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वो प्लेयर जिसने इंडिया की पहली टेस्ट जीत में सेंचुरी मारी

पहलान रतनजी उमरीगर. शोलापुर महाराष्ट्र में एक पारसी घर में 28 मार्च 1926 को जन्म. बॉम्बे के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलते हुए इंडिया के लिए टेस्ट मैच खेले. 8 टेस्ट मैचों में इंडिया की कप्तानी की. मिडल ऑर्डर का सॉलिड बैट्समैन जो साथ में कामचलाऊ मीडियम पेस और ऑफ़ स्पिन फेंक लेता था. जब ये रिटायर हुए तो किसी भी इंडियन प्लेयर ने पॉली से ज़्यादा टेस्ट नहीं खेले थे, न ही रन बनाये थे और न ही टेस्ट सेंचुरी. पॉली उमरीगर ही वो पहले इंडियन बैट्समैन थे जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में डबल सेंचुरी बनाई थी. उमरीगर ने 20 नवंबर 1955 को यह कारनामा किया था. मैदान था हैदराबाद का और सामने टीम थी न्यूज़ीलैंड की.

हम सुना रहे हैं पॉली उमरीगर से जुड़े 5 मज़ेदार किस्से.

#1

बात है 1948 की. पॉली यूनिवर्सिटी की तरफ से खेला करते थे. वेस्ट इंडीज़ की टीम इंडिया आई हुई थी. वेस्ट इंडीज़ के टूर मैच में पॉली ने 115 रन बनाये. यहां से उन्हीं नेशनल टीम में पहुंचने की यात्रा शुरू हुई. यहां से सात हफ़्ते बाद वो इंडियन टीम में थे. कॉमनवेल्थ टीम जब 1949 और 1950 में इंडिया आई (कॉमनवेल्थ टीम में इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज़ के प्लेयर्स होते थे). अनऑफिशियल टेस्ट मैचों में पॉली ने 276 और 562 रन बनाये. हमें सेंचुरी छक्के से मारने वालों में बस सहवाग याद है. पॉली उस वक़्त मद्रास टेस्ट में 90 से 102 रन पर दो गेंदों में पहुंच गए थे. फ्रैंक वॉरेल को पॉली ने लगातार 2 छक्के मारे थे.

#2 

एक साल बाद पॉली की इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले चार टेस्ट मैच में बहुत ही ख़राब परफॉरमेंस रही. उनसे आशाएं काफी थी लेकिन उनका खेल उसके ठीक उलट चला. चार टेस्ट मैचों में 113 रन. वो भी तब इंग्लैंड की टीम अपने चरम से काफी दूर थी. उनके मुख्य प्लेयर्स खेल ही नहीं रहे थे. पॉली को बताया गया कि उन्हें चौथे टेस्ट में नहीं खेलाया जाएगा. लेकिन आखिरी मिनट पर टीम में हेमू अधिकारी चोटिल हो गए. टीम मैनेजमेंट ने झक मारकर पॉली को टीम में वापस लिया. पॉली वैसे तो 3 या 5 नंबर पर जाते थे. लेकिन उस मैच में उन्हें 7 नम्बर पर मैच खेलने भेजा गया. पॉली ने 130 रन बनाये. ये ऐतिहासिक 130 रन थे. इन्हें भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सोने से लिखा जायेगा. ये पहला टेस्ट मैच था जिसे इंडिया ने जीता था. उमरीगर खुद इसे अपने जीवन की सबसे अच्छी इनिंग्स कहते हैं.

#3

1961-62 में इंडिया की टीम वेस्ट इंडीज़ में खेल रही थी. पांच मैचों की सीरीज़ में चौथे टेस्ट में उमरीगर ने 56 और 172 रन बनाये. और साथ ही बॉलिंग में अपनी ऑफ ब्रेक बॉलिंग से 56 ओवर में 5 विकेट लिए. इस इनिंग्स के बारे में सबसे बड़ी ये थी कि पॉली बैटिंग करने तब आये थे जब इंडिया की हालत गंभीर थी. इंडिया के पहले 5 विकेट मात्र 30 रन पर ही गिर गए थे. दूसरी इनिंग्स में जो 172 रन बनाये थे, उसमें 150 रन तो 200 मिनट में बने. अगले 22 रन भयानक तेजी से बने. उमरीगर ने वीज़्ली हॉल को एक ओवर में चार चौके मारे. सालों बाद हॉल वेस्ट इंडीज़ के मैनेजर बने. जब भी वो इंडिया आते, वो लोगों को पूरे विस्तार से बताते कि कैसे उमरीगर ने उन्हें चार बेहतरीन शॉट्स मारे थे.

#4

बापू नाडकर्णी. इंडियन बैट्समैन और पॉली के टीममेट. दोनों बेहद अच्छे दोस्त. नाडकर्णी 1959 के इंग्लैंड दौरे पर पॉली के साथ थे. टूर के फर्स्ट हाफ़ में बापू बहुत परेशान थे. उनके साथ समस्या ये थी कि वो जब भी गेंद को ड्राइव कर के कवर्स में मारने जा रहे थे, गेंद फाइन लेग पर चली जाती थी. बापू रन नहीं बना पा रहे थे. उन्होंने पॉली से मदद मांगी. पॉली सिर्फ अच्छे क्रिकेटर ही नहीं थे बल्कि खेल की टेक्निकली अच्छी समझ भी रखते थे. पॉली ने कहा कि वो इंग्लैंड की पिच थी, मुंबई की नहीं. इंग्लैंड की पिच पर गेंद को आखिरी वक़्त तक देखना होता है. बेहतर होगा कि गेंद को अपने पास आने दिया जाए और फिर गेंद को खेला जाए. बापू ने इस मन्त्र को अपनाया. टूर के अगले हाफ़ में बापू नाडकर्णी ने 855 रन बनाये.

#5 

पॉली उमरीगर अपने सिद्धांतों पर चलते थे. उन सिद्धांतों से छेड़-छाड़ उन्हें कतई बर्दाश्त नहीं थी. 1958-59 में वेस्ट इंडीज़ की टीम इंडिया आई हुई थी. पॉली उमरीगर कप्तान थे. चेन्नई टेस्ट के ठीक पहले उनके पास BCCI के प्रेसिडेंट रतिभाई पटेल का फ़ोन आया. पॉली बैट्समैन एके सेनगुप्ता को खेलाना चाहते थे. लेकिन रतिभाई पटेल उनके ऊपर सेनगुप्ता की जगह ऑफ स्पिनर जेसू पटेल को खेलाने का दबाव डाल रहे थे. पॉली ने जिरह की. उन्होंने दलीलें दीं कि क्यूं एके सेनगुप्ता को खेलना चाहिए और जेसू पटेल को नहीं. उस वक़्त पॉली कप्तान थे और टीम कॉम्बिनेशन के बारे में उनसे बेहतर जज किसी को नहीं होना चाहिए. कम से कम बोर्ड के प्रेसिडेंट को तो कतई नहीं. लेकिन रतिभाई उनकी सुनने को तैयार नहीं थे.

पॉली ने मैच की सुबह कप्तानी पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उन्हें उसके बाद कभी भी इंडिया का कैप्टन नहीं बनाया गया. नारी कांट्रेक्टर पॉली के बारे में कहते थे, “पॉली बहेतरीन क्रिकेटर था. साथ ही एक जेंटलमैन. वो हमेशा अपने सिद्धांतों पर टिका रहा. लेकिन अगर वो किसी भी तरह से फ़ेल हो जाता था तो पूरा दिन यही सोचता रहता था कि क्या हुआ जो ग़लत हुआ. उसे क्रिकेट में फ़ेलियर पसंद नहीं था.”


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