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RBI गवर्नर ने सुबह-सुबह आकर जो कहा, उसकी आना-पाई यहां समझिए

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 22 मई, शुक्रवार को सुबह-सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस की. रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट घटाने के साथ-साथ और भी कई ऐलान किए. उन्होंने जो ख़ास-ख़ास बातें कीं, उसे आसान भाषा में समझते हैं.

# रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट कम

क्या ऐलान किया?

शक्तिकांत दास ने रेपो रेट के 4.4 फीसदी से घटकर 4 फीसदी होने का ऐलान किया. साथ ही, रिवर्स रेपो रेट भी 3.75 फीसदी से घटाकर 3.35 फीसदी कर दिया गया है.

ये होता क्या है?

बैंक अपने रोज के खर्चों को चलाने के लिए RBI से पैसा उधार लेते हैं. बैंक जिस दर पर रिज़र्व बैंक से उधार लेते हैं, उसे रेपो रेट कहते हैं. इससे उलट, जब बैंक अपना पैसा रिज़र्व बैंक में जमा करते हैं, तो उन्हें ब्याज़ मिलता है. इस ब्याज की दर को ही रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.

असर क्या होगा?

रेपो रेट में कमी आने से होम लोन, ऑटो लोन समेत सभी तरह के लोन सस्ते होंगे. वहीं रिवर्स रेपो रेट में कमी आने से बैंक आरबीआई के पास ज्यादा पैसा रखने की बजाय कर्ज ज्यादा बांटेंगे, इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी.

# मोरेटोरियम बढ़ा

क्या ऐलान किया?

मार्च में दिए गए तीन महीने के मोरेटोरियम को तीन महीने तक और बढ़ा दिया गया है. यानी अब अगस्त तक.

ये होता क्या है?

वित्तीय संकट के बीच RBI ने मार्च में ऐलान किया था कि अगर किसी ने कोई लोन ले रखा है, तो EMI चुकाने में तीन महीने की छूट दी जाएगी. यानी तीन महीने तक किस्त न भरने पर कोई एक्शन नहीं होगा. अब इसी मोरेटोरियम पीरियड को तीन महीने तक और बढ़ा दिया गया है. ग्राहक चाहें, तो EMI भर सकते हैं, बैंक दबाव नहीं डालेंगे.

असर क्या होगा?

ऐसे लोगों को राहत मिल सकती है, जिन्होंने लोन ले रखे हैं और इस वक्त कैश क्रंच से जूझ रहे हैं. अगस्त तक किस्त नहीं भरेंगे, तो भी उन्हें डिफॉल्टर नहीं माना जाएगा. हालांकि अगस्त के बाद ये पेमेंट करना होगा, वो भी ब्याज के साथ.

# वर्किंग कैपिटल के ब्याज पर छूट

क्या ऐलान किया?

रिज़र्व बैंक ने मार्च में बैंकों से कहा था कि वे तीन महीने तक वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज न वसूलें. अब इस छूट को भी तीन महीने तक के लिए बढ़ा दिया है. यानी ये भी अगस्त तक.

ये होता क्या है?

वर्किंग कैपिटल लोन यानी वो कर्ज़, जिसे कंपनियां अपनी रोज की ज़रूरतें पूरी करने के लिए लेती हैं. वर्किंग कैपिटल लोन का इस्तेमाल किराया, मेंटनेंस, बिजली बिल जैसी ज़रूरतें पूरी करने के लिए किया जा सकता है.

असर क्या होगा?

वर्किंग कैपिटल लोन ज़्यादातर छोटी कंपनियां या छोटे कारोबारी लेते हैं. अब इस पर ब्याज से तीन महीने तक की और छूट मिलने पर उन्हें राहत मिलेगी. हालांकि वर्किंग कैपिटल पर ब्याज चुकाने में जो छूट ली जाएगी, उसे बाद में चुकाना होगा. किस्तों में.

# सीएसएफ में छूट

क्या ऐलान किया?

कन्सॉलिडेटेड सिंकिंग फंड (सीएसएफ) के ज़रिये विड्रॉल के नियमों में ढील दी गई है. राज्य इस फाइनेंशियल ईयर में करीब 13,300 करोड़ रुपए अतिरिक्त निकाल सकेंगे.

ये होता क्या है?

कन्सॉलिडेटेड सिंकिंग फंड (सीएसएफ). यानी वो फंड, जिसके तहत राज्य सरकारों को रिज़र्व बैंक के पास एक निश्चित राशि रखवानी रहती है. ये पैसा राज्यों को काफी ज़रूरत होने पर मिलता है. जैसे कि कोई ज़रूरी पेमेंट करना हो, कोई बड़ा कर्ज़ चुकाना हो.

असर क्या होगा?

राज्य अपने 45 फीसदी रिडंप्शन को पूरा कर सकेंगे. राज्यों को लोन चुकाने और बिज़नेस को बूस्ट देने में मदद मिलेगी.

# एग्ज़िम बैंक को क्रेडिट

क्या ऐलान किया?

एग्ज़िम यानी एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक को 90 दिन के लिए 15 हज़ार करोड़ रुपए का क्रेडिट दिया जाएगा. इस अवधि को एक साल तक के लिए बढ़ाया भी जा सकता है.

ये होता क्या है?

एग्ज़िम बैंक एक्सपोर्ट-इंपोर्ट से जुड़े कारोबारियों को लोन देता है. अब चूंकि एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर भी बड़ा असर पड़ा है, तो बैंक को भी फंड जुटाने में दिक्कत आ रही है. इसीलिए क्रेडिट दिया जा रहा है.

असर क्या होगा?

क्रॉस बॉर्डर बिज़नेस में फिर से बूस्ट आया, तो देश के पास बाहरी मुद्राओं में पैसा आएगा. राजकोषीय घाटा भी कम हो सकता है.

# जाते-जाते एक और बात..

ये सारे फैसले लेने वाली MPC कौन है?

फैसले MPC ने लिए हैं. यानी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी. हिंदी में मौद्रिक नीति समिति.

देश में ब्याज दरों से जुड़े हर फैसले लेने का ज़िम्मा इसी कमेटी के हवाले होता है. साल में चार बार MPC की मीटिंग होती है. MPC के चेयरमैन हैं RBI गवर्नर शक्तिकांत दास. उनके अलावा इसमें पांच सदस्य हैं.

इस बार रेपो रेट घटाने का फैसला MPC से 5:1 से पास हुआ है. यानी पांच सदस्य इसके पक्ष में थे, एक विपक्ष में.


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