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क़िस्सागोई 16 : शुतुरमुर्ग ने अपने भाषण से सबको चक्कर में डाल दिया

एक जंगल था जिसमें सिर्फ़ परिंदे रहते थे. एक दिन एक शुतुरमुर्ग़ ने जंगल में ज़ोरदार ऐलान किया- कल सुबह 9 बजे हम आसमान में उड़ेंगे. ये घोषणा जब जंगलवासियों ने सुनी तो उन्हें अचंभा हुआ. ये इतना भारी भरकम बंदा आसमान में कैसे उड़ेगा. फिर भी बंदे की ज़ोरदार घोषणा में झलकते कॉन्फिडेंस ने ज़बरदस्त जिज्ञासा पैदा की. यूं भी शुतुरमुर्ग की मजबूती, दमदारी और विशिष्टता का सारे परिंदे लोहा मानते थे. सो बहुत सारे जंगल वासी अगले दिन सुबह 9 बजे निर्धारित जगह पर इकट्ठा हो गए. कुछ लोग नहीं भी आए. सबके आने के बाद शुतुरमुर्ग ने एक मुख़्तसर मगर धुंआधार तक़रीर की. इस तक़रीर में शुतुरमुर्ग ने उड़ने की महिमा बताई. जंगल वाले तक़रीर सुनकर सुखद रोमांच से भर गए.

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सब इंतज़ार में थे कि बस इधर तक़रीर ख़त्म हुई उधर शुतुरमुर्ग उड़ा. कुछ बेसब्र लोगों को गुस्सा भी आ रहा था कि ये सीधे उड़ क्यों नहीं जाता. तक़रीर क्यों कर रहा है. तक़रीर के ख़त्म होते ही शुतुरमुर्ग ने अपने विशाल पंख फैला  लिए. बिल्कुल हवाई जहाज़ की मुद्रा में. ये देखकर जंगल वाले बहुत ख़ुश हुए. शुतुरमुर्ग की ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद शुरू हो गयी. उसका ये अंदाज़ देखकर कुछ प्रतिष्ठित जंगल वासियों को लगा कि आज ये ज़रूर उड़ेगा. ये पहली बार उड़ने जा रहा है. उड़ने के बाद मुमकिन है कि ये इस जंगल में लौटे ही न. उड़ते उड़ते दूर निकल जाए. अतः उड़ने से पहले इसका सम्मान तो बनता है. ये ख़ुसूर पुसुर सब लोगों में वायरल मैसेज की तरह फैल गयी कि हो सकता है शुतुरमुर्ग वापस न आए अतः उड़ान से पहले सम्मान समारोह ज़रूरी है. फिर क्या था- किसी ने शुभकामना गीत गाया, किसी ने क़सीदा पढ़ा, किसी ने मंगल वचन बोले किसी ने तिलक दिया, किसी ने वाद्य बजाए. नागरिक अभिनंदन ख़त्म हुआ तो सब लोग शुतुरमुर्ग के उड़ने की प्रतीक्षा में यथास्थान खड़े हो गए.

शुतुरमुर्ग होता है लंबा चौड़ा प्राणी. कहीं कहीं इनकी रेस भी करवाते हैं इंसान लोग (फ़ाइल फोटो)
शुतुरमुर्ग होता है लंबा चौड़ा प्राणी. कहीं कहीं इनकी रेस भी करवाते हैं इंसान लोग (फ़ाइल फोटो)

अब शुतुरमुर्ग अपने पंख फैलाए हुए  बड़ी तेज़ गति से कुछ दूर दौड़ा और फिर उसी तरह दौड़ते हुए अपने घर की तरफ मुड़ गया. शुतुरमुर्ग की पत्नी ने ये तमाशा देखा तो उसे रास्ते में मिलकर पूछा- स्वामी आपने ये ड्रामा क्यों किया ? शुतुरमुर्ग बोला ड्रामा क्या, ये तो हमारा मास्टरस्ट्रोक है. पत्नी बोली- ये कैसा मास्टरस्ट्रोक है स्वामी? पहले इतना माहौल बनाया. भाषण देकर बड़ी-बड़ी बातें कीं, ज़बरदस्ती की वाह-वाही लूटी और फिर बिना उड़े ही बैक टू पेवेलियन हो लिए. शर्म नहीं आई आपको? पत्नी को ‘टू द प्वाइंट’ सवाल पूछते देख शुतुरमुर्ग ने पैंतरा बदला. बोला  कि तुमने देखा कि सब जंगलवासी मुझसे कितना प्यार करते हैं. मेरे वियोग का ख़याल भर आते ही सब कितना चिंतित और उदास हो गए थे. उनको भय था कि कहीं ऐसा न हो कि मैं उड़ने के बाद वापस ही न लौटूं. उन सबके मुख मलीन हो गए थे. मैं अपने साथियों को इस दयनीय दशा में छोड़कर कैसे उड़ सकता हूँ.  अपने साथियों के लिए मुझे अपनी प्रतिष्ठा त्यागनी पड़ी. पत्नी ने फिर तेवर कड़े किए. बोली जब आप कुदरती तौर पर उड़ने में सक्षम ही नहीं हैं तो आप ऐसी बातों से किसको मूर्ख बना रहे हैं. अब शुतुरमुर्ग को आवेश आया. वो बोला कि मैं इन्हें मूर्ख बना नहीं रहा हूँ, ये मूर्ख हैं, और इनमें जो मूर्ख नहीं हैं वो अति भोले और मासूम हैं. यदि ये मूर्ख या मासूम न होते तो क्या मेरी बातों में आ जाते? जो ऐसे नहीं थे वो मुझे उड़ता देखने के लिए आये ही नहीं.

इंसानों का भाषण तो सूना होगा लेकिन इस शुतुरमुर्ग के भाषण से तो नेता चकरा जाएं (फ़ाइल फोटो)
इंसानों का भाषण तो सूना होगा लेकिन इस शुतुरमुर्ग के भाषण से तो नेता चकरा जाएं (फ़ाइल फोटो)

पत्नी बोली मगर आपको इस हवाई घोषणा से मिला क्या? शुतुरमुर्ग बोला कि अगर मैं उड़ने की घोषणा न करता, ज़ोरदार भाषण देकर माहौल न बनाता तो क्या ये लोग मेरा ऐसा भव्य स्वागत करते? ये वाद्य कौन बजाता? कौन मंगल गाता? पत्नी ने कुछ सोचते हुए पूछा- पर स्वामी ये सब पीछे आपका मज़ाक़ बना रहे होंगे कि आपने बातें बड़ी-बड़ी कीं मगर किया कुछ नहीं. शुतुरमुर्ग हंसते हुए बोला- मज़ाक़ तो ये बना ही नहीं सकते. न ही मज़ाक़ बर्दाश्त कर सकते हैं. क्योंकि मज़ाक़ बनाने और बर्दाश्त करने के लिए जो स्वतंत्र सोच अनिवार्य है वो इनके पास है ही नहीं. उल्टा ये लोग तो मेरा आभार मानेंगे कि मैंने उड़ान नहीं भरी. क्योंकि इन्हें पूरा भरोसा है कि मैंने न उड़ने का फैसला जंगलवासियों के हित में किया. ये यही मानते हैं कि मैं इसीलिए नहीं उड़ा ताकि जंगलवासियों को मेरे वियोग का कष्ट न झेलना पड़े. पत्नी बोली पर आप तो बिना कुछ बताए ही इधर चले आए वो ऐसा क्यों मानेंगे. शुतुरमुर्ग बोला क्योंकि मैं अपने डिप्टी को बता आया था कि मेरे जाने के बाद एक जोरदार भाषण देना और इन लोगों को यक़ीन दिला देना कि ये जो कुछ भी हुआ ये हमने उनके हित मे ही किया है.

हिमांशु बाजपेयी
हिमांशु बाजपेयी

हिमांशु बाजपेयी. क़िस्सागोई का अगर कहीं जिस्म हो, तो हिमांशु उसकी शक्ल होंगे. बेसबब भटकन की सुतवां नाक, कहन का चौड़ा माथा, चौक यूनिवर्सिटी के पके-पक्के कान और कहानियों से इश्क़ की दो डोरदार आंखें.‘क़िस्सा क़िस्सा लखनउवा’ नाम की मशहूर क़िताब के लेखक हैं. और अब The Lallantop के लिए एक ख़ास सीरीज़ लेकर आए हैं. नाम है ‘क़िस्सागोई With Himanshu Bajpai’. इसमें दुनिया जहान के वो क़िस्से होंगे जो सबके हिस्से नहीं आए. हिमांशु की इस ख़ास सीरीज़ का ये था क़िस्सा नंबर सोलह.


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