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हिटलर के साथ प्रिंस फिलिप के कनेक्शन की कहानी

शुरुआत करते हैं एक प्रेम कहानी से. बहुत साल पहले की बात है. एक राजकुमारी थी. 13 बरस की. उसके देश की एक पड़ोसी मुल्क से जंग छिड़ने वाली थी. सब युद्ध की तैयारियों में लगे थे. तैयारी ठीक से हो रही है कि नहीं, इसका मुआयना करने राजकुमारी पहुंची एक मिलिटरी कॉलेज. राजकुमारी को सब दिखाने-बताने का जिम्मा मिला 18 साल के एक लड़के को. नीली आंखों वाला हैंडसम लड़का.

राजकुमारी ने लड़के को देखा. और लड़की को मुहब्बत हो गई. फिलहाल ये मुहब्बत एकतरफ़ा थी. लड़के की नज़र में राजकुमारी ज़्यादा-से-ज़्यादा उसकी एक दोस्त थी. इससे पहले कि कहानी आगे बढ़ती, जंग छिड़ गई. लड़का मोर्चे पर निकल गया. बॉर्डर फ़िल्म के ‘संदेसे आते हैं’ की तरह उसे भी युद्ध के बीच ही राजकुमारी के भेजे प्रेम पत्र मिलते रहे.

जंग ख़त्म हुई. लड़का युद्ध के मैदान में नाम कमाकर लौटा. अब उसे भी राजकुमारी से इश्क़ हुआ. उसने शादी के लिए प्रपोज़ किया. राजकुमारी तो तैयार थी, मगर उसके पिता को ये रिश्ता मंज़ूर नहीं था. राजकुमारी ने पिता से कहा, इस लड़के के सिवाय किसी और से मुहब्बत नहीं कर सकूंगी. इस ऐलान के आगे कोई क्या कहता. राजा ने बिटिया की शादी करा दी. शादी हुई, मगर इसमें परीकथा जैसा रोमैंस नहीं था. न ही इसमें ‘दे लिव्ड हैपली ऐवर आफ़्टर’ का भाव था. वो दोनों उम्रभर साथ रहे. मगर उस साथ रहने में दिल का टूटना भी था और समझौते करके जीना भी था.

अभी मैंने आपको जो लव स्टोरी सुनाई, वो 82 साल पुरानी है. इस लव स्टोरी का बेटर हाफ़, वो नीली आंखों वाला लड़का, कुछ रोज़ पहले दुनिया से रुख़सत हो गया. अपने 100वें जन्मदिन का बर्थडे केक काटने के बस दो महीने पहले. उस शख़्स का नाम था, फ़िलिप. ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ के पति, ड्यूक ऑफ़ एडिनबर्ग, प्रिंस फ़िलिप. हमने इस कहानी की शुरुआत फ़िलिप और एलिज़ाबेथ की लव स्टोरी से की. असल में, ये लव स्टोरी प्रिंस फ़िलिप की ज़िंदगी का सबसे डिफ़ाइनिंग मोमेंट था. समझिए कि इस शादी के पहले तक फ़िलिप को कभी किसी से प्यार मिला ही नहीं. दो-दो शाही परिवारों का वारिस होने के बावजूद उन्हें रिश्तेदारों की मोहलत पर पलना पड़ा. रिफ़्यूजी बनना पड़ा.

एलिज़ाबेथ से हुई शादी ने फ़िलिप को सबकुछ दिया. घर, मुल्क, पहचान सबकुछ. मगर ये सब पाने के लिए फ़िलिप को बहुत कुछ गंवाना भी पड़ा. अपने सपने कुर्बान करने पड़े. क्या कुर्बानी देनी पड़ी प्रिंस फ़िलिप को? क्या है संतरे की टोकरी में छुपाकर उन्हें स्मगल किए जाने का क़िस्सा? हिटलर के साथ क्या कनेक्शन था उनका? क्यों लोग उन्हें ब्रिटेन का सबसे नस्लीय आदमी कहते थे?

इस कहानी की शुरुआत करते हैं 19वीं सदी से

आप लॉर्ड माउंटबेटन से परिचित हैं न. उनके पिता का नाम था, प्रिंस लूइस. प्रिंस लूइस की शादी हुई प्रिंसेज़ विक्टोरिया से. ये विक्टोरिया दूर के रिश्ते में क्वीन विक्टोरिया की परपोती लगती थीं. लूइस और विक्टोरिया के चार बच्चे हुए. इनमें सबसे बड़ी थीं, प्रिंसेज़ ऐलिस. यानी लॉर्ड माउंटबेटन की बड़ी बहन.

प्रिंसेज़ ऐलिस की शादी हुई प्रिंस ऐंड्रू से. प्रिंस ऐंड्रू ग्रीस और डेनमार्क, दोनों की शाही गद्दी के वारिस थे. कैसे? दरअसल प्रिंस ऐंड्रू के पिता थे, किंग जॉर्ज प्रथम. किंग जॉर्ज राजा तो थे ग्रीस के. मगर इसके अलावा वो डेनमार्क शाही घराने के राजकुमार भी थे. उस जमाने में यूरोप के शाही परिवारों के बीच इस क़िस्म का क्रॉस कनेक्शन आम बात थी. अपने पिता के ही चलते ऐंड्रू का कनेक्शन ग्रीक और डेनिश, दोनों जगहों की रॉयल फैमिलीज़ से था.

Princes Alice
प्रिंसेज़ ऐलिस. (तस्वीर: एएफपी)

ये कनेक्शन समझने के बाद फिर लौटते हैं प्रिंसेज़ ऐलिस और ऐंड्रू के ज़िक्र पर. दोनों की चार बेटियां और एक बेटा. बेटे की आमद काफ़ी देर से हुई. उसकी पैदाइश का साल था, 1921. ग्रीस की उत्तर-पश्चिमी दिशा में कोरफ़ु नाम का एक द्वीप है. यहीं एक आलीशान घर की रसोई में रखी एक मेज के ऊपर पैदा हुआ ऐलिस और एंड्रू का बेटा फ़िलिप. फ़िलिप की पैदाइश के समय उसके परिवार की हालत ख़राब थी. राजनैतिक उथल-पुथल के चलते उनके सितारे गर्दिश में थे. फ़िलिप के पैदा होने के बाद हालात और बिगड़े. उनके पिता प्रिंस एंड्रू को राजद्रोह के आरोप में अरेस्ट कर लिया गया. एंड्रू का मारा जाना बिल्कुल तय था.

किसने बचाया एंड्रू को?

पति को बचाने के लिए ऐलिस ने बहुत हाथ-पांव मारे. कहीं से मदद नहीं मिली, तो ऐलिस को याद आया ब्रिटिश शाही घराना. इसके साथ रिश्तेदारी थी ऐलिस की. तब ब्रिटेन के राजा थे, जॉर्ज पंचम. मौजूदा महारानी क्वीन एलिज़ाबेथ के दादा. जॉर्ज पंचम ने ऐलिस की मदद की. ग्रीस पर दबाव बनाकर एंड्रू को रिहा करवाया. रिहाई मिली, मगर एंड्रू का परिवार अब ग्रीस में सुरक्षित नहीं था. उन्हें वहां से निकालने के लिए जॉर्ज पंचम ने एक नाव भेजी ग्रीस. इसमें बैठकर एंड्रू की फैमिली ग्रीस से भाग आई. इस वक़्त फ़िलिप की उम्र थी, 18 महीने. क़िस्सा है कि फ़िलिप को संतरे की एक टोकरी में छुपाकर ग्रीस से लाया गया था.

एंड्रू और ऐलिस अपने बच्चों के साथ ग्रीस से भागकर पैरिस चले आए. जान तो बच गई, मगर उनके अच्छे दिन नहीं लौटे. सबसे बुरा हाल होने वाला था प्रिंस फ़िलिप का. क्योंकि बहनों की तो शादी हो गई. नौ महीने के अंतराल में चारों बहनें ब्याहकर जर्मनी चली गईं. अपने मां-बाप के साथ संघर्ष के दिन देखने के लिए बचे फ़िलिप. रिश्तेदारों की मोहलत से उनका घर चलता था.

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युवा प्रिंस फ़िलिप. (तस्वीर: एपी)

आर्थिक हैसियत बिगड़ने के अलावा एंड्रू और ऐलिस का रिश्ता भी दरकने लगा था. एंड्रू महीनों घर नहीं आते. फिर एक रोज़ वो हमेशा के लिए घर छोड़कर चले गए. ऐलिस डिप्रेशन में चली गईं. उन्हें स्विट्ज़रलैंड के एक सेनिटोरियम में भेज दिया गया. महज 10 साल की उम्र में फ़िलिप की हालत अनाथों सी हो गई. वो परवरिश के लिए रिश्तेदारों के मोहताज़ थे. रिश्तेदार, जिनमें से कुछ जर्मनी में थे और कुछ ब्रिटेन में.

दोनों तरफ के रिश्तेदारों में फ़िलिप को लेकर खींचातानी होने लगी. कभी ब्रिटेन में रह रही अपनी नानी. कभी अपने मामा. तो कभी जर्मनी में बसी अपनी बहनों के बीच फ़िलिप रोटेट होते रहे. उनका कोई स्थायी घर, कोई परमानेंट पता नहीं था. रिश्तेदार कपड़ों तक के पैसे नहीं देते. बोर्डिंग स्कूल में गाहे-बगाहे ही कोई रिश्तेदार फ़िलिप से मिलने आता. इन्हीं दिनों से जुड़ा एक क़िस्सा सुनिए. फ़िलिप तब स्कॉटलैंड स्थित गॉडनस्टन बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रहे थे. उन्हें अपने एक शाही रिश्तेदार की शादी में जाना था. इस फंक्शन के लिए ड्रेसकोड के हिसाब से तैयार होकर जाना था. ड्रेस के इंतज़ाम के लिए फ़िलिप को हॉस्टल के लड़कों से चंदा इकट्ठा करना पड़ा.

ख़ैर, किसी तरह स्कूल ख़त्म हुआ. सवाल उठा कि आगे क्या. फ़िलिप ने तय किया कि अपने मामा माउंटबेटन की तरह वो भी नेवी में भर्ती होंगे. और इस तरह 1938 में फ़िलिप ने ब्रिटिश रॉयल नेवी कॉलेज में दाखिला लिया. इस वक़्त उनकी उम्र थी, 17 साल. दाखिले के अगले बरस, यानी 1939 में, इसी कॉलेज कंपाउंड में फ़िलिप की मुलाकात हुई 13 साल की एलिज़ाबेथ से. इस मुलाक़ात का क़िस्सा हम आपको पहले ही सुना चुके हैं.

फ़िलिप और एलिज़ाबेथ की इस मुलाक़ात के तुरंत बाद सेकेंड वर्ल्ड वॉर शुरू हो गया. इस लड़ाई में ब्रिटेन और जर्मनी आमने-सामने थे. आयरनी देखिए. जनवरी 1940 में 19 साल के फ़िलिप को ब्रिटिश रॉयल नेवी में पहली पोस्टिंग मिली. इस पोस्टिंग ने फ़िलिप को जीवन में पहली बार कुछ ठोस करने का मकसद दिया. मगर साथ-ही-साथ, उन्हें अपनी बहनों से भी दूर कर दिया.

Prince Philip With Elizabeth
महारानी एलिज़ाबेथ के साथ प्रिंस फ़िलिप. (तस्वीर: एपी)

कैसे सभी से दूर होते गए फ़िलिप?

फ़िलिप ब्रिटिश साम्राज्य की हिफ़ाजत के लिए लड़ रहे थे. और उनकी चार में से तीन बहनें- मार्गरिटा, सेसिल और सोफ़ी, हिटलर की सपोर्टर्स थीं. न केवल इन तीनों के पति नाज़ी ऑर्डर में ऊंचे पदों पर थे. बल्कि बहनें भी नाज़ी समर्थक थीं. फ़िलिप की एक बहन सोफ़ी को तो हिटलर चार्मिंग भी लगता था.

हालांकि सेकेंड वर्ल्ड वॉर तक फ़िलिप की दो ही बहनें नाज़ी जर्मनी के साथ रह गईं थीं. तीसरी बहन सेसिल और उनके पति सेकेंड वर्ल्ड वॉर शुरू होने से पहले ही एक विमान हादसे में मारे गए थे. ये 1937 की बात है. उस वक़्त 16 साल के फ़िलिप बहन और जीजा के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने जर्मनी भी गए थे. यहां फ्यूनरल मार्च के दौरान उन्होंने नाज़ी सैनिकों से सैल्यूट भी लिया था. सैल्यूट लेते समय की उनकी एक तस्वीर 2015 में एक ब्रिटिश टैबलॉइड ने छापी थी. ख़ूब हंगामा हुआ था इसपर. ब्रिटिश शाही परिवार ने नाज़ी जर्मनी के साथ अपने जिन कनेक्शन्स को दशकों पहले ढक दिया था, उसे इस तस्वीर ने फिर से ताज़ा कर दिया था. तब शाही परिवार ने कहा था कि इस तस्वीर का छपना बड़ा निराशाजनक है.

ख़ैर, इस छोटे से विषयांतर के बाद फिर से लौटते हैं मूल कथानक पर. पहले श्रीलंका, फिर बॉम्बे, अदन, मोम्बासा, डरबन, सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान फ़िलिप कई जगहों पर ट्रांसफ़र होते रहे. शुरुआती सालों में उन्हें युद्ध में सक्रिय भूमिका से दूर रखा गया. इसके पीछे फ़िलिप का कोई दोष नहीं था.

वजह थी, ग्रीक राजशाही के साथ उनका रिश्ता. ब्रिटेन नहीं चाहता था कि युद्ध के दौरान फ़िलिप की जान जाए. ऐसा होता, तो लोग कहते कि देखो, ग्रीस का एक राजकुमार ब्रिटेन के लिए लड़ते हुए मारा गया. वो तो जब जर्मनी के साथी इटली ने ग्रीस पर हमला किया. और ग्रीस ने अलाइड फोर्सेज़ से हाथ मिलाया. तब जाकर फ़िलिप को ऐक्टिव ड्यूटी मिली. फ़िलिप ने बड़ी बहादुरी और दक्षता से ड्यूटी निभाई. उन्हें फर्स्ट लेफ़्टिनेंट बना दिया गया. इस पद पर नियुक्ति पाने वाले सबसे युवा लोगों में थे फ़िलिप.

जंग में नाम कमाकर, ख़ुद की क़ाबिलियत साबित करके फ़िलिप ब्रिटेन लौटे. अब जाकर उन्हें भी एलिज़ाबेथ से प्यार होने लगा. युद्ध ख़त्म होने के एक साल बाद 1946 में उन्होंने एलिज़ाबेथ को शादी के लिए प्रपोज़ किया. वो तो तैयार थीं, मगर उनके पिता किंग जॉर्ज सिक्स्थ राज़ी नहीं थे.

Prince Philip With Elizabeth Wedding
1947 में एलिज़ाबेथ और फ़िलिप की शादी हो सकी. (तस्वीर: एपी)

क्यों नहीं थे राज़ी?

इसकी कई वजहें थीं. मसलन, फ़िलिप का मूलत: ब्रिटिश न होना. उनका चर्च ऑफ़ इंग्लैंड से ताल्लुक न होना. आर्थिक हैसियत में ग़ैर-बराबरी. वगैरह वगैरह. मगर शादी के लिए फ़िलिप ने बड़ी शिद्दत दिखाई. अपना चर्च बदल लिया. पिता की साइड के सरनेम त्याग दिए. नाम में अपनी मां का सरनेम ‘माउंटबेटन’ जोड़ लिया. ग्रीस और डैनिश गद्दी से अपना दावा तज दिया. ख़ुद को अपनी जर्मन बहनों से दूर कर लिया. ख़ुद को बदलकर पूरी तरह ब्रितानिया बन गए. और इतने जतन के बाद 20 नवंबर, 1947 को एलिज़ाबेथ और फ़िलिप की शादी हो सकी.

शादी के पहले से फ़िलिप को पता था कि बतौर पति उनके ऊपर बड़ी जिम्मेदारी आने वाली है. कैसी जिम्मेदारी? किंग जॉर्ज का कोई बेटा नहीं था. बड़ी बेटी होने के चलते एलिज़ाबेथ को ही उनके बाद गद्दी पर बैठना था. मगर किंग जॉर्ज 50 के लपेटे में थे. फ़िलिप को लगा था, अभी जॉर्ज लंबा जियेंगे. एलिज़ाबेथ की ताज़पोशी में अभी समय लगेगा. मगर ऐसा हुआ नहीं. शादी के चार साल बाद, यानी 1952 में ही किंग जॉर्ज चल बसे. महज 25 की उम्र में एलिज़ाबेथ महारानी बना दी गईं.

बस इसके बाद से ही फ़िलिप की ज़िंदगी बदल गई. वो महारानी के पति थे. क़ायदे के मुताबिक, अब वो नौकरी नहीं कर सकते थे. फ़िलिप को नेवी छोड़नी पड़ी. फ़िलिप को अपने काम से प्यार था. शादी के चलते न केवल उन्हें अपने पैशन का बलिदान देना पड़ा. बल्कि अलग पहचान बनाने की उनकी उम्मीदें भी टूट गईं. तय हो गया कि आगे आनी वाली पूरी ज़िंदगी वो बस एक सपोर्टिंग रोल निभाएंगे. बस महारानी के पति के तौर पर जाने जाएंगे. राजा का ओहदा भी नहीं मिलेगा. पत्नी क्वीन कहलाएगी और वो कहलाएंगे प्रिंस. क्यों? क्योंकि ब्रिटिश मोनार्की में यही क़ायदा है. वहां राजा की पत्नी तो क्वीन कहला सकती है. मगर किंग की उपाधि उसी को मिलती है, जिसे वंशानुगत सिस्टम से गद्दी मिले.

Prince Philip And Elizabeth
महारानी एलिज़ाबेथ के साथ प्रिंस फ़िलिप की पुरानी तस्वीर. (तस्वीर: एपी)

आप सोचिए. हम 21वीं सदी में हैं. पिछले 100 सालों में औरतों की सामाजिक स्थिति बहुत ऊपर आई है. मगर अब भी ऐसे कितने पुरुष हैं जो ख़ुद से ज़्यादा मशहूर, ख़ुद से ज़्यादा कमाने वाली पत्नी के साथ सहज हो पाते हैं? मर्दों को शादी में नंबर 1 बनने की आदत होती है. फ़िलिप तो पिछली सदी के थे. उन्हें अपनी पहचान का ख़त्म होना, शादी में नंबर दो पर फ़िक्स हो जाना बहुत अखरा.

कहते हैं कि इन सब वजहों से फ़िलिप और एलिज़ाबेथ की शादी नॉर्मल नहीं रही. उनके आपसी रिश्ते तनावपूर्ण और ठंडे रहे. तनाव की एक वजह ये भी थी कि शादी के बाद भी एलिज़ाबेथ विंडसर ही रहीं. विंडसर उनके पिता का सरनेम था. एलिज़ाबेथ ने अपने नाम में पति का नाम नहीं जोड़ा. बल्कि एलिज़ाबेथ ने ये भी तय किया कि उनके बच्चे भी विंडसर ही कहलाएंगे. इसपर फ़िलिप बहुत झल्लाए थे. उन्होंने बयान दिया कि उनकी हालत अमीबा जैसी है. कि पूरे ब्रिटेन में वो इकलौते पुरुष हैं, जिसे अपने बच्चों को अपना नाम तक देने का हक़ नहीं.

जानकार कहते हैं कि फ़िलिप की इस फ्रस्ट्रेशन का असर उनकी शादी पर भी पड़ा. एलिज़ाबेथ और उनके बीच का रिश्ता समझौते से चलता रहा. दोनों पर्सनल लाइफ़ में अलग-अलग ज़िंदगी जीते थे. ‘द क्राउन’ सीरीज़ में तो ये तक इशारा किया गया है कि फ़िलिप के शादी के बाद कई अफ़ेयर रहे. कि उनके और महारानी के बीच निजी जीवन में बड़ा फॉर्मल और दिखावटी रिश्ता था. अगर ये सच भी हो, तो भी प्रिंस फ़िलिप की इतनी वाहवाही ज़रूर है कि सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा ही पत्नी को सपोर्ट किया. अपने आख़िरी दम तक, यानी पूरे 74 सालों तक अपनी शादी निभाई. यही प्रिंस फ़िलिप की सबसे बड़ी विरासत है.

प्रिंस फ़िलिप के नस्लीय बयान

जब कोई मशहूर इंसान गुज़रता है, तो उसकी विरासत टटोली जाती है. उसके जीवन को खंगाला जाता है. प्रिंस फ़िलिप 9 अप्रैल, 2021 को चल बसे. अपना 100वां जन्मदिन मनाने के बस दो महीने पहले. फ़िलिप अपने पीछे कई यादें छोड़ गए हैं. कुछ अच्छी, कुछ दाग़दार. यहां दाग़दार विरासत का मतलब है, प्रिंस फ़िलिप के नस्लीय बयान.

मसलन, 1986 में एक दफ़ा वो चीन की यात्रा पर गए. यहां उन्होंने कुछ ब्रिटिश छात्रों से मुलाकात की. बोले, अगर तुम लोग यहां लंबे समय तक रहोगे तो तुम्हारी भी आंखें छोटी-छोटी हो जाएंगी. ये टिप्पणी चीन के लोगों के नैन-नक्श की हंसी उड़ाते हुए कही गई थी. ऐसे ही उन्होंने हिंदुस्तानियों पर भी कई बार छींटाकशी की. एक दफ़ा एक इलेक्ट्रिक सर्किट की डिजाइनिंग का मज़ाक उड़ाते हुए बोले कि इसे तो पक्का किसी भारतीय ने बनाया होगा.

Prince Philip
99 बरस की उम्र में प्रिंस फ़िलिप चल बसे. (तस्वीर: एपी)

एक दफ़ा केमैन आइलैंड के एक आदमी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तुम्हारे देश में तो ज़्यादातर लोग लुटेरों के वंशज हैं. एक बार पापुआ न्यू गिनी में ट्रैकिंग करके आए एक अंग्रेज़ से बोले कि चलो, शुक्र है कि उन्होंने तुम्हें खाया नहीं. ऑस्ट्रेलिया में मूलनिवासियों के एक लीडर से पूछा कि क्या तुम लोग अब भी एक-दूसरे पर भाले फेंकते हो.

फ़िलिप के समर्थक कहते थे कि वो मज़ाकिया तबीयत के हैं. दिल के अच्छे हैं, बस हंसने-हंसाने को ऐसी बातें कर देते हैं. मगर सच ये है कि ये टिप्पणियां विशुद्ध नस्लीय थीं. बदतर ये था कि आलोचना के बाद भी फ़िलिप ऐसे अपमानजनक बयान देने से बाज़ नहीं आते थे. इसी वजह से करीब 20-30 साल पहले तक कई लोग उन्हें ब्रिटेन का सबसे सजा-धजा, सबसे वीआईपी, सबसे संभ्रांत नस्लवादी कहते थे.

फ़िलिप की पर्सनैलिटी के बारे में एक और बात कही जाती है. कहते हैं कि उनके अपने बच्चों के साथ कभी सहज संबंध नहीं रहे. प्रिंस चार्ल्स समेत उनके बच्चों की शादीशुदा ज़िंदगी डिस्टर्ब्ड रही. कई लोग कहते हैं कि इसके पीछे एक वजह प्रिंस फ़िलिप के अपने अनुभव भी थे. बचपन में उनका अकेलापन. पत्नी के साथ किए गए समझौते और उससे उपजी निराशा. इन सबका असर फ़िलिप के व्यक्तित्व पर पड़ा. अपने बच्चों के साथ उनका भावनात्मक कनेक्शन कमज़ोर रहा. ये भी कारण था कि फ़िलिप और एलिज़ाबेथ के बच्चे अपनी-अपनी ज़िंदगी में लगातार इमोशनली स्ट्रगल करते रहे.

फ़िलिप अब नहीं हैं. 17 अप्रैल को विंडसर कैसल स्थित सेंट जॉर्ज चैपल में उनका अंतिम संस्कार होना है. फ्यूनरल तक उनका शरीर विंडसर कैसल के ही एक प्राइवेट चैपल में रखा गया है. उनका ताबूत एक ख़ास झंडे में लिपटा है. इस झंडे में उनकी चार अलग-अलग पहचानों का मिश्रण है. पहला हिस्सा ग्रीक. दूसरा हिस्सा डैनिश. तीसरा हिस्सा, सफ़ेद और काली धारियां. जो कि उनकी मां की माउंटबेटन फैमिली का प्रतीक है. और झंडे के चौथे हिस्से में है एडिनबर्ग का किला. जिसके शासक होने की पदवी थी फ़िलिप के पास. फिलहाल ब्रिटेन में राजकीय शोक है. ये शोक फ्यूनरल वाले दिन ख़त्म होगा. जब फ़िलिप मिट्टी में दफ़ना दिए जाएंगे. जैसा कि गीतकार राजेंद्र कृष्ण लिख गए हैं. राजा हो या रंक सभी का, अंत एक सा होय.


विडियो- हिटलर के साथ प्रिंस फिलिप का क्या कनेक्शन था?

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