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क़िस्सागोई 1: अच्छा तो फिर शहज़ादे को क्या वो सुनहरे बालों वाली लड़की मिली भी कि नहीं?

हिन्दुस्तान में ज़बानी रिवायत, वाचिक परंपरा या ओरल ट्रेडिशन में कहानी सुनने का एक नियम है.  कहानी सुनते हुए सुनने वाले को बीच-बीच में हूं हूं करते रहना पड़ता है. कहानी की परंपरा में इसे हुंकारा भरना कहते हैं. हुंकारा के बिना कहानी सुनाने का कोई मतलब नहीं. हुंकारे की अहमियत इसलिए है कि ये बताता है कि सुनने वाला ध्यान से कहानी सुन रहा है. साथ ही कहानी में जो कुछ हो रहा है उस पर उसे कहानी के अंदर रहते हुए पूरा यक़ीन है. अगर कहानी सुनने वाला कहानी से अंदर से नहीं जुड़ता और उसे बाहरी दुनिया के सच-झूठ से परखता है तो न उसे कहानी सुनने का लुत्फ़ मिलेगा, न सुनाने वाले को सुनाने का.

Qissagoi

# हुंकारा भरना इसलिए ज़रूरी है 

सुनने सुनाने से मंसूब एक क़िस्सा यूं है कि पुराने समय में एक आदमी था. उसको कहानी सुनने का बहुत शौक़ था. पर सलीक़ा नहीं था. उसकी एक बुरी आदत थी. कहानी सुनते वक़्त जब उसे बहुत मज़ा आने लगता तो वो कह बैठता कि ये तो हो ही नहीं सकता. ये सुनते ही कहानी सुनाने वाले का मन ख़राब हो जाता और वो कहानी सुनाना बंद कर देता. जब ऐसा कई बार हो चुका तो सारे कहानी सुनाने वालों ने गुस्से और दुख में उसे कहानी सुनाना बंद कर दिया. अब कहानी सुनने का शौक़ीन वो आदमी कहानियों के अभाव में तड़पने लगा, बिलबिलाने लगा. उसने जगह जगह जाकर सारे क़िस्सागोयों से निवेदन किया कि वो उसे कहानी सुना दें मगर किसी ने उसकी बात नहीं मानी.

विक्रम बेताल की कहानी तो याद होगी, (तस्वीर विक्रम बेताल सीरियल यूट्यूब ग्रैब)
विक्रम बेताल की कहानी तो याद होगी, (तस्वीर विक्रम बेताल सीरियल यूट्यूब ग्रैब)

# अच्छा फिर क्या हुआ?

आख़िर में एक क़िस्सागो को उस पर रहम आ गया और वो उसे कहानी सुनाने को तैयार हो गया. मगर उसने एक शर्त रखी कि अगर इस बार उसने कहानी के बीच में ये कहा कि ये तो हो ही नहीं सकता, तो वो कहानी सुनाना बंद कर देगा और फिर कोई भी क़िस्सागो उसे कभी कोई कहानी नहीं सुनाएगा. लेकिन उसके कहानी न सुन पाने की कहानी भी सबको सुनाई जाएगी. कहानी को अपनी बेक़द्री बरदाश्त नहीं होती सो कहानी उस आदमी से रुठ जाएगी और वो कहानी सुनना ही भूल जाएगा. इस बात से वो आदमी बहुत डर गया और उसने क़िस्सागो के सामने क़सम खाई कि वो कहानी के बीच में बिल्कुल नहीं कहेगा कि ये सच नहीं हो सकता.

कहानी सुनाने वाला आपको ले जाता है दूसरी दुनिया में. इसी दुनिया में रहे तो क्या रहे. (क्लासिक पेंटिंग 'सी ऐट युअर शोर')
कहानी सुनाने वाला आपको ले जाता है दूसरी दुनिया में. इसी दुनिया में रहे तो क्या रहे. (क्लासिक पेंटिंग ‘सी ऐट युअर शोर’)

# लेकिन सलीक़ा तो सलीक़ा ही है  

किस्सागो ने अपनी कहानी शुरू की. बहुत साल पहले किसी घने जंगल के बीचो-बीच एक राज्य था. जिससे होकर नदी बहती थी. जिसके किनारे पर एक भव्य राज-महल बना हुआ था, जिसमें एक शहज़ादा रहता था. एक दिन शहज़ादा नदी किनारे पानी में पैर डालकर छप-छप कर रहा था कि तभी उसके पास पत्ते से बना एक ख़ूबसूरत दोना तैरता हुआ आया. उसने उत्सुकता के साथ वो दोना उठा कर देखा तो उसमें किसी लड़की का एक बाल रखा हुआ था. ऐसा ख़ूबसूरत बाल शहज़ादे ने कभी नहीं देखा था. सुनहरा बाल. सोने का बना हुआ. उसमें एक दिव्य चमक भी. शहज़ादे ने सोचा कि ये बाल इतना सुंदर है तो ये जिसका है वो कितनी सुंदर होगी.

सोने का बाल हो या एक सींग वाला दानव, ये है बात विश्वास की. (क्लासिक पेंटिंग by Goldilocks)
सोने का बाल हो या एक सींग वाला दानव, ये है बात विश्वास की. (क्लासिक पेंटिंग by Goldilocks)

इतने में कहानी सुनने वाला अपने उत्साह और आनंद पर काबू न कर सका और दीवाना होकर बोल उठा ये सच नहीं हो सकता. किस्सागो ने उसी वक़्त अपना बयान रोका और बिना कुछ कहे वहां से उठकर चला गया. इसके बाद वो आदमी कहानी सुनना भूल गया. क्योंकि उसको किसी ने कोई कहानी नहीं सुनाई. लेकिन उसकी कहानी तब से आज तब सुनाई जा रही है. जिसकी एक ही सीख है कि कहानी सुनना तो सलीक़े से सुनना…हुंकारा ज़रूर भरना.

हिमांशु बाजपेयी
हिमांशु बाजपेयी

हिमांशु बाजपेयी. क़िस्सागोई का अगर कहीं जिस्म हो, तो हिमांशु उसकी शक्ल होंगे. बेसबब भटकन की सुतवां नाक, कहन का चौड़ा माथा, चौक यूनिवर्सिटी के पके-पक्के कान और कहानियों से इश्क़ की दो डोरदार आंखें.‘क़िस्सा क़िस्सा लखनउवा’ नाम की मशहूर क़िताब के लेखक हैं. और अब The Lallantop के लिए एक ख़ास सीरीज़ लेकर आ रहे हैं. नाम है ‘क़िस्सागोई With Himanshu Bajpai’. इसमें दुनिया जहान के वो क़िस्से होंगे जो सबके हिस्से नहीं आए. हिमांशु की इस ख़ास सीरीज़ की ये थी पहली खेप.


दास्तानगो के शागिर्द का क़िस्सा भी सुनते जाइए –

क़िस्सागोई: जब लखनऊ के एक नवाब दास्तानगो के शागिर्द से बहुत खुश हुए थे

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