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कठुआ और उन्नाव के बीच PM मोदी ने क्या कहा


 

अपडेट: 13 अप्रैल की देर शाम को PM मोदी ने डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक का उद्घाटन करते हुए भाषण में कहा कि जिन बेटियों के साथ अन्याय हुआ, उन्हें न्याय मिलकर रहेगा.


 

नरेंद्र मोदी. देश के वज़ीर. हमारे प्रधानमंत्री. इस देश की हर जान को सलामत रखने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. मुल्क के हर मर्ज़ का इलाज खोजना उनके सिर है. वो अकेले ये काम नहीं करते. एक भरी-पूरी टीम है उनके साथ. और फिर हम और आप भी तो हैं. हमारे और आपके लिए ही तो बनती है सरकारें. तो फिर जिन बातों से हमें फर्क पड़ता है, उन बातों से सरकार को भी तो फर्क पड़ना चाहिए. जो बातें हमें रुलाती हैं, कलेक्टिव तकलीफ देती हैं, उन बातों से सरकार को भी तो दर्द होना चाहिए. ये सरकार का फर्ज है. क्या वो इसे निभा रही है?

मोदी जी सोशल मीडिया पर बहुत ऐक्टिव हैं. जब पूरा देश कठुआ और उन्नाव केस पर बात कर रहा है, तब मोदी जी चुप हैं. विपक्ष संसद नहीं चलने दे रही. इसे लेकर खूब बातें कीं. उपवास किया. ताना दिया. राजनीति की. मगर इन दोनों मुद्दों पर एक भी बयान नहीं. कम से कम एक ट्वीट ही कर देते. आप कहेंगे, ट्वीट करना जरूरी तो नहीं. बात इसी ‘जरूरत’ की है. क्या जरूरी है और क्या जरूरी नहीं, ये कौन तय करेगा? बस मोदी? या बस उनकी सरकार? जनता का जरूरी कोई मायने नहीं रखता? जहां तक ट्वीट की बात है, तो हम बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में मोदी जी ने क्या-क्या ट्वीट किया. इन ट्वीट्स में एक ट्वीट इन मुद्दों पर भी हो सकता था कि नहीं. ट्वीट देखकर फैसला कीजिएगा. ट्वीट्स का क्रम नए से पुराने की तरफ है.

13 अप्रैल, सुबह करीब 8:54 बजे PM ने ट्वीट किया,

जालियांवाला बाग नरसंहार के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि. उन शहीदों का कभी न हराया जा सकने वाला जज्बा हमेशा याद रखा जाएगा. हमारी आजादी के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी.

 

12 अप्रैल को PM ने ट्वीट किया:

महाबलिपुरम में आयोजित डिफेंस एक्सपो इंडिया में दिए गए मेरे भाषण का पूरा लिंक यहां है.

  12 अप्रैल को ही PM ने एक और ट्वीट किया:

एक समय था जब राजनैतिक निष्क्रियता के कारण देश की रक्षा तैयारी जैसा अहम मुद्दा भी प्रभावित होता था. हमने इसका नुकसान भी देखा है. अब हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. बिना किसी शॉर्ट-कट के. ये सुनिश्चित करने के लिए कि पहले जो नुकसान हुए, अब न हों.

 

There was a time when the critical issue of defence preparedness was hampered by policy paralysis. We have seen its damage too. We are moving fast, without short-cuts to ensure that this does not happen again! pic.twitter.com/qYlzGeumE1 — Narendra Modi (@narendramodi) April 12, 2018

 

12 अप्रैल का एक और ट्वीट (डिफेंस एक्सपो प्रोग्राम से ही),

हम ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं, जो कि रक्षा उत्पादन और निर्माण के क्षेत्र में नए और रचनाशील उद्यमियों को बढ़ावा देती है.

  12 अप्रैल (डिफेंस एक्सपो) से एक और ट्वीट,

 

        12 अप्रैल का एक और ट्वीट,

 

        इसी दिन का एक और ट्वीट. उसी कार्यक्रम से,

 

        इसी तारीख का एक और ट्वीट. उसी वेन्यू से,

 

        इसी मौके का एक और ट्वीट,

 

        इस आयोजन का एक और ट्वीट,

 

        इसी प्रोग्राम का एक और ट्वीट,

 

        ISRO को बधाई देते हुए PM मोदी ने ट्वीट किया,

 

        योग पर PM का एक और ट्वीट. इसमें उन्होंने एक विडियो शेयर किया है. ग्राफिक की मदद से उनके जैसा दिखने वाला एक आदमी बनाया गया है, जो योग कर रहा है.

 

11 अप्रैल को PM मोदी का एक और ट्वीट,

11 अप्रैल को PM मोदी का एक और ट्वीट,

इसी दिन का एक ट्वीट,

एक और ट्वीट. 11 अप्रैल का,

11 अप्रैल का एक और ट्वीट,

11 अप्रैल का एक और ट्वीट,

11 अप्रैल का ही एक और ट्वीट,

11 तारीख का ही एक और ट्वीट,

11 अप्रैल का एक और ट्वीट. उसी मुलाकात से जुड़ा,

11 अप्रैल (मुद्रा योजना का फायदा पाने वाले लोगों से हुई मुलाकात) का एक और ट्वीट,

पीएम मोदी की ट्विटर फीड, उनके किए ट्वीट्स ऐसे ही हैं. लगातार आते रहते हैं. कभी किसी सम्मेलन से जुड़े, कभी किसी योजना से जुड़े. उन्होंने अपने भाषण में क्या कहा, तमाम चीजें. लिंक के साथ. उनकी तस्वीरें. उनके विडियो. सारे ट्वीट्स में बस वो ही वो. एक ही चीज (जैसे मुद्रा योजना) पर एक के बाद एक ट्वीट्स. कभी किसी को जन्मदिन की बधाई. कभी विपक्ष को ताना. चुनाव के दिनों में चुनाव प्रचार की तस्वीरें, भाषण. हम ये नहीं कहते कि ये जरूरी नहीं. मगर एक ट्वीट कठुआ और उन्नाव पर भी तो हो सकता है. इसलिए कि ये दोनों मामले नजरंदाज करने लायक नहीं. कठुआ गैंगरेप और मर्डर ने विदेशों में भी हमारी थू-थू कराई है. अल जजीरा, गार्डियन, न्यू यॉर्क टाइम्स, बीबीसी, द इंडिपेंडेंट सबने लिखा है. हर जगह हमारी छिछालेदर हुई है. और होनी भी चाहिए. ऐसी घटनाएं थूकने के ही लायक होती हैं. इनके ऊपर बोलना चाहिए था प्रधानमंत्री को. न्याय का आश्वासन देना चाहिए था. देश को भरोसा देना चाहिए था. संदेश देना चाहिए था कि अपराध में धर्म और राजनीति नहीं होती. कि अपराधी का कोई धर्म, कोई वर्ग नहीं होता. उसे बस अपराधी समझा जाना चाहिए. सजा दी जानी चाहिए.

PM मोदी को बोलना चाहिए था. बस इसलिए नहीं कि वो प्रधानमंत्री हैं. इसलिए भी कि दोनों घटनाओं में उनकी अपनी पार्टी के लोग जुड़े हैं. जिन राज्यों में ये हुआ, वहां बीजेपी सरकार में है. केंद्र में भी है. वैसे तो ये माना जाता है कि सरकार सरकार होती है. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री संवैधानिक पद होते हैं. ये राजनीति नहीं करते. लेकिन हमें पता है कि कहने और करने की बातें अलग होती हैं. कि राजनीति सबसे ऊपर होती है. कम से कम इसी राजनीति के बहाने पीएम मोदी कुछ कहते. उनकी पार्टी, उनके नेताओं का नाम जुड़ा है. कम से कम इसी नाम पर कोई प्रतिक्रिया देते. और कुछ नहीं, तो कम से कम एक ट्वीट ही कर देते. अभी उनकी चुप्पी से तो ये लग रहा है कि उन्हें हमारे सवालों से कोई फर्क नहीं पड़ता. कि मोदी जी तो बस अपने तय किए गए वक्त पर, अपनी सहूलियत से बोलते हैं.


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