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मोदी के बांग्लादेश दौरे के क्या मायने हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर अक्सर उनके राजनीतिक विरोधी आलोचना करते रहे हैं. आरोप लगाया जाता है कि वो बहुत ज्यादा विदेश दौरे करते हैं. लेकिन कोरोना शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री के ये दौरे भी थम गए और विपक्षियों की आलोचना भी. अब करीब सालभर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पहली विदेश यात्रा पर हैं. आज से वो दो दिन के बांग्लादेश दौरे पर हैं. सालभर पहले जब कोरोना शुरू हुआ था तब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में थोड़ी सी खटास की खबरें थी. बांग्लादेश के मंत्रियों ने भारत का दौरा रद्द कर दिया था. भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने सीएए को लेकर संसद में बयान दिया जिसमें बांग्लादेश घुसपैठियों का भी ज़िक्र किया था. विपक्ष पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने का आरोप लगाया था. 2019 के लोकसभा चुनाव हो या उससे पहले असम-बंगाल के विधानसभा चुनाव. बांग्लादेशी घुसपैठियों का चुनावी भाषणों में खूब ज़िक्र आता था. लेकिन इस बार शायद ही आपने बीजेपी के किसी बड़े नेता या प्रधानमंत्री-गृहमंत्री के भाषण में बांग्लादेशी घुसपैठियों का ज़िक्र सुना होगा. सीएए और एनआरसी की बात ज़रूर हो रही है कि लेकिन पहले जिस तरह से इनके ईर्द-गिर्द बांग्लादेशी घुसपैठियों का ज़िक्र आता था, अब वैसे नहीं हो रहा….. तो साल भर में क्या बदला? आज़ादी के बाद से भारत के साथ दोस्ताना रखने वाला बांग्लादेश पिछले साल नाराज़ क्यों हो गया था? और क्यों अब भारत बांग्लादेश से संबंध सुधारने में लगा है? प्रधानमंत्री मोदी की बांग्लादेश यात्रा के निहितार्थ क्या हैं? भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के लिहाज से भी और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के हिसाब से भी.

बांग्लादेश जाने वाले मोदी अभी अकेले पीएम नहीं

साउथ एशियाई देशों के और भी कई प्रधानमंत्री हफ्तेभर में बांग्लादेश आए हैं. इससे पहले मालदीव के प्रधानमंत्री इब्राहीम मोहम्मद सोलिह, नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी, श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षा और भूटान के प्रधानमंत्री डॉ लोतोय शेरिंग भी बांग्लादेश आ चुके हैं. और दुनिया के नेताओं ने वीडियो संदेश भेजा है जैसे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पोप फ्रांसिंग, क्वीन एलिज़ाबेथ आदि इत्यादि. और ऐसा किस मौके पर हो रहा है. बांग्लादेश की आज़ादी के 50 साल पूरे होने पर. बांग्लादेश अपनी आज़ादी की गोल्डन जुबली मना रहा है. 10 दिन का कार्यक्रम. और ये कार्यक्रम शुरू हुआ 17 मार्च से. 17 मार्च से क्यों, क्योंकि इस दिन बंगबंधु का जन्मदिन आता है. अब ये बंगबंधु कौन हैं – बांग्लादेश की मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता. इन्हें बांग्लादेश का राष्ट्रपिता कहा जाता है. बांग्लादेश को पाकिस्तान से मुक्ति दिलाने वाले नेता. थोड़ी सी उस कहानी की भी बात कर लेते हैं.

बंगबंधु की कहानी

1947 में जब देश का विभाजन हुआ तो पाकिस्तान के दो हिस्से थे. आज जो बांग्लादेश है वो पूर्वी पाकिस्तान था, और आज जो पाकिस्तान है वो पश्चिमी पाकिस्तान था. जब मुस्लिम लीग के अलावा भी कई राजनीतिक पार्टियां नई बन रही थी तो पूर्वी पाकिस्तान में 1949 में एक पार्टी बनी आवामी मुस्लिम लीग. शेख मुजीब उर रहमान ने ये पार्टी बनाई थी. हालांकि बाद में पार्टी ने नाम में से मुस्लिम शब्द हटा दिया गया था और सिर्फ आवामी लीग नाम रह गया था. फिर आइए 1970 के पाकिस्तान के आम चुनाव में. तब नेशनल असेंबली यानी संसद की 300 सीटों पर चुनाव हुआ, 162 थी पूर्वी पाकिस्तान में और 138 पश्चिमी पाकिस्तान में. पूर्वी पाकिस्तान में तब बड़ी पार्टी आवामी लीग थी और पश्चिमी पाकिस्तान में बेनज़ीर भुट्टो के पिता ज़ुल्फीकार अली भुट्टो की पार्टी पीपीपी यानी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी.

Sgeikh Mujeeb
शेख मुजीब उर रहमान. (तस्वीर: एपी)

चुनाव में आवामी लीग को बहुमत मिला. 160 सीटें मिलीं. लेकिन याहया खान और भुट्टो ने शेख मुजीब उर रहमान को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया. एक बंगाली को वो प्रधानमंत्री नहीं बनने देना चाहते थे. और तब इस्लाम के नाम पर पश्चिमी पाकिस्तान से जुड़े पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली राष्ट्रीयता का आंदोलन शुरू हो गया. 26 मार्च को 1971 को शेख मुजीब उर रहमान ने बांग्लादेश को आज़ाद घोषित कर दिया. इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान की सेना ने नरसंहार शुरू कर दिया. आंकड़े दिए जाते हैं कि करीब 30 लाख लोगों का पाकिस्तानी आर्मी ने खून किया था. लाखों महिलाओं का रेप हुआ था. तब मुक्ति वाहिनी सेना बनी थी, भारत में उसे ट्रेनिंग देने की बात कही जाती है. शरणार्थी भारत आ रहे थे. आखिरकार दिसंबर 1971 में भारत ने बांग्लादेश की मुक्ति में दखल दिया और फिर पाक सेना को सरेंडर करना पड़ा, बाद में जो हुआ वो सारा इतिहास है. बांग्लादेश आज़ाद हुआ तो पहले प्रधानमंत्री मुजीब उर रहमान ही बने. हालांकि 1975 में जब भारत आज़ादी मना रहा था उसी दिन शेख मुजीब रहमान के पूरे परिवार की, उनके बेटों समेत सेना ने हत्या करवा दी थी. सिर्फ उनकी दो बेटियां बची थीं, जिनमें से एक शेख हसीना आज बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं.

तो आज बांग्लादेश की आज़ादी को 50 साल हो गए हैं और भारत बांग्लादेश की दोस्ती को भी 50 साल पूरे हो गए हैं. और इसी मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश में हैं. तो प्रधानमंत्री ने आज बांग्लादेश में क्या क्या किया और कल क्या करेंगे इस पर भी बात कर लेते हैं.

पीएम मोदी आज सुबह करीब पौने 8 बजे बांग्लादेश के लिए रवाना हुए. ये उसी वक्त की तस्वीरें हैं जब वो बांग्लादेश के लिए रवाना हो रहे थे. इस बोइंग 777 एयरक्राफ्ट के बारे में भी खबर आई है कि ये बिल्कुल नया है और पिछले साल अक्टूबर में ही बोइंग ने भारत सरकार को दिया था. और पहली दफा प्रधानमंत्री के दौरे के लिए इस्तेमाल हो रहा है.

Modi Sheikh Hasina

करीब 10 बजे वो बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुंचे. ढाका में एयरपोर्ट पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना उनकी आगवानी करने पहुंची थी. उसके बाद प्रधानमंत्री शहीद स्मारक पहुंचें. यहां उन्होंने 1971 के बांग्लादेश लिबरेशन युद्ध में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी. इसके बाद पीएम मोदी ने बांग्लादेश के अलग अलग समुदायों के नेताओं से मुलाकात की. मुस्लिम बोहरा समुदाय के नेताओं ने भी पीएम मोदी से मुलाकात की.

पीएम मोदी का बड़ा कार्यक्रम हुआ नेशनल परेड स्क्वैयर पर

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शेख हसीना और बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद भी मौजूद थे. यहां पर पीएम मोदी ने इस साल का गांधी शांति पुरस्कार भी सौंपा. इस बार शेख मुजीब उर रहमान को गांधी शांति पुरस्कार दिया गया है. पीएम ने इस कार्यक्रम में कहा है कि बांग्लादेश की मुक्ति के लिए वो भी जेल गए थे.

कार्यक्रम में पीएम मोदी ने पाकिस्तान के ज़ुल्म का भी जिक्र किया है. बांग्लादेश की मुक्ति की बात की बात करते हुए पीएम ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का नाम भी लिया.

इसके बाद पीएम मोदी के कुछ और भी कार्यक्रम हुए. जैसे उन्होंने बंगबंधु-बापू म्यूजियम का उद्घाटन किया है. भारत के राष्ट्रपति महात्मा गांधी और बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीब उर रहमान की याद में ये म्यूजियम बनाया गया है. प्रधानमंत्री शेख हसीना ने रात में पीएम मोदी के सम्मान में डिनर का आयोजन किया.

मंदिर दर्शन करेंगे पीएम मोदी

पीएम मोदी मुतआ मंदिर और श्यामनगर के जेशोरेश्वरी काली मंदिर भी जाएंगे. इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है. इस मंदिर जाने मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे. मतुआ मंदिर में जाना हो या काली मंदिर में जाना और इसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहले चरण की वोटिंग से भी जोड़कर देखा जा रहा है. इन मंदिरों के दौरों के अलावा पीएम मोदी कल बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे. खबर है कि दोनों देशों के बीच 5 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं.

ये तो हुई पीएम मोदी के इवेंट्स की बात. अब उन बातों पर आते हैं जो इवेंट्स की तरह नहीं दिखती हैं. जब बांग्लादेश आज़ाद हुआ तो देश में कांग्रेस की सरकार थी. इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं. शेख मुजीब उर रहमान उम्र में इंदिरा गांधी से 3 साल छोटे थे. और वे इंदिरा को बड़ी बहन कहते थे. भारत की तर्ज पर बांग्लादेश ने सोशलिस्ट और सेक्युलर रिपब्लिक बांग्लादेश बनाया था. लेकिन फिर शेख मुजीब की हत्या हो जाती है. सैन्य शासन आ जाता है बांग्लादेश कुछ कुछ पाकिस्तान वाली दिशा में चला जाता है. और भारत से भी संबंध खराब होते हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों में आवामी लीग के सत्ता में रहते भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बहुच अच्छे रहे हैं. भारत में सरकार चाहे कांग्रेस की हो या बीजेपी की बांग्लादेश से रिश्तों में ज्यादा असर नहीं पड़ा. पीएम मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही बांग्लादेश के साथ सीमाई इलाकों की अदला-बदली हुई. हांलाकि तीस्ता नदी के पानी का मसला हो या सीमा पर पशु तस्करों पर बीएसएफ की गोलीबारी का मामला हो, दोनों देशों में ऐसी छिटपुट चीज़े होती रहती हैं. लेकिन इससे दोनों देशों के संबंधों में कोई बड़ा असर नहीं पड़ा. हांलाकि बीच में रिश्ते थोड़े कमज़ोर पड़े. बांग्लादेश के चीन के बीआरआई का हिस्सा बनने से भारत को नाराज़गी हुई, और सीएए को लेकर बार बार बांग्लादेश घुसपैठियों के ज़िक्र से बांग्लादेश की सरकार ने बुरा माना.

इन सबके बावजूद बांग्लादेश भारत का अहम साझेदार है. जिस तरह से पाकिस्तान में आतंकियों को पनाह मिलती है, और वो भारत को नुकसान पहुंचाते हैं, वैसा बांग्लादेश में आवामी लीग की सरकार में नहीं होता है. अब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भी तेज़ी से दौड़ रही है. पर कैपिटा जीडीपी के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है. अनुमान है कि इसी रफ्तार से विकास दर चलती रही तो 2030 तक बांग्लादेश दुनिया की 25 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा.

इस समीकरणों के हिसाब से बांग्लादेश से अच्छे रिश्ते भारत के हक में भी है. और पीएम मोदी के इस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों में भरोसा और मजबूत होगा.


विडियो- पाकिस्तान में हुआ पहला आम चुनाव, जिसकी वजह से बांग्लादेश आज़ाद हुआ?

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