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पंजाब में बिजली को लेकर इतना हाहाकार क्यों मचा हुआ है?

पंजाब में बिजली को लेकर सड़क से सीएम हाउस तक माहौल गरम है. बिजली कटौती से परेशान लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं विपक्षी राजनीतिक पार्टियों को नया मुद्दा मिल गया है. इसके सहारे वो कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को घेर रही हैं. लेकिन आखिर पंजाब में बिजली संकट कैसे और क्यों गहरा गया है? क्या इसके पीछे सरकार की कोई भूमिका है, चलिए जानने की कोशिश करते हैं.

किसानों को बिजली का ही सहारा

इस वक्त पंजाब में धान की रोपाई चल रही है. गर्मी भी अपने शबाब पर है. मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि इस बार मानसून जल्दी आएगा, खूब बारिश होगी. लेकिन उसने भी दगा कर दिया. जहां एक ओर शहरों के लोग बिजली कटौती के कारण पसीने से तरबतर हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों को भी सरकारी वादे के मुताबिक 8 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है. ये हाल तब है जब PSPCL यानी Punjab State Power Corporation Limited ने ज्यादा बिजली लेने वाली इंडस्ट्रीज़ को हफ्ते में दो दिन बंद रखने का आदेश जारी कर रखा है.

बिजली कटौती का आलम इससे समझिए कि सरकारी दफ्तरों के एसी तक बंद करवा दिए गए हैं. उनका निर्धारित वक्त सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक कर दिया गया है.

दी लल्लनटॉप के संवाददाता रजत शर्मा और रूहानी जोत सिंह इस वक्त इसी हालात को समझने के लिए पंजाब में हैं. वो बताते हैं कि धान की रोपाई के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है. अगर मानसून आ जाता तो शायद ये मांग इतनी ना होती क्योंकि खेत में पानी लगाने के लिए अब बिजली का ही सहारा है. छोटे किसान डीजल पंप का खर्चा नहीं उठा सकते, लिहाजा वो बिजली पर ही निर्भर हैं.

रजत बताते हैं कि सरकारी ऑफिसों में एसी बंद हैं. हालांकि पंजाब में पिछले दो दिनों से 8 घंटे सप्लाई आ रही है लेकिन रोपाई का जो टाइम था पिछले 2 हफ्ते का, वह नुकसान में गया है. पंजाब के किसान चाहते हैं कि बिना कट के सप्लाई आए. वो इसलिए क्योंकि मान लीजिए कि 2 घंटे लाइट आई और खेत के एक हिस्से में ही पानी लग पाया, बाकी हिस्सा सूखा ही रह गया. तो नुकसान होता है. पंजाब में काफी इलाके ऐसे हैं, जहां बिजली का 70 प्रतिशत तक हिस्सा केवल एग्रीकल्चर के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

हर एक को बिजली की जरूरत

tribune india की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब करीब 5500 मेगावॉट बिजली का उत्पादन करता है. इसमें सोलर पावर भी शामिल है. करीब 7200 मेगावॉट बिजली उसे नॉर्दन ग्रिड से लेनी होती है. ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के प्रवक्ता वीके गुप्ता कहते हैं कि पंजाब इस वक्त करीब 12,800 मेगावॉट की सप्लाई कर रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल पंजाब में बिजली की मांग 14 हजार 225 मेगावॉट है, लेकिन सप्लाई केवल 12 हजार 800 मेगावॉट ही है. 1425 मेगावॉट की कमी का असर ये है कि पंजाब के कई इलाकों को 14 घंटे तक की बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है.

– रोपाई का सीजन निकल गया तो बिजली मिलने का भी कोई फायदा नहीं, इसलिए किसानों को तुरंत बिजली चाहिए.
– महामारी के कारण घाटे का सामना कर रही इंडस्ट्रीज को भी बिजली चाहिए ताकि काम चलता रहे.
– जनता को भी बिजली की जरूरत है. लगातार और लंबे-लंबे कट का सामना करके जनता परेशान है.

अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि डिमांड और सप्लाई के बीच में इतना गैप क्यों है?

साल 2019 की गर्मियों में पीक सीजन के दौरान अधिकतम डिमांड 13 हजार 633 मेगावॉट थी. 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान ये डिमांड 13 हजार 150 मेगावॉट हो गई थी. PSPCL को अंदाजा नहीं था कि 2021 के पीक सीजन में ये डिमांड 14 हजार 500 मेगावॉट तक पहुंच जाएगी.

रजत शर्मा बताते हैं,

“आमतौर पर इस मौसम में बारिश हो जाती है. लेकिन इस बार बारिश कम हुई है या हुई ही नहीं है. बारिश से दो फायदे होते हैं- पहला ये कि खेतों में पानी लग जाता है और किसानों को बिजली पर कम निर्भर रहना होता है. दूसरा ये कि बारिश के मौसम में ट्रांसमिशन में बिजली लॉस कम हो जाता है.”

“एक बात ये भी है कि पंजाब के पास करीब 13 हजार मेगावॉट को ही चैनलाइज करने की कैपेसिटी है. वो केवल इतनी ही बिजली को भेज सकते हैं क्योंकि लाइनें ही इतनी हैं. डिमांड इस बार 14 हजार को पार कर गई. ऐसा नहीं कि सरकार को इसका पता नहीं था. अगर सरकार ज्यादा बिजली खरीद भी लेती तो उसे ट्रांसमिशन लाइनों के जरिए भेजती कैसे?”

सरकार को सब कुछ पता था?

पंजाब सरकार ने बठिंडा का थर्मल प्लांट बंद कर दिया. फिर रोपड़ थर्मल प्लांट की दो यूनिटों को भी बंद कर दिया गया. ये सब करीब 880 मेगावॉट बैठता है. इसके अलावा प्राइवेट पावर प्लांट तलवंडी साबो की  660 MW की एक यूनिट को भी 8 मार्च को रिपेयर के लिए बंद कर दिया गया. यानी बिजली का संकट धीमे-धीमे गहरा रहा था. ये संभव नहीं कि इसके बारे में प्रशासन और शासन को पता नहीं था.

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PSPCL बिजली की मांग को पूरा नहीं कर पा रहा है. फोटो सोर्स- रूहानी, रजत

बिजली कंपनी का क्या कहना है?

इस मामले पर पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के वरिष्ठ अधिकारी ए. वेणु प्रसाद कहते हैं कि तलवंडी साबो में हुई गड़बड़ी के कारण स्थितियां बिगड़ीं. 10 जून से 15 जून के बाच आंधी-तूफान ने कई जगहों पर बिजली की सप्लाई को बाधित किया. उस दौरान जो नुकसान हुआ, उसके लिए अभी तक रिपेयर का काम चल रहा है. बिजली की कमी को दूर करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि अब किसानों को आठ की जगह 10 घंटे से अधिक बिजली दी जा रही है. 6 जुलाई से हालात और बेहतर होने की उम्मीद है.

उन्होंने बताया कि PSPCL के अधिकारी अब किसान संगठनों से मुलाकात कर रहे हैं. हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं. मैसेज सुविधा भी शुरू की गई है. बिजली नहीं आने की स्थिति में लोग ऐप के माध्यम से भी अपनी परेशानी PSPCL तक पहुंचा सकते हैं.

बिजली कंपनी भले ही आंधी-तूफान को दोष देकर खानापूर्ति कर रही हो, लेकिन हालात की जानकारी PSPCL को पहले से है. समस्या ये भी है कि PSPCL के पास रेगुलर डायरेक्टर तक नहीं है. रजत बताते हैं कि 2010 से 2021 तक, 11 साल हो गए लेकिन एक भी ऐसा डायरेक्टर नहीं मिल पाया जो रेगुलर तौर पर केवल PSPCL के लिए ही काम करे.

बिजली खरीद समझौते

निजी थर्मल प्लांटों के साथ हुए बिजली खरीद समझौते अब पंजाब सरकार को परेशान कर रहे हैं. पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2020 में बजट सत्र के दौरान विधानसभा में बिजली खरीद समझौतों पर श्वेतपत्र वाले की बात कही थी. 3 जुलाई को अमरिंदर ने कहा था कि 139 में से 122 समझौतों पर बिना वजह हस्ताक्षर किए गए थे. बता दें कि ये समझौते शिरोमणि अकाली दल- बीजेपी सरकार के दौरान किए गए थे.

अब शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि बिजली समझौते बिल्कुल सही थे. अगर ये गलत हैं तो वर्तमान सरकार इनको निरस्त करे, और हमारे ऊपर केस दर्ज करा दे. उन्होंने बिजली संकट की वजह बताते हुए कहा कि 2017 में पंजाब में 12500 मेगावॉट बिजली की मांग थी, और उत्पादन 13 हजार मेगावॉट था. लेकिन अब मांग बढ़ गई है और उत्पादन कम हो गया है.

बिजली पर राजनीति

जिस दौरान पंजाब के किसानों को बिजली के सर्वाधिक आवश्यकता थी, सरकार आपसी झगड़ों में उलझी रही. नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच छिड़ी अनकही जंग जगजाहिर है. बिजली को राजनीतिक मुद्दा भी बनाने की कोशिश हुई है. आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि अगर उनकी सरकार बनी तो 300 यूनिट फ्री बिजली दी जाएगी. अब सिद्धू भी कह रहे हैं कि 300 यूनिट फ्री बिजली देना संभव है. लेकिन किसान यूनियन मुफ्त बिजली नहीं चाहते. उनका कहना है कि बिजली का रेट सही हो और बिजली 24 घंटे आनी चाहिए. 300 यूनिट फ्री देने से सरकारी खजाने पर भी तो बोझ पड़ेगा.

केजरीवाल के फ्री बिजली के दावों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सवाल उठाए हैं. दावा किया है कि पंजाब में उद्योगों को 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से सब्सिडी पर बिजली दी जा रही है, जबकि दिल्ली में इसके लिए 9.80 रुपये वसूले जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब में औद्योगिक इकाइयों को बिजली पर 2226 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है. वहीं किसानों को 6735 करोड़ रुपये की मुफ्त बिजली दी जा रही है. बहरहाल देखना ये है कि राजनीति से इतर पंजाब में बिजली का ये संकट कब और कैसे खत्म हो पाता है.


वीडियो- नेता नगरी: सिद्धू और CM अमरिंदर सिंह के बीच चल रही तनातनी का कांग्रेस पर क्या असर होगा?

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