप्रत्याशित घटना घट गई.

# हो गई ग़लती

अमेरिकी मिडफील्डर जॉन हार्क्स ने अपने साथी अर्नी स्टीवार्ट की ओर एक लो क्रॉस धकेला. बॉल लहराकर उनकी ओर बढ़ी. बॉल पर नज़र गड़ाए कोलंबियन गोलकीपर कोर्डोबा भी अपनी जगह से तेजी से उस दिशा के गोलपोस्ट की ओर बढ़े. लेकिन बॉल स्टीवार्ट तक पहुंच नहीं पाई. उससे पहले ही कोलंबियन कप्तान आंद्रेस एस्कोबार उसे रोकने के लिए झपटे. एस्कोबार ने डाइव लगाकर बॉल को स्टीवार्ट तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की. इधर कोर्डोबा स्टीवार्ट की तरफ के गोलपोस्ट की ओर बढ़ चुके थे.

उनका शरीर लय में था और तभी बॉल आंद्रेस के पैर से लगकर गोल की तरफ बढ़ चली. कोर्डोबा ने इसे देखा लेकिन मानव शरीर की सीमाओं के आगे उन्हें झुकना पड़ा. वह वापस नहीं मुड़ पाए और उसी पल हताशा में पीठ के बल गिर गए. बॉल गोल में चली गई और इसे देख आंद्रेस भी निराश हो गए.

इस आत्मघाती (फुटबॉल की भाषा में ओन गोल) ने कोलंबियन प्लेयर्स को हिला दिया. उनका आत्मविश्वास चूर-चूर हो चुका था. किसी भी कोलंबियन ने सोचा तक नहीं था कि अमेरिका उन्हें टक्कर दे पाएगा. यह भरोसा जिन प्लेयर्स के चलते आया था, उनमें आंद्रेस प्रमुख थे. अब आंद्रेस के चलते ही कोलंबिया मैच में पिछड़ रहा था. मैच के सेकंड हाफ में अमेरिका के लिए अर्नी स्टीवार्ट ने गोल कर स्कोर 2-1 कर दिया. सब्सिट्यूट आए स्ट्राइकर एडोल्फो वलेंसिया ने मैच के 90वें मिनट में गोल किया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. कोलंबिया ने मैच गंवा दिया.

इस हार ने कोलंबियन टी फैंस, के दिल और ड्रग लॉर्ड सैंटियागो गयान का बैंक बैलेंस तोड़ दिया. बाद में कोलंबिया ने स्विटजरलैंड को 2-0 से हराकर अपना आखिरी लीग मैच जीता लेकिन इसका कोई फायदा नहीं था. वो बाहर हो चुके थे. पूरे देश का लाडला आंद्रेस अब वहां विलेन बन चुका था. सबने आंद्रेस को अमेरिका में ही कुछ दिन रुकने की सलाह दी. लेकिन आंद्रेस ने कहा कि वे मेरे लोग हैं, मुझे उनका सामना करना चाहिए. आंद्रेस ने कहा,

‘ज़िंदगी यहां खत्म नहीं होती’

और कोलंबिया लौट आए. इस हार के ठीक 10वें दिन आंद्रेस अपने दोस्तों के साथ एल इंडियो में पार्टी करने पहुंच गए. यहां उनकी सैंटियागो और उसके भाई पेड्रो से बहस हुई जिसके बाद उनके बॉडीगार्ड हम्बर्टो कास्त्रो मुनोज़ ने आंद्रेस की हत्या कर दी. बाद में गिरफ्तार हुए मुनोज़ ने हत्या की बात कबूली. उसे 1995 में 43 साल की सजा भी हुई. लेकिन फिर उसे 2005 में ही जेल से रिहा कर दिया गया क्योंकि जेल में उसका व्यवहार अच्छा था.

आंद्रेस एस्कोबार चले गए. उनकी हत्या के बाद उनकी अंतिम यात्रा में इकट्ठा हुए लाखों लोग एक स्वर में कह रहे थे- काश पाब्लो जिंदा होता! सोचिए, जिस पाब्लो ने पूरे देश को सालों प्रताड़ित किया. जिसके चलते पूरी दुनिया में लोग कोलंबिया के नागरिकों को ड्रग्स से जोड़ने लगे थे. लोग उसके जिंदा होने की दुआ कर रहे थे. क्यों?

क्योंकि पाब्लो के लिए फुटबॉलर्स दोस्त थे. वो उनकी बहुत इज्जत करता था. उसके होते हुए कोई भी इंसान, आंद्रेस या किसी और प्लेयर को छूने की हिम्मत भी ना कर पाता. ये रुतबा था सिर्फ 27 साल के आंद्रेस का कोलंबिया में कि लोग उनके लिए पाब्लो जैसे शैतान को भी झेलने को तैयार थे. साल 2002 में आंद्रेस की यादें संजोने के लिए मेडेइन शहर में उनका एक पुतला लगाया गया. फुटबॉल प्रेमी आज भी इस पुतले के आसपास घूमते और अपने हीरो को याद करते देखे जा सकते हैं.


वो बच्चा, जो 21 की उम्र में ‘कौड़ियों’ में बिककर इटली आया, 25 में सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर बन गया

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

चीन और जापान जिस द्वीप के लिए भिड़ रहे हैं, उसकी पूरी कहानी

आइए जानते हैं कि मामला अभी क्यों बढ़ा है.

भारतीयों के हाथ में जो मोबाइल फोन हैं, उनमें चीन की कितनी हिस्सेदारी है

'बॉयकॉट चाइनीज प्रॉडक्ट्स' के ट्रेंड्स के बीच ये बातें जान लीजिए.

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

मधुबाला को खटका लगा हुआ था इस हीरोइन को दिलीप कुमार के साथ देखकर

एक्ट्रेस निम्मी के गुज़र जाने पर उनको याद करते हुए उनकी ज़िंदगी के कुछ किस्से

90000 डॉलर का कर्ज़ा उतारकर प्राइवेट जेट खरीद लिया था इस 'गैंबलर' ने

उस अमेरिकी सिंगर की अजीब दास्तां, जो बात करने के बजाए गाने में ज़्यादा कंफर्टेबल महसूस करता था

YES Bank शुरू करने वाले राणा कपूर कौन हैं, जिन्होंने नोटबंदी को 'मास्टरस्ट्रोक' बताया था

यस बैंक डूब रहा है.

सात साल पहले केजरीवाल ने वो बात कही थी जो आज वो ख़ुद नहीं सुनना चाहते

बरसों पुरानी इस बात की वजह से सोशल मीडिया पर घेर लिए गए हैं.

क्या भारत सरकार से पूछे बिना पाकिस्तान चली गई इंडियन कबड्डी टीम?

अब ढेरों खेल-तमाशा हो रहा है.