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पुलवामा: शहीद पंकज कुमार के परिवार को विधायक पांच लाख देने वाले थे, एक पैसा भी न दिया

नाम- पंकज कुमार त्रिपाठी
निवासी- महाराजगंज, UP.

14 फरवरी, 2019. पुलवामा में CRPF के काफिले पर हमला हुआ था. 40 जवान शहीद हो गए थे. हमले को एक साल पूरा हो गया है. ‘आज तक’ ने शहीदों के परिवार के हालात जानने के लिए उनसे बात की. इन शहीदों में से एक हैं पंकज कुमार त्रिपाठी. परिवार महाराजगंज के हरपुर में रहता है.

पंकज के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं. हमले के वक्त उनका बेटा तीन साल का था. पत्नी रोहिणी प्रेगनेंट थी. पंकज के शहीद होने के कुछ ही दिन बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया.

विधायक ने एक पैसा भी नहीं दिया

महाराजगंज के नौतनवा विधानसभा सीट से विधायक हैं अमन मणि त्रिपाठी. निर्दलीय विधायक हैं. पंकज के पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि अमन मणि ने पांच लाख 50 हजार रुपए देने का वादा किया था, लेकिन आज तक एक पैसा भी नहीं दिया है. लखनऊ में भूमि देने के भी कहा था, वो भी नहीं मिली. ओमप्रकाश ने कहा,

‘बहुत से लोगों ने बहुत सी घोषणाएं कीं, लेकिन कुछ पूरा नहीं हुआ.’

रिलायंस फाउंडेशन वाले भी नहीं आए

ओमप्रकाश ने बताया कि रिलायंस फाउंडेशन वाले भी एक बार भी उनके घर नहीं आए. पंकज के बेटे को यूपी विधान परिषद के पूर्व स्पीकर गणेश शंकर पांडे पढ़ा रहे हैं. ओमप्रकाश ने कहा,

‘हमारा बच्चा अभी आनंद नगर में एमपी पब्लिक स्कूल में पढ़ रहा है. गणेश शंकर पांडे खुद व्यवस्था करके पढ़ा रहे हैं. न तो रिलायंस वाले हमारे पास आए. उन्होंने हमसे कहा भी नहीं कि हम आपके बच्चे को पढ़ाएंगे. महानता केवल गणेश जी ने दिखाई. वो खुद बच्चे को हमारे घर से लेकर गए.’

Omprakash Tripathi
पंकज त्रिपाठी के पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी.

नौकरी मिली या नहीं?

राज्य सरकार ने रोहिणी को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था. ये वादा पूरा हुआ. ओमप्रकाश ने बताया कि ऐलान के एक महीने बाद ही नौकरी दे दी गई. वो अभी फरेंदा ब्लॉक में जॉब कर रही हैं.

सीएम योगी ने क्या किया?

ओमप्रकाश ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ उनके घर आए थे, लेकिन उन्होंने कोई घोषणा नहीं की थी. आगे बताया,

‘सीएम ने कहा था कि वो हमारी समस्या को देख रहे हैं. हमने कागज पर लिखकर अपनी समस्या उनके सामने रखी थी. रोने के सिवा उन्होंने तब कुछ नहीं किया. फिर वो चले गए, लिखी हुई बात को उन्होंने दोहराया नहीं. पूछा नहीं कि हम कैसे हैं. मुख्यमंत्री को क्या मतलब कि हमारे विषय में जानकारी लें.’

पंकज के परिवार को पुलवामा हमले की जांच को लेकर कोई जानकारी नहीं है.

Pankaj Tripathi Son
पंकज त्रिपाठी का बेट. पुलवामा हमले के वक्त तीन साल का था.

स्कूल का नाम बदला गया

गांव के स्कूल का नाम पंकज के नाम पर कर दिया गया है. पहले पूर्व माध्यमिक विद्यालय नाम था, अब अमर शहीद पंकज त्रिपाठी विद्यालय नाम है. गांव में पंकज का शहीद स्मारक बनाने पर काम चल रहा है. गांव में पंकज के घर तक जाने का सही रास्ता नहीं था. अब प्रशासन ने रास्ता बना दिया है. गांव की एंट्री पर एक गेट है, जहां पंकज की प्रतिमा बनाई गई है. अमिताभ बच्चन की तरफ से भी पंकज के माता-पिता को 5 लाख और पत्नी को 5 लाख रुपए दिए जा चुके हैं.

अभी क्या मांग है सरकार से?

इस सवाल पर ओमप्रकाश ने कहा,

‘सरकार ने जो कहा था वो तो पूरा नहीं किया, तो अब हम क्या मांग करेंगे. संसार में लोगों को अगर देना होता है तो खुद से देते हैं, लेकिन ऐसा कोई है नहीं. जो शहीद हो गया, वो शहीद हो गया. अब कौन पूछेगा उनको?’

पंकज के परिवार के पास अब केवल उनकी याद बची है. उन्हें पता है कि वो वापस नहीं आने वाले.


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