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बैंक लॉकर अलॉट करने के नए नियम क्या हैं, जान लीजिए

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किराए पर बैंक लॉकर लेने के नियमों में बदलाव किया है. RBI ने जो नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, उनके तहत लॉकर वाली बिल्डिंग के गिरने, उसमें आग लगने, सेंधमारी, चोरी-डकैती होने या बैंक एंप्लॉयी के फ्रॉड करने पर मुआवजा मिलेगा. ये मुआवजा लॉकर के लिए दिए जाने वाले किराए का 100 गुना तक होगा. वहीं, लॉकर लेने के लिए अब 3 साल का किराया एडवांस में देना होगा. इसके अलावा बहुत कुछ बैंक मैनेजर के हाथ में दे दिया गया है.

इस रिपोर्ट में जानेंगे कि बैंक लॉकर अलॉट कराने के नए नियम क्या हैं और RBI की गाइडलाइन के बाद इस सर्विस में आगे क्या बदलने वाला है.

कैसे मिलेगा बैंक लॉकर?

आप किसी बैंक के कस्टमर हैं. आपने बैंक लॉकर के लिए अप्लाई किया है. Know Your Customer (KYC) भरा है तो आपको सेफ डिजिटल लॉकर/सेफ कस्टडी लॉकर की सुविधा मिल सकती है. हालांकि जिन कस्टमर्स का बैंक में खाता नहीं है, वे भी KYC के नियमों का पालन करते हुए डिजिटल लॉकर/सेफ कस्टडी लॉकर की सुविधा ले सकते हैं.

#बैंक में सेफ डिपॉजिट लॉकर लेने के लिए सबसे पहले ये पता करना होगा कि बैंक में लॉकर उपलब्ध है कि नहीं. RBI ने कहा है कि बैंकों को ब्रांच में खाली लॉकरों की सूची बनानी होगी. ये सभी जानकारी कोर बैंकिंग प्रणाली (CBS) या साइबर सुरक्षा वाली कंप्यूटराइज्ड प्रणाली में डालनी होगी. लॉकर नहीं है तो बैंकों को वेटिंग लिस्ट का नंबर देना होगा.

#लॉकर होने पर बैंक के साथ लॉकर रेंटल एग्रीमेंट करना होगा. इसमें आपकी और बैंक की जिम्मेदारियों और अधिकारों का जिक्र होगा. बैंक हर लॉकर के लिए आने वाली एप्लिकेशन से जुड़े व्यक्ति की पासपोर्ट साइज फोटो लेंगे. साथ ही उनका रिकॉर्ड सुरक्षित रखेंगे.

#लॉकर के आवंटन के समय बैंक कस्टमर के साथ स्टैंप पेपर पर समझौता करेगा. इस समझौते की एक कॉपी लॉकर लेने वाले और दूसरी बैंक के पास रहेगी.

सांकेतिक फोटो (reuters)
सांकेतिक फोटो (reuters)

#लॉकर अकेले या मिलकर लिया जा सकता है. नॉमिनी बनाना जरूरी है. जॉइंट लॉकर होने की सूरत में एक लॉकर होल्डर की मौत होने पर नॉमिनी या दूसरे होल्डर को उसका एक्सेस मिलता है. नॉमिनी के नहीं होने पर कानूनी वारिस को जरूरी डॉक्युमेंट्स देने पर एक्सेस मिलता है.

#बैंक में लॉकर लेने के लिए किराया देना होता है. लॉकर का किराया बैंकों को समय पर मिलता रहे, इसके लिए बैंकों को अलॉटमेंट के समय कस्टमर से टर्म डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी.

#टर्म डिपॉजिट की रकम इतनी हो सकती है कि उससे लॉकर का तीन साल का किराया और जरूरत पड़ने पर उसे तोड़कर खोलने का खर्च निकल आए. अगर लगातार तीन साल तक लॉकर का किराया नहीं मिलता है, तो ये बैंक पर निर्भर करेगा कि वो उसे तोड़कर खोलेगा या नहीं.

#अगर लॉकर का किराया एडवांस में लिया जाता है और कस्टमर लॉकर सरेंडर करता है, तो बैंक ने जो एडवांस किराया लिया है उसे लौटाना होगा.

किस संदेह में ग्राहकों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार?

अवैध सामानों और संपत्तियों को छिपाने के लिए लॉकर के इस्तेमाल की शिकायतें बढ़ रही थीं. अब RBI ने बैंकों से लॉकर समझौते में एक क्लॉज शामिल करने के लिए कहा है. इसके तहत लॉकर में कुछ भी अवैध या कोई खतरनाक वस्तु नहीं रहेगी. यदि बैंक को संदेह है कि किसी ग्राहक ने लॉकर में अवैध या खतरनाक चीज जमा की है, तो उसे ऐसे ग्राहकों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का अधिकार है.

Bank
नियम में हुआ बदलाव पुराने और नए लॉकर दोनों के मामले में 1 जनवरी 2022 से लागू होगा. सांकेतिक तस्वीर (PTI)

बैंकों के मर्जर, क्लोजिंग, शिफ्टिंग या ब्रांच अगर लॉकर को कहीं और शिफ्ट कर रहा है तो इसके लिए बैंक को पब्लिक नोटिस देना होगा. दो अखबारों में. एक वहां की स्थानीय भाषा के अखबार में और एक डेली न्यूज पेपर में. कस्टमर को ऐसी स्थिति में कम से कम दो महीने पहले सूचित करना होगा. प्राकृतिक आपदाओं या किसी अन्य आपात स्थिति के कारण अगर बैंक की शिफ्टिंग होती है तो बैंक अपने कस्टमर्स को जितना जल्दी हो सके सूचना देंगे.

बैंक लॉकर में चोरी की घटनाएं बढ़ रही थीं. इसकी शिकायत RBI को मिली थी. ऐसे बैंक लॉकर की सिक्योरिटी को लेकर RBI ने बैंकों को उचित कदम उठाने को कहा है.

मुआवजा कैसे मिलेगा?

‘एक्ट ऑफ गॉड’ यानी प्राकृतिक आपदा (जैसे भूकंप, बाढ़ या तूफान) आने से नुकसान होने पर बैंकों को मुआवजा नहीं देना होगा. हालांकि, बैंकों को अपने परिसर को इस तरह की आपदाओं से बचाने के लिए उचित इंतजाम करना होगा. इसके अलावा जिस परिसर में लॉकर हैं, उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी.

निर्देश में कहा गया है कि आग, चोरी, डकैती या सेंधमारी की स्थिति में बैंक अपने दायित्व से नहीं हट सकता. ऐसे मामलों में बैंक को लॉकर के वार्षिक किराए का 100 गुना तक मुआवजा देना होगा. लेकिन अगर लॉकर में रखी सामग्री को नुकसान कस्टमर की गलती से होगा तो उसका जिम्मेदार बैंक नहीं होगा.

नियम में हुआ बदलाव पुराने और नए लॉकर दोनों के मामले में 1 जनवरी 2022 से लागू होगा.

बैंक लॉकर के लिए कितना किराया देना होता है?

महंगी जूलरी, इंपॉर्टेंट डॉक्युमेंट, सर्टिफिकेट या वो वस्तुएं जो कीमती होती हैं, उन्हें रखने के लिए बैंक लॉकर सेफ जगह माना जाता है. सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के बैंक इस तरह की सुविधा देते हैं. लॉकर के साइज के हिसाब से बैंक एक हजार से लेकर 10 हजार रुपए सालाना चार्ज करते हैं.

बिजनेस अखबार मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक लॉकर का किराया कितना होगा ये बैंक की ब्रांच और लॉकर के साइज पर डिपेंड करता है. भारतीय स्टेट बैंक शहरी और मेट्रो इलाकों में छोटे आकार के लॉकर (125x175x492 सेमी) के लिए सालाना 1500 रुपये प्लस GST चार्ज करता है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इसी लॉकर का किराया 1000 रुपये प्लस GST है.

रिपोर्ट के मुताबिक, SBI में एक एक्स्ट्रा लार्ज लॉकर के लिए आपको हर साल 12 हजार रुपये विद GST चुकाने पड़ सकते हैं. लॉकर के आकार के आधार पर रजिस्ट्रेशन फीस भी देनी होती है. SBI छोटे और मध्यम लॉकरों के लिए 500 रुपये प्लस GST लेता है, जबकि लार्ज और एक्स्ट्रा लार्ज लॉकर के लिए 1000 रुपये और GST का भुगतान करना पड़ता है.


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