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Reliance vs Amazon: जेफ बेजोस और मुकेश अंबानी आखिर किस बात पर झगड़ रहे हैं?

आजकल देश में एक बहुत बड़ा झगड़ा चल रहा है. अरे नहीं, पेगासस वाला नहीं. उससे भी बहुत बड़ा. इसमें एक तरफ है दुनिया का सबसे अमीर आदमी जेफ बेजोस और दूसरी तरफ है भारत का सबसे अमीर धन्ना सेठ मुकेश अंबानी. हम बात कर रहे हैं एमजॉन और रिलायंस के झगड़े की. हुआ ये है कि रिलांयस की हजारों करोड़ की डील में एमजॉन ने टांग अड़ा दी है. मामला कोर्ट में पहुंच गया है और तगड़ी रस्साकशी जारी है. आइए जानते हैं कि भारत के कानूनी अखाड़े में चल रही दुनिया के दो धनकुबेरों के दंगल की कहानी.

हजारों करोड़ की दास्तान-ए-जंग

साल 1991 की बात है. उदारीकरण की नीति ने विदेशी कंपनियों के लिए देश के दरवाजे खोले और बिजनेस जगत में तेजी से बदलाव आने लगा. दुनियाभर की बड़ी कंपनियां भारत में बाजार खोजने के लिए लाइन लगाने लगीं. साथ ही देश में भी एक बड़ा मध्यमवर्ग उभरा और उसी के साथ उभरा एक नया बाजार. बड़े बिजनेस ग्रुप की रिटेल दुकानें. मतलब लोकल परचून-किराना और कपड़े-लत्ते की बजाय घर के आसपास एक ऐसा स्टोर, जिसमें सब मुफीद कीमत में आपके सामने हाजिर था.

इस मॉडल के पहरुआ बने किशोर बियानी. BIG BAZAAR के जरिए वे सही मायनों में रिटेल किंग बन गए. उनका रिटेल चेन ब्रैंड घर-घर पहुंच गया. एक छोटी कपड़े की दुकान चलाने वाले के पोते ने ऐसा काम कर दिखाया था, जो पहले किसी ने नहीं किया था. साल 2001 से शुरू हुए बिग-बाजर के सफर को 2008-09 में आई वैश्विक आर्थिक मंदी के चलते कुछ धक्का तो लगा, लेकिन सफर जारी रहा. ये बात अलग है कि इस उठा-पटक और जद्दोजहद में किशोर बियानी का फ्यूचर ग्रुप भारी बैंक लोन के तले पिसने लगा.

ये मुश्किलें आसान होने का नाम नहीं ले रहीं थीं कि रिटेल मार्केट पर दूसरे प्लेयर्स की नजर भी पड़ी. इनमें सबसे आगे थे देश के बड़े बिजनेसमैन मुकेश अंबानी. ऑयल से लेकर मोबाइल तक के मार्केट में मुकेश अंबानी की तूती बोल रही थी तो रिटेल मार्केट क्यों छूटे. हालांकि इस मैदान में उतरने में उन्होंने कुछ देरी कर दी थी.

ये सब चल ही रहा था कि एक दूसरी तरह के रिलेट मार्केट से बिग-बाजार को चुनौती मिलने लगी. वो था ऑनलाइन बिजनेस पोर्टल. दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन मार्केट एमजॉन भारत में अपने पांव पसार रही थी. कस्टमर के लिए सब कुछ बड़ा आसान हो गया. घर बैठ के सामान ऑर्डर करो और अगले दिन सामान घर पर. लोगों को लगा अब कौन जाए बिग-बाजार, सब घर पर ही मंगा लेते हैं.

फ्यूचर ग्रुप को भी ये बात समझ में आने लगी कि ऐसे सर्वाइव करना मुश्किल है. उसने साल 2019 में एमजॉन के साथ एक डील की, जिसमें बिग-बाजार को भी ऑनलाइन लाने का जुगाड़ शुरू हुआ. हालांकि बाद में स्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि किशोर बियानी को अपना फ्यूचर ग्रुप मुकेश अंबानी को 24,713 करोड़ रुपए में बेचने का फैसला करना पड़ा. ये दोनों ही डील ऐसी उलझीं कि मामला कोर्ट में पहुंच गया है.

Kishor Biyani Big Bazar
भारत में रिटेल क्रांति लाने वाले किशोर बियानी की कंपनी फ्यूचर रिटेल्स कर्ज के फेर में ऐसी फंसी कि उसे एमजॉन से डील करनी पड़ी. आखिर में फ्यूचर रिटेल्स को खरीदने का फैसला मुकेश अंबानी ने कर लिया.

क्या है फ्यूचर-रिलायंस की डील?

अगस्त 2020. भारत के सबसे लोकप्रिय रिलेट ब्रैंड बिग-बाजार और उसे चलाने वाले फ्यूचर ग्रुप की हालत पतली होने लगी. इसमें दो बातों का बड़ा योगदान था. पहले ही बियानी का फ्यूचर ग्रुप भारत के सबसे बड़ी बैंक एसबीआई के लोन के बोझ के तले दबा जा रहा था, उस पर आ गया कोरोना. इसके चलते मार्च 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा हुई और साथ ही बिग-बाजार पर भी ताला लगने की पटकथा तैयार हो गई. 2 महीने से ज्यादा के लॉकडाउन से बिग-बाजार, पैंटलून, ब्रैंड फैक्ट्री जैसे आउटलेट की हालत खराब हो गई.

दूसरी तरफ बियानी एसबीआई का लोन चुकाने के लिए छटपटा रहे थे और इसके लिए कई बिजनेस घरानों से बातचीत कर रहे थे. लेकिन कहीं बात बन नहीं रही थी. ऐसे में मुकेश अंबानी ने दांव खेला. उन्होंने फ्यूचर रिटेल के सारे ऑपरेशन 24,713 करोड़ रुपए में खरीदने का फैसला किया. ये डील फ्यूचर रिटेल्स, रिलायंस रिटेल और फैशन स्टाइल के बीच हुई थी. डील के मुताबिक, रिटेल, होलसेल, लॉजिस्टिक और गोदाम सब मुकेश अंबानी को मिलने थे. अभी बियानी को ‘Congratulations’ और अंबानी को ‘Well Done’ कहने वाले थके भी नहीं थे कि एमजॉन ने कह दिया, ‘ये सौदा नहीं हो सकता.’ उसने कहा कि ये डील बियानी के फ्यूचर ग्रुप और एमजॉन के बीच हुए करार का खुला उल्लंघन है.

Mukesh Amabani
मुकेश अंबानी की कंपनी ने बियानी की कंपनी फ्यूचर ग्रुप का पूरा रिटेल बिजनेस खरीद लिया.(फोटो: इंडिया टुडे)

बियानी के फ्यूचर ग्रुप और बेजोस के एमजॉन की क्या डील थी?

साल 2019 आते-आते फ्यूचर ग्रुप के मुखिया किशोर बियानी को अहसास हो गया था कि भविष्य तो ऑनलाइन का ही है. दूसरी तरफ एमजॉन को भी देश के उन हिस्सों में फास्ट डिलीवरी में दिक्कत हो रही थी, जहां फ्यूचर ग्रुप मौजूद था. ऐसे में दोनों ने एक डील की. एमजॉन ने फ्यूचर रिलेट की प्रमोटर फर्म फ्यूचर कूपॉन का 49 फीसदी हिस्सा खरीद लिया. इसके लिए एमजॉन ने 2000 करोड़ रुपए चुकाए. इस डील में दो बातों पर रजामंदी हुई.

पहली- फ्यूचर रिटेल्स भी अपने प्रॉडक्ट एमजॉन के आनलाइन मार्केट पर उपलब्ध करा सकेगा.

दूसरा- एमजॉन देश की कुछ सिलेक्टेड जगहों पर कस्टमर के ऑर्डर करने के 2 घंटे के भीतर सामान डिलीवरी करेगा और उसमें फ्यूचर ग्रुप मदद करेगा. ये काम फ्यूचर ग्रुप बखूबी कर भी सकता था, क्योंकि उसके देशभर में 1500 से ज्यादा रिटेल स्टोर मौजूद हैं.

इस सौदे में एमजॉन को ‘कॉल’ सुविधा का विकल्प भी दिया गया था. इसके जरिए 3-10 साल का एग्रीमेंट करके एमजॉन फ्यूचर कूपॉन का पूरा या आंशिक हिस्सा खरीद सकता था. लेकिन जैसे ही फ्यूचर ग्रुप ने रिलायंस के साथ डील की, एमजॉन बिफर गया.

Amazon
दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी एमजॉन के साथ भी किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप ने 2 हजार करोड़ की डील कर रखी है.

एमजॉन इतना नाराज़ क्यों है?

एमजॉन ने फ्यूचर रिटेल्स और रिलायंस रिटेल्स की डील पर कई सवाल उठाए हैं. उसका कहना है कि ये डील ‘प्रतिस्पर्धा न करने’ और ‘राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल’ मतलब ‘पहले मना करने’ के क्लॉज का उल्लंघन है. एमजॉन की ये भी आपत्ति है कि फ्यूचर ग्रुप को अगर किसी थर्ड पार्टी के साथ डील करनी ही थी तो पहले उसे बताना चाहिए था. ये सब कारण बताने के साथ ही भन्नाए एमजॉन ने शेयर मार्केट पर नियंत्रण करने वाली संस्था SEBI, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को चिट्ठी लिख डाली. इसमें फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस ग्रुप की डील को अप्रूव न करने के लिए कहा गया था.

इसके साथ ही एमजॉन मामले को अंतरराष्ट्रीय पंचायत के लिए सिंगापुर इंटरनेशनल ऑर्बिटरेशन सेंटर (SIAC) में लेकर पहुंच गया. SIAC एक ऐसी नॉन प्रॉफिट संस्था है जो दुनियाभर के बिजनेस ग्रुप में होने वाली किसी भी डील में टकराव होने पर बीच-बचाव कराती है. SIAC ने शुरुआती सुनवाई के बाद फ्यूचर-रिलायंस डील पर अंतरिम स्टे दे दिया है. लेकिन भारत में बियानी और अंबानी कह रहे हैं कि कौन SIAC, हम इनको नहीं मानते.

बियानी ने साफ कह दिया है कि एमजॉन खामख्याली में है, बेवजह बड़े-बड़े दावे कर रहा है. उन्होंने कहा है- हमने खाते में 1000 करोड़ रुपए मुकदमेबाजी के लिए अलग से रख लिए हैं. और ये डील तो होकर रहेगी.

और मामला पहुंच गया हाई कोर्ट

किशोर बियानी ने SIAC के फैसले को मानने से इन्कार कर दिया तो एमजॉन दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया. 18 मार्च 2021 को जस्टिस जेआर मिधा की बेंच ने बियानी के फ्यूचर ग्रुप पर SIAC का आदेश न मानने पर पेनल्टी लगा दी. कोर्ट ने ये भी कहा कि बियानी की सारी संपत्ति अटैच कर दी जाए और कंपनी पर रोक लगाने का कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया. इस फैसले के तीन दिन बाद बियानी हाई कोर्ट की बड़ी बेंच में पहुंच गए. 22 मार्च को डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगा कर बियानी को राहत दे दी.

इन सबसे पहले एमजॉन एक और कानूनी दांव चल चुका था. उसने फरवरी में ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को फैसला लेने से रोकने को कह दिया था. 2016 में बना ये ट्रिब्यूनल कंपनियों के बीच विवाद और उनके मर्जर पर मुहर लगाता है. 22 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप की डील को अप्रूव न करने का आदेश NCLT को दे दिया. कोर्ट ने कहा कि इस पर जब हम फाइनल फैसला दे दें, तब आगे की कार्रवाई की जाए.

Delhi High Court
रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप की डील के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मामला पहुंचा. कोर्ट ने बियानी के खिलाफ फैसला सुना दिया.

सुप्रीम कोर्ट से लगा अंबानी-बियानी को झटका

सुप्रीम कोर्ट में मामला पलट गया है. 6 अगस्त 2021 को शीर्ष अदालत ने कंपनियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि SIAC का फैसला भारत में भी लागू होगा. लोगों को लगा कि चलो मामला निपटा, लेकिन नहीं. अब 13 अगस्त को फिर फ्यूचर ग्रुप के प्रमोटर दिल्ली हाई कोर्ट के 22 मार्च को दिए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं.

आपके दिमाग में भी यही चल रहा होगा कि आखिर ये मामला सुलटेगा कैसे. अब बस एक ही उम्मीद है. सिंगापुर के इंटरनेशनल ऑर्बिटरेशन सेंटर ने मामले की सुनवाई खत्म कर ली है. उसका फैसला जैसे ही आएगा, इस करोड़ों के झगड़े पर तस्वीर कुछ साफ हो सकेगी.


वीडियो – खर्चा पानी: AGR और रिलायंस फ्यूचर डील पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, बैंकों पर भारी

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