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24 साल पहले का वो दिन, जब श्रीलंका ने सारी दुनिया में गर्दा काट दिया था

17 मार्च 1996 की तारीख कोई भी क्रिकेट फैन भूल ही नहीं सकता. किसी हाल में नहीं. वो दिन उनकी परीकथाओं वाले सपने साकार होने का दिन जो है. ये वही दिन है, जब क्रिकेट की दुनिया के तमाम धुरंधरों को धूल चटाते हुए श्रीलंका विश्वविजेता बना था.

किसी बड़े टूर्नामेंट में किसी अंडरडॉग टीम द्वारा एकाध उलटफेर कर देना कोई बड़ी बात नहीं है. केन्या हो, बांग्लादेश हो या आयरलैंड हो, अपने अच्छे दिन पर कमज़ोर टीमों के बड़ी टीमों पर भारी पड़ने के उदाहरण बहुत से हैं. लेकिन ये एकाध मैच तक ही सीमित सिलसिला है. अगले मैच से फिर सब पहले जैसा हो जाता है. श्रीलंका के केस में ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने सीधे वर्ल्ड कप जीत लिया. वो भी बिना कोई मैच हारे. ये अभूतपूर्व सफलता थी.

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श्रीलंका का उस वर्ल्ड कप में सफ़र

1996 का वर्ल्ड कप श्रीलंका ने सिर्फ जीता नहीं था बल्कि अथॉरिटी से जीता था. अपने ग्रुप में टॉप पर रही थी श्रीलंका. हालांकि इसमें एक पेच भी है. ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज ने सुरक्षा कारणों से श्रीलंका में खेलने से मना कर दिया था. नतीजतन श्रीलंका को वॉक ओवर मिला. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि श्रीलंका अगले राउंड में किसी की मेहरबानी से गई थी. उन्होंने अपने खेले हुए सारे मैच जीते थे और उनका नेट रन रेट दूसरे नंबर पर रही ऑस्ट्रेलिया से लगभग दोगुना था. श्रीलंका क्वार्टर-फाइनल में सीना चौड़ा करके गई थी.

श्रीलंकन टीम के कॉन्फिडेंस का लेवल इस वाकये से भी पता चलता है. इंडिया के खिलाफ दिल्ली में ग्रुप मैच था. इंडिया ने 271 रन बनाए. इनिंग्स ब्रेक में कोच डेव व्हाटमोर ने महानामा से कहा, “अगर हम 230-240 भी बना लें तो ठीक होगा.” महानामा ने कलपकर जवाब दिया, “हद है, हम सारे ही बना सकते हैं.” व्हाटमोर ने जान लिया कि टीम का कॉन्फिडेंस शबाब पर है. यही तो वो चाहते थे. उस मैच तक कप्तान अर्जुना रणतुंगा उम्मीद करते थे कि श्रीलंका सेमी-फाइनल तक पहुंच पाएगी. इंडिया को हारने के बाद उन्हें विश्वास हो गया कि वो कप उठा सकते हैं.

डेव व्हाटमोर.
डेव व्हाटमोर.

नॉक आउट स्टेज में दिखाया कमाल

ग्रुप स्टेज में एकाध मैच हारने की लिबर्टी रहती है लेकिन नॉक आउट स्टेज में हारे तो सीधा बाहर. श्रीलंका ने यहां धुरंधरों को हराया. क्वॉर्टर फाइनल में उनके सामने क्रिकेट की जन्मदाता टीम थी. इंग्लैंड. श्रीलंका ने फैसलाबाद की स्लो पिच पर पहले इंग्लैंड के गले में स्पिन का फंदा कसा. फिर उनका बनाया 235 का स्कोर बेहद आसानी से लगभग दस ओवर पहले ही हासिल कर लिया.

फिर आया वो कंट्रोवर्शियल मैच, जो श्रीलंका के साथ-साथ इंडिया को भी याद है. कोलकाता का बदनाम सेमी-फाइनल. खचाखच भरे ईडन गार्डन में मज़बूत टीम इंडिया के सामने थी श्रीलंका. मैदान में अज़हर की टीम और मैदान से बाहर आक्रामक जनता. सबसे लोहा लिया श्रीलंका ने. पहले बैटिंग करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत बहुत ख़राब रही थी. एक रन पर दोनों ओपनर पवेलियन लौट चुके थे. बावजूद इसके श्रीलंका ने 251 रन बनाए. डिसिल्वा, महानामा, रणतुंगा, तिलकरत्ने सबने योगदान दिया. जवाब देने उतरी टीम इंडिया श्रीलंका के स्पिन के जाल में बुरी तरह फंस गई.

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ये मैच भारत की मेजबानी पर काला धब्बा है.

सचिन तेंडुलकर के अलावा किसी ने संघर्ष नहीं किया. उनके आउट होने के साथ अगले 22 रन में सात विकेट गिर चुके थे. आगे का ड्रामा तो सबको पता है. ईडन गार्डन पर हुआ दंगा, विनोद कांबली का रोना और मैच रेफरी का श्रीलंका को विजेता घोषित करना. श्रीलंका को जीता हुआ भले ही घोषित कर दिया गया हो, लेकिन ये तोहफा नहीं था. मैच पूरा भी होता, तो भी श्रीलंका ही जीतती.

यादगार फाइनल

जब 17 मार्च 1996 को श्रीलंका लाहौर के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के सामने जा खड़ी हुई, तो बहुतों ने इसे पहाड़ और चींटी का मुकाबला बताया. दिन ख़त्म होते-होते मंज़र बदल गया था.

टॉस श्रीलंका ने जीता. ऑस्ट्रेलिया से कहा तुम लोग खेलो. ऑस्ट्रेलिया खेली और जम के खेली. रिकी पोंटिंग और मार्क टेलर की पारियों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया एक वक़्त बहुत स्ट्रोंग पोजीशन में दिखाई दे रही थी. 26वें ओवर में 137 रन बन चुके थे और सिर्फ एक बंदा आउट हुआ था.

300 पक्के लग रहे थे. तभी अरविंद डिसिल्वा की गोल्डन आर्म हरकत में आ गई. उन्होंने टेलर और पोंटिंग दोनों को आउट करके मैच में श्रीलंका की वापसी की. वहां से मुरलीधरन, जयसूर्या, धर्मसेना और डिसिल्वा ने मिलकर वो ब्रेक लगाई कि तीन सौ तो दूर ढाई सौ भी ना बने. किसी तरह 241 रन तक पहुंची ऑस्ट्रेलिया. आधी बाज़ी जीत ली गई थी.

अरविंद डिसिल्वा.
अरविंद डिसिल्वा.

जवाब देने उतरी श्रीलंका के ओपनर फिर जल्दी आउट हो गए. लेकिन फिर वही आदमी अड़ गया, जिसने बोलिंग करते वक़्त ऑस्ट्रेलिया को तंग किया था. अरविंद डिसिल्वा. बोलिंग में तीन विकेट लेने के बाद अगले ने बैटिंग में भी झंडे गाड़े. वर्ल्ड कप फाइनल जैसे बड़े स्टेज पर शतक मार दिया. श्रीलंका ने आसानी से मैच जीत लिया. अभी 22 गेंदें बाक़ी थी.

वो दिन है और आज का दिन है, श्रीलंका की क्रिकेट यात्रा का ग्राफ ऊपर ही जा रहा है. कभी अंडरडॉग माने जानेवाली श्रीलंका अब एक प्रमुख टीम है. ये जीत श्रीलंका का टीम एफर्ट तो था हा, साथ ही अर्जुन रणतुंगा की अद्भुत कप्तानी की भी थी. उस आदमी ने अपनी टीम में बारूद भर दिया था. आतिशबाज़ी तो होनी ही थी.

अपनी वर्ल्ड कप जीत की 22वीं एनिवर्सरी से पहली रात श्रीलंका निदाहस ट्रॉफी में बांग्लादेश से हार गया. उस जीत के बाद बांग्लादेश की टीम ने जो उत्पात मचाया, वो क्रिकेट को शर्मसार करने वाला था. बांग्लादेश को चाहिए कि वो ग्रेसफुली जीतना सीखे, श्रीलंका से. और श्रीलंका को चाहिए कि वो बांग्लादेश की बदतमीज़ी को भुलाकर अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाए.


 

मैच का ये वीडियो देखिए-

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