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राकेश मारिया : वो पुलिस ऑफिसर, जिसके सामने फफककर बोले थे संजय दत्त- "मेरे से गलती हो गई"

12 मार्च, 1993 का दिन. मुंबई शहर. दोपहर के डेढ़ बजे से लेकर तीन बजकर 40 मिनट के बीच, यानी इन 2 घंटे 10 मिनट में मुंबई अपने सबसे खौफनाक दिनों में से एक का सामना कर चुकी थी. शहर में 12 सीरियल बम ब्लास्ट हुए. 13 मार्च की सुबह चढ़ी. तड़के 6 बजे मुंबई के ‘किंग’ ने एक फोन घुमाया. किंग, यानी पुलिस कमिश्नर अमरजीत सिंह सामरा. वायरलेस कॉल्स और कोड लैंग्वेज में उन्हें ‘किंग’ कहकर ही पुकारा जाता था. सामरा ने फोन किया मुंबई के उस वक्त के DCP ट्रैफिक को. नाम- राकेश मारिया.

यही नाम हमारी-आपकी आज की बातों का मुख्य पात्र है. 13 मार्च 93 की सुबह मारिया के पास किंग का फोन क्यों आया था? राकेश मारिया ने उसके बाद ऐसा क्या किया? क्यों हम राकेश मारिया की बातें आज करीब 28 साल बाद भी कर रहे हैं? ये चंद सवाल हैं और हैं राकेश मारिया के चंद किस्से. तो, शुरू करते हैं.

DCP ट्रैफिक, जिसने ब्लास्ट केस सुलझाया

अपनी किताब Let me say it now में राकेश मारिया लिखते हैं कि जब वह सामरा के घर पहुंचे, तो वहां महेश नारायण सिंह भी थे. जॉइंट सीपी (क्राइम) महेश नारायण. जबसे मारिया की मुंबई में पोस्टिंग हुई थी, तबसे ये पहला मौका था, जब वो एकसाथ सीपी और जॉइंट सीपी के सामने थे.

सामरा ने कहा-

“राकेश, तुम जानते ही हो कि ब्लास्ट कितने सीरियस हैं. इससे भी बड़ी दिक्कत ये कि हमारे पास कोई क्लू नहीं है कि ये किसने किया, क्यों किया. राकेश, मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा दांव पर है. हमने फैसला किया है कि इस केस की इन्वेस्टिगेशन तुम करोगे.”

राकेश मारिया, जिनको मुंबई जैसे शहर में काम संभाले अभी 22 महीने ही हुए थे. 12 महीने डीसीपी, जोन-4 के तौर पर और पिछले 10 महीने डीसीपी ट्रैफिक के तौर पर. अब वह मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर थे.

Mumbai Attack 93
1993 में मुंबई में हुए बम ब्लास्ट देश में हुए सबसे भीषण हमलों में से एक थे. (फाइल फोटो)

दाऊद और टाइगर मेनन का नाम उजागर

13 मार्च की रात ही राकेश मारिया को एक ख़बर मिलती है. पता चला कि वर्ली में हथियारों से भरी एक मारुति वैन कार मिली है. वैन में थीं- सात एके-56 असॉल्ट रायफलें, 14 मैग्ज़ीन, पिस्टल और चार हैंड ग्रेनेड.

पता चला कि वैन रुबिना सुलेमान मेमन के नाम पर है. पता- माहिम की अल हुसैनी बिल्डिंग.

मारिया ने अपने एक इन्फॉर्मर से पूछा- “ये अल हुसैनी बिल्डिंग के मेमन कौन हैं?”

जवाब था- “टाइगर मेमन. उसका फ्लैट है इधर.”

मारिया- “टाइगर मेमन. पहली बार नाम सुन रहा हूं. कौन है?”

जवाब- “स्मगलर है सर. अंडरवर्ल्ड.”

ये पहला मौका था, जब ब्लास्ट की जांच से टाइगर मेमन का नाम जुड़ा.

इसी तरह Let Me Say It Now में राकेश मारिया लिखते हैं-

अंडरवर्ल्ड की दुनिया में एक किस्सा पानी पी-पीकर सुनाया जाता है.1992में बाबरी मस्ज़िद गिराए जाने के बाद मुंबई के कुछ मुस्लिम इसका बदला लेना चाहते थे. बदला लेने के लिए मदद मांगी गई दुबई में बैठे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से. दाऊद ने साफ मना कर दिया.

कहा जाता है कि इसके बाद कुछ मुस्लिम महिलाओं ने दाऊद को चूड़ियां भेजीं. लानत के तौर पर. ये बात दाऊद को लग गई. उसने टाइगर मेमन और मोहम्मद दौसा के साथ मिलकर मुंबई हमले की प्लानिंग कर डाली. यहां से जांच में जुड़ा दाऊद का नाम.

Mumbai Bomb Blast
मुंबई में एक के बाद एक कुल 12 बम ब्लास्ट हुए थे. (फाइल फोटो)

जब मारिया के सामने रोये संजय दत्त

पुलिस ने पूरी साज़िश में शामिल तीन लोगों को पकड़ा. बादशाह खान, हनीफ और समीर. इनसे पूछताछ से ही एक सबसे चौंकाने वाला नाम निकला. इनसे सख़्त पूछताछ चल रही थी, तभी वो बोले, “साब, आप बड़े लोगों को पकड़ते नहीं क्या?”

मारिया- “कौन बड़े लोग”

हनीफ, समीर- संजू बाबा

मारिया- “कौन संजू”

हनीफ, समीर- संजय दत्त. हीरो.

मारिया अपनी किताब में लिखते हैं- मुझे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था. जांच की गई तो पता चला कि भरूच से मुंबई तक कुछ हथियार लाए गए थे. लेकिन इन्हें कहीं भी रखने की जगह नहीं थी. तभी अनीस इब्राहिम ने सुझाव दिया था कि “हीरो के घर रख सकते हैं”. हीरो माने संजय दत्त. संजय दत्त के घर पर तीन एके-56 रायफल, 25 हैंड ग्रेनेड और एक 9 एमएम पिस्टल रखी गई, जो बाद में ख़तरनाक काम में इस्तेमाल आई.

19 अप्रैल 1993 को संजय दत्त की फ्लाइट मॉरीशस से मुंबई लैंड हुई. फ्लाइट से उतरते ही उनके सामने राकेश मारिया थे. मारिया ने अपना परिचय दिया. संजय से उनका पासपोर्ट और बोर्डिंग पास मांगा. संजय दत्त कुछ समझ पाते, इससे पहले वह पुलिस की जीप में थे. मारिया लिखते हैं कि

“संजय दत्त शॉक में थे. पूरे रास्ते किसी ने उनसे एक शब्द नहीं बोला, कोई बात नहीं. यही निर्देश थे. जबकि संजय लगातार बोल रहे थे– आप ये नहीं कर सकते. मेरी फैमिली इंतज़ार कर रही है. मुझे एक बार मिलने दीजिए, बात करने दीजिए.”

अगले दिन सुबह जाकर किसी ने दत्त से पहली बार बात की. मारिया ने कहा –

“तुम अपनी कहानी खुद बताओगे या मैं बताऊं.”

दत्त ने कहा – “सर मैंने कुछ नहीं किया.”

बाद में संजय दत्त ने मारिया को एक-एक करके सारी बात बताई. कुछ दिन बाद मारिया ने संजय दत्त का उस समय के सांसद सुनील दत्त से भी सामना कराया. पिता को सामने देखते ही संजय दत्त मारिया के सामने ही फफककर रो पड़े. ये बोलते हुए कि– “मेरे से ग़लती हो गई.”

खैर, संजय दत्त पर अवैध हथियार रखने का दोष साबित हुआ था. बाद में उन्होंने इसकी सज़ा भी काटी.

Sanjay Dutt
संजय दत्त को बाद में TADA के आरोपों से तो मुक्त कर दिया गया, लेकिन आर्म्स ऐक्ट के तहत उन्होंने सजा काटी. (फाइल फोटो)

मेमन परिवार के कुल सात लोगों को ब्लास्ट केस में दोषी करार दिया गया. सबसे बड़े मुज़रिम- टाइगर और याकूब मेमन. टाइगर मेमन अब भी फरार है. याकूब को 2015 में फांसी दे दी गई.

राकेश मारिया को ये केस सुलझाने के लिए पुलिस मेडल मिला. खास बात ये रही कि उन्हें 13 साल की सर्विस के बाद ही ये मेडल मिल गया, जबकि अमूमन पुलिस मेडल के लिए कम से कम 15 साल की सर्विस होनी चाहिए.

पहली बार आया ‘फिक्सिंग’ शब्द

राकेश मारिया ने ही भारतीय क्रिकेट में पहली बार ‘फिक्सिंग’ मामले का भंडाफोड़ किया था. 15 फरवरी 1995 को मारिया ने मुंबई के एक छोटे से गुंडे सुनील सावंत को धरा. उसकी संपत्ति एक-डेढ़ साल में कई गुना बढ़ी थी. पुलिस को शक था कि वो सुपारी किलिंग कर रहा है. जब पकड़ा गया तो उसने बताया कि वो तो मैच-फिक्सिंग से पैसा बनाता है. उसने बताया कि किस तरह एक बड़ा गैंग पैसे के दम पर मैच का नतीजा पहले ही तय कर देता है. पुलिस भी ये शब्द पहली बार सुन रही थी. किसी को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ.

सावंत ने कहा कि साब, कल भारत-न्यूज़ीलैंड का मैच है. आप खुद देख लेना. अगले दिन यानी 16 फरवरी 1995 को भारत-न्यूज़ीलैंड के बीच नेपियर में वनडे मैच हुआ. भारत ने पहले बल्लेबाजी की. पूरी टीम 45.5 ओवर में 160 रन पर ऑलआउट हो गई. न्यूज़ीलैंड ने चार विकेट से मैच जीत लिया. मारिया हैरान थे. मैच में ठीक वैसा ही हुआ, जैसा सावंत ने बताया था. यहां से मैच फिक्सिंग की जो जांच शुरू हुई, तो दो साल में चंद्रचूड़ कमेटी की जांच भी बैठ गई. और फिर मैच फिक्सिंग में वो खुलासे हुए कि पूरा क्रिकेट जगत हिल गया.

Rakesh Maria Book
राकेश मारिया 2017 में रिटायर हुए. उन्होंने Let me say it now नाम से किताब लिखी.

बाद में 2013 में जब IPL स्पॉट फिक्सिंग सामने आई तो मारिया एंटी टेररिज़्म स्क्वॉड (ATS) में ADG थे. लेकिन 1995-96 के उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्पॉट फिक्सिंग की जांच से विशेषज्ञ के तौर पर जोड़ा गया.

इसके अलावा राकेश मारिया ने 2008 के मुंबई हमले, शीना बोरा मर्डर केस जैसे मामलों की जांच में भी अहम भूमिका निभाई.


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