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PM नरेंद्र मोदी के इस अमेरिका दौरे पर क्या होने वाला है और उससे हासिल क्या होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार 22 सितंबर को अमेरिका के लिए रवाना हो गए. पीएम मोदी का ये दौरा 22 से 25 सितंबर तक का है. 6 महीने बाद पीएम मोदी कोई विदेश यात्रा कर रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बुलावे पर ये दौरा रखा गया है. जो बाइडेन ने इसी साल 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच दो बार वर्चुअल मीटिंग्स हो चुकी हैं. लेकिन आमने-सामने पहली बार मुलाकात होगी. यात्रा के दौरान 23 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी अमेरिका की वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस से भी मुलाकात करेंगे. व्हाइट हाउस की ओर से जारी राष्ट्रपति बाइडेन के साप्ताहिक कार्यक्रम में भी मोदी-हैरिस मुलाकात का जिक्र है.

Pm Modi Tour
प्रधानमंत्री सबसे ज़्यादा अमेरिका के दौरे पर गए हैं.(फाइल फोटो- PTI)

पीएम मोदी की ओर से क्या कहा गया है?

यात्रा शुरू करने से पहले पीएम मोदी की ओर से एक बयान जारी किया गया. इसमें कहा गया है,

इस दौरे पर राष्ट्रपति बाइडेन के साथ वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और ग्लोबल मुद्दों पर चर्चा होगी. उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ विज्ञान और टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग के अवसरों पर चर्चा होगी. राष्ट्रपति बाइडेन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा के साथ व्यक्तिगत रूप से क्वाड लीडर्स शिखर सम्मेलन में भाग लूंगा. ये सम्मेलन इस साल मार्च में हुए वर्चुअल शिखर सम्मेलन के नतीजों का जायजा लेने का मौका देगा. साथ ही भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए हमारे साझा दृष्टिकोण के आधार पर भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों पर बातचीत होगी.

वहीं व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से कहा गया है,

मोदी अमेरिका दौरे पर आ रहे हैं. हम चाहते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा मजबूत हों. बाइडेन-हैरिस एडमिनिस्ट्रेशन भारत के साथ अपनी ग्लोबल पार्टनरशिप को नए आयाम देना चाहता है. हम चाहते हैं कि हिंद और प्रशांत महासागर में आवाजाही को आसान बनाया जाए. कोविड को खत्म करने के लिए भी दोनों देश सहयोग जारी रखेंगे. क्लाइमेट चेंज और कुछ दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत होगी.

विदेश सचिव ने क्या बताया?

प्रधानमंत्री के अमेरिका के दौरे को लेकर विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने मंगलवार 21 सितंबर को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों नेता पहली बार एक दूसरे के आमने-सामने बैठ कर बातचीत करेंगे. इसमें द्विपक्षीय और निवेश संबंधों को मजबूत करने, रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक महत्व की साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिए जाने की उम्मीद है.

श्रृंगला ने कहा,

मोदी और बाइडेन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक में अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम के बाद की मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर बात होगी. साथ ही उसके पड़ोसी और अफगानिस्तान के दीर्घकालिक और प्रमुख विकास साझेदार के तौर पर हमारे हितों पर भी चर्चा होगी. इस संदर्भ में कट्टरपंथ, चरमपंथ, सीमा पार से आतंकवाद की रोकथाम करने और वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क को नष्ट करने की जरूरत पर चर्चा करेंगे.

प्रधानमंत्री के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, खुद हर्ष वर्धन श्रृंगला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहेंगे.

कारोबारियों से मिलेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री अपने दौरे पर कई बड़े कारोबारियों से भी बातचीत करेंगे. इसका लक्ष्य दोतरफा व्यापार और निवेश को बढ़ाना होगा. तय कार्यक्रम के तहत पीएम मोदी 23 सितंबर को अमेरिका के टॉप CEOs से मिलेंगे. इनमें ऐपल कंपनी के CEO टिम कुक भी शामिल हैं. इसी दिन पीएम मोदी अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मिल सकते हैं.

इसके अलावा पीएम मोदी क्वॉड देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी मुलाकात करेंगे. इनमें बाइडेन और मोदी के अलावा जापान के प्रधानमंत्री सुगा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन हिस्सा लेंगे. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, क्वॉड की मीटिंग में चर्चा के लिए नई टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और डिजास्टर मैनेजमेंट के अलावा क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दे शामिल होंगे.

क्या है क्वाड?

क्वाड यानी क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग. इस अंतरराष्ट्रीय समूह के चार सदस्य हैं. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया. क्वाड को बनाने की बात पहली बार 2004 की सुनामी के बाद हुई थी. तब भारत ने अपने और अन्य प्रभावित पड़ोसी देशों के लिए बचाव और राहत के प्रयास किए थे. इसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भी शामिल हो गए.

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे को 2006 और 2007 के बीच क्वाड की नींव रखने का श्रेय जाता है. हालांकि कुछ समय बाद ही ऑस्ट्रेलिया इससे अलग हो गया था. फिर 10 साल बाद 2017 में मनीला में आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-ऑस्ट्रेलिया-जापान-अमेरिका’ संवाद के साथ क्वाड वापस अस्तित्व में आया.

Quad
QUAD देश के नेता.

इसके बाद क्वाड देशों के विदेश मंत्री अक्टूबर 2020 में टोक्यो में मिले. कुछ ही महीनों बाद इस साल मार्च में जो बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के कुछ ही हफ़्तों बाद अमेरिका ने क्वाड के वर्चुअल शिखर सम्मलेन की मेज़बानी की. उधर, चीन शुरू से ही क्वाड को चार विरोधी देशों का समूह मानता रहा है. उसे लगता है कि क्वाड के ये चार देश उसकी बढ़ती ताकत के खिलाफ गुटबंदी कर रहे हैं.

दौरे से क्या उम्मीदें हैं?

ये समझने के लिए हमने बात की दिल्ली स्थित थिंक टैंक ‘ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन’ में स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम’ के प्रमुख प्रोफ़ेसर हर्ष वी पंत से. उनका कहना है,

दौरे के दो हिस्से हैं. एक यूएन जनरल असेंबली में पीएम मोदी का संबोधन जहां वे पहले भी कई बार भाषण दे चुके हैं. पीएम (अलग-अलग मुद्दों पर) भारत का प्वाइंट ऑफ व्यू रखने की कोशिश करेंगे. दूसरा है भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय बातचीत. जो इस समय बहुत ही इंट्रेस्टिंग मोड़ से गुजर रही है. खासकर अफनागिस्तान के मसले के बाद. साथी ही क्वाड की मीटिंग में भारत के लिए अपना पक्ष रखना जरूरी है. द्विपक्षीय बातचीत सकारात्मक नोट पर खत्म हो तो अच्छा रहेगा. क्योंकि हालात बदल गए हैं. खासकर हमारे पड़ोस में हालात बदल रहे हैं. यहां क्वाड का अपना रोल है, लेकिन भारत के पीएम अपना पक्ष रखने गए हैं.

प्रोफ़ेसर हर्ष वी पंत का कहना है कि क्वाड में जहां तक भारत का सवाल है तो अफगानिस्तान के हालात के बाद भारत चाहेगा कि काउंटर टेररिज्म को बड़ा रोल मिले. उन्होंने याद दिलाया कि ऑस्ट्रेलिया के साथ 2+2 बातचीत में काउंटर टेररिज्म को बड़ा मुद्दा माना गया था. अब अमेरिका में आयोजित क्वाड सम्मेलन में भी भारत का पक्ष रखा जाएगा और उसको स्वीकार्यता मिलेगी.

प्रोफेसर ने बताया कि क्वाड की पिछली मीटिंग में वैक्सीन सप्लाई को लेकर बात हुई थी कि कैसे फ्रेमवर्क तैयार होगा. भारत की वैक्सीन सप्लाई बढ़ाने के लिए अमेरिका और जापान ने फंडिंग की बात कही थी. भारत अक्टूबर से वैक्सीन एक्सपोर्ट करेगा. बैठक में ग्लोबल वैक्सिनेशन एक मुद्दा होगा जिस पर चर्चा होगी. चीन वैक्सीन सप्लाई कर रहा है जो बाकी देशों को पसंद नहीं आ रही है. ऐसे में क्वाड अगर अल्टरनेटिव के रूप में खड़ा होता है तो अच्छी बात होगी.

Xi Jinping China
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग. (तस्वीर: एपी)

प्रोफ़ेसर हर्ष वी पंत का कहना है कि क्वाड में जो भी मुद्दे हों, भले ही उनमें चीन का नाम ना लिया जाता हो, लेकिन सारी चीजें चीन पर ही केंद्रित हैं. उन्होंने कहा,

वैक्सीन सप्लाई भी अगर है तो वो भी चीन पर केंद्रित है. आपको उसका अल्टरनेटिव देना है. वहीं उभरती टेक्नोलॉजी की बात अगर हो रही है तो इस पर कि चीन पर आप निर्भर नहीं होना चाहते हैं. कुल मिलाकर क्वाड में जो भी विषय हैं वो चीन से ही रिलेटेड हैं. तो एक तरीके से चीन को जवाब देने की बात तो है ही.

पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के साथ अपनी यात्रा का समापन करेंगे. इसमें कोरोना महामारी, आतंकवाद से निपटने की जरूरत, जलवायु परिवर्तन और दूसरे अहम मुद्दों समेत वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान दिया जाएगा.


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