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क्या है वो साजिश, जिससे जुड़े हजारों इंस्टाग्राम, फेसबुक अकाउंट आनन-फानन में हटा दिए गए

दुनिया में ऐसे लोग भी हैं, जो मानते हैं कि धरती गोल नहीं बल्कि चपटी है. अब मानते हैं तो मानते हैं. मानने में क्या जाता है. लेकिन अगर ये मानने वाले भूगोल की किताब में यही पढ़ाने की जिद पकड़ लें. आंदोलन शुरू कर दें तो दिक्कत बढ़ सकती है. कुछ ऐसा ही गदर अमेरिका में क्यूएनोन (QAnon) थ्योरी को मानने वालों ने काट रखा है. इससे परेशान होकर फेसबुक और ट्विटर ने इस तरह के कॉन्सिपिरेसी थ्योरी फैलाने वाले हजारों लोगों को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है. लेकिन इस माजरे पर अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप की बांछें खिली हुई हैं. आइए जानते हैं, क्या है यह क्यूएनोन कॉन्सपिरेसी थ्योरी और क्या है इसका ट्रंप कनेक्शनः

अमां क्या साजिश का भी कोई सिद्धांत होता है

षड्यंत्र सिद्धांत या कॉन्पिरेसी थ्योरी का इतिहास उतना ही पुराना है, जितना खुद थ्योरी का. मतलब जब से दुनिया में सिद्धांत नाम की चीज बनी, षड्यंत्र वाले सिद्धांत भी बनने शुरू हो गए. मिसाल के तौर पर यह धरती गोल है वाला सिद्धांत. कॉन्सपिरेसी थ्योरीज के पीछे मान्यता ज्यादा और वैज्ञानिक सबूत कम ही होते हैं. इसे मानने वाले ‘ऐसा होता है तो होता है’ वाले फंडे पर चलते हैं. कुछ नामी कॉन्सपिरेसी थ्योरी जान लीजिए.

# इंसान चांद पर गया ही नहीं, यह सब स्टूडियो में शूट किया गया.

# 9/11 का हमला अमेरिका ने खुद अपने ऊपर करवाया.

# एड्स जैसी कोई बीमारी नहीं है, यह झूठ फैलाया जा रहा है.

# यहूदी, फ्रीमैसन, कम्यूनिस्ट, कैथलिक चर्च हमेशा दुनिया के खिलाफ कुचक्र रचते रहते हैं.

कॉन्सपिरेसी थ्योरी का नया नमूना यह है कि लोग कोरोना को भी दुनियाभर के बड़े देशों की साजिश मान रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसी कोई बीमारी है ही नहीं, और इसे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और कुछ साइंटिस्टों ने मिलकर गढ़ा है.

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अमेरिकी 1 डॉलर के नोट पर छपे इस निशान को कॉन्सपिरेसी थ्योरिस्ट ‘सरकार सबकुछ देख रही है; से जोड़कर देखते हैं.

अब समझते हैं क्यूएनोन (QAnon) की महिमा.

ट्रंप सरकार के अमेरिका में चुने जाने के बाद यह अजीब-सा नाम QAnon अक्टूबर 2016 में दुनिया के सामने आया. एक वेबसाइट पर Q नाम के प्रोफाइल नेम वाले किसी शख्स ने पोस्ट किया कि ट्रंप सरकार ने विपक्षी पार्टी यानी डेमोक्रेट्स के खिलाफ जो जांच कराई है, उसमें भारी खुलासे हुए हैं लेकिन बहुत लोगों को बचाया जा रहा है. इस Q नाम के इंसान ने बताया कि हिलैरी क्लिंटन सहित पूरी विपक्षी पार्टी एक ऐसी शैतानी ताकत को मानते हैं, जो बच्चों के यौन शोषण में लिप्त है. इस पूरी रिपोर्ट को दबाने में बड़े नेताओं, बिजनेसमैन और मीडिया समूह सहित दुनिया भर के ताकतवर लोग लगे हैं. इनके खिलाफ दुनिया में सिर्फ एक ही नेता है, जो लड़ रहा है और वह है- अमेरिकी प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप. चूंकि इस Q का कोई नाम नहीं था तो इसे Anonymous यानी अनाम कहा गया. Q और Anonymous मिलकर बना QAnon और बन गई क्यूएनोन थ्योरी.

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क्यूएनोन के समर्थक इस सिंबल को अपनी पहचान मानते हैं.

शुरुआत में किसी ने क्यूएनोन की बेसिर-पैर की बातों का ज्यादा लोड नहीं लिया. लेकिन मामला 2018 तक आते-आते गंभीर हो गया. इस थ्योरी को मानने वाले बेहद तेजी से बढ़े. साथ ही, इस थ्योरी को न मानने वालों के खिलाफ हेट स्पीच की बातें सामने आने लगीं. रेडिट नाम की वेबसाइट पर इस थ्योरी को मानने वालों की तरफ से रेप, हत्या और तोड़फोड़ को सही ठहराने वाले पोस्ट की बाढ़ आ गई. रेडिट ने इनको बैन करना शुरू किया. क्यूएनोन थ्योरी को मानने वालों ने यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम का रुख किया. साइबर दुनिया की इस हलचल की आहट अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी एफबीआई तक भी पहुंची. उसके कान खड़े हो गए. उसने एडवाइजरी जारी कर दी कि क्यूएनोन से आंतरिक आतंकवाद का खतरा है. मामला यहीं रुक जाता तो भला होता, लेकिन बात निकली तो दूर तलक गई. थ्योरी को मानने वाले और इसका जुनून इस कदर बढ़ गया कि इस बार के यूएस इलेक्शन में क्यूएनोन के एक सपोर्टर टेलर ग्रीन ने ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन की तरफ से जॉर्जिया में एक सीट पर नॉमिनेशन जीत लिया. उसे ट्रंप की पार्टी का फ्यूचर स्टार बताया जा रहा है.

ट्रंप का QAnon वालों से कैसा कनेक्शन
दुनिया में कुछ भी विवादित हो और अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप का उससे नाम न जुड़ जाए, ऐसा कम ही होता है. बुधवार 19 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार ने प्रेसिडेंट ट्रंप से क्यूएनोन के बारे में पूछा वो बोले –

मैं इस मूवमेंट के बारे में ज्यादा तो नहीं जानता लेकिन मुझे इतना पता है कि इससे जुड़े लोग मुझे बहुत पसंद करते हैं. इस बात की मैं तारीफ करता हूं. मुझे पता चला है कि यह बहुत पॉपुलर होता जा रहा है.

रिपोर्टर ने फिर पूछा-

QAnon सपोर्टर मानते हैं कि आप खुफिया तरीके से उन शैतानी शक्तियों के खिलाफ लड़ रहे हैं, जो बच्चों का यौन शोषण करते हैं और नरभक्षी भी हैं.

ट्रंप ने पलटकर जवाब दिया-

मैंने भी ऐसा सुना है, आप ही बताएं अगर मैं ऐसा करता हूं तो इसे अच्छा काम समझा जाए या बुरा?

इस बातचीत से आपको अंदाज लग गया होगा कि ट्रंप इस थ्योरी को लेकर कितने गंभीर हैं. जानकारों का मानना है कि इस थ्योरी के पीछे दक्षिणपंथी विचारधारा वाले वही लोग हैं, जो डॉनल्ड ट्रंप को अपना नेता मानते हैं. इस थ्योरी को जानबूझकर डॉनल्ड ट्रंप की इमेज को महान दिखाने के लिए गढ़ा गया था. यह सब एक बड़े झूठ से शुरू हुआ और इसे अमेरिकी प्रेसिडेंट का भी मौन समर्थन मिला हुआ है. ट्रंप ने कभी क्यूएनोन थ्योरी मानने वालों को संबोधित नहीं किया. लेकिन क्यूएनोन समर्थकों में उनको लेकर इतना दीवानापन है कि वह ट्रंप की हर स्पीच और प्रेस कॉन्फ्रेंस को ध्यान से सुनते और देखते हैं और उसमें अपने लिए छुपे कोड मेसेज तलाशते रहते हैं. मिसाल के तौर पर जब भी ट्रंप 17 नंबर का जिक्र करते हैं तो वह इसे अपने लिए इशारा समझते हैं. क्योंकि Q अंग्रेजी वर्णमाला का 17वां लेटर है. इसी तरह जब ट्रंप गुलाबी टाई लगाते हैं तो वह इसे अमेरिकी मेडिकल इमरजेंसी ‘कोड पिंक’ मानते हैं. कोड पिंक बच्चों की सेफ्टी के लिए जारी होता है.

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क्यूएनोन सिर्फ अमेरिका ही नहीं, दूसरे देशों में भी पैर पसार रहा है. रोमानिया में एक ट्रंप समर्थक.

कुछ लोग मानते हैं कि ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी का क्यूएनोन को समर्थन है. यही वजह है कि एफबीआई द्वारा अलर्ट जारी करने के बाद भी किसी बड़े क्यूएनोन समर्थक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. अक्सर सोशल मीडिया पर मौजूद वही पेज और प्रोफाइल इन थ्योरीज को बढ़ावा देते हैं, जो रिपब्लिकन पार्टी और डॉनल्ड ट्रंप का समर्थन करते हैं. भारी दबाव के चलते फेसबुक, ट्विटर और सोशल ब्लॉगिंग साइट रेडिट ने क्यूएनोन से जुड़े हजारों पेज हटा दिए हैं. अमेरिकी वेबसाइट एनबीसी डॉट कॉम के अनुसार इनमें 10 हजार इंस्टाग्राम अकाउंट, 2000 फेसबुक ग्रुप, 440 फेसबुक पेज शामिल हैं. आपको यह बड़ा एक्शन लग सकता है लेकिन अब भी क्यूएनोन थ्योरी को मानने वालों का सबसे बड़ा ठिकाना फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर और इंस्टाग्राम बना हुआ है.

क्या कहते हैं जानकार?
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में छपी खबर के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइना में कम्यूनिकेशन के प्रोफेसर विल पार्टिन और डाटा सिक्योरिटी के रिसर्च एनालिस्ट एलिस मारविक ने इस पर काफी काम किया है.

विल पार्टिन कहते हैं कि-

QAnon एक खुफिया कल्चर है, जो सोशल नेटवर्किंग के जरिए लोगों में अपनी पैठ बना रहा है. यह आम जिंदगी में फिट न हो पाने वाले लोगों को एक जगह पर जमा कर रहा है. ऐसे लोग एक साथ जमा होकर लोकतंत्र के खिलाफ, दुनिया भर पर राज करने और हिंसा से खुद को सही साबित करने जैसी चर्चाएं करते हैं.

एलिस मारविक के अनुसार.

हमने अपनी रिसर्च में पाया है कि इससे जुड़े लोग अतार्किक नहीं हैं बल्कि अति साक्षर हैं. वो ऐसी बातों पर भी एक दूसरे से मुतमईन रहते हैं, जो कि पहले ही पूरी तरह से गलत साबित हो चुकी हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि उनके सच और झूठ को समझने का तरीका ही बाकी दुनिया से अलग है.

फिलहाल अमेरिका में यह जिन्न बोतल से बाहर आ चुका है. और अब किसी भी तरह फिर से बोतल में डालने की कोशिश चल रही है. वक्त ही बताएगा कि इसमें कितनी सफलता मिलती है. आपने भी अगर हमारे यहां कुछ ऐसी कॉन्सपिरेसी थ्योरी पढ़ी या सुनी हों तो उनके बारे में कमेंट बॉक्स में लिखें.

वीडियो – फेसबुक पर गाली वाली पोस्ट, फेक अकाउंट की कंप्लेंट करते रहिए, उस तरफ सुनने वाला कोई नहीं है!

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