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यूपी पुलिस ने झांसी में क्या एक फर्जी एनकाउंटर कर दिया?

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यूपी की राजनीति गर्म है. क्यों? झांसी पुलिस ने एक कथित मुठभेड़ को अंजाम दिया है. इस मुठभेड़ में 28 वर्ष के एक कांट्रेक्टर पुष्पेन्द्र यादव की मौत हो गयी. पुलिस ने कहा कि पुष्पेन्द्र यादव अपराधी थे. उन्होंने मुठभेड़ के एक दिन पहले एक पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई और उनकी कार लूटकर ले गए. पुलिस ने छापेमारी में पुष्पेन्द्र को गिरफ्तार करने की कोशिश की, पुष्पेन्द्र ने गोली चलाई. पुलिस ने जवाब दिया और उनकी मौत हो गयी.

लेकिन मारे गए पुष्पेन्द्र यादव की पत्नी, उनके परिजन और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव कहते हैं कि यूपी पुलिस ने हत्या की है. नृशंस हत्या. क्यों ऐसा कहते हैं? उनका आरोप है कि पुष्पेन्द्र यादव का एक ट्रक झांसी पुलिस ने पकड़ लिया था. इस ट्रक को छोड़ने के लिए उनसे डेढ़ लाख रूपए घूस की मांग की गयी थी. पुष्पेन्द्र ने एक लाख रुपए दे दिए थे, पचास हज़ार नहीं दे पा रहे थे. इस पर उक्त दारोगा से उनकी बहस हुई और खीझकर दारोगा ने पुष्पेन्द्र यादव को गोली मार दी.

क्या है पूरा मामला? विस्तार से जानिए

झांसी में है मोंठ थाना क्षेत्र. पुलिस के अनुसार यहां बीते शनिवार यानी 5 अक्टूबर को मोंठ थाना क्षेत्र के प्रभारी धर्मेन्द्र सिंह चौहान पर बमरौली बायपास चौराहे के पास हमला किया गया. धर्मेन्द्र सिंह चौहान ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पुष्पेन्द्र ने उनपर तमंचे से फायरिंग की और उनकी कार लूटकर भाग गए.

एसएसपी ओपी सिंह
एसएसपी ओपी सिंह

इस बारे में झांसी के एसएसपी ओपी सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा,

“धर्मेन्द्र सिंह चौहान ने 29 सितम्बर को अवैध खनन के एक मामले में पुष्पेन्द्र का एक ट्रक ज़ब्त कर लिया था. शनिवार की रात धर्मेन्द्र सिंह चौहान कानपुर से दो दिनों की छुट्टी के बाद लौट रहे थे. उन्हें पुष्पेन्द्र ने फोन किया और कहा कि ज़ब्त किये गए ट्रक के संबंध में मिलना है. रात 9:15 के आसपास धर्मेन्द्र बमरौली चौराहे पर पुष्पेन्द्र से मिलने पहुंचे.”

फिर उन्होंने आगे कहा,

“धर्मेन्द्र ने बात करने के लिए अपनी कार का शीशा नीचे किया और पुष्पेन्द्र ने उन पर गोलियां चला दीं. गोली उनके ठुड्डी से होकर गुज़र गयी. वो गोली चलाने वालों का पीछा करने के लिए पैदल भागे, लेकिन वो तब तक फरार हो चुके थे.”

इसके बाद उन्होंने कहा,

“घटनास्थल पर हमने देखा कि किसी वजह से आरोपी अपनी बाइक छोड़कर गए थे, जबकि इन्स्पेक्टर धर्मेन्द्र की कार लेकर चले गए थे.”

घायल धर्मेन्द्र सिंह चौहान को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. पुलिस ने जांच शुरू की. पुष्पेन्द्र के अलावा उनके भाई रवीन्द्र यादव और उनके सहयोगी विपिन के खिलाफ IPC की धाराओं 307, 394, 397, 398 और 353 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया.

एसएचओ धर्मेन्द्र सिंह चौहान
एसएचओ धर्मेन्द्र सिंह चौहान

अगली सुबह यानी 6 अक्टूबर के भोर 2:30 बजे के आसपास धर्मेन्द्र सिंह की कार घटनास्थल से 40 किलोमीटर दूर गुरुसराय रोड पर दिखाई पड़ी. एसएसपी ओपी सिंह ने बताया,

“हमने रास्ते बंद किये हुए थे. इन्स्पेक्टर धर्मेन्द्र की कार आती हुई दिखाई दी. जब हमने कार को रोकने का प्रयास किया तो हम पर गोलियां चलाई गयीं. हमने जवाबी कार्रवाई की तो पुष्पेन्द्र को गोली लगी. जबकि उसके दो सहयोगी भाग गए. पुष्पेन्द्र ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया.”

मामला यहीं ख़त्म हो जाता, अगर समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव ने आगे कोई बात न की होती. उन्होंने मीडिया में बयान दिया कि ये पुलिस की कार्रवाई नहीं थी, और पुष्पेन्द्र कोईअपराधी नहीं था. उन्होंने कहा,

“पुष्पेन्द्र का ट्रक तो ज़ब्त कर लिया गया था, और इन्स्पेक्टर धर्मेन्द्र से इस बारे में वो बात करने गए. दोनों के बीच बहस हो गयी और पुष्पेन्द्र को मार दिया गया. ये एक हत्या का मामला है, और पुलिस अफसरों के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए.”

अब यहीं से मामला ज्यादा बड़ा हो गया. झांसी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे. मृत पुष्पेन्द्र के भाई रवीन्द्र ने दावा किया कि जिस समय धर्मेन्द्र सिंह चौहान पर हमला हुआ, उस समय रवीन्द्र दिल्ली में थे. रवीन्द्र CISF के जवान हैं और कहते हैं कि घटना की रात वे दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 10 घंटे की ड्यूटी पर थे. कहते हैं कि उनके पास इसके सबूत हैं. जबकि पुलिस ने उनका नाम FIR में शामिल किया है.

पुष्पेन्द्र के परिजनों से मिलते अखिलेश यादव
पुष्पेन्द्र के परिजनों से मिलते अखिलेश यादव

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में रवीन्द्र यादव ने कहा,

“मुझे फोन आया कि मेरी भाई को गोली मार दी गयी है. मैंने तुरंत छुट्टी के लिए आवेदन किया और घर निकल गया. घर पहुंचा तब मुझे पता चला कि इस मामले में मैं भी एक आरोपी हूं. मैं वहां नहीं था. अगर मैं वहां होता, तो वे मुझे अब तक गिरफ्तार कर चुके होते.”

रवीन्द्र यादव का नाम FIR में कैसे आया? इस बारे में तो पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया लेकिन झांसी के असिस्टेंट सुपरीटेंडेंट ऑफ़ पुलिस राहुल मिठास ने कहा,

“अगर रवीन्द्र वहां नहीं थे, तो उनका नाम FIR में से निकाल दिया जाएगा.”

उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई की जांच के लिए मजिस्ट्रेट जांच बिठा दी गयी है. अगर पता चलता है कि पुलिस ने गलती की है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

लेकिन पुष्पेन्द्र के कथित एनकाउंटर के अगले दिन से ही पुष्पेन्द्र के परिजनों का भी यही कहना है कि पुष्पेन्द्र की हत्या की गयी है. पुष्पेन्द्र के एशादी तीन महीनों पहले ही हुई थी. उनकी 19 वर्षीय पत्नी शिवांगी बेहद दुःख में हैं. रो रही हैं. और मीडिया से कह रही हैं कि उनके पति की हत्या के लिए उन्हें न्याय चाहिए. मीडिया से बातचीत में शिवांगी ने कहा,

“अगर मेरे पति को न्याय नहीं मिला तो मैं आत्महत्या कर लूंगी.”

लेकिन क्यों ये लोग पुष्पेन्द्र को बेगुनाह मानते हैं. मीडिया से बातचीत में पुष्पेन्द्र के पिता हरीश चंद्र – जो खुद CISF में रह चुके हैं और अब दृष्टिहीन हैं – ने कहा,

“पुष्पेन्द्र का ट्रक पकड़ लिया गया था. ट्रक छोड़ने के लिए धर्मेन्द्र सिंह चौहान ने डेढ़ लाख रूपए की घूस मांगी थी. पुष्पेन्द्र ने पहले ही एक लाख रुपए दे दिए थे. 5 अक्टूबर की रात SHO धर्मेन्द्र ने पुष्पेन्द्र को मिलने के लिए बुलाया और कहा कि ट्रक छोड़ने के बारे में बात करनी है.”

हरीश चंद्र ने आगे बताया,

“पुष्पेन्द्र उस रात 9 बजे घर से निकला. उसने अपनी मां को बताया कि वो इन्स्पेक्टर धर्मेन्द्र से मिलने जा रहा है. मुलाक़ात में धर्मेन्द्र ने पुष्पेन्द्र को जानकारी दी कि उसके ज़ब्त किये गए ट्रक का चालान कट चुका है. अब वो ट्रक नहीं छोड़ सकता है.”

ये तब की बात है जब पुष्पेन्द्र ने एक लाख रूपए बतौर घूस कथित रूप से इन्स्पेक्टर धर्मेन्द्र को दे दिए थे. हरीश चंद्र ने आगे बताया,

“ये जानकर कि ट्रक का चालान कट गया, पुष्पेन्द्र ने कहा कि उसके पैसे वापिस कर दिए जाएं. क्योंकि ट्रक को तो अब छोड़ा ही नहीं जा सकता. इस पर पुष्पेन्द्र और धर्मेन्द्र में बहस होने लगी. और गुस्से में धर्मेन्द्र सिंह चौहान ने पुष्पेन्द्र को गोली मार दी.”

ऐसे इस मामले की दो वर्ज़न सामने आए. एक में पुष्पेन्द्र अपराधी है और एक में पुष्पेन्द्र अपराधी नहीं है. एक में पुलिस अपराधी है, एक में पुलिस अपराधी नहीं है.

पुलिस ने चोरीछिपे किया पुष्पेन्द्र का शवदाह

यूपी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे. मामला तूल पकड़ने लगा. 7 अक्टूबर को झांसी पुलिस ने पुष्पेन्द्र का अंतिम संस्कार कर दिया. कहा कि परिजन पुष्पेन्द्र का शव लेने के लिए तैयार नहीं थे. इस पर पुष्पेन्द्र के पिता हरीश चंद्र ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

“पुलिस आई और मेरे बेटे की बॉडी जबरदस्ती उठाकर ले गयी. कहने लगी कि मैं पुलिस का हौसला कम ना करूं. वे उसका अंतिम संस्कार करने लगे तो उन्होंने शवदाह घर का गेट बंद कर दिया. उसका अंतिम संस्कार चोरीछिपे किया गया.”

इस पर ASP मिठास ने कहा,

“हमने उन्हें कहा कि वे अंतिम संस्कार में शामिल हों. उन्होंने मना कर दिया. हम क्या कर सकते हैं?”

इसके बाद झांसी पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने 8 अक्टूबर को कुछ ट्वीट किये. एक ट्वीट में पुष्पेन्द्र के अंतिम संस्कार और मामले का विवरण था. प्रेस नोट था यह. इसमें कहा गया कि परिजन आकर पुष्पेन्द्र की अस्थियां कलेक्ट कर ले गए.

इसके बाद झांसी पुलिस ने ट्विटर पर दो ट्वीट के ज़रिये पुष्पेन्द्र के खिलाफ आपराधिक मुकदमों की जानकारी देने की कोशिश की. देखिए, इस मामले का पहला ट्वीट :

जैसा कि इस ट्वीट से जानकारी मिलती है, पुष्पेन्द्र के खिलाफ पांच केस दर्ज थे. इन केसों में पुष्पेन्द्र पर हमला करने, संपत्ति का झगड़ा, औरत को भगा ले जाने और गुंडा एक्ट के तहत एक केस दर्ज था.

दूसरे ट्वीट में झांसी पुलिस ने पुष्पेन्द्र के ज़ब्त किये गए ट्रकों का विवरण दिया, इसमें उस ट्रक का भी ज़िक्र था, जिस पर ये कथित मुठभेड़ की वारदात केन्द्रित है.

राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव ने इन केसों के बाबत कहा कि मुठभेड़ की रात के पहले तक पुष्पेन्द्र यादव पर कोई केस दर्ज नहीं था. पुष्पेन्द्र की पत्नी शिवांगी और उनके पिता हरीश चंद्र ने भी यही कहा कि उनके बेटे पर कोई मुक़दमे नहीं थे. ये भी कि सारे मुक़दमे फर्जी हैं, और बाद में दायर किये गए हैं.

इसी समय झांसी में SHO धर्मेन्द्र सिंह चौहान की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ़ मुकदमा दर्ज करने के लिए लगभग 40 लोग धरना देने बैठे. इनमें बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव भी शामिल थे. पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने ट्वीट किया, डिलीट किया

झांसी पुलिस ने इस मामले में एक ट्वीट किया और फिर डिलीट कर दिया. जो ट्वीट में लिखा था, उसे पढ़कर लग रहा था कि पुलिस कह रही थी, “पुलिस के खिलाफ मत बोलो.”

इस ट्वीट में झांसी पुलिस ने लिखा कि पुष्पेन्द्र प्रकरण में भ्रामक खबर/अफवाह न फैलाएं, अन्यथा अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जाएगी. पत्रकारों और इस घटना का विरोध कर रहे लोगों को लगा कि ये ट्वीट पुलिस पर लाइन पर बात करने का एक अल्टीमेटम है. मामले की भर्त्सना शुरू हुई तो झांसी पुलिस ने ये ट्वीट डिलीट कर दिया.

Jhansi Police deleted tweet

और पहुंचे अखिलेश यादव

हां. मामले ने तूल पकड़ा तो अखिलेश यादव भी लावलश्कर लेकर झांसी पहुंचे. पुष्पेन्द्र के परिवार से मिले. यूपी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा दिए. उन्होंने कहा,

“ये राम राज्य नहीं है, ये नाथू राज्य है.”

मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा,

“ये पुलिस मुठभेड़ नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा की गयी लिंचिंग थी.”

कई बार मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की जाए. मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए जा चुके हैं और झांसी के एडिशनल डीएम की अध्यक्षता में जांच हो रही है, ऐसी खबरें भी आ रही हैं. लेकिन अखिलेश यादव को सीबीआई पर भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा,

“मुझे सीबीआई, ईडी या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पर कोई भरोसा नहीं है. वो सिर्फ विपक्षी दलों को तोड़ने का काम कर रहे हैं. इस मामले की जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए.”

इस पर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह का बयान आया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा,

अखिलेश यादव जी का झांसी में एनकाउंटर में मारे गए पुष्पेंद्र यादव के घर जाना खनन माफ़िया एवं जातिवाद के प्रति उनका लगाव ही है. एक माफ़िया जो एक प्रभारी इंस्पेक्टर को गोली मार दे और दोनों तरफ़ से गोली चलने के बाद मारा जाय उसके लिए सहानभूति रखना अखिलेश जी आपकी सोच को दर्शाता है.”

लेकिन सिद्धार्थनाथ सिंह के बयान और पुष्पेन्द्र यादव पर उनके द्वारा लगाए गए आरोप के बीच एक ही तथ्य है, यूपी पुलिस ने पुष्पेन्द्र यादव के खिलाफ मुकदमों की जो फेहरिस्त गिनाई है, उसमें अवैध खनन का कोई भी मुकदमा नहीं दर्ज है.


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