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रानी की नाक सबसे बड़े बेटे ने ही कटवा दी

ब्रिटेन का शाही परिवार. नाम तो सुना की होगा वाली तर्ज़ में अपना इंट्रो कराने वाला परिवार. परिवार की लिस्ट लम्बी और वंश बहुत पुराना. इतना कि 1 एपिसोड तो शाही गद्दी के वारिसों का नाम बताने में ही लग जाए. साल 2022 शाही परिवार के लिए खास है. ग़ालिब होते तो कहते,

उग रहा है दर-ओ-दीवार से सब्ज़ा ‘ग़ालिब’ हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है

दुनिया की ही तरह ब्रिटेन भी आमिक्रॉन से त्रस्त है. लेकिन बकिंघम पैलेस में कुछ अलग ही नजारा दिख रहा है. रानी एलिज़ाबेथ को गद्दी पर बैठे 70 साल होने जा रहे हैं.

जिसके चलते शाही परिवार में जश्न का माहौल है. माहौल से इतर विंडसर कैसल में मौक़ा मौक़ा की धुन भी बज रही है. मौक़ा इसलिए कि पिछले कुछ सालों में शाही परिवार की पब्लिक में बहुत किरकिरी हुई है. पहले प्रिन्स हैरी और उनकी पत्नी मेघन मर्कल ने ओपरा विनफ़्रे के साथ हुए इंटर्व्यू में शाही परिवार पर नस्लभेद के आरोप लगा दिए. ये कम था कहने को कि बाद में दोनों ने शाही परिवार से ही इस्तीफ़ा दे दिया. मतलब रख लो तुम अपनी गद्दी और अपना महल वाले टशन में दोनों ब्रिटेन छोड़ अमेरिका जा बसे.

70 साल पूरे होने पर शाही परिवार को लगा था इस मौके का इस्तेमाल ज़रा इमेज मेकओवर के लिए किया जाएगा. लेकिन ऐन मौक़े पर रंग में भंग पड़ गया है.

शाही परिवार के एक राजकुमार पर यौन शोषण के आरोप लगे थे. इस मामले में एक और नया मोड़ आया है. जवाब मांगा गया तो शहज़ादे ने फ़रमाया, “साहब क्या बात करते, हम को तो पसीना ही नहीं आता.”

दोस्तों ने भी कहा सच है. हमारे शहज़ादे को तो युद्ध में लड़ते हुए पसीना ना आया तो यौन शोषण में क्या आएगा. ख़ैर अब मामला पहुंचा है रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के पास. और उन्होंने पसीने आने का पूरा प्रबंध कर दिया. सारे पदक वदक छीन लिए. और पैसा-भत्ता मिलने पर भी रोक लगा दी.

शाही परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही. हैरी और मर्कल वाले एपिसोड से आगे बड़े तो साल 2021 में शाही परिवार के लिए एक और बुरी खबर आई. पिछले साल 9 अप्रैल को क्वीन एलिज़ाबेथ के पति प्रिन्स फ़िलिप की मृत्यु हो गई. अब इससे पहले आप पूछें कि क्वीन का पति प्रिन्स कैसे हुआ. तो हम कहेंगे, मत पूछिए साहब. राजा रानी की कहानी, सदियों पुरानी है.

अभी के लिए बस ये समझ लीजिए की शाही परिवार में खून के हिसाब से गद्दी मिलती है. जॉर्ज पंचम की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे को गद्दी मिली. एक अमेरिकी महिला के प्रेम में राजा एडवर्ड ने गद्दी छोड़ दी. तब भी कुछ ऐसा ही हंगामा हुआ था जैसा प्रिन्स हेनरी के राजशाही त्याग देने पर हुआ. बड़े बड़े महलों में ऐसी छोटी छोटी बातें होती रहती हैं सेन्योरिटा.

एडवर्ड के बाद राजा बने जॉर्ज छठे. बदमाश नहीं, भले आदमी थे. वक्त से पहले ही कैंसर की बीमारी से चल बसे. अब दिक़्क़त ये खड़ी हुई कि राजा जॉर्ज का कोई पुरुष वारिस पैदा नहीं हुआ था. इसलिए खून की परम्परा में जॉर्ज की बड़ी बेटी लिलिबेट को गद्दी मिली. जिसके बाद लिलिबेट बन गई रानी एलिज़ाबेथ द सेकेंड. एलिज़ाबेथ के पति थे प्रिन्स फ़िलिप. चूंकि उनमें विंडसर ख़ानदान का खून नहीं था, इसलिए वो राजा नहीं बन सकते थे. इन दोनों की हुई चार औलादें. पहले प्रिन्स चार्ल्स. लेडी डायना के पति. ये ही अगले वारिस है गद्दी के. यानी क्वीन एलिज़ाबेथ के बाद ये ही ब्रिटेन के राजा बनेंगे.

95 साल की उम्र में भी एलिज़ाबेथ की सेहत को देखकर कहा नहीं जा सकता कि फ़िलिप राजा कब बनेंगे. लेकिन उससे पहले चिंता इस बात की है कि तब तक फ़िलिप की गद्दी बचेगी भी नहीं. 21 वीं सदी के ब्रिटेन में दबी ज़बान में लोग पूछने लगे हैं कि ये रानी, ये महल, इस सब का मतलब क्या है. देश चलाता है प्रधानमंत्री और वो कौन बनेगा, ये चुनाव से तय होता है. तो ये महल और शाही ठाट -बाट का खर्च जनता की जेब से क्यों जा रहा है.

रानी एलिज़ाबेथ के कार्यकाल को 70 साल हो चुके हैं. अभी भी ब्रिटेन की 60 % जनता राजशाही के पक्ष में है. लेकिन धीरे-धीरे ये प्रतिशत गिरता जा रहा है. जो राज परिवार के लिए चिंता की बात है. प्रिन्स चार्ल्स को अपनी फ़्यूचर की कुर्सी की फ़िक्र है. लेकिन कुर्सी के चौपायों में अपने ही सेंध लगाने में लगे है. और इनमें से एक है उनका छोटा भाई प्रिन्स एंड्र्यू.

ड्यूक ऑफ़ यॉर्क की उपाधि रखने वाले एंड्र्यू का जन्म हुआ था 1960 में. इतिहासकार और रॉयल लेखिका इंग्रिड सीवर्ड शाही फ़ैमिली के मामलों में एक्स्पर्ट मानी जाती हैं. शाही फ़ैमली के ऊपर उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं. उनकी एक किताब, My Husband and I: The Inside Story of 70 Years of the Royal Marriage, के अनुसार बचपन से ही एंड्र्यू उग्र स्वभाव के थे. वो कुत्तों को लात मारते और शाही गार्डों को चिढ़ाया करते थे.

एंड्र्यू ने स्कॉटलैंड के एक बोर्डिंग स्कूल में शिक्षा पूरी की. वैसे ही जैसे कभी उनके पिता प्रिन्स फ़िलिप ने की थी. फिर ब्रिटिश नेवी को जॉइन कर लिया. जवानी के दिनों में इनके साथ एक नाम जुड़ा, रैंडी ऐंडी. काहे कि प्रिन्स एंड्र्यू पार्टियों की जान हुआ करते थे. और उन्हें प्लेबॉय प्रिन्स के नाम से भी जाना जाता था.

बड़े भाई के साथ कभी कुछ खास सम्बंध ना रहे. चार्ल्स को लगता था कि एंड्र्यू उनकी कुर्सी खाने के चक्कर में है. चार्ल्स की पत्नी डायना को जब पहली बार शाही परिवार से मिलवाया गया, तब भी खबरें उड़ी कि डायना को चार्ल्स की बजाय एंड्र्यू के लिए देखा जा रहा है. बाद में डायना और एंड्र्यू की दोस्ती के चर्चे भी खूब उठे.

जवानी में अय्याशी के चलते खबरों में रहने वाले एंड्र्यू की ज़िंदगी में चेंज आया 1982 में. जब आर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच फ़ॉकलैंड युद्ध की स्थिति बनी. एंड्र्यू ब्रिटिश नेवी में थे. युद्ध में एंड्र्यू की जान को ख़तरा हो सकता था. इसलिए ब्रिटिश सरकार ने उनसे एक डेस्क जॉब पर जाने के लिए कहा. एंड्र्यू ने इनकार कर दिया. और तब रानी एलिज़ाबेथ ने अपने बेटे का साथ दिया. उन्होंने भी एंड्र्यू को कॉम्बैट मिशन पर जाने से रोकने के लिए इनकार कर दिया.

इस युद्ध में एंड्र्यू ने एक्टिव कॉम्बैट मिशन में भाग लिया और नेवल हेलिकॉप्टर को पायलट भी किया. इस युद्ध में उनके साहस को देखकर जनता में उनकी छवि रातों रात बदल गई. अब वो एक वॉर हीरो बन गए थे.

साल 1986 में उनकी शादी सैरा फर्गसन से हुई. और तब से वो ड्यूक ऑफ़ यॉर्क बन गए. एक दशक चली इस शादी में एंड्र्यू पर कई बार बेवफ़ाई के आरोप लगे. और इन्हीं आरोपों के चलते 1996 में उनका तलाक़ भी हो गया.

2002 में उनका नाम एक और स्कैंडल में आया. New Zealand Herald की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रिन्स एंड्र्यू टेज रफ़्तार से गाड़ी चलाते पकड़े गए थे. तब वो एक गोल्फ चैम्पीयन्शिप में हिस्सा लेने जा रहे थे. पुलिस अफ़सर ने उनकी गाड़ी रोक ली. लेकिन जब उन्हें पता चला कि अंदर प्रिन्स एंड्र्यू हैं, तो उन्हें जाने दिया गया.

साल 2012 में एक बार फिर उनका नाम चर्चा में आया. जब प्रिन्स एंड्र्यू एक गगनचुंबी इमारत के 87 वें माले से सिर्फ़ रस्सी के सहारे नीचे उतरे. ये सब एक चैरिटी के वास्ते किया गया था.

माना जाता है कि एंड्र्यू रानी एलिज़ाबेथ के सबसे प्रिय पुत्र हैं. इसका एक कारण तो है प्रिन्स चार्ल्स और लेडी डायना का एपिसोड, जिसकी वजह से एलिज़ाबेथ और प्रिन्स चार्ल्स के रिश्ते कटु हो चले थे. दूसरा कारण है एंड्र्यू की पैदाइश का वक्त. जब एंड्र्यू पैदा हुए, तब तक एलिज़ाबेथ रानी बन चुकी थी. और ये 103 साल बाद हो रहा था कि किसी शासक के सत्ताधीन रहते हुए कोई पुरुष वारिस पैदा हुआ हो. चूंकि एलिज़ाबेथ के पति प्रिन्स फ़िलिप भी मिलिट्री बैकग्राउंड से आते थे. इसलिए एंड्र्यू के मिलिट्री बैकग्राउंड के चलते भी वो क्वीन एलिज़ाबेथ के प्रिय बने रहे.

एलिज़ाबेथ के दूसरे बेटे होने के बावजूद गद्दी के वारिस के तौर पर इनका नंबर पांचवां है. इनसे पहले प्रिन्स चार्ल्स और उनकी औलादों का नंबर आता है.

कुछ सफ़ेद और कुछ ग्रे के बाद अब चलते हैं एंड्र्यू की ज़िंदगी के स्याह पक्ष की ओर.

21 दिसम्बर के दुनियादारी के एपिसोड में हमने आपको जेफ़्री एपस्टीन की कहानी बताई थी. बताया था कि कैसे अपनी दोस्त घिलेन मैक्सवेल के साथ मिलकर उसने 80 से अधिक नाबालिग लड़कियों का शोषण किया. ये दोनों केवल शोषण ही नहीं किया करते थे, बल्कि नाबालिग लड़कियों को ऊंची पहुंच और रसूख़ वाले लोगों तक सप्लाई किया करते थे.

जेफ्री एप्स्टीन ने 2019 में खुदकुशी कर ली थी. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और डॉनल्ड ट्रंप के करीबी बताए जाने वाले एप्सटीन की लाश जेल की बैरक में मिली थी. घिलेन मैक्सवेल को भी साल 2021 दिसम्बर महीने में सजा सुनाई गई.

घिलेन मैक्सवेल और एप्सटीन के साथ जिन लोगों का नाम जुड़ा, उनमें से एक प्रिन्स एंड्र्यू भी थे. 2015 में एंड्र्यू पर पहली बार आरोप लगा. एक महिला, वर्जीनिया गिफ़्रे ने आरोप लगाया कि जब वो 17 साल की थी,. जेफ्री एप्स्टीन ने उन्हें प्रिन्स एंड्र्यू से मिलाया था. और तब प्रिन्स एंड्र्यू ने गिफ़्रे का 3 बार रेप किया.

साल 2019 में एंड्र्यू ने BBC को एक इंटरव्यू दिया. इसमें उनके एपस्टीन और घिलेन मैक्सवेल के साथ रिश्तों को लेकर सवाल पूछे गए. इस दौरान इंटरव्यूवर ने एंड्र्यू को गिफ़्रे के एक बयान का हवाला दिया. गिफ़्रे ने बताया था कि जब एंड्र्यू से उनकी मुलाक़ात हुई तो वो पसीने से तर बतर हुए जा रहे थे. इस सवाल के जवाब में एंड्र्यू ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी मुलाक़ात की कोई याद नहीं. साथ ही दिया एक अजीबोग़रीब बयान. बोले कि मेडिकल कंडीशन के चलते उन्हें पसीना आता ही नहीं. गिफ़्रे के साथ एक पुरानी फोटो को लेकर भी वो कोई जवाब नहीं दे पाए.

सिर्फ़ इतना कहा कि उन्हें ऐसी कोई मुलाक़ात याद नहीं है. इस इंटरव्यू के बाद ब्रिटेन में हंगामा मच गया. 2019 चुनाव का साल था लेकिन अख़बारों की सुर्ख़ियों में एंड्र्यू का ये इंटरव्यू छाया रहा. शाही परिवार के लिए ये बड़ा स्कैंडल था. मजबूरन एंड्र्यू ने ऐलान किया कि वो उन पर लगे आरोपों के चलते वो पब्लिक लाइफ़ से पीछे हटते हैं. फिर तमाम चैरिटी और संगठनों ने एंड्र्यू से किनारा कर लिया. इसके बाद वह बहुत ही कम मौकों पर सार्वजनिक तौर पर नजर आए.

लगा इससे मामला शांत होगा. लेकिन तब एक और मुसीबत आ खड़ी हुई. साल 2021 में वर्जीनिया गिफ़्रे ने अमेरिकी अदालत में एंड्र्यू के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर कर दिया. इसी महीने 12 जनवरी को इस मामले में लेटस्ट अपडेट आया. न्यू यॉर्क अदालत के जज ने प्रिंस एंड्र्यू पर यौन शोषण का मुक़दमा चलाने की इजाज़त दे दी. एंड्र्यू के वकीलों ने प्रयास किया कि अदालत इस मामले को खारिज कर दे, लेकिन न्यूयॉर्क के जज ने उनकी ये कोशिशें निरस्त कर दीं.

अब इस मामले में एंड्र्यू पर मुक़दमा चलेगा. जैसे ही मुक़दमे की खबर सामने आई. शाही परिवार की तरफ़ से भी क्राइसिस मैनेजमेंट की कोशिशें तेज हो गई.

इस बीच लोगों की तरफ़ से मांग उठी की क्वीन एलिज़ाबेथ कुछ सख़्त कदम उठाएं. रॉयल नेवी, रॉयल एयर फोर्स और ब्रिटिश सेना के अधिकारियों ने क्वीन एलिज़ाबेथ को एक पत्र लिखा. उन्होंने मांग की कि सशस्त्र बलों में एंड्र्यू की पदवियां और उपाधियां छीन ली जाएं. महारानी एलिजाबेथ राष्ट्राध्यक्ष होने के नाते थल सेना, नौसेना और वायु सेना की कमांडर इन चीफ हैं. राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्यों को सैन्य इकाइयों के मानद प्रमुख के तौर पर नियुक्त करने की ज़िम्मेदारी उन्हीं की है. प्रिन्स एंड्र्यू भी ग्रेनेडियर गार्ड्स के मानद कर्नल थे. ये वही गार्ड्स हैं जिन्हें काली टोपी और लाल पोशाक में बकिंघम पैलेस की सुरक्षा में तैनात किया जाता है.

घिलेन मैक्सवेल के साथ उनके रिश्तों को लेकर भी कुछ नई बाते सामने आई. बकिंघम पैलेस के शाही सुरक्षा अधिकारी पॉल पेज और युआन रेली ने दावा किया कि घिलेन मैक्स्वेल और एंड्र्यू का रिश्ता काफ़ी करीबी था. उनके अनुसार घिलेन को कभी भी महल में आने जाने की अनुमति थी. और कभी-कभी तो वो एक दिन में चार बार महल में जाया करती थी.

इन सब खबरों के चलते इसी हफ़्ते बकिंघम पैलेस को इस मामले में सख़्त निर्णय लेना पड़ा. पैलेस ने आधिकारिक रूप से ऐलान किया कि प्रिन्स एंड्र्यू अपने सभी मिलिट्री पदवियों का त्याग करते हैं. साथ ही उनसे सभी शाही ज़िम्मेदारियां वापिस ली जाती है. शाही परिवार को मिलने वाली सम्मान सूचक उपाधि, ‘हिज रॉयल हाईनेस’ भी उनसे वापस ले ली गई.

स्टेट्मेंट में आगे कहा गया कि प्रिन्स एंड्र्यू किसी सामाजिक ज़िम्मेदारी का निर्वहन नहीं करेंगे. और अमेरिका में चल रहे केस को वो एक प्राइवेट सिटिज़न के तौर पर लड़ेंगे. इस मामले में शाही परिवार से उन्हें कोई मदद नहीं दी जाएगी. प्रिन्स हैरी के बाद ये दो सालों में दूसरी बार है जब शाही परिवार के किसी सदस्य से शाही पदवियां छीन ली गई हैं.

इस मामले में आगे क्या होगा?

न्यू यॉर्क अदालत में जो केस चल रहा है, वो क्रिमिनल ना होकर सिविल केस है. इसलिए इस मामले में एंड्र्यू के जेल जाने के चांसेज नहीं के बराबर है. लेकिन सिविल केस के चलते उनकी और किरकिरी ज़रूर हो सकती है. जो पहले ही बहुत हो चुकी है. अगर दोनों पक्ष किसी तरह का कोई सेटेलमेंट करते हैं तो मुमकिन है एंड्र्यू को किसी प्रकार के ग़लत आचरण को स्वीकार नहीं करना पड़ेगा.

लेकिन सेटेलमेंट के चलते, उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है. ख़ासकर तब जब शाही परिवार से उन्हें मिलने वाला भत्ता भी रोक दिया गया है. मामला और खिंचा तो इस केस में ज्यूरी ट्रायल भी हो सकता है. और एप्सटीन के साथ प्रिन्स एंड्र्यू के रिश्ते को लेकर और बहुत से जानकारियां बाहर आ सकती हैं.

कुल मिलाकर बात ये है कि साल 2022 शाही परिवार के लिए जश्न का मौक़ा था. लेकिन प्रिन्स एंड्र्यू के केस के चलते ये साल भी शाही परिवार पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है.

 


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