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राजस्थान चुनाव: उस राज्य में क्या चल रहा है जो हर बार सरकार बदल देता है

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राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. फिलहाल राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. वसुंधरा राजे राज्य की मुख्यमंत्री हैं. वसुंधरा राजे अपने पांच साल का हिसाब देने के लिए सुशासन गौरव यात्रा निकाल रही हैं. राजस्थान के चुनाव में यात्राओं को बड़ा महत्व रहा है. 2013 में वसुंधरा राजे ने पूरे प्रदेश में सुशासन संकल्प यात्रा निकाली थी. इस यात्रा के बाद चुनाव नतीजों में भाजपा ने 200 विधानसभा सीटों में से 164 सीटें जीतीं. इसके छह महीने बाद हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 25 की 25 सीटें जीतीं. लेकिन भाजपा के लिए अब परिस्थितियां बहुत बदल गई हैं. राजस्थान में बहुत जोर से सत्ता विरोधी लहर चल रही है. भाजपा के संगठन में 73 दिन चली खींचतान के बाद नया प्रदेशाध्यक्ष मिल पाया. पहले सुप्रीम कोर्ट के SC-ST एक्ट पर फैसले के बाद SC-ST समुदाय की नाराजगी और एक्ट को पहले जैसा कर देने के बाद सवर्ण जातियों की नाराजगी भाजपा की परेशानी को और बढ़ा रही है. इसी सब के बीच दोनों पार्टियों ने चुनाव के लिए पूरा जोर लगा दिया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 11 सितंबर को जयपुर आए. वहीं कांग्रेस ने करौली और नागौर में रैली की. इनमें अशोक गहलोत, सचिन पायलट, सीपी जोशी और प्रदेश के कई बड़े नेता मौजूद थे. इनमें आई भीड़ का ये आलम था कि नेताओं को रैली में पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ गई. अब आपको बताते हैं कि राजस्थान में क्या चुनावी चकल्लस चल रही है.

वसुंधरा राजे 2013 का करिश्मा फिर से दोहराने की कोशिश में लगी हैं.
वसुंधरा राजे 2013 का करिश्मा फिर से दोहराने की कोशिश में लगी हैं.

बीजेपी के खेमे की खबरें

पहले अध्यक्ष बनाने में महीनों का टाइम लग गया. फिर वसुंधरा राजे की यात्रा शुरू हुई. यात्रा का कई जगह पर विरोध हुआ. हालात यहां तक हो गए कि प्रशासन को कई जगह आदेश देना पड़ा कि इस यात्रा का विरोध करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जोधपुर में जब यह यात्रा निकल रही थी तो सीएम के काफिले पर पथराव भी हुआ. इस घटना में कथित रूप से NSUI से जुड़े कार्यकर्ता पकड़े गए. वसुंधरा राजे अपनी गौरव यात्रा में कई योजनाओं की घोषणा कर रही थीं और कई योजनाओं का उद्घाटन कर रही थीं. लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि गौरव यात्रा के दौरान किसी भी तरह का सरकारी कार्यक्रम करने पर रोक लगा दी. यात्रा अभी चालू है. खत्म होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने की उम्मीद है.

गौरव यात्रा का कहीं स्वागत हो रहा है तो कहीं विरोध.
गौरव यात्रा का कहीं स्वागत हो रहा है तो कहीं विरोध.

अब बात अमित शाह के कार्यक्रम की. अमित शाह ने दो जगह भाषण दिए. दोनों जगहों पर उनका भाषण राज्य से ज्यादा केंद्र सरकार के काम पर फोकस कर रहा था. अमित शाह ने NRC का मुद्दा उठाया. सर्जिकल स्ट्राइक, वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी जैसे मुद्दे उठाए. साथ ही कांग्रेस पर भी हमले किए. राजस्थान में बिना सीएम फेस घोषित किए लड़ रही कांग्रेस से नेता का नाम पूछा. शाह ने कांग्रेस को चंगू-मंगू और हंप्टी-डंप्टी की पार्टी बताया. अमित शाह यहां पर अपनी पार्टी से भी नाखुश नज़र आए. शाह ने कहा कि राजस्थान के कार्यकर्ता हमारे पास आते हैं और मुंह लटकाए हुए बैठ जाते हैं .किंतु -परंतु, इधर-उधर की बातें करते हैं. हमने कहा कि मुंह मत लटकाओ काउंटिंग के बाद आना ,जितनी छाती पीटनी हो छाती पीट लेना. अभी तो एक होकर चुनाव में लग जाओ और BJP को जिताओ. यह किसी नेता, सीएम, मिनिस्टर या MLA का चुनाव नहीं है, पार्टी का चुनाव है. इसलिए पार्टी को जिताने में लग जाइए.

अमित शाह की इस रैली में वसुंधरा राजे मौजूद नहीं थीं.
अमित शाह की इस रैली में वसुंधरा राजे मौजूद नहीं थीं.

एक बड़ी बात जो शाह के भाषण से निकलकर आई उससे राजस्थान और लोकसभा के चुनाव साथ होने की अटकलों पर विराम लग जाएगा. शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि दिसंबर में राजस्थान के चुनाव की तैयारी करें और मई में होने वाले लोकसभा चुनाव की. ऐसे में यह उम्मीद कम है कि दोनों चुनाव साथ होंगे.

कांग्रेस का क्या हाल है?

तमाम ओपिनियन पोल्स और सर्वे में कांग्रेस को इस विधानसभा चुनाव में आगे बताए जाने के बाद से पार्टी का काडर उत्साह में है. कांग्रेस के नेता संकल्प रैली नाम से रैली करने में लगे हैं. अंदरखाने सीएम फेस के लिए खींचतान चल रही है. पूर्व सीएम अशोक गहलोत पहले कह चुके हैं कि उनके दो बार के सीएम रहने के बाद किसी और को सीएम फेस बनाने का सवाल नहीं है. वहीं सचिन पायलट इशारों-इशारों में अपनी दावेदारी जताते रहे हैं. सीपी जोशी अब सीएम की रेस से लगभग बाहर हैं. उनका खेमा भी अब इतना सक्रिय है. अगस्त में जयपुर हुई राहुल गांधी की रैली में राहुल ने गहलोत और पायलट को मंच पर गले मिलवाया. उसके बाद से कांग्रेस में चल रही खींचतान सार्वजनिक रूप से तो कम हुई है. ओपिनियन पोल्स में जब लोगों से चेहरे के बारे में पूछा जा रहा है तो वो अब भी पायलट की जगह गहलोत पर भरोसा जता रहे हैं. इससे गहलोत खेमे में जोश बना हुआ है.

एक सीट पर बैठकर एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.
एक सीट पर बैठकर एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

संकल्प रैलियों में उमड़ रही भारी भीड़ से तो कांग्रेस पार्टी गदगद है. नेता एकजुटता दिखाने के लिए रैली में एक बस में सवार होकर जाते हैं. अशोक गहलोत और सचिन पायलट एक ही सीट पर बैठकर जाते हैं. 11 सितंबर को करौली में हुई रैली में भीड़ देखकर तो कांग्रेस के नेता भी चकित हैं. करौली में इतनी भीड़ उमड़ी कि नेताओं को लेकर आ रही बस रैली की जगह से 13 किलोमीटर दूर रह गई. वहां से सचिन पायलट ने अशोक गहलोत को बाइक पर बिठाया और रैली की तरफ निकल पड़े. भीड़ इतनी थी कि दोनों नेताओं को रैली के स्टेज तक पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ गई. अगले दिन नागौर में हुई रैली की भीड़ को देखकर भी कांग्रेस बहुत उत्साहित है.

मंच से भाषण देना था, कार छोड़ी, अशोक गहलोत को बाइक पर बिठाकर चल दिए | The Lallantopमंच से भाषण देना था, कार छोड़ी, अशोक गहलोत को बाइक पर बिठाकर चल दिए

Posted by The Lallantop on Wednesday, September 12, 2018

हालांकि, SC-ST एक्ट का विरोध कर रहे सवर्णों ने इस रैली से पहले कांग्रेस नेताओं को भी काले झंडे दिखाए. साथ ही, स्थानीय स्तर के नेताओं की फूट भी दिखाई दी. लेकिन भारी भीड़ के शोर में सब दबता हुआ लग रहा है.

तीसरे मोर्चे का क्या हाल है?

सीधे शब्दों में बताएं तो खस्ताहाल हैं क्योंकि यह पनप ही नहीं पा रहा है. सब अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग गा रहे हैं. घनश्याम तिवाड़ी ने अपनी भारत वाहिनी पार्टी बनाई है लेकिन अब तक उसकी पहुंच नहीं बनी है. पहले हनुमान बेनीवाल बहुत आक्रामक थे लेकिन अब वो भी शांत नज़र आ रहे हैं. बसपा अपने टार्गेट वोटर्स तक ही सीमित है. आम आदमी पार्टी के पूर्व राजस्थान प्रभारी कुमार विश्वास पर अरविंद केजरीवाल अविश्वास जता चुके हैं. नए प्रभारी दीपक वाजपेयी अभी पैर जमाने में ही लगे हैं. अब इंतजार करना होगा चुनाव नतीजों का जब पता चल सकेगा कि कौन राजस्थान पर राज जमाएगा.


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