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18 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव का पूरा तियां-पांचा यहां समझ लें

देशभर में राज्यसभा की 18 सीटों के लिए शुक्रवार, 19 जून को चुनाव होने हैं. पहले ये चुनाव 26 मार्च को होने थे, लेकिन कोरोना और लॉकडाउन की वजह से टल गए. इन 18 सीटों में से गुजरात और आंध्र प्रदेश में चार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन, झारखंड में दो और मणिपुर, मेघालय और मिजोरम में एक-एक सीट पर चुनाव होना है. जानते हैं इन राज्यों में समीकरण क्या है.

गुजरात

गुजरात की चार राज्यसभा सीटों पर पांच प्रत्याशी मैदान में हैं. गुजरात में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 35 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी. गुजरात में विधानसभा की 182 सीटें हैं. कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीती थीं. अब सिर्फ 65 विधायक बचे हैं. इन विधायकों को बचाने के लिए भी कांग्रेस को रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का सहारा लेना पड़ रहा है. बीजेपी के पास 103 विधायक हैं. वहीं बीटीपी के दो, एनसीपी के एक, और एक निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी हैं.

2002 के बाद कांग्रेस ने 2017 में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया. पार्टी को उम्मीद थी कि राज्यसभा में उसकी सीटें बढ़ेंगी. लेकिन एक के बाद एक विधायकों के इस्तीफे के बाद हालात बदल गए हैं. कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों की जीत के लिए 70 विधायकों की जरूरत होगी. कांग्रेस के पास 65 हैं. जिग्नेश मेवानी के समर्थन के बाद 66 फिर भी चार वोट कम पड़ेंगे. ऐसे में बीजेपी की तीसरे कैंडिडेट का जीतना तय लग रहा है.

अगस्त 2017 में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता अहमद पटेल .5 वोट से चुनाव जीते थे. उस समय बड़ा खेल किया था शक्ति सिंह गोहिल ने. गोहिल इस समय उम्मीदवार हैं. बीजेपी और खासतौर पर अमित शाह हिसाब चुकता करना चाहेंगे.

बीजेपी के उम्मीदवार

1. अभय भारद्वाज– जाने माने वकील हैं. गुलबर्ग सोसायटी और कई मामलों में गुजरात सरकार का पक्ष रख चुके हैं. परिवार जनसंघ से जुड़ा था. भारद्वाज पहले संघ और फिर बीजेपी से जुड़े. एनकाउंटर केस में अमित शाह का कोर्ट में पक्ष रखते थे.

2. रमीला बेन बारा- 2007 में विधानसभा चुनाव लड़ा था. सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद. आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं. गुजरात भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं.

3. नरहरि अमीन– 75 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं. गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे हैं चिमनभाई पटेल की सरकार में. कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए थे. गुजरात क्रिकेट असोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट रह चुके हैं.

कांग्रेस

1. शक्ति सिंह गोहिल– कांग्रेस के कद्दावर नेता. गुजरात सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं. नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता. राजनीति का लंबा अनुभव है. कांग्रेस आलाकमान के करीबी.

2. भरत सिंह सोलंकी– गुजरात कांग्रेस के प्रेसिडेंट रह चुके हैं. मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री थे. आनंद सीट से 2014 में चुनाव हार गए थे. हालांकि इस चुनाव में वह कांग्रेस की पहली पसंद नहीं थे. लेकिन डैमज कंट्रोल के तौर पर उनका नाम आगे किया गया.

राजस्थान

राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटे हैं. लेकिन मैदान में चार उम्मीदवार हैं. एक सीट के लिए 51 वोटों की जरूरत होगी. कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं. 12 निर्दलीय विधायक हैं, जो कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं. बीजेपी के 72 विधायक हैं. हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायकों का समर्थन बीजेपी को है. दोनों पार्टियों के विधायकों को मिला दिया जाए, तो ये आंकड़ा 75 होता है. बीजेपी के एक उम्मीदवार की जीत तय है, लेकिन दूसरे की नामुमकिन लग रही है. कांग्रेस सरकार में है, लेकिन बीजेपी पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगा रही है. पिछले कुछ दिनों से यहां भी रिजॉर्ट पॉलिटिक्स चल रही है.

कांग्रेस

1. के सी वेणुगोपाल- केरल के रहने वाले हैं. कांग्रेस के महासचिव हैं. राहुल गांधी के करीबी नेता. 2011 से 2014 तक यूपीए सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री रहे. तीन बार विधायक भी चुने जा चुके हैं. 2004 से 2006 तक केरल सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं.

2. नीरज डांगी– नीरज डांगी यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके है. इस समय कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हैं. एससी समुदाय से आते है. नीरज डांगी राजस्‍थान के सीएम अशोक गहलोत के करीबी माने जाते हैं. डांगी तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके है. तीनों बार हार का सामना करना पड़ा है.

बीजेपी

1. राजेन्द्र गहलोत– गहलोत भाजपा की भैरोंसिंह सरकार में जलमंत्री रह चुके हैं. संघ के बैकग्राउंड से आते हैं. लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए हैं. 2008 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने चुनाव लड़ा था. हार गए थे. इस समय बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं.

2. ओंकार सिंह- पढ़ाई के दौरान संघ के सम्पर्क में आए. जनता पार्टी में भी काम किया. वर्ष 1980 में भाजपा बनी, तब अजमेर शहर का पहला महामंत्री बनाया गया. युवा मोर्चा प्रदेश मंत्री रह चुके हैं. 1994 में यूआईटी चेरयमैन बने थे.

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटे हैं, लेकिन चार उम्मीदवार मैदान में हैं. एक सीट पर जीत हासिल करने के लिए 52 वोट चाहिए. बीजेपी के 107 विधायक हैं. दोनों उम्मीदवारों की जीत के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी. कांग्रेस के 92 विधायक हैं. ऐसे में कांग्रेस के दूसरे उम्मीदवार की जीत नामुमकिन दिख रही है. एसपी, बीएसपी और निर्दलीय विधायकों ने बीजेपी के समर्थन किया है.

बीजेपी

ज्योतिरादित्य सिंधिया- कांग्रेस के कद्दावर नेता थे. राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए. सिंधिया के समर्थक विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई थी.

सुमेर सिंह सोलंकी -सुमेर सिंह अनुसूचित जनजाति से आते हैं. पूर्व खरगौन-बड़वानी भाजपा सांसद माकन सिंह सोलंकी के भतीजे हैं. बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए हैं. राज्यसभा चुनाव के लिए प्रोफेसर के पद से इस्तीफा दिया है.

कांग्रेस

दिग्विजय सिंह- मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम. राज्यसभा सांसद. राहुल के करीबी. कद्दावर नेता. राज्यसभा सांसद हैं. फिर से चुनाव लड़ रहे हैं.

फूल सिंह बरैया- फूल सिंह बरैया बहुजन समाज पार्टी का बड़ा चेहरा रहे. उसके बाद अपनी पार्टी बहुजन संघर्ष दल बना ली. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे. फूल सिंह बरैया का ग्वालियर चंबल इलाके में अनुसूचित जाति वर्ग में अच्छी पैठ है.

मध्य प्रदेश में प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया राज्यसभा सांसद थे, लेकिन बीजेपी ने दोनों को ही फिर से टिकट नहीं दिया. उनकी जगह नए चेहरे ले आई. हालांकि सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद से ही उनका राज्यसभा टिकट कंफर्म था. लेकिन दूसरी सीट पर बीजेपी ने एक प्रोफेसर को चुना.

झारखंड

राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव है. उम्मीदवार तीन हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और बीजेपी, तीनों ने एक-एक उम्मीदवार उतारा है. एक सीट के लिए कम से कम 27 वोट चाहिए. जेएमएम के 29 विधायक हैं. दो वोट बचते हैं. कांग्रेस के 17 विधायक हैं. उसके पास सीपीआईएमएल के एक, एनसीपी के एक, आरजेडी के एक और दो निर्दलियों में से एक का समर्थन है. कुल मिलाकर 23 वोट होते हैं. जीत के लिए चार और विधायक चाहिए. बीजेपी के 25 विधायक हैं. सुदेश महतो की पार्टी आजसू के दो विधायक हैं. महतो ने बीजेपी को समर्थन का वादा किया है.

जेएमएम

शिबू सोरेन– झारखंड के तीन बार के मुख्यमंत्री. इस समय के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता. मनमोहन सरकार में मंत्री रह चुके हैं. पहली बार 1980 में लोकसभा का चुनाव जीता था. बहुत सीनियर नेता हैं.

बीजेपी

दीपक प्रकाश- झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष. राज्य में बीजेपी की हार के बाद उन्हें ये जिम्मेदारी दी गई है.

कांग्रेस

शहजादा अनवर- 2007 में कांग्रेस से जुड़े. वह दो बार- 2009 और 2014 में रामगढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं पाए. कांग्रेस से पहले जेएमएम के सदस्य रह चुके हैं. कांग्रेस के प्रवक्ता हैं.

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश की 175 सदस्यों वाली विधानसभा में वाईएसआर कांग्रेस के 157 विधायक हैं. सभी चारों सीटें वाईएसआर कांग्रेस को ही मिलना तय है. यहां चार राज्यसभा सीटों पर पांच प्रत्याशी हैं. वाईएसआर कांग्रेस की तरफ से पिल्ली सुभाष चंद्रबोस, मोपीदेवी वेंकटरमणास, आल्ला अयोध्या रामीरेड्डी और परिमल नाथवानी मैदान में हैं. वहीं टीडीपी ने वर्ला रामय्या पर दांव लगाया है.

मणिपुर

मणिपुर की एक सीट पर राज्यसभा चुनाव होना है. इसके लिए बीजेपी से महाराजा संजाओबा लिसिम्बा, कांग्रेस से पूर्व मंत्री तोंगब्रम मंगिबाबू और नागा पीपल्स फ्रंट से होनरीकुई काशुंग के बीच मुकाबला है. सरकार में अब तक 39 विधायक थे. सरकार से नौ विधायक अलग हो गए हैं. हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिन सात विधायकों पर पाबंदी लगी है, संभव है कि वो वोट न डाल पाएं. विपक्ष में 20 सदस्य हैं. राज्यसभा सीट जीतने के लिए 26 वोट की ज़रूरत है. ऐसे में मामला पेचीदा हो गया है. कौन जीतेगा, वोटिंग के बाद ही पता चलेगा.

मेघालय

मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) ने राज्य की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए एनपीपी के प्रदेश अध्यक्ष डब्ल्यू आर खरलुखी को उम्मीदवार बनाया है. वहीं विपक्षी कांग्रेस ने पूर्व विधायक कैनेडी खीरीयम को मैदान में उतारा है. 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में कांग्रेस के 19 विधायक हैं.

मिजोरम

राज्यसभा की एक मात्र सीट के लिए सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने पार्टी नेता के कनललवेना को उम्मीदवार बनाया है. वहीं ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने बी लालछनजोवा और कांग्रेस ने लल्लिंछुंगा को उम्मीदवार बनाया है. चालीस सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में, एमएनएफ के 27 सदस्य हैं, जबकि जेडपीएम के सात, कांग्रेस के पांच और भाजपा का एक विधायक है.


Video: नेता नगरी: बिहार असेंबली और गुजरात राज्य सभा चुनाव में क्या होगा?

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