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रेलवे ऑनलाइन एग्जाम लेने के लिए कैंडिडेट्स को 2000 किमी दूर क्यों भेज रहा है?

भारतीय रेलवे ने जब से 90,000 पदों पर भर्ती के विज्ञापन निकाले हैं, ये परीक्षा विवादों में है. इस विवाद की शुरुआत हुई थी परीक्षा के लिए निर्धारित उम्र बढ़ने को लेकर. इसके बाद कभी फीस, कभी योग्यता और फिर परीक्षा सेंटर के हजारों किलोमीटर दूर होने को लेकर जो विवाद शुरू हुए, वो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं.

अभी क्या है विवाद

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भारतीय रेलवे ने 90,000 पदों पर जो वैकेंसी निकाली है, वो करीब पांच साल के बाद आई है. इन 90,000 सीटों में ग्रुप सी और ग्रुप डी के अलग-अलग पद हैं. ग्रुप सी में  कुल 26,502 पद हैं. इनमें लोको पायलट के 17,673 पद और टेक्निशियन के 8,829 पद हैं. वहीं ग्रुप डी में 62900 पद हैं. फिलहाल जो विवाद है, वो ग्रुप सी की भर्ती पर हो रहा है, जिसके लिए 9 अगस्त से परीक्षाएं शुरू हो रही हैं. इन 26,502 पदों के लिए कुल 47,56000 परीक्षार्थियों ने फॉर्म भरा है. इनमें से करीब 9 लाख परीक्षार्थी बिहार से, 9.5 लाख परीक्षार्थी यूपी से, 4.5 लाख परीक्षार्थी राजस्थान से हैं. इन परीक्षार्थियों में से करीब 9 लाख परीक्षार्थी ऐसे हैं, जिनकी परीक्षा का सेंटर 1500 से 2000 किमी दूर दिया गया है.

ऑनलाइन होनी है परीक्षा

रेलवे की ग्रुप सी की परीक्षा ऑनलाइन होनी है. ऐसे में परीक्षार्थियों की सबसे बड़ी मांग ये है कि अगर परीक्षा ऑनलाइन ही होनी है, तो फिर उन्हें उनके शहर से 1500-2000 किमी दूर क्यों भेजा जा रहा है. जिन 9 लाख परीक्षार्थियों का सेंटर इतनी दूर दिया गया है, उनमें से कई परीक्षार्थी इतने गरीब हैं कि वो चार से पांच हजार रुपये खर्च कर इतनी दूर परीक्षा देने नहीं जा सकते हैं. इन परीक्षार्थियों का कहना है कि पांच साल के लंबे इंतजार के बाद वैकेंसी आई है. इसके लिए वो पिछले कई सालों से तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब जब उनका सेंटर 1500-2000 किमी दूर कर दिया गया है तो परीक्षा देने नहीं जा पाएंगे. वहीं रेलवे की ओर से एससी और एसटी के लिए टिकट का इंतजाम किया गया है. लेकिन इन परीक्षार्थियों को भी इतनी दूरी तय करने में 40 घंटे से भी ज्यादा का वक्त लगेगा. ऐसे में ये परीक्षार्थी 40 घंटे से ज्यादा का सफर तय कर जब परीक्षा सेंटर में पहुंचेंगे, तो वो इस हालत में नहीं रहेंगे कि परीक्षा दे सकें.

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परीक्षार्थियों के डूब जाएंगे करोड़ों रुपये

जब इस परीक्षा के लिए फॉर्म भरे जा रहे थे, तो परीक्षा फीस 500 रुपये थी. पहले इस परीक्षा के लिए मात्र 100 रुपये लगते थे, लेकिन इस बार फीस बढ़ाकर 500 रुपये कर दी गई. इस पर खूब विवाद हुआ, जिसके बाद रेलवे ने सफाई दी कि जो परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे, उन्हें 400 रुपये वापस कर दिए जाएंगे. अब जब करीब 9 लाख परीक्षार्थी परीक्षा छोड़ने की तैयारी में हैं, तो उनके 500-500 रुपये डूब जाएंगे. इस लिहाज से देखें तो करीब परीक्षार्थियों को करीब 45 करोड़ रुपये का नुकसान होने जा रहा है और ये पूरी मुनाफा रेलवे की झोली में जाएगा.

इसको उदाहरणों से समझते हैं.

1. विक्की प्रसाद यादव और उत्तम पाराशर

छपरा के परीक्षार्थियों का सेंटर तेलंगाना के तिरुपति में है.

बिहार में एक जिला है छपरा. वहां के रहने वाले विक्की प्रसाद यादव और उत्तम पाराशर का सेंटर तेलंगाना के तिरुपति में है. परीक्षा की तारीख है 20 अगस्त और 31 अगस्त छपरा से तिरुपति की कोई ट्रेन नहीं है. अगर विक्की या उत्तम को छपरा से तिरुपति जाना है, तो उन्हें सबसे पहले पटना आना होगा. पटना से भी तिरुपति की इकलौती ट्रेन है, जो हफ्ते में एक दिन सिर्फ मंगलवार को ही चलती है. ट्रेन का नाम है पटना एर्नाकुलम. करीब 42 घंटे और 2309 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ये ट्रेन तिरुपति पहुंचती है. ट्रेन करीब 10 बजे सुबह तिरुपति पहुंचती है. देर सवेर मान लीजिए कि 14 अगस्त को चली ये ट्रेन 16 अगस्त की रात तक पहुंच जाती है. इसके बाद विक्की क्या करेंगे. क्या वो पांच दिन इंतजार करेंगे, क्योंकि अगली ट्रेन पटना से उनकी परीक्षा बीतने के एक दिन बाद चलेगी. ऐसे में विक्की छपरा से बस से पटना आएंगे. वहां से वो किसी ट्रेन से कोलकाता जाएंगे. वहां उन्हें रात में करीब 8.35 पर हावड़ा यशवंतपुर ट्रेन मिलेगी, जो उन्हें अगले दिन रात को साढ़े 11 बजे तिरुपति पहुंचाएगी. इसमें भी करीब 40 घंटे का वक्त लगेगा. और खर्च करीब 4000 रुपये. यही हाल उत्तम पाराशर का भी होगा. उन्हें 28 अगस्त को ट्रेन मिलेगी. उनके साथ बस ये होगा कि अगर उनकी ट्रेन छह-सात घंटा लेट हो जाती है तो उनकी परीक्षा छूट जाएगी और पैसे के साथ ही उनका वक्त भी बर्बाद हो जाएगा.

2. स्वागत प्रसाद मौर्य

पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक जिला है गाज़ीपुर. वहां एक कस्बा है भदौरा. यहां के रहने वाले स्वागत का सेंटर भटिंडा पड़ा है. भदौरा का नज़दीकी सबसे बड़ा स्टेशन है मुगलसराय. इसे अब दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नाम से जाना जाता है. यहां से भटिंडा जाने के लिए इकलौती ट्रेन है उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस. रात में दो बजे मुगलसराय से खुलने वाली ये ट्रेन करीब 25 घंटे की दूरी तय कर रात के तीन बजे भटिंडा पहुंचती है. लेकिन इस ट्रेन का इतिहात खंगाल लीजिए. ये ट्रेन कभी भी 10 घंटे से कम की देरी से नहीं चली है. स्वागत के पास इकतौता उपाय ये है कि 9 तारीख की परीक्षा देने के लिए उन्हें कम से कम 6 तारीख को निकलना पड़ेगा. ट्रेन वक्त पर पहुंची तो स्टेशन पर इंतजार करना होगा या फिर धर्मशाला या होटल लेकर रुकना होगा. ट्रेन देर से पहुंची तो ट्रेन में ही इंतजार करेंगे. आने-जाने, रहने-खाने का खर्च करीब चार हजार रुपये. परीक्षा देंगे तो खाते में 400 रुपये लौट आएंगे. नहीं देंगे तो 500 रुपये डूब जाएंगे.

3. जितेश कुमार सिंह

छपरा के जीतेंद्र सिंह का सेंटर तेलंगाना के हैदराबाद में है.

जितेश सिंह भी छपरा के रहने वाले हैं. उनका सेंटर तेलंगाना के हैदराबाद में है. 10 अगस्त को इनकी परीक्षा है. छपरा से हैदराबाद के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है. इन्हें पहले छपरा से छह-सात घंटे लगाकर पटना आना होगा. यहां से उन्हें सिकंदराबाद एक्सप्रेस मिलेगी. ये ट्रेन पटना से हैदराबाद जाने में करीब 33 घंटे का वक्त लेती है. कुल मिलाकर कम से कम 40 घंटे का सफर जितेश सिंह को करना ही होगा. तब जाकर ये छपरा से हैदराबाद पहुंच सकते हैं. 40 घंटे का सफर, चार से पांच हजार रुपये का खर्च और थकान अलग से. क्या जितेश  परीक्षा दे पाएंगे, शायद नहीं . खुद जितेश भी इस बात को मानते हैं कि वो परीक्षा देने नहीं जाएंगे, भले ही उनके पैसे नुकसान हो जाएं.

4. मिथिलेश कुमार

बिहार के मधुबनी के रहने वाले हैं. उनका परीक्षा का सेंटर भोपाल में है. मधुबनी से भोपाल के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है. उन्हें पहले मधुबनी से पटना आना होगा, जिसमें छह से सात घंटे का वक्त लगेगा. पटना से इन्हें भोपाल के लिए सुबह 11.35 पर इकलौती ट्रेन मिलेगी, जो राजेंद्रनगर इंदौर एक्सप्रेस है. पटना से इंदौर पहुंचने के लिए 1402 किमी दूरी तय कर ये ट्रेन करीब 22 घंटे का वक्त लेती है. यानी मिथिलेश को परीक्षा देने जाने के लिए करीब 30 घंटे का सफर तय करना होगा, जिसमें कम से कम 3,000 रुपये का खर्च आएगा. अगर परीक्षा छोड़ते हैं तो 500 रुपये और वक्त का नुकसान. परीक्षा देते हैं, तो 400 रुपये उनके खाते में आ जाएंगे.

क्या कह रहा है रेलवे

रेलवे ने अपनी वेबसाइट पर सफाई दी है कि अधिकांश लोगों के सेंटर 200 से 500 किमी के रेंज में ही हैं.

जब से परीक्षार्थियों के सेंटर 1500-2000 किमी दूर देने की बात सामने आई है, परीक्षार्थियों ने विरोध जताना शुरू कर दिया है. हजारों परीक्षार्थियों ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को ट्वीट कर अपनी तकलीफें बताई हैं. इसके बाद भी उनके परीक्षा सेंटर में कोई बदलाव नहीं किया गया है. रेलवे विभाग की ओर से दावा किया गया है कि रेलवे परीक्षा के लिए जिन्होंने शुरू में आवेदन कर दिया था, उनका सेंटर नज़दीक दिया गया है. जिन्होंने बाद में आवेदन किया है, उनका सेंटर दूर भेजा गया है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में ऑनलाइन परीक्षा लेने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं हैं. रेलवे के मुताबिक 34 लाख परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र उनके ही शहर में या उनके शहर से 200 किमी के दायरे में हैं. वहीं करीब 40 लाख लोगों के सेंटर 500 किमी के दायरे में हैं. वहीं रेलवे विभाग ने ये भी कहा है कि शारीरिक रूप से अक्षम लोगों और महिलाओं का सेंटर उनके शहर में या उनके शहर से करीब 200 किमी के दायरे में दिया गया है. रेलवे ने बताया है कि 17 फीसदी परीक्षार्थियों को 1500 से 2000 किमी दूर परीक्षा देने जाना पड़ रहा है. इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के लोग ज्यादा हैं, क्योंकि यहां के एग्जाम सेंटर में सीसीटीवी और मेटल डिटेक्टर जैसी सुविधाएं नहीं हैं.

क्या सेंटर बदलने का ऑप्शन दे रहा है रेलवे

सोशल साइट्स के साथ ही यूट्यूब पर वीडियो के जरिए ये दावा किया जा रहा है कि जिन परीक्षार्थियों का सेंटर 1500-2000 किमी दूर है, वो अपना सेंटर बदल सकते हैं. हालांकि ये दावा पूरी तरह से झूठ है. रेलवे विभाग की ओर से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है. लोग एक मैसेज का हवाला दे रहे हैं. वो मैसेज ये है-

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आप सेंटर बदल सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. इसके लिए पूरा आलेख देखिए.
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आप सेंटर बदल सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. इसके लिए पूरा आलेख देखिए.

लेकिन जब हमने इसकी पड़ताल की तो दावा झूठा निकला. आप भी कर के देखिए. रेलवे भर्ती बोर्ड की साइट http://indianrailways.gov.in/railwayboard/view_section.jsp?lang=0&id=0,4,1244 खोलिए.

काले घेरे में ये ऑप्शन दिखाई देगा.
काले घेरे में ये ऑप्शन दिखाई देगा.

यहां पर रेलवे बोर्ड के नाम में नौवीं रो में चेन्नई दिखेगा. इस पर क्लिक करिए. सबसे कोने में आपको दिख रहा होगा हेल्प डेस्क.

face

हेल्प डेस्क पर क्लिक करिए. ये खुलकर आएगा.

इसमें आपको अपनी डिटेल भरनी होगी.
इसमें आपको अपनी डिटेल भरनी होगी.

कैंडिडेट लॉग इन में अपनी डिटेल भरिए. इसके बाद खुलकर ये पेज आ जाएगा, जिसमें आपकी डिटेल होगी.

रजिस्ट्रेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ भरने के बाद पूरी जानकारी सामने आ जाएगी.

इसमें हेल्प डेस्क पर क्लिक करिए. ये पेज खुलेगा.

after login

अब आप इसमें raise new query पर क्लिक करिए. ये पेज खुलेगा.

query

अब आप इसमें problem category पर क्लिक करके exam city intimation advice पर क्लिक करिए. नीचे problem type में जाएंगे, लेकिन वहां पर आपको किसी तरह का सेंटर चेंज करने का ऑप्शन नहीं मिलेगा. आपको ये ऑप्शन मिलेंगे.

candidate query

इसका सीधा सा मतलब ये है कि कोई भी परीक्षार्थी अपना सेंटर चेंज नहीं कर पाएगा. अभी तक सोशल मीडिया पर जितने भी दावे किए जा रहे हैं, वो पूरी तरह से फेक हैं, झूठे हैं. इसलिए जिन्हें भी परीक्षा देनी है, वो अपने पूर्व निर्धारित शेड्यूल के हिसाब से ही तैयारी करें. परीक्षा के सेंटर में कोई बदलाव नहीं किया गया है.


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