Submit your post

Follow Us

राष्ट्रपति बनने से पहले कोविंद ने जिस काम का विरोध किया था, अब वो खुद कर डाला

768
शेयर्स

यह लेख डेली ओ से लिया गया है. जिसे लिखा है अशोक उपाध्याय ने. 
दी लल्लनटॉप के लिए हिंदी में यहां प्रस्तुत कर रही हैं शिप्रा किरण.


राष्ट्रपति सचिवालय से 14 जुलाई को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें लिखा था – ‘राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए चार सदस्यों को मनोनीत किया है. वे चारों हैं- राम शकल, राकेश सिन्हा, रघुनाथ मोहपात्रा और सोनल मानसिंह. राम शकल की बात करें तो – ‘ये एक लोकप्रिय नेता हैं. उत्तर प्रदेश की जनता के प्रतिनिधि हैं. रॉबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र से वे तीन बार सांसद रह चुके है.’

kovind 3

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 और प्रधानमंत्री की सलाह से इन चारों को राज्यसभा का मनोनीत सदस्य घोषित करते हुए भारत के राष्ट्रपति ने इन्हें अपनी शुभकामनाएं दीं. प्रेस रीलीज में आगे बताया गया है- संविधान के धारा 3 के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा के लिए वही लोग मनोनीत हो सकते हैं जो- साहित्य, विज्ञान कला या समाज विज्ञान के क्षेत्र में अपना विशेष स्थान रखते हों और इस क्षेत्र में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान भी दिए हों.’ असल में ये संगीतकारों, अभिनेताओं, कवियों या समाज सेवियों के लिए संसद तक पंहुचने का एक मौक़ा होता है. जो कोई चुनाव जीतकर संसद तक नहीं पहुंच सकते उनके लिए ये एक अवसर होता है. जिसके माध्यम से वे अपने अनुभवों से राजनीति को भी समृद्ध कर पाते हैं.

kovind 1
स्पष्ट है कि राम शकल जैसे सक्रिय राजनेताओं को चुनाव के माध्यम से संसद तक जाना चाहिए न कि मनोनयन के माध्यम से. लेकिन ये पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है कि किसी राजनेता को इस आसान रास्ते से संसद तक पहुंचाया गया हो. अप्रैल 2016 में भाजपा के मंत्री सुब्रमन्यम स्वामी और नवजोत सिंह सिद्धू (जो अब कांग्रेस में हैं) को नरेंद्र मोदी सरकार के विशेष आग्रह पर राष्ट्रपति ने राजयसभा के लिए मनोनीत किया था. पहले भी जगमोहन, भूपिंदर सिंह मान, प्रकाश अंबेडकर, गुलाम रसूल कार जैसे लोग मनोनीत होकर राज्यसभा तक पहुंच चुके हैं.

manmohan singh

मनमोहन सिंह के कार्यकाल में मणिशंकर अय्यर का राज्य सभा के लिए मनोनयन सबसे विवादास्पद मनोनयन रहा है जब 2009 में वो लोक सभा चुनाव हार गए थे. तब भाजपा ने उनके मनोनयन का भारी विरोध किया था. साहित्य में मणिशंकर के योगदान को ध्यान में रखते हुए उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था. तब भाजपा प्रवक्ता रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 80 का ज़िक्र करते हुए अय्यर के मनोनयन पर तमाम सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि जो इन श्रेणियों में आते हैं उन्हें ही इन पदों के अंतर्गत मनोनीत किया जाना चाहिए.

kovind 2
तब भाजपा प्रवक्ता रहे रामनाथ कोविंद ने कहा था कि मणिशंकर इस तरह की किसी भी श्रेणी में नहीं आते और वे कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता भी हैं. कोविंद ने आगे कहा था- मणिशंकर का मनोनयन संवैधानिक नियमों के खिलाफ है. कानून को ताक पर रखकर ये मनोनयन किया गया है. कांग्रेस अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर रही है.’ 2010 में भाजपा के प्रवक्ता की भूमिका में कोविंद ने कांग्रेस के प्रतिबद्ध कार्यकर्ता के मनोनयन का विरोध किया था लेकिन अब 2018 में जब वे देश के राष्ट्रपति हैं तब भाजपा के इन सक्रिय कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजने के लिए कैसे उन्होंने अपनी अनुमति दे दी. ऐसा लगता है जैसे राष्ट्रपति कोविंद ने उस सलाह पर ध्यान नहीं दिया जो कभी भाजपा प्रवक्ता कोविंद ने तब सत्ता में बैठे लोगों को दी थी.


ये भी पढ़ें- 

पड़ताल : क्या दलित होने की वजह से मंदिर में घुसने से रोक दिए गए थे राष्ट्रपति कोविंद?

कहानी उस जवान की, जिसे जानकर राष्ट्रपति कोविंद भी रोने लगे

रामनाथ कोविंद अपने पहले भाषण में नेहरू का नाम लेना कैसे भूल गए?

जिस आदमी को राष्ट्रपति के घर में नहीं घुसने दिया, अब वो खुद राष्ट्रपति बन गया है


वीडियो देखें-

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

चाचा शरद पवार ने ये बातें समझी होती तो शायद भतीजे अजित पवार धोखा नहीं देते

शुरुआत 2004 से हुई थी, 2019 आते-आते बात यहां तक पहुंच गई.

रिव्यू पिटीशन क्या होता है? कौन, क्यों, कब दाखिल कर सकता है?

अयोध्या पर फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रिव्यू पिटीशन दायर करने जा रहा है.

इन नौ सवालों का जवाब दे दिया, तब मानेंगे आप ऐश्वर्या के सच्चे फैन हैं

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

अमिताभ बच्चन तो ठीक हैं, दादा साहेब फाल्के के बारे में कितना जानते हो?

खुद पर है विश्वास तो आ जाओ मैदान में.

‘ताई तो कहती है, ऐसी लंबी-लंबी अंगुलियां चुडै़ल की होती हैं’

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए शिवानी की चन्नी.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो कितना जानते हो उनको

मितरों! अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

इस क्विज़ में परफेक्ट हो गए, तो कभी चालान नहीं कटेगा

बस 15 सवाल हैं मित्रों!

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

इंग्लैंड के सबसे बड़े पादरी ने कहा वो शर्मिंदा हैं. जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.